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श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण और शॉर्टकट दोनों

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण और शॉर्टकट दोनों

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः लघु पाठ, वाकार विधि और सरल विकल्प

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः नवदुर्गा
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः नवदुर्गा

नवरात्रि में माता का हर भक्त श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करने की लालसा रखता है. बहुत से लोग करते भी हैं. कई लोग अज्ञानता में विधियों का ध्यान नहीं रख पाते और पूर्ण फल से वंचित रह जाते हैं.

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि कई कही गई हैं. सप्तशती के अलावा भी कुछ विकल्प हैं जिनका पाठ भी पूरे दुर्गा सप्तशती के पाठ के बराबर फलदायी होता है.

कई लोगों के साथ समय का अभाव रहता है या कोई अन्य कारण जिससे वे लंबी पूजा नहीं कर पाते. शास्त्रों में उनके लिए भी कई उपाय बताए गए हैं. बस जरूरत है आपको श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि जानने की.

9 दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती पाठ कैसे करेंः श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की संपूर्ण विधि

नवरात्रि के 9 दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का विधिवत पूजन करना चाहिए. इसकी क्या विधि है वह हम नीचे बता रहे हैं. यह लंबी विधि है और उन साधकों के लिए है जो पूरे विधि-विधान से पूजन कर रहे हैं. श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में यह विधि और विस्तार से बताई गई है. अधिक विस्तार से जानने के लिए श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक देखें.

पाठ आरंभ करने से पूर्व श्री गणेशजी, शिवजी, माता जगदंबा, श्रीविष्णु आदि देवताओं का स्मरण एवं पूजा कर लेनी चाहिए. गणेशजी का आह्वान तो हर पूजन से पूर्व किया ही जाता है. यदि आप गणेशजी का आह्वान विधिवत करना चाहते हैं जो कि कर ही लेना चाहिए तो इसके लिए प्रभु शरणम् ऐप्प के दैनिक पूजन मंत्र सेक्शन में देखें. वहां सरलतम विधि मिल जाएगी. नवरात्रि में यदि आप व्रत रखते हैं तो पूजन विधिवत क्यों न हो.

गणेश जी का आह्वान और पुस्तक पूजन

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ विधि
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ विधि

श्री गणेश जी का आह्वान पूजन कर लें. यदि आप विधिवत नहीं कर पा रहे किसी कारण तो आप कम से कम एक माला ऊँ गं गणपत्यै नमः मंत्र की जप लें. फिर हाथ जोड़कर गणेशजी का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करेंः

हे मंगलमूर्ति बिना आपके आशीर्वाद के कोई भी पूजन या मंगलकार्य संभव ही नहीं. मैं अज्ञान अबोध हूं. मुझसे कई अपराध हुए हैं. मैं ज्ञात-अज्ञात विधियों से विमुख हूं. इसके लिए क्षमा करेंगे. मैं आपका शरणागत हूं. आपका शरणागत होकर आपकी मैं मां जगदंबा की प्रसन्नता के लिए यह पूजन कर रहा हूं. हे विघ्नहर्ता आप सदैव मेरे साथ उपस्थित रहें. इस पूजन में आने वाले विघ्नों का नाश करें. मां जगदंबा का पूजन निर्विघ्न कर सकूं इसके लिए मुझे आशीर्वाद दें.

सप्तश्लोकी दुर्गा-सात श्लोकों में पूरी दुर्गासप्तशती पाठ का फल

श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक का पंचोपचार पूजन

इसके बाद श्री दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए लिए पुस्तक का पूजन भी कर लेना चाहिए.

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ जिस पुस्तक से करते हैं सर्वप्रथम उस ग्रंथ को पूजन कर उन्हें संतुष्ट कर लेना चाहिए. इसके बिना किया श्री दुर्गा सप्तशती पाठ अपूर्ण है.

पंचोपचार पूजन की सरल विधिः

पुस्तक के पूजन के लिए उन पर जल छिड़कर स्नान भाव से स्नान कराएं. फिर धूप-दीप पुष्प आदि समर्पित करें.  इससे जुड़ी छोटी-छोटी बहुत सी काम की बातें जो बहुत सरल हैं नवरात्र में आपको नियम से प्रभु शरणम् ऐप्प में भी बताई जाएंगी. जुड़े रहिएगा और पढ़ते रहिएगा.

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय पुस्तक को भगवती दुर्गा का ही स्वरूप मानना चाहिए. इस पुस्तक का पाठ करने से पूर्व निम्न मंत्र द्वारा पंचोपचारपूजन करें. पंचोपचार पूजन क्या होता है यह आपको बहुत बार बता चुका हूं. आप ऐप्प के दैनिक पूजन सेक्शन में जरूर देखिए. पंचोपचार पूजन में मुश्किल से एक से डेढ़ मिनट लगते हैं तो फिर क्यों न किया जाए.

