गणेश जी की कैसी मूर्ति लानी चाहिएः जैसी मनोकामना वैसी चुनें प्रतिमा

गणेश जी की कैसी मूर्ति लानी चाहिएः जैसी मनोकामना वैसी चुनें प्रतिमा

गणेश जी की सूंड की दिशा किस ओर होनी चाहिए: घर में कौन सी प्रतिमा रखें दक्षिणाभिमुखी या वाममुखी प्रतिमा?

घर हो या मंदिर गणपति की प्रतिमा की स्थापना के समय गणेश जी की सूंड की दिशा का विशेष ध्यान रखा जाता है। गजानन के सूंड का मुड़ाव अलग-अलग ऊर्जा और फल का प्रतीक है।

दीवाली की पूजा से लेकर गणेश चतुर्थी तक हम अपने घरों में गणेश जी की स्थापना करते ही हैं। बाजार में आपको विभिन्न मूर्तियों में गणेश जी की सूंड अलग-अलग दिशा आपने नोट की होगी।

कई प्रतिमाओं में सूंड बाईं और होती है जिसे वामावर्त या वाममुखी गणेश प्रतिमा कहते हैं। जिनमें सूंड दाईं तरफ होता है उसे दक्षिणावर्ती या दक्षिणमुखी गणेश कहते हैं। कुछ में सूंड सीधी भी रहती है। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है।

गणेश जी की सूंड की दिशा का क्या महत्व है?

घर के लिए मूर्ति चयन में गणेश जी की सूंड की दिशा का महत्व: दाईं और बाईं ओर गणेश जी की सूंड का अर्थ
घर के लिए मूर्ति में गणेश जी की सूंड की दिशा का चयन कैसे करें

गणेश जी की सूंड की दिशा में अंतर होना क्या कलाकार की अपनी इच्छा है या इसका कोई खास महत्व है? गणेश जी की सूंड की दिशा क्या कोई विशेष महत्व रखती है?

इसका उत्तर है “हां”। गणेश जी की सूंड की दिशा बहुत कुछ कहती है। यह कलाकार की अपनी इच्छा नहीं है। मूर्तिकार आमतौर पर इन रहस्यों से परिचित होते हैं कि प्रतिमा क्या कहती है, उसका क्या प्रयोजन है। अनुभवी मूर्तिकार आपसे आपकी जरूरत, आपका पेशा, आपकी मनोकामना आदि पूछते हैं फिर उसके अनुसार सुझाव देते हैं।

लेकिन कई बार दुकानदार को बस मूर्ति बेचनी होती है या फिर खरीदार को ही नहीं पता होता कि वह किस उद्देश्य से मूर्ति ले रहा है। इसलिए कई बार भूल हो जाती है। आप इस पोस्ट को पढ़ने के बाद सही मूर्ति के चयन में पूरी तरह सक्षम होंगे ऐसा हमारा प्रयास है। आपके पास सारी जानकारी हो इसलिए पोस्ट को विस्तृत रखा गया है।


गणेश जी की सूंड की दिशा पर जानकारी की इस पोस्ट में आप जानेंगेः

  • गणेश जी की सूंड की दिशा बाईं तरफ होने का क्या तात्पर्य है?
  • गणेश जी की सूंड की दिशा दाईं तरफ होने का क्या अर्थ है?
  • घर में स्थापित किए जाने वाले गणेश जी की सूंड की दिशा क्या होनी चाहिए?
  • मंदिर में स्थापित होने वाले गणेश जी की सूंड की दिशा क्या बेहतर मानी जाती है?
  • गणेश जी की सूंड की दिशा किधर शुभ होती है?
  • दुकान या ऑफिस में गणेश जी की सूंड की दिशा क्या रखनी चाहिए?
  • किस मनोकामना के लिए गणेश जी के किस विग्रह का पूजन करना चाहिए?
  • वास्तु के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा के रंग और सामग्री का क्या महत्व है?

इसे पढ़ने के बाद गणेश जी की सूंड की दिशा को लेकर आपको कोई भ्रम नहीं रहेगा। सारी बातें आप शास्त्र आधारित हैं। गणेश पुराण तथा मुद्गल पुराण में दी गाई जानकारियों के आधार पर लिखी गई हैं।

पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करके रख लें ताकि जब भी प्रतिमा खरीदते समय गणेश जी सूंड की दिशा को लेकर भ्रम हो तो इसे पढ़कर आप निवारण कर सकें। अपने लिए गणेश जी सही प्रतिमा का चुनाव कर सकें.


