गणेश चतुर्थी को कलंक चतु्र्थी क्यों कहते हैं? कलंक चौथ का चांद दिख जाए तो करें 3 सरल उपाय

गणेश चतुर्थी को कलंक चतु्र्थी क्यों कहते हैं? कलंक चौथ का चांद दिख जाए तो करें 3 सरल उपाय

कलंक चतुर्थी: भूल से गणेश चतुर्थी का चांद दिख जाए तो क्या करें? जानें कलंक चौथ की कथा और अचूक उपाय

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी गणेश चतुर्थी को शास्त्रों में कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस दिन भूलवश भी चंद्र दर्शन कर लेता है, तो उस पर चोरी, बेईमानी या झूठा लांछन (कलंक) लगने का भय रहता है।

स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी इस दोष से अछूते नहीं रहे थे और उन्हें स्यमंतक मणि चोरी के मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ा था। यदि आपसे भी जाने-अनजाने गणेश चतुर्थी का चांद दिख गया है, तो घबराएं नहीं। शास्त्रों में इस दोष से मुक्ति के अत्यंत सरल और अचूक उपाय बताए गए हैं।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि 2026 की कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ 14 सितंबर को है।

इस लेख में आप जानेंगे:

  • गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ क्यों कहा जाता है?

  • गणेश जी ने चंद्रमा को क्या शाप दिया था (कलंक चतुर्थी की कथा)?

  • भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमंतक मणि की चोरी का आरोप क्यों लगा?

  • अगर भूल से गणेश चतुर्थी का चांद दिख जाए तो क्या करना चाहिए?

  • चंद्र दर्शन दोष मुक्ति मंत्र और पाठ विधि।

कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ की कथाः चौथ के चंद्रमा को क्यों दिया गणेश जी ने शाप
कलंक चतुर्थी गणेशजी से शापित रहते हैं चंद्रमा

श्रीकृष्ण पर लगा स्यमंतक मणि की चोरी का आरोपः कलंक चतुर्थी

भगवान श्रीकृष्ण पर द्वारका में स्यमंतक मणि की चोरी का आरोप लग गया. भगवान बड़ी दुविधा में थे कि आखिर उन पर यह आरोप क्यों लगा? ऐसा कौन सा पाप या अपराध उनसे हुआ है कि चोरी का झूठा आरोप लग गया. भगवान इसी सोच में थी कि तभी नारदजी वहां प्रकट हो गए.

अभिवादन के बाद नारदजी ने कहा- प्रभु आप तो अंतर्यामी हैं. आप इस दुविधा में कैसे. आप गणेशजी द्वारा चंद्रमा को दिए शाप के बारे में भूल गए थे और अंजाने में आपने चौथ के चंद्रमा के दर्शन कर लिए. चौथ का चंद्रमा तो कलंकित है. इसलिए यह कलंक तो लगना ही था. यह तो कलंक चतुर्थी के चंद्रदर्शन का परिणाम है मायापति.

भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा- नारद, यह तो आपने बड़ी विचित्र बात कही. ऐसी क्या भूल हो गई थी चंद्रमा से जो उसे गणेश जी ने ऐसा शाप दे दिया. चंद्रमा तो देव हैं. देव के दर्शनमात्र से मनुष्य कलंकित हो जाए यह तो बड़ी हैरान करनी वाल बात हुई? मुझे सारी कथा विस्तार से कहो.


कलंक चतुर्थी की कथा: गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया था शाप?

कलंक चतुर्थी की कथा: गणेश जी द्वारा चंद्रमा को शाप देने का पौराणिक प्रसंग
भगवान गणेश द्वारा चंद्रमा के अहंकार पर शाप देने का दृश्यः कलंक चतुर्थी कथा

नारदजी ने कथा सुनानी शुरू की. हे केशव एक बार ब्रह्माजी ने विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए चतुर्थी तिथि का कठोर व्रत रखा. गणपति बप्पा प्रसन्न होकर प्रकट हुए और ब्रह्मदेव से पूछा कि आप किस अभीष्ट की कामना से यह व्रत कर रहे हैं. मैं आपसे प्रसन्न हूं. आप अपना अभीष्ट कहें मैं उसे पूरा करूंगा.

