Advertisement728 × 90

शिवलिंग पूजा विधि: क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं? शिव प्रसाद खाना चाहिए?

शिवलिंग पूजा विधि: क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं? शिव प्रसाद खाना चाहिए?

शिवलिंग पूजा विधि: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका और नियम

महादेव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग पूजा विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। बहुत से भक्त भक्ति में शिवलिंग पर जल तो चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग क्या है और कैसे बना?

आज के इस लेख में हम जानेंगे शिवलिंग की उत्पत्ति, शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका, चंदन लगाने के नियम और वो सभी बातें जो आपको एक शिव भक्त के रूप में जाननी चाहिए।

इस पोस्ट मे आप जानेंगेः

  • शिवलिंग क्या है और शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?
  • शिवलिंग कितने प्रकार के होते हैं?
  • शिवलिंग की प्रतिष्ठा कैसे करनी चाहिए?
  • शिवलिंग का आकार-प्रकार कैसा होना चाहिए?
  • शिवलिंग पूजा विधि: जल चढ़ाने का सही तरीका
  • शिवलिंग को क्या स्त्रियां छू सकती हैं? (महत्वपूर्ण नियम)

 

शिव पुराण में प्रसंग आता है कि नैमिषारण्य में ऋषियों ने सूत जी से शिवलिंग और शिवलिंग की पूजा के संदर्भ में समस्ता ज्ञान देने को कहा। शिवलिंग की प्रतिष्ठा कैसे करनी चाहिए? शिवलिंग के आकार-प्रकार, परिमाण संबंधित स्थापित परंपरा क्या है? किसी विधि से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए जिससे महादेव प्रसन्न हों?

ऋषियों के अनुरोध पर सूतजी ने उन्हें वह सब बताना शुरू किया जो उन्हें उनके गुरुदेव भगवान वेद व्यास जी ने बताया था।  शिव पुराण में सूत जी के माध्यम से शिवलिंग पूजा विधि को विस्तार से बताया गया है।

प्रभु शरणं के प्रेमियों के लिए हम विस्तृत शिवलिंग पूजा विधि को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि आप सरलता से समझ सकें और पालन भी कर सकें।

 

शिवलिंग क्या है और शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई?

शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि निराकार ब्रह्म का प्रतीक है। सृष्टि की उत्पत्ति के समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। विवाद बहुत बढ़ गया तो सभी को चिंता हुई।

तब एक विशाल अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ। इस अग्नि स्तंभ का न आदि था न अंत। यह शिव का स्वरूप था। इसे ही शिवलिंग कहा गया। शिव पुराण में शिवलिंग के विषय में बहुत विस्तार से वर्णन आता है। इस पर आपको पोस्ट पढ़ने को मिलेगी।

शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग को सृष्टि का आधार और निराकार शिव का प्रकाश पुंज माना गया है।

शिवलिंग के प्रकारः चल और अचल शिवलिंग

शिव पुराण में शिवलिंग के कई प्रकार बताए गए हैं। मुख्य रूप से दो प्रकार के शिवलिंग होते हैं: अचल शिवलिंग और चल शिवलिंग

अचल शिवलिंग

वे शिवलिंग हैं जो मंदिर में प्रतिष्ठित होते हैं। इसकी प्रतिस्थापना और प्राण प्रतिष्ठा विधि बहुत विषद है।

अचल शिवलिंग पूजा विधि में कई विधान भी करने होते हैं। इसलिए हम इसके बारे में यहां बात नहीं करेंगे। हम प्रभु शरणं के पाठकों के लिए घर में शिवलिंग पूजा विधि पर ध्यान देंगे।

चल शिवलिंग

चल शिवलिंग मुख्य रूप से वे शिवलिंग हैं जो घरों में या घरों में बनने वाले छोटे मंदिरों में आमतौर पर स्थापित होते हैं। चल शिवलिंग में पार्थिव शिवलिंग, बाणलिंग या रत्नजड़ित शिवलिंग प्रमुख रूप से आते हैं।

घर के लिए छोटे पार्थिव शिवलिंग या नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा सर्वोत्तम मानी गई है। घरों में ऐसे शिवलिंग पूजा विधि सामान्य होती है जिसे हम आगे समझेंगे।

पार्थिव शिवलिंग और बाणलिंग के बारे में आपको हम जानकारी देते रहे हैं। विस्तार से जानकारी एक अन्य पोस्ट में जिसका लिंक इस पोस्ट में मिलेगा। तो शिवलिंग पूजा विधि की जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले यह समझ लेते हैं कि घरों में पूजन के लिए पार्थिव शिवलिंग को क्यों उत्तम माना गया है।