गणेश जी की सूंड की दिशा क्यों महत्वपूर्ण है? इसका क्यों ध्यान रखना चाहिए?

घर में गणेश जी की सूंड किस तरफ हो? जानें सही स्वरूप व वास्तु नियम
मूर्ति चुनते समय गणेश जी की सूंड की दिशा का ध्यान क्यों जरूरी है

गणेश जी को हाथी का मस्तक मिलना एक सामान्य घटना नहीं है। आखिर हाथी का ही मस्तक क्यों मिला? मनुष्य, गंधर्व, देव, गण, सिंह या किसी भी अन्य जीव का मस्तक गणेश जी को दिया जा सकता था। इससे भी बड़ी बात किसी अन्य का शीश क्यों लगाना? जब जोड़ ही रहे थे तो वही शीश जोड़ देते जो कटकर अलग हुआ था। यह सब प्रश्न आपके मन में आते होंगे- आने भी चाहिए। ऐसे जितने प्रश्न आएं उनकी चर्चा होगी।

सनातन और अन्य धर्म परंपराओं में यह एक बड़ा अंतर है। सनातन में धार्मिक विषयों पर संदेह, संदेह से पैदा हुए प्रश्न और फिर चर्चा करके उनका निवारण- यह तीन महत्वपूर्ण पक्ष हैं जो इसे अन्य किसी भी मत से अलग बनाते हैं। अन्य मतों में किताबों में लिखी बातों पर संदेह करने और प्रश्न पूछने की छूट नहीं है।

सनातन संदेह करके प्रश्न पूछने और उस जिज्ञासा से पैदा हुए ज्ञान पर आधारित हैं। इसीलिए इसमें ताजगी बनी रहती है। यह प्रोगेसिव या प्रगतिशील है। इस विषय पर एक गंभीर पोस्ट जल्द ही देंगे।

आज इस बात को यहीं छोड़ते हैं और गणेश जी सूंड की दिशा पर फोकस करते हैं।

हाथी का मस्तक क्यों मिला? जिस हाथी का मस्तक गणेश जी को मिला उसकी भी एक पौराणिक सुंदर कथा है। उसका लिंक आपको इस पोस्ट में मिलेगा।

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गणेश जी की सूंड की दिशा दाईं तरफः सिद्धि विनायक स्वरूप

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि गणेश जी की सूंड की दिशा यदि दाईं तरफ हो तो उसे दक्षिणमुखी या दक्षिणावर्ती गणेश कहते हैं। दक्षिणमुखी गणेश को सिद्धिविनायक भी कहा जाता है।

दक्षिणमुखी गणेश को मंदिरों में पूजन के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।

अच्छा यह बात तो रह ही गई कि गणेश जी की सूंड की दिशा को कैसे परखें- यानी अपने सामने रखकर या गणेश जी के पीछे बैठकर जो दिशा हो वह। इसका निवारण भी किए देते हैं।

आप स्वयं को गणेश जी जगह रखें और देखें कि आपका दायां हाथ कौन सा है। वह वही गणेश जी की दाईँ भुजा है। दाई भुजा को जो सूंड स्पर्श करे वह सिद्धि विनायक हैं।

गणेश जी की सूंड की दिशा दाईं तरफ होने का महत्वः

दायां हिस्सा सूर्य नाड़ी को दर्शाता है। सूर्य ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत हैं। इसलिए ऊर्जावान सूर्य नाड़ी का अधिक क्रियाशील या एक्टिव होने का अर्थ है बहुत अधिक तेजस्वी और शक्तिशाली होना।

इसी तथ्य को आधार मानकर दाईं ओर सूंड वाले गणपति को जागृत तथा अत्यंत तेजस्वी माना जाता है। घरों के लिए इतनी तेजस्विता अच्छी नहीं है। उसके कई कारण हैं। घरों में वास्तु का दोष हो सकता है।

घरों में कई बार मांसाहार पकता है अथवा मांसाहारी व्यक्तियों का आगमन हो सकता है। मदिरा या शराब का सेवन हो सकता है। इस पर पूरा नियंत्रण कर पाना संभव नहीं है। आपको घर आया व्यक्ति क्या खाता है और क्या पीकर आया है यह आप कैसे जानेंगे? अगर जान भी गए तो हर बार रोकना संभव नहीं है। मंदिरों में ऐसा नहीं होता।