गणेश जी द्वारा वरदान मांगने को कहे जाने पर संतुष्ट ब्रह्माजी ने मांगा- हे गणपति आप लोभ, मोह, मद अहंकार आदि का नाश करने वाले हैं. मुझे अपनी रची सृष्टि का मोह न हो, मुझे इसी वर की अभिलाषा है. कृपया यह वरदान प्रदान करें.

गणेशजी ने ब्रह्माजी को उनका इच्छित वर दे दिया और वहां से चले.

गणपति का शरीर भारी-भरकम है. लंबा पेट है इसलिए लंबोदर कहलाते हैं। मुख के स्थान पर हाथी का मस्तक है इसलिए गजानन कहे जाते हैं. वहीं चतुर्थी के दिन चंद्रमा सबसे ज्यादा सुंदर रूप में होते हैं. चतुर्थी को चंद्रमा तो जैसे पूरे शृंगार के साथ प्रकट हुए थे.

गणेश जी कुछ विचारते हुए चले जा रहे थे तभी दैवयोग से कुछ अनहोनी हो गई.

गणेशजी की चाल दैवयोग से लड़खड़ा गई. वे गिरते-गिरते बचे. इसे देखकर चंद्रमा की हंसी छूट गई. उन्होंने गौरीपुत्र का तिरस्कार कर दिया. चंद्रमा द्वारा किए उपहास से वे क्रोध में तमतमाने लगे.

चंद्रमा के इस अहंकार और तिरस्कार को देखकर गजानन अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने तत्काल चंद्रमा को शाप दे दिया:

“रूप के अभिमान में अंधे चंद्रमा! तुमने मेरी काया का उपहास उड़ाया है. जिस रूप पर तुम्हें मिथ्या गर्व है, वह अब किसी को प्रिय नहीं रहेगा. मैं शाप देता हूं कि आज से कोई तुम्हारा मुख देखना पसंद नहीं करेगा. जो भी तुम्हें देखेगा, वह कलंकित होगा. देव हो या मानव कोई भी चंद्रदर्शन नहीं करेगा.”

 

शाप के प्रभाव से चंद्रमा की चमक तत्काल समाप्त हो गई और उनका क्षय होने लगा. उनकी सुंदर काया तत्काल अत्यंत डरावनी हो गई. शाप से पीड़ित चंद्रमा को मानसरोवर में जाकर छिपना पड़ा. चंद्रमा विलुप्त हो गए.

चंद्रमा के लुप्त होने से प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा और ऋतु चक्र थम गया.  इससे प्राणियों को बड़ा कष्ट होने लगा. सभी ने ब्रह्माजी से इस संकट से उबारने की गुहार लगाई.

ब्रह्माजी ने बताया कि यह सब गणेशजी के शाप के कारण हो रहा है. चंद्रमा ने अपनी मूर्खता में गणेशजी का अपमान कर दिया है. हम सबको मिलकर गणेशजी को प्रसन्न करने का प्रयास करना होगा.

शाप में संशोधन: केवल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को निषेध

ब्रह्माजी के आदेश पर सभी देवताओं ने गणेश जी का व्रत किया और उनकी विविध प्रकार से स्तुति की.

देवताओं की व्रत-पूजा से गणेश जी प्रसन्न होकर वहां प्रकट हो गए.

गणेश जी ने कहा- देवताओं मैं आपसे प्रसन्न हूं. मैं आपके लिए क्या करूं जो आपको प्रियकर हो. आप जो भी चाहें मुझसे मांग लें.

देवताओं ने कहा- आप तो सर्वज्ञ हैं. हमारी इस स्तुति का अभिप्राय भी जानते हैं. हे प्रभु आप चंद्रमा को क्षमा कर दें. आपसे शापित होने के कारण वह लुप्त हैं इससे प्राणियों को बड़ा कष्ट हो रहा है. जगत कल्याण के लिए आप चंद्रमा को शाप मुक्त कर दें.