श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक के पूजन का मंत्रः

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायैनियता:प्रणता:स्मताम्॥

साधकों के लिए संपूर्ण विधिः  कवच-अर्गला-कीलक और नवार्ण मंत्र का जप

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण एवं सरल विधि
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण एवं सरल विधि

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए ग्रंथ पूजन के बाद: –

-श्री देवी कवच

-श्री अर्गला स्तोत्रम्

– श्री कीलक स्तोत्र का पाठ जरूर कर लेना चाहिए.

उसके बाद माता का सिद्ध मंत्र नवार्ण मंत्र की एक माला जप लेनी चाहिए।

माता का सिद्ध मंत्र नवार्ण  मंत्र हैः

ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

नवार्ण मंत्र माता का बड़ा चमत्कारी मंत्र है. इसके नवार्ण होने का कारण और महत्व भी जानना चाहिए।

श्री दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों के पाठ के बाद देवी सूक्त और रात्रि सूक्त के पाठ का भी विधान है. लेकिन यह सब प्रक्रिया साधकों के लिए है.

जगदंबा का सबसे शक्तिशाली मंत्र

माता के आम भक्तों के लिए थोड़ी सरल विधिः

  • श्री गणेश जी, शिव-पार्वती, श्रीहरि का अपनी विधि से स्मरण करें.
  • फिर नवार्ण मंत्र का 11 या 21 बार जप करें.
  • उसके बाद कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करें.
  • फिर वे सप्तशती पाठ आरंभ कर सकते हैं.

श्री दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ की सरल विधिः आम भक्तों के लिए

श्री दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय हैं और उनमें सात सौ श्लोक. इसके पूरे पाठ में कई घंटे का समय लगता है. बहुत से भक्तों के लिए इतना समय निकालना संभव नहीं है.

जो लोग समय के अभाव या किसी अन्य कारण से एक दिन में  श्री दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने में सक्षम नहीं हैं उनके लिए कुछ वैकल्पिक तरीके भी बताए गए हैं. ऐसे भक्त लघु पाठ या वाकार विधि का पालन कर सकते हैं. पहले लघु पाठ जानते हैं, उसके बाद जानेंगे वाकार विधि.

लघुपाठ या शॉर्टकट विधिः 

प्रसंग भेद के आधार पर श्रीदुर्गासप्तशती के तेरह अध्यायों को तीन चरित में बांटा जाता है.

प्रथम चरित,

द्वितीय चरित और

तृतीय चरित.

नियमः

  • प्रथम चरित्र के अंतर्गत केवल प्रथम अध्याय को माना जाता है.
  • द्वितीय चरित में दूसरा, तीसरा एवं चौथा अध्याय शामिल है.
  • तृतीय चरित में पांचवें से तेरहवें अध्याय माने जाते हैं.

नियम के अनुसार तीनों चरितों के पाठ का महात्म्य है. परंतु समय के अभाव में द्वितीय चरित का पाठ भी किया जा सकता है. इसे लघु पाठ कहते हैं. लघु पाठ के बाद भी 11, 21 या 108 बार नर्वाण मंत्र का जप कर लेना चाहिए.

लघु पाठ से भी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का पूरा फल मिलता है.

बहुत विवशता होने या समय का अभाव होने पर क्या विकल्प है?

कामकाजी हैं और दफ्तर पहुँचना है. अधिक देर तक बैठने में असुविधा है या कोई अन्य विवशता है तो आप निम्न दो पाठ भी कर सकते हैंः

  • सप्तश्लोकी दुर्गा
  • सिद्धकुंजिका स्तोत्रम

फिर भी यदि संभव हो तो नवरात्र के नौ दिनों में तीन बार करके निम्न विधि से कम से एक बार श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लेना चाहिए.

  • एक दिन प्रथम चरित,
  • दूसरे दिन द्वितीय चरित और
  • तीसरे दिन तृतीय चरित

ऐसे करके भी पूरी दुर्गासप्तशती का एक पाठ तो कर ही लेना चाहिए.

नवरात्रि पूजा जरूर करनी चाहिए, जानें नवरात्र का वैज्ञानिक आधार

श्री दुर्गासप्तशती  पाठ की वाकार विधिः

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की वाकार विधि सात दिनों में तेरह अध्यायों के पाठ की एक अन्य सरल विधि है. जो लोग नवरात्रि में नियम से सप्तशती पाठ करते हैं वे समय के अभाव में इस विधि का प्रयोग कर सकते हैं.