गणेश जी के सिद्धि विनायक दक्षिणमुखी स्वरूप की स्थापना मंदिरों में ही करनी चाहिए।

सिद्धि विनायक स्वरूप में महागणपति ऐश्वर्य के प्रतीक भी हैं। इसलिए उनका पूजन सूती वस्त्र के स्थान पर रेशमी वस्त्र धारण करके किया जाना श्रेष्ठ माना जाता है। आपने गौर किया हो शायद, सिद्धि विनायक गणेश जी बहुत चमकते वस्त्रों में, खूब आभूषणों से सजे होते हैं।

नोट:

आप घर में दक्षिणमुखी (दाईं ओर सूंड वाले) गणेश जी स्थापित करना चाहते हैं, तो किसी योग्य पुरोहित से विधि-विधानपूर्वक ही करवाएं; बिना नियमों के इनकी पूजा घरों में उचित नहीं मानी जाती।

यदि अनजाने में ऐसी प्रतिमा घर में स्थापित हो गई है, तो भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। पोस्ट में आगे बताई गई हैं कुछ सरल सावधानियां उनका ध्यान रखकर पूजन करें।

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डरने-घबराने की कोई बात नहीं है। ईश्वर नहीं डराते, असुर डराते हैं। हम तो ईश्वर की पूजा कर रहे हैं। भूल हुई तो क्षमा मांग लिया। वे क्षमा कर देंगे।

गणेशजी के विभिन्न अवतार

गणेश जी की सूंड की दिशा बाईं तरफः वक्रतुंड स्वरूप 

जिस विग्रह या प्रतिमा में गणेश जी सूंड की दिशा बाईं तरफ हो, यानी उसका अग्रभाग बाईं ओर मुड़ा हो, भगवान की बाईं भुजा को स्पर्श करता हो, उसे वाममुखी कहते हैं। इस विग्रह को वक्रतुंड भी कहा जाता है।

जैसे दायां भाग सूर्य नाड़ी है वैसे बायां भाग चंद्रनाड़ी है। चंद्रनाड़ी शीतलता का प्रतीक है।

बायां भाग उत्तर दिशा पर प्रभाव रखता है। पूजा अर्चना के लिए जो दिशाएं सबसे शुभ मानी गई हैं वे उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या पूर्व दिशा हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर दिशा भी पूजा-अर्चना के लिए शुभ मानी गई है।

घर में स्थापित करने के लिए गणपति का वक्रतुंड स्वरूप उत्तम है।

महागणपति के वक्रतुंड विग्रह की पूजा में भी बहुत विशेष नियमों व विधि-विधानों का पालन करने का बंधन नहीं होता। इसलिए घरों में इनकी स्थापना श्रेष्ठ है।

वक्रतुंड सरल पूजन से ही शीघ्र प्रसन्न और संतुष्ट हो जाते हैं।

इस स्वरूप में गणेश जी चूंकि शीतल भाव से हैं इसलिए शीघ्र क्रोधित नहीं होते।

घर में रखने के लिए गणेश जी की सर्वोत्तम प्रतिमा:

यदि आप पहली बार गणेश जी की मूर्ति ला रहे हैं, तो वाममुखी मूर्ति ही चुनें।

 

यह सुरक्षित, शुभ और गृहस्थ जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी है।

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जिस प्रतिमा में गणेश जी के सूंड की दिशा सीधी हो उसका महत्व:

सीधी सूंड वाली गणेश जी का प्रतिमा को सुषुम्ना नाड़ी पर प्रभाव रखने वाला माना जाता है। यह विशेष साधना के लिए अधिक उपयुक्त की गई है। ऐसे गणेश जी की पूजा रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। साधु-संन्यासी व सिद्ध पुरुष मोक्ष प्राप्ति हेतु गणेश जी के इसी विग्रह स्वरूप का ध्यान करते हैं।

ध्यान देने की बातः गृहस्थों को ऐसी प्रतिमा लाने से बचना चाहिए जिसमें गणेश जी के सूंड की दिशा सीधी हो। यदि आप साधारण गृहस्थ जीवन का पालन करते हैं तो इस मूर्ति की स्थापना से बचें। सीधी सूंड वाले गणेश जी के विग्रह पूजन में बहुत सात्विक जीवन का पालन करने का विधान है।


