शिव शंभु शरणं

शिव पंचाक्षर स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित | Shiva Panchakshara Stotram

शिव पंचाक्षर स्तोत्र हिंदी अर्थ एवं महत्व (Shiva Panchakshara Stotram) शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव के पावन पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ के पांच अक्षरों—न, म, शि, वा,…

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पार्वती स्तोत्र हिंदी अर्थ एवं पाठ विधि | Parvati Stotram

पार्वती स्तोत्र हिंदी अर्थ एवं पाठ विधि (Parvati Stotram) श्री पार्वती स्तोत्रम् जगज्जननी भगवती पार्वती की एक अत्यंत पावन और फलदायी स्तुति है। सुखी वैवाहिक जीवन, मनचाहे जीवनसाथी…

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जानकीकृतं पार्वती स्तोत्रम् हिंदी अर्थ सहित

माता जानकी द्वारा रचित पार्वती स्तोत्रम् ब्रह्मवैवर्त पुराण में आता है कि माता सीता भगवान श्रीराम को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माँ गौरी…

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श्री बटुक भैरव स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

।श्री बटुक भैरव स्तोत्र। Batuk Bhairav Stotra भगवान शिव के उग्र और कल्याणकारी स्वरूप बटुक भैरव की कृपा पाने के लिए बटुक भैरव स्तोत्र बेहद चमत्कारी और पवित्र…

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श्री बटुक भैरव स्तोत्रम्

॥ श्री बटुक भैरव स्तोत्रम् ॥ ॥ ध्यानम् ॥ वन्दे बालं स्फटिक-सदृशं कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम् । दिव्याकल्पैर्नव-मणिमयैः किंकिणी-नूपुराढ्यम् ॥ दीप्ताकारं विशद-वदनं सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम् । हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं शूल-दण्डौ दधानम् ॥ ॥…

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श्री लिंगाष्टकम्

॥ श्री लिंगाष्टकम् ॥ ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं निर्मलभासित शोभित लिङ्गम् । जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम् ॥१॥ जिनकी पूजा ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवता करते हैं,…

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दारिद्रय दहन शिव स्तोत्र

दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र दरिद्रता मिटाने वाला शिवजी का स्तोत्र है. जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार-व्यवसाय की पूँजी बार-बार…

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महामृत्युंजय मंत्र

।।महामृत्युंजय मंत्र।। त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात॥   अर्थ:हम तीन नेत्र वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते…

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शिवजी की आरती

शिवजी की आरती स्तुतिः कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं| सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥   जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी…

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शिव चालीसा

।।श्री शिव चालीसा।।   दोहा जय गणेश गिरिजासुवन मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम देउ अभय वरदान॥   चालीसा जय गिरिजापति दीनदयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा…

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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्   जो व्यक्ति श्रद्धा पूर्वक इस द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करता है, उसे साक्षात द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन के समान ही पुण्यलाभ होता है।…

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रूद्र-सूक्तम्

रूद्र-सूक्तम्   जिस प्रकार सभी पापों का नाश करने में ‘पुरूष-सूक्त’ बेमिसाल है उसी प्रकार सभी दुखों एवं शत्रुओं का नाश करने में ‘रूद्र-सूक्त’ बेमिसाल है। ‘रूद्र-सूक्त’ सभी…

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शिवाष्टकम्

श्री शिवाष्टकम् (आदि शंकराचार्य विरचित) शिवाष्टकम् की रचना आदिगुरू शंकराचार्य ने की थी. आठ पदों में विभक्त यह रचना परब्रह्म शिवजी की पूजा का उत्तम साधन है.  …

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शिव महिम्न स्तोत्रम्

शिवभक्त गंधर्व पुष्पदंत ने भूल से शिवजी को अर्पित फूलों औऱ बेलपत्रों पर पांव रख दिया तो उसकी दिव्य शक्तियां समाप्त हो गईं. उसे अपनी गलती का बोध…

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