सात दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों के पाठ का क्रमः

  • प्रथम दिनः प्रथम अध्याय
  • दूसरे दिनः द्वितीय व तृतीय अध्याय
  • तीसरे दिनः चतुर्थ अध्याय
  • चौथे दिनः पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय
  • पांचवें दिनः नवम एवं दशम अध्याय
  • छठे दिनः ग्यारहवां अध्याय
  • सातवें दिनः द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय

इस तरह सात दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ किया जा सकता है.

नवरात्रि पूजन क्यों सबको करना चाहिए? नवरात्रि पूजा के पीछे का विज्ञान जानना चाहते हैं?  बहुत धैर्य के साथ पढ़ें पोस्ट और गर्व करें. पोस्ट का लिंक यहां दिया जा रहा हैः

हवन, कन्या पूजन और ब्राह्मण भोजनः

सप्तशती पाठ या माता के किसी भी साधना की निश्चित संख्या पूरी हो जाने के बाद हवन, कन्या पूजन एवं ब्राह्मण भोजन अवश्य करा देना चाहिए. वैसे तो पूजा-पाठ में सर्वाधिक भक्त श्रद्धाभाव का है लेकिन जहां तक संभव हो विधि-विधानों का पालन कर लेना चाहिए.

नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों होता है?

नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ में हवन और कन्या पूजन का बहुत महत्त्व बताया गया है. देवी कन्या का स्वरूप हैं. इसलिए कन्या पूजन तो कर ही लेना चाहिए. गृहस्थ भक्तों को तो खासतौर से यह करना चाहिए.

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ में ध्यान देने की कुछ अन्य बातेंः

एक बात विशेष तौर पर ध्यान रखने की है. श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ आप चाहे जिस विधि से भी कर रहे हों, आपको प्रतिदिन पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए. यदि आप संस्कृत पढ़ सकते हैं तो प्रभु शरणं ऐप के श्री दुर्गा शरणं सेक्शन में क्षमा प्रार्थना मंत्र दिया गया है. बहुत सरल संस्कृत है. वहां इसका हिंदी अर्थ भी मिल जाएगा.

यदि उतना नहीं करना चाहते तो दंडवत लेटकर माता से अपने तरीके से पूजन के दौरान हुए अपराधों के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य कर लें. यह प्रतिदिन करना है.

पूजा के उपरांत श्री दुर्गा माता की आरती भी अवश्य करें.

साफ सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए. जिस वस्त्र को पहनकर शौच गए हों, या कुछ खाया हो उसे धोने के बाद ही पहनें.

नवरात्रि हवनः घर में भी और खुद कर सकते हैं

मां दुर्गा की पूजा आराधना से जुड़ी सारी बातें प्रभु शरणं ऐप में एक स्थान पर मिल जाएंगी. आप ऐसा समझें कि पूरी दुर्गा सप्तशती, माँ दुर्गा की पूजा की विधियां, सारे मंत्र, आरती सबकुछ एक स्थान पर मिल जाएगा. ऐप कैसे डाउनलोड कर सकते हैं वह नीचे बताया गया है.

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का लाभ और उद्देश्यः

मां दुर्गा के भक्त सुख-शांति, धन-धान्य की प्राप्ति, रोग-दोष एवं कष्टों से मुक्ति एवं अन्य मनोकामनाओं के लिए पाठ करते हैं. वे नौ दिनों की पूजा में जगदंबा से यह सब वरदान मांगते हैं. पुत्र माता से तो माँगते ही हैं. यह उनका अधिकार भी है.

लेकिन श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ और दुर्गा जी की पूजा के पीछे एक अन्य उद्देश्य भी है. दुर्गा जी के उपासकों को कभी भी किसी कन्या का अपमान नहीं करना चाहिए. कन्याओं में माता का स्वरूप देखना चाहिए. कन्याओं को माता के स्वरूप मानते हुए उन्हें मान-सम्मान केवल नवरात्रि में नहीं अपितु हमेशा देना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ का अर्जित फल क्षीण हो जाता है. ऐसा शास्त्रों में कहा गया है.

संकलनः
राजन प्रकाश

आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. यह पोस्ट श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में बताई गई विधियों का सरल शब्दों में संकलन मात्र है. इसका उद्देश्य आपको जानकारी देना मात्र है. आप संपूर्ण पुष्ट जानकारी के लिए श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को देखें.

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दुर्गा सप्तशती संपूर्ण प्रभु शरणम् ऐप्प में उपलब्ध है. वेबसाइट पर भी पढ़ सकते हैं. नवरात्रि पूजन के लिए श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ का ही प्रयोग करें. यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है. नीचे लिंक से वेबसाइट पर मिल जाएगा. ऐप्प में भी मां दुर्गा मंत्र सेक्शन में पूरी सप्तशती उपलब्ध है. 

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