गणेश जी की प्रतिमा चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

जब भी गणेश जी की प्रतिमा या चित्र घर में लाएं, तो कुछ चीजों का ध्यान रखने का प्रयास करें। इनका पालन करना सरल है तो क्यों न पालन कर ही लिया जाए।

गणेश जी सायुध और सवाहन हों।

सायुध यानी अपने समस्त प्रिय आयुधों से युक्त हों। गणेश जी के हाथों में उनका एकदंत, अंकुश और मोदक होना चाहिए।

सवाहन का अर्थ है- वाहन के साथ।

गणेशजी की प्रतिमा के साथ उनका वाहन मूषक भी होना चाहिए। मूषक के अलावा भी उनके कुछ वाहन कई कथाओं में मिलते हैं। कुछ परंपराओं में मूषक के अलावा अन्य वाहन पर उन्हें आरूढ़ दिखाया जाता है जिसमें हाथी भी है।

यदि गणेश जी कमल दल पर सुशोभित हैं और पास में भी उनका वाहन है जो मूर्ति या छवि में दिख रहा है तो वह भी ठीक है।

जिस प्रतिमा में गणेशजी सायुज और सवाहन हों, साथ ही साथ यदि उनका एक हाथ वरदान देने की मुद्रा में हो तो घर में पूजन के लिए वह सबसे उत्तम विग्रह या छवि मानी जाती है।


वास्तु के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा स्थापना के नियम

मुख्य द्वार पर: कुछ वास्तु दोष ऐसे होते हैं जिनको चाहकर भी दूर नहीं किया जा सकता। जैसे महानगरों में फ्लैट लिए जाते हैं। उनमें आप वास्तु के अनुसार बहुत तोड़-फोड़ नहीं करा सकते। ऐसे घरों में मुख्य द्वार पर गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। वह समस्त वास्तु दोषों का निवारण करने वाला होता है।

यदि मुख्य द्वार गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर नहीं लगाते तो ऐसी जगह लगाएं जहां घर में प्रवेश करने पर वे सामने या स्पष्ट रूप से दिखें। उन पर दृष्टि पड़े। घर में प्रवेश करने पर सबसे पहले उन्हें प्रणाम कर लेना चाहिए।

वास्तु दोष दूर करने के लिए लगाई गई प्रतिमा या तस्वीर में गणेश जी के सूंड की दिशा क्या होनी चाहिए? यह तो हम पहले ही बता चुके हैं कि घरों के लिए ऐसी प्रतिमा लाएं जिसमें गणेश जी के सूंड की दिशा बाईं ओर हो। यह विघ्नों का नाश करने वाली है। तो वास्तु विघ्न का भी इससे नाश होगा।

घर में प्रवेश करने से पहले या प्रवेश करने के साथ ही जब हमें विघ्न विनाशक व्रकतुंड स्वरूप भगवान गणेश जी के दर्शन होते हैं, तो इसके प्रभाव से सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है। हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती।

पूजा घर में:

पूजा घर में यदि संभव हो तो ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मुख पूर्व या उत्तर की ओर रखें। लेकिन हर बार ऐसा संभव नहीं है। फ्लैटों आदि में तो अधिकांशतः यह संभव नहीं हो पाता। इसलिए परेशान होने या घबराने की बात नहीं है। भक्ति की भावना बनी रहे- ईश्वर को भाव का प्रेम है। बाकी सबका उतना अर्थ नहीं है।

प्रतिमा की ऊँचाई:

मूर्ति की ऊँचाई आँखों के स्तर या उससे ऊपर होनी चाहिए। जमीन पर न रखें। गणेश जी को चौकी पर या सिंहासन या फर्श से ऊपर किसी चीज पर ही स्थापित करना चाहिए। लकड़ी, पत्थर, धातु किसी भी चीज का आसन दे सकें तो अच्छा है।

गणेश जी की प्रतिमा किस कमरे में हो:

वास्तु के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा पूजा घर, लिविंग रूम, या स्टडी रूम में ही रखें। रसोई, बाथरूम, या बेडरूम के पास न रखें। इन स्थानों पर तो किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा रखने से परहेज करना चाहिए। लेकिन आजकल घर छोटे होते हैं। बहुत से लोगों के पास एक ही कमरा होता है।

