पंचमुखी रुद्राक्ष में शिव करते हैं पांचों रूपों में वासः जानें शिव के पांच रूपों को
पंचमुखी रुद्राक्ष में शिव करते हैं पांचों रूपों में वासः जानिए शिव के पांचों रूपों को
पंचमुखी रूद्राक्ष में शिव करते हैं पांच रूपों में वास
रुद्राक्ष शिव का अंश है, शिवस्वरूप है. भगवान रूद्र के नेत्रजल से प्रकट होने के कारण इसे सूक्ष्मरूप में साक्षात शिव ही मानना चाहिए. पंचमुखी रुद्राक्ष इतनी संख्या में पृथ्वी पर क्यों पाया जाता है? पंचमुखी क्यों हैं उत्तम रुद्राक्ष?

रुद्राक्ष की महिमा से शास्त्र भरे पड़े हैं. ज्योतिषशास्त्र में रूद्राक्ष के प्रभावों पर विषद चर्चा है. शिव का स्वरूप होने से रूद्राक्ष के माहात्म्य के विषय पर ज्यादा बताने की आवश्यकता रह नहीं जाती.
पचमुखीरुद्राक्ष जो पृथ्वी पर सहजता से सुलभ है आज उसके महत्व की चर्चा करेंगे. क्यों पंचमुखी इतना अधिक उपलब्ध है? इसे धारण करने के क्या लाभ हैं?
पंचमुखी, एकमुखी रुद्राक्ष से श्रेष्ठ है?
अक्सर लोग एकमुखी रुद्राक्ष की तलाश में रहते हैं, लेकिन यह बहुत दुर्लभ होता है और आसानी से नहीं मिलता। चूंकि भगवान शिव अपने भक्तों पर सदैव कृपालु रहते हैं, वे कभी नहीं चाहेंगे कि उनके भक्त अपने प्रिय रुद्राक्ष को पाने से वंचित रहें।
इसका अर्थ यह है कि महादेव स्वयं नहीं चाहते कि अत्यधिक दुर्लभता के कारण आम लोग एकमुखी रुद्राक्ष के पीछे परेशान हों। इसलिए, नकली रुद्राक्ष के फेर में ठगे जाने से कहीं अधिक बेहतर है कि शिवजी द्वारा प्रदत्त उस रुद्राक्ष को धारण किया जाए जो सर्वसुलभ और किफायती होने के साथ-साथ सभी गुणों से परिपूर्ण भी है।
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पंचमुखी रूद्राक्ष की विशेषताएं और महत्व
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सर्वसुलभ और सर्वगुण संपन्न: पंचमुखी ही एकमात्र ऐसा रुद्राक्ष है जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है और साथ ही सभी गुणों से संपन्न भी माना गया है।
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सर्वाधिक शुभ व पुण्यदायी: यह सभी रुद्राक्षों में सर्वाधिक शुभ, पुण्यदायी, तथा संतान एवं धन सुख प्रदान करने वाला माना गया है। संभवतः इसीलिए भगवान रुद्र ने इसे सर्वसुलभ बनाया है।
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पहचान और प्रचलन: आप जितने भी लोगों को रुद्राक्ष की माला पहने देखते होंगे, उनमें से अधिकांश पंचमुखी ही होते हैं।
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ठगी से बचें और सही चुनाव करें
तो आपने समझ लिया कि पंचमुखी की माला धारण करना भी अत्यंत उत्तम है। यदि आपको एकमुखी रुद्राक्ष मिल जाए तो यह अच्छी बात है, लेकिन यदि न मिले तो 100 से 200 रुपये में आसानी से मिलने वाले प्रामाणिक पंचमुखी को प्रसन्नता के साथ धारण करें। यही आपके लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
धर्म के नाम पर होने वाली ठगी और पाखंड से बचने के लिए इन बातों को जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि आजकल बाजार में ठगी की प्रवृत्ति काफी बढ़ गई है।
आइए अब आपको इस रुद्राक्ष की महिमा से परिचित कराते हैं, जिसके आधार पर इसे इतना उत्तम बताया गया है।
पंचमुखी रूद्राक्ष की इतनी महिमा क्यों:

देवाधिदेव भगवान महादेव के पांच देवस्वरूप कहे गए हैं.