देवताओं के अनुनय-विनय पर दयालु गणेश जी पसीज गए, किंतु उन्होंने कहा कि दिया हुआ शाप पूरी तरह निष्फल नहीं हो सकता। अतः गणेश जी ने शाप में संशोधन करते हुए कहा:

  • चंद्रमा को पूरे वर्ष शाप से मुक्त रखा जाएगा।

  • किंतु अपने अहंकार की भूल का स्मरण बना रहे, इसके लिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी ( कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ) को चंद्र दर्शन पूर्णतः वर्जित रहेगा।

  • जो भी मनुष्य अथवा देव इस रात्रि चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर समाज में झूठे लांछन व चोरी के कलंक लगेंगे।

शाप में यह संशोधन होने से चंद्रमा को बहुत सुकून मिला.

चंद्रमा को गणपति का वरदानः भूल से कलंक चतुर्थी का चाँद देखने पर दोष से मुक्ति का मार्ग

शाप स्वीकार करने के बाद चंद्रमा ने गणेश जी की स्तुति आरंभ कर दी. वह नियमित रूप से गणेश स्तुति करते रहे. लंबे समय तो उनके तप से गणेश जी चंद्रमा पर प्रसन्न हो गए.

गजानन गणेशजी प्रसन्न होकर बोले- चंद्रमा मैं तुम्हारी स्तुति से प्रसन्न हूं और तुम्हारी मूर्खता को क्षमा कर चुका हूं. तुम्हारे शाप में संशोधन भी कर चुका हूं परंतु मैंने पहले भी कहा है कि तुम्हें शापमुक्त नहीं कर सकता. इसके अतिरिक्त बताओ तुम्हारी प्रसन्नता के लिए मैं क्या करूं. जो इच्छित हो वह वरदान मांग लो.

चंद्रमा ने विनीत भाव से कहा- प्रभु आपने जो दंड दिया है मैं उसके योग्य ही हूं. आपकी अनुकंपा है कि आपने क्षमा कर दिया. मुझ पर प्रसन्न हैं तो एक कृपा करें. यदि कोई भूल से चतुर्थी के दिन मेरे दर्शन भूल से कर ले तो उसकी मुक्ति का कोई उपाय बताएं. भूल से होने वाले अपराध की क्षमा का तो विधान है. मैं बस उसी विधान का पालन करने की विनती कर रहा हूं.

गणेश जी का क्रोध शांत हो चुका था.

वह चंद्रमा की चतुराई पर हंसते हुए बोले- चंद्रदेव आप बड़े चतुर हैं. आपकी इस चतुराई पर भी मैं प्रसन्न हूं. अप्रत्यक्ष रूप से आप इस शाप से मुक्ति ही चाहते हैं. मैंने तो निर्णय किया था कि आपको पूरी तरह से शापमुक्त नहीं करूंगा पर आपकी चतुराई से प्रसन्न होकर मैं भूल से हुए चंद्रदर्शन दोष से मुक्ति का मार्ग बताता हूं.

गणेश जी बोले- जो मनुष्य प्रत्येक द्वितीया को तुम्हारे दर्शन करता रहेगा, वह इस लांछन से बच जाएगा. उसे इस शाप का प्रभाव न होगा. इस चतुर्थी तिथि को मैं अपना प्रिय दिन स्वीकारता हूं. चतुर्थी तिथि ही मेरी तिथि होगी. इस दिन सिद्धि विनायक व्रत करने से सारे दोष छूट जाएंगें.

कलंक चतुर्थी का चंद्रमा देखने से भगवान श्रीकृष्ण पर लगा था स्यमंतक मणि की चोरी का आरोप

कलंक चतुर्थी का प्रभावः श्रीकृष्ण पर लगा स्यमंतक चोरी का दोष

इतनी कथा सुनाकर नारदजी श्रीकृष्ण से बोले- हे नाथ! इस प्रकार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को कलंक का कारण माना जाता है. इसे कलंक चतुर्थी की उपमा है. भूल से आपने गणेश चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन कर लिया था.