देखिए फिर वही कहेंगे जहां तक संभव हो नियमों का पालन वहां तक कर लें। जो संभव नहीं हो रहा है उसके लिए भगवान से प्रार्थना करें कि हे देव मुझे सक्षम बनाइए ताकि ये सब नियमों का पालन कर सकूँ। जब तक नहीं कर पाता तब तक के लिए क्षमा मांगता हूँ।

मूर्ति का मुख किस ओर होना चाहिए:

गणेश जी की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना उत्तम है। उत्तर-पूर्व भी रखा जा सकता है। यदि संभव हो तो पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर उनका मुख न रखें।

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गणेश जी की प्रतिमा के रंग और उसकी सामग्री का महत्व

गणेश जी की सूंड किस तरफ हो? जानें दाईं-बाईं सूंड के रहस्य, किस मनोकामना के लिए पूजें कौन सी प्रतिमा, सही रंग, धातु का चयन और स्थापना के जरूरी वास्तु नियम।
नृत्य मुद्रा में गणेश जी की सूंड की दिशा का महत्व

गणेश जी की प्रतिमा के रंगों और प्रतिमा किस सामग्री की बनी है इसके बारे में भी वास्तु और कुछ अन्य शास्त्रों में कुछ बातें कहीं गई हैं। उन्हें भी जान लेते हैः

सिंदूरी लाल रंग:

गणेशजी का रंग लाल है। भगवान का लाल-रक्त वाला स्वरूप विघ्न-बाधाओं को हरने वाला, तेजस्वी और अपनी छाप छोड़ने वाला माना गया है। सिंदूरी रंग के गणेश जी की पूजा सुख-समृद्धि और प्रभाव को बढ़ाने वाली मानी गई है। बिजनेस व्यापार में इसे विशेष लाभदायक माना गया है। दुकानों-दफ्तरों आदि में सिंदूर रंग के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करना श्रेष्ठ है।

सफ़ेद रंग:

श्वेत शांति, ज्ञान, और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। विद्यार्थियों और ज्ञान की कामना के साथ गणपति का ध्यान करने वालों के लिए सफेद रंग के गणेश जी की पूजा उत्तम कही जाती है। यदि संभव हो तो सफेद रंग के गणेश जी की प्रतिमा या फोटो रख लें अन्यथा सुनहरे या हरे रंग की प्रतिमा  और फोटो रखें।

पीला या सुनहरा रंग:

यह रंग धन, समृद्धि, और वैभव का प्रतीक कहा जाता है। फैक्ट्रियों, दुकानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पीले या सुनहरे रंग की प्रतिमा रखना विशेष शुभ कहा गया है।

हरा रंग:

गणेश जी को बुध ग्रह का अधिपति माना गया है। बुध ग्रह बुद्धि की राशि है। इसलिए बुधवार का दिन गणेश जी का विशेष रूप से दिन कहा गया है। हरे रंग की गणेश प्रतिमा सभी के लिए सुखदायी है। बुद्धि विवेक से किए जाएं तो सारे कार्य सफल होते हैं।

गणेश जी की प्रतिमा की सामग्री का महत्वः

मिट्टी की मूर्ति:

वास्तु दोष निवारण के लिए सबसे अधिक उत्तम मानी जाती है। इसका पृथ्वी तत्व से जुड़ाव है। जिन प्रतिमाओं का अनिवार्य रूप से विसर्जन होना है वैसी प्रतिमाएं तो मिट्टी की ही होनी चाहिए। यह पर्यावरण के अनुकूल।

गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए मिट्टी की बनी प्रतिमा सर्वोत्तम रहेगी। लेकिन उस पर हानिकारक रसायन हों तो फिर नदी या जलाशयों में विसर्जित न करें। बेहतर है कि मिट्टी की बनी प्रतिमा लाएं। बहुत ताम-झाम के लिए उसमें हानिकारक रसायन न लगे हों।

पीतल की मूर्ति:

पीतल एक लंबे समय तक चलन वाला धातु है। जल्द खराब नहीं होता। इसलिए वास्तु में इसे लंबी उम्र और स्थायित्व से जोड़कर देखा जाता है। पूजा घर में स्थायी स्थापना के लिए यह उत्तम है। दीवाली की पूजा के लिए यह एक सुंदर विकल्प है।

स्फटिक (क्रिस्टल) की मूर्ति:

