June 19, 2026

श्री बटुक भैरव स्तोत्रम्

॥ श्री बटुक भैरव स्तोत्रम् ॥ ॥ ध्यानम् ॥ वन्दे बालं स्फटिक-सदृशं कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम् । दिव्याकल्पैर्नव-मणिमयैः किंकिणी-नूपुराढ्यम् ॥ दीप्ताकारं विशद-वदनं सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम् । हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं शूल-दण्डौ दधानम् ॥ ॥ मूल स्तोत्र…

श्री लिंगाष्टकम्

॥ श्री लिंगाष्टकम् ॥ ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं निर्मलभासित शोभित लिङ्गम् । जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥१॥ जिनकी पूजा ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवता करते हैं, जो निर्मल…

दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र दरिद्रता मिटाने वाला शिवजी का स्तोत्र है. जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार-व्यवसाय की पूँजी बार-बार फंस जाती…

महामृत्युंजय मंत्र

।।महामृत्युंजय मंत्र।। त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात॥   अर्थ:हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जिस…

शिवजी की आरती

शिवजी की आरती स्तुतिः कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं| सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥   जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥…

शिव चालीसा

।।श्री शिव चालीसा।।   दोहा जय गणेश गिरिजासुवन मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम देउ अभय वरदान॥   चालीसा जय गिरिजापति दीनदयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके।…

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्   जो व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इस द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करता है, उसे साक्षात द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन के समान ही पुण्यलाभ होता है।    …

शिव सहस्रनामावलि

आदि एवं अंत से रहित, सर्वेश्वर शिव देवाधिदेव हैं। मानव मात्र ही नहीं वरन देव, दानव, पशु-पक्षी, यहाँ तक की ईश्वर भी संकट के समय में शिव की ही शरण…

रूद्र-सूक्तम्

रूद्र-सूक्तम्   जिस प्रकार सभी पापों का नाश करने में ‘पुरूष-सूक्त’ बेमिसाल है उसी प्रकार सभी दुखों एवं शत्रुओं का नाश करने में ‘रूद्र-सूक्त’ बेमिसाल है। ‘रूद्र-सूक्त’ सभी दुखों और…

शिवाष्टकम्

श्री शिवाष्टकम् (आदि शंकराचार्य विरचित) शिवाष्टकम् की रचना आदिगुरू शंकराचार्य ने की थी. आठ पदों में विभक्त यह रचना परब्रह्म शिवजी की पूजा का उत्तम साधन है.     तस्मै…

शिव महिम्न स्तोत्रम्

शिवभक्त गंधर्व पुष्पदंत ने भूल से शिवजी को अर्पित फूलों औऱ बेलपत्रों पर पांव रख दिया तो उसकी दिव्य शक्तियां समाप्त हो गईं. उसे अपनी गलती का बोध हुआ. उसने…