कलंक चौथ के शापित होने के कारण सत्राजित के भाई प्रसेन की हत्या और स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा लांछन आप पर लग गया. आप भी गणेश चतुर्थी का व्रत करें तो यह दोष मिट जाएगा.

तब श्रीकृष्ण ने भी कलंक से मुक्त के लिए चतुर्थी का व्रत किया. भगवान श्रीगणेश वहां प्रकट हुए और बोले- आप पर सत्राजित ने जो आरोप लगाया वह चंद्रदर्शन के दोष के कारण था पर आप उससे मुक्त हैं. आपने यह शाप स्वीकार करके मुझे बहुत प्रसन्न किया है. अतः भूल से यदि कोई भाद्रपद की चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन कर लेगा तो उसकी मुक्ति एक रास्ता और बनाता हूं.

कलंक चतुर्थी को भूल से चंद्रमा के दर्शन करने वाला यदि आप पर स्यमंतक मणि की चोरी के आरोप लगने और फिर आरोप से मुक्ति की कथा यदि सुन ले तो वह उस दोष से मुक्त हो जाएगा.

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अगर गणेश चतुर्थी का चाँद दिख जाए तो क्या करना चाहिए? (दोष मुक्ति के उपाय)

यदि भूल से या अनजाने में गणेश चतुर्थी का चांद दिख गया हो, तो बिल्कुल भी विचलित न हों। शास्त्रों में बताए गए इन 3 उपायों में से किसी एक को तुरंत कर लें:

1. ब्रह्मवैवर्त पुराण का दोष मुक्ति मंत्र जपेंः  हाथ में जल या फल लेकर भगवान गणेश और श्रीकृष्ण का स्मरण करें और इस मंत्र का 3, 5 या 11 बार पाठ करें:

सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

अर्थ: हे सुंदर बालक! प्रसेन को सिंह ने मारा और उस सिंह का संहार जाम्बवान ने किया। अतः तुम रोओ मत, इस स्यमंतक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार है।

2. स्यमंतक मणि की कथा का श्रवण या पाठ करेंः भगवान श्रीकृष्ण की स्यमंतक मणि के उद्धार और कलंक से मुक्ति की पावन कथा का पाठ करने या सुनने से चंद्र दर्शन का दोष तत्काल समाप्त हो जाता है।

3. गणेश जी को दूर्वा व मोदक अर्पित कर क्षमा मांगेंः भगवान श्रीगणेश के मंदिर या घर के पूजा स्थान पर जाकर बप्पा को 21 दूर्वा दल चढ़ाएं, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और अनजाने में हुए चंद्र दर्शन के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

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कलंक चतुर्थी और चंद्र दर्शन: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कौन सी चतुर्थी को चंद्रमा नहीं देखना चाहिए?

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (गणेश चतुर्थी), जिसे कलंक चतुर्थी या कलंक चौथ भी कहा जाता है, उस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए।

चौथ का चांद कब नहीं देखना चाहिए?

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की पूरी रात्रि चंद्र दर्शन वर्जित रहता है। विशेषकर जिस समय चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय और चंद्रास्त होता है, उस संपूर्ण काल में आकाश, जल या दर्पण में भी चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए।

अगर गणेश चतुर्थी का चाँद दिख जाए तो क्या करना चाहिए?

यदि भूलवश चौथ का चांद दिख जाए, तो तत्काल हाथ में जल या फल लेकर भगवान गणेश और श्रीकृष्ण का ध्यान करें। इसके बाद ब्रह्मवैवर्त पुराण का स्यमंतक मणि मंत्र (“सिंहः प्रसेनमवधीत्…”) 3 या 11 बार पढ़ें अथवा श्रीकृष्ण-स्यमंतक मणि प्रसंग की कथा का पाठ/श्रवण करें।

क्या शीशे या पानी में चांद की परछाई दिखने पर भी दोष लगता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार प्रत्यक्ष दर्शन के साथ-साथ जल, शीशे या खिड़की के कांच में भी चतुर्थी के चंद्रमा का प्रतिबिंब देखना वर्जित माना गया है। ऐसी स्थिति में भी दोष निवारण मंत्र का स्मरण कर लेना चाहिए।


संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

 

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