स्फटिक ऊर्जा, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक वातावरण प्रदान करता है। ड्राइंग रूम आदि में रखने के लिए स्फटिक की मूर्ति विशेष रूप से अच्छी है।

चांदी की मूर्ति:

धन लाभ, समृद्धि, और मान-सम्मान। पूजन के लिए यह भी एक उत्तम विकल्प है।

सोने की मूर्ति:

अत्यंत शुभ, राजसी प्रभाव, और उच्च आध्यात्मिक लाभ। सोने की महिमा के बारे में अधिक बताने की आवश्यकता ही नहीं है।


किस कामना के लिए करें गणेश जी के किस स्वरूप की पूजा-साधना

नारायण की तरह महादेव, सूर्य, जगदंबा और गणपति के अनेक अवतार हैं. विशेष कारणों से हुए हैं हर अवतार और विशेष मनोरथ की पूर्ति के लिए पूजे जाते हैं। यदि लालसा है भगवान के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की तो आपको तत्काल प्रभु शरणम् ऐप से जुड़ जाना चाहिए।

प्रभु शरणं में हम ऐसी कथाएं नियमित रूप से देते रहते हैं। हजारों कथाएं पहले से डाली गई हैं जिन्हें आप सरलता से पढ़ सकते हैं। प्रभु शरणं ऐप एकदम फ्री है। सनातन के प्रचार के लिए बनाया गया है। प्लेस्टोर में सर्च करें- Prabhu Sharnam और डाउनलोड कर लें।

चलिए अभी बात करते हैं कि किस कामना के साथ गणेश जी के किस स्वरूप की आराधना करें।

संतान सुख प्राप्ति हेतुः

घर में पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति का विचारः संतान प्राप्ति के लिए करें गणेश जी के बाल स्वरूप की पूजा
गणेश जी की सूंड की दिशा और बाल गणेश की पूजा का मर्म

संतान सुख की कामना है तो अपने घर में बाल गणेश की प्रतिमा या तस्वीर रखकर पूजा करनी चाहिए।

बाल गणेश के पूजन से संतान प्राप्ति में आने वाली विघ्न बाधाएं दूर होती हैं। बुद्धिमान और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है। कहते हैं गर्भावस्था में स्त्रियों को गणेश जी की बाल लीलाओं का खूब पाठ करना चाहिए। इससे गर्भस्थ संतान बुद्धिमान होती है।

बाल गणेश की पूजा की पूजा में दूध, मिश्री, और मोदक का भोग लगाएं।

बुद्धि-विवेक की कामनाः

यदि परिवार में बहुत गलतफहमियां हैं। लोग एक दूसरे की बात नहीं सुनते। अकारण ही परिवार के लोग एक दूसरे पर शक करते हों तो ऐसे घर में गणेश जी की ऐसी प्रतिमा या छवि रखनी चाहिए जिसमें वे नृत्य कर रहे हों। नाचते हुए गणेश जी की प्रतिमा की पूजा सकारात्मक भाव लाती है।

नृत्य मुद्रा में गणेश जी का ध्यान घर में आनंद, उत्साह और उन्नति प्रदान करता है। यदि किसी विद्यार्थी को भेंट कर रहे हों तो नृत्य मुद्रा वाले गणेश जी की प्रतिमा या फोटो भेंट करें। लेकिन गणेश जी सवाहन हों यानी उनका वाहन भी उस चित्र में हो। यह पॉजिटिविटी और उत्साह का संचार करता है।

कला जगत से जुड़े लोगों को भी इसी स्वरूप का ध्यान करने से विशेष लाभ मिलता है।

सुख और आनंद के लिए

गणेश जी आसन पर विराजमान हों या लेटे हुए मुद्रा में हों, तो ऐसी प्रतिमा को घर में लाना शुभ होता है। इससे घर में सुख और आनंद का स्थायित्व बना रहता है। शांत भाव से लेटे हुए प्रसन्नमुख गणेश जी की ऐसी प्रतिमा या छवि को देखने से तनाव और चिंता में राहत मिलती है। आप ऐसा करके देखें कुछ दिनों के लिए आपको सच में लाभ होता दिखेगा।

जो लोग डिप्रेशन वगैरह में रहते हैं उन्हें ऐसी प्रतिमा या फोटो को घर में ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां दिन में कई-कई बार उन्हें देखने का अवसर मिले। ड्राइंग रूम में ऐसी प्रतिमा रखने से आपको बार-बार दर्शन होंगे क्योंकि वहां आप अधिक समय तक बैठते हैं।