- सद्योजात
- ईशान
- तत्पुरुष
- अघोर और
- वामदेव
शिव इन पाचों रूपों को धारणकर पृथ्वीलोक पर विचरण करते हैं. कहा जाता है कि ये पांचो शिवरूप पचमुखी रुद्राक्ष में वास करते हैं. भूमि मातास्वरूप हैं. इस भूमि से उपजे जिस वृक्ष से पंचमुखी रुद्राक्ष प्राप्त होता है उसमें माता और पांचों शिवस्वरूप का समावेश हो जाता है.
पृथ्वी पर पंचमुखी रूद्राक्ष की सर्वाधिक उपलब्धता का भी कारण संभवतः यही है. माता पृथ्वी अपने बच्चों को रुद्राक्ष के इसी स्वरूप से ज्यादा जोड़ना चाहती हों.
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रुद्राक्ष धारण करने के लाभ (Benefits of Panchmukhi Rudraksha)
हर रुद्राक्ष का एक विशेष नाम और विशेष प्रभाव होता है। पचमुखी रुद्राक्ष को ‘कालाग्नि’ नाम से भी जाना जाता है, जो कि साक्षात रुद्रस्वरूप है। पचमुखी रुद्राक्ष में पञ्चदेवों का वास होने के कारण इसे भगवान शिव का आत्मस्वरूप भी माना गया है।
रुद्राक्ष धारण करने से निम्नलिखित प्रमुख लाभ प्राप्त होते हैं:
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पापों से मुक्ति: ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने से अनजाने में हुए पाप और वर्जित कर्मों के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। भूलवश हुए दोषों के लिए शिवजी से क्षमा मांगकर इसे धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
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समृद्धि और ऊर्जा: इसके प्रभाव से शारीरिक, मानसिक तथा संपदा शक्ति में वृद्धि होती है और व्यक्ति तन, मन व धन से समृद्ध होता है।
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रोग निवारण: जंघा व कान के रोग, मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग और मोटापे जैसी समस्याओं के निवारण में यह सहायक माना जाता है।
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आत्मविश्वास में वृद्धि: इसे धारण करने से आत्मविश्वास, मनोबल और ईश्वर के प्रति भक्तिभाव बढ़ता है।
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ज्योतिष में पंचमुखी रूद्राक्ष का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमुखी रुद्राक्ष के अधिपति ग्रह देवगुरु बृहस्पति हैं। जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह प्रतिकूल या कमजोर हों, उन्हें पचमुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।
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कई विद्वान इसे पुखराज रत्न से भी अधिक प्रभावशाली मानते हैं।
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पचमुखी धारण करने से निर्धनता मिटती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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चूंकि गुरु ग्रह वैवाहिक सुख, करियर और भाग्य के कारक हैं, अतः इसके प्रभाव से इनसे जुड़े सभी शुभ फल सहज ही प्राप्त होने लगते हैं।
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विशेषकर: मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले जातकों के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना बहुत ही लाभकारी माना गया है।
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रुद्राक्ष धारण करने की विधि एवं नियम
किसी भी रुद्राक्ष को धारण करने से पहले उसे पूरी विधि-विधान से सिद्ध अवश्य करना चाहिए।
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शुभ दिन: पचमुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए सबसे उत्तम दिन सोमवार है।
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पूजा विधि: सोमवार के दिन स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिव मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग या शिव प्रतिमा के सामने बैठें। विधिपूर्वक विनियोग, न्यास और ध्यान करके शिवजी की पूजा करें तथा जलाभिषेक करें।
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सिद्ध करने का मंत्र: रुद्राक्ष को सिद्ध करने के लिए पुराणों में अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी एक का चुनाव कर सकते हैं:
“ॐ हूं नमः” अथवा “ॐ ह्रीं नमः”
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इस मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जप करने के बाद ही रुद्राक्ष को धारण करें।
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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