गणेश जी की पूजा में अक्सर होने वाली भूलें

पूजा में कुछ चीजों का ध्यान विशेष रूप से रखना अच्छा होता है। इससे पूजा-पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है।

क्या करें (Do’s)

  • नियमित रूप से मूर्ति की सफाई करें और धूल जमने न दें।
  • प्रतिदिन दीपक, धूप, और पुष्प अर्पित करें।
  • गणेश जी को मोदक, लड्डू, और लाल फूल प्रिय हैं — इन्हें अर्पित करें।
  • मूर्ति को ऊँचे स्थान पर स्थापित करें (आँखों के स्तर या ऊपर)।
  • वाममुखी मूर्ति घर में रखें (यदि आप गृहस्थ हैं)।
  • मूर्ति के पीछे दीवार होनी चाहिए (खुली जगह में न रखें)।
  • गणेश जी की मूर्ति के साथ माता लक्ष्मी या सरस्वती की मूर्ति भी रख सकते हैं।

 

क्या न करें (Don’ts)

  • कभी भी टूटी या क्षतिग्रस्त प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए। यह अशुभ है। रोग-दोषकारक है। यदि मूर्ति टूट जाए तो उसका विसर्जन कर दें और नई प्रतिमा ले आएं।
  • दक्षिणमुखी गणेश मूर्ति यदि घर में स्थापित कर रहे हैं तो पूजा में विधि-विधानों का पूरा ध्यान रखें। इसके बारे में हमने ऊपर बताया है।
  • मूर्ति को किसी आसन या सिंहासन पर रखे। भूमि या मंदिर के फर्श पर न रखें।
  • रसोई, बाथरूम, या बेडरूम के पास किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा नहीं रखनी चाहिए। लेकिन कई बार ऐसा संभव नहीं होता। इसके बारे में हमने पोस्ट में ऊपर चर्चा की है।
  • मूर्ति के सामने कूड़ा-करकट या जूते-चप्पल न रखें।
  • बिना स्नान किए गणेश जी की पूजा न करें। किसी भी देवी देवता की पूजा पवित्र होकर ही करनी चाहिए।
  • गणेश जी की मूर्ति के पास तामसिक वस्तुएं (मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन) न रखें।
  • नियमित विसर्जन/सफाई जरूरी है — पुरानी मूर्ति को नदी या समुद्र में विसर्जित करें।
  • घर के लिए वाममुखी गणेश प्रतिमा ही रखें। यदि दक्षिणमुखी (दाईं सूंड वाले) गणेश जी की स्थापना पुरोहित से विधि-विधानपूर्वक ही कराएं।यदि अनजाने में ऐसी प्रतिमा आ गई हो, तो घबराएं नहीं—प्रतिदिन नियमित भोग, मंत्रोच्चार व आरती से पूजा करें।यदि कठिन नियमों का पालन संभव न हो, तो मिट्टी की प्रतिमा होने पर विसर्जन कर दें और धातु की प्रतिमा होने पर गणपति से क्षमा मांगकर आगे से सावधानी बरतें। सच्चे भाव से ईश्वर क्षमा कर देते हैं।

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

गणपति उत्सव विशेष: जानिए श्रीगणेश के अनसुलझे व दुर्लभ रहस्य

पूरे गणेशोत्सव के पावन पर्व पर हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं भगवान श्रीगणेश की दिव्य कथाओं, सिद्ध मंत्रों और शास्त्रोक्त विधियों की विशेष श्रृंखला। इसमें हम आपको गणपति स्थापना की संपूर्ण विधि और प्रभावशाली मंत्रों से तो परिचित कराएंगे ही, साथ ही बप्पा के उन गूढ़ रहस्यों को भी उजागर करेंगे जो सामान्यतः सुनने को नहीं मिलते।

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गणेश जी के सूंड की दिशा और गणेश जी की प्रतिमा से जुड़े सारे रहस्यों को उजागर करती यह पोस्ट आशा है आपको पसंद आई होगी। अपने विचार में कमेंट में लिखकर भेजें। आप कोई विशेष कहानी या पोस्ट पढ़ना चाहते हैं तो वह भी बताएं। हम उसे पोस्ट करेंगे।

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