पार्थिव शिवलिंग पूजन की महिमा

सूत जी ने शिवलिंग पूजा विधि में पार्थिव शिवलिंग की पूजा को सर्वश्रेष्ठ बताया है। पार्थिव यानी पृथ्वी के अंश मिट्टी आदि से निर्मित। पार्थिव शिवलिंग को पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसके बाद ही अन्य शिवलिंग का स्थान आता है।

असुरराज बलि वैरोचन के सौ पुत्रों में सबसे बड़ा पुत्र बाणासुर इतना बड़ा शिवभक्त था कि उसे शिव का पार्षद कहा जाता था। बाणासुर नर्मदा तट पर प्रतिदिन एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करके उसका पूजन करता था।

कहते हैं शिवजी उसकी इस पूजा से उसके वश में हो गए थे। बाणासुर ने शिवजी से अपने नगर की रक्षा करने की प्रार्थना की जिसे वह ठुकरा न सके। अपना वचन निभाने के लिए शिवजी, कार्तिकेय, शिवगणों आदि के साथ बाणासुर के नगर के पहरेदार बन गए थे।

बाणासुर ने एक बार श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध का हरण कर लिया था। श्रीकृष्ण अपनी सेना के साथ बाणासुर से युद्ध को आए तो उन्हें शिवजी अपनी सेना के साथ रखवाली करते दिखे।

भगवान शिव और श्रीकृष्ण के बीच धोर संग्राम हुआ था. यह कथा मैंने आपको सुनाई है. नीचे लिंक से पढ़ सकते हैं।

शिवभक्त बाणासुर की पुत्री उषा, श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध के प्रेम का परिणाम, महादेव और श्रीकृष्ण में छिड़ गया भीषण संग्रामः भाग-1

बाणासुर ने जिस पार्थिव शिवलिंग के पूजन से शिवजी को वश में कर लिया था उसकी महिमा और बताने की क्या आवश्यकता?

कहते हैं बाणासुर ने असंख्य पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा के बाद नर्मदा में प्रवाहित किया था। आज भी नर्मदा में शिवलिंग प्राप्त होते हैं। उन्हें बाणलिंग भी कहा जाता है।

अब हम जानेंगे कि पार्थिव लिंग का किस प्रकार निर्माण और पूजन करना चाहिए जिससे शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

चरणबद्ध तरीके से शिवलिंग से जुड़ी जानकारियां दे रहा हूँ। ताकि शिवभक्तों को सबकुछ बहुत स्पष्ट रहे। इसलिए पोस्ट के साथ बने रहिए और पूरा पढ़िए। आप अनुभव करेंगे कि बहुत सारी बातें तो आप जानते ही नहीं थे।

इसलिए हम सरल शब्दों में और समझ-समझकर पढ़ने वाली शैली में आगे बढ़ेंगे।

शिवलिंग पूजा विधि
शिवलिंग पूजा की विधि, जल कैसे चढ़ाएं, पार्थिव शिवलिंग कैसे बनाएं, क्या स्त्रियाँ शिवजी की पूजा कर सकती हैं, क्या शिवजी पर चढ़ा प्रसाद खा सकते हैं- इन सब बारे में क्या कहता है शिव पुराण

पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि (विस्तृत विधि और मंत्र)

पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि जानने से पहले यह समझते चलें कि पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कैसे होता है? इसमें क्या ध्यान रखना चाहिए?

  • पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी उत्तम सरोवर या नदी के भीतर की मिट्टी लें. फिर उस मिट्टी का पुष्प, चंदन, द्रव्य आदि से संशोधन करना चाहिए।
  • एक मंडप बनाकर उसके नीचे उस मिट्टी का दूध से शोधन करना चाहिए. यानी मिट्टी में दूध मिलाकर उसे गीला करना चाहिए। सफाई करनी चाहिए।
  • फिर गणेश जी, श्री विष्णु जी, श्री सूर्यदेव, माता पार्वती आदि का आह्वान कर उनका षोडषोपचार विधि से पूजन करना चाहिए। उसके बाद शिवलिंग निर्माण करना चाहिए।
  • देवों का पूजन करने के बाद उसमें माता-पिता अथवा प्रकृति-पुरुष की भावना रखनी चाहिए।
  • भगवान भोलेनाथ पुरुष और भगवती उमा प्रकृति-स्वरूपा हैं। पार्वती जी के प्रति माता का भाव और शिवजी के प्रति पिता का भाव रखकर पूजन करना चाहिए।
  • शिवलिंग का परिमाण यानी लंबाई 22 अंगुल ऊंचा होना चाहिए। इससे अधिक ऊंचा नहीं होना चाहिए। जिस अनुपात में परिमाण का ध्यान नहीं रखते, फल उसी अनुपात में कम हो जाता है।
  • मंदिर में यदि शिवलिंग की स्थापना करनी हो तो इसे गर्भगृह में स्थापित करना चाहिए।
  • ब्रह्मवृति का पालन करते हुए बंधु-बांधवों के साथ गाजे-बाजे, वाद्ययंत्र बजाते हुए श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का पूजन करें। अग्निहोत्र के साथ षोडशोपचार विधि से पूजन करना चाहिए।
  • ब्रह्मवृति का अर्थ है सात दिन ब्रह्मा-विष्णु और महेश देवों के निमित्त यज्ञ-हवन करें। सामर्थ्य अनुसार दान देकर पुरोहितों को प्रसन्न करें।

शिवलिंग पूजा के फलः

  • पार्थिव लिंग के पूजन से धन-धान्य, आयु, बल और यश की वृद्धि होती है। उत्तम साधकों के लिए इससे उत्कृष्ट दूसरा कोई साधन इस संसार में सुलभ नहीं हो सकता।
  • वैदिक विधि से शिवलिंग का पूजन करके सधक इस जन्म में सभी वांछित भोगों को भोगकर देह त्यागने पर मोक्ष लाभ कर लेता है।

शिवलिंग पूजा विधिः शिव पुराण के अनुसार

अब तक हमने शिवलिंग की उत्पत्ति, शिवलिंग के प्रकार, पार्थिव शिवलिंग, पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि, शिवलिंग पूजा के फल और बाणलिंग के बारे में जाना। अब हम शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पूजा विधि को संक्षेप में जानेंगे।

  • प्रातः नित्यकर्मों से निवृत होकर साधक भस्म और रूद्राक्ष धारण करे।
  • शिवजी का स्मरण करते हुए नदीतट, तालाब, पर्वत अथवा किसी पवित्र स्थान पर पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करे।
  • पवित्र स्थान से मिट्टी लेकर उसका जल से शोधन करे।
  • ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए उस स्थान की शुद्धि करे जहां स्थापना करनी है।
  • उस स्थान पर विद्यमान किसी जीव की हत्या न हो जाए इसका विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
  • यदि कोई चींटी या कीड़ा आदि है तो मिट्टी खोदते समय उसकी हत्या नहीं होनी चाहिए, इसका विशेष ध्यान रखें।
  • विधिवत पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके मंत्रोच्चार से उसका षोडशोपचार यानी सोलह प्रकार का पूजन करना चाहिए।

आशा है आपको पोस्ट पसंद आ रही होगी। अपने कमेंट और सुझाव जरूर लिखिएगा। कोई भूल हुई तो उस पर भी ध्यान आकृष्ट कराएं ताकि तत्काल इसका सुधार किया जा सके।

शिवलिंग पूजा विधि में अब रोज की पूजा विधि के बारे में जानेंगे। आगे बढ़ने से पहले फिर से स्पष्ट कर दूँ कि शिवजी या कोई भी देवता भाव के भूखे हैं। आपने भक्तिभाव से सिर्फ हाथ भी जोड़ लिया है तो वह भी पुण्यकारी है।

शिवलिंग पूजन की जो विधि हम नीचे बता रहे हैं वे उनके लिए जिनके पास पर्याप्त समय है और जो विधि-विधान से पूजन करने के इच्छुक हैं। वैसे संभव हो तो सभी को इसका पालन करना चाहिए।

चलिए शिवलिंग पूजन विधि में षोडषोपचार विधि को जानते हैं।

शिवलिंग पूजन विधिः षोडषोपचार विधि एवं मंत्र

  • सर्वप्रथम “मानो महान्तम्” मंत्र से शिवजी का आह्वान करें। यह मंत्र यजुर्वेद (अध्याय 16, मंत्र 15) के रुद्राष्टाध्यायी (या रुद्री) का हिस्सा है।
    • मानो महान्तम् मंत्र (संस्कृत):
      ॐ मानो महान्तम् उत मा नोऽ अर्भकं मा न उक्षन्तम् उत मा नऽ उक्षितम् ।
      मा नो वधीः पितरं मोत मातरं मा नः प्रियास्तन्वो रुद्र रीरिषः ॥
    इस मंत्र के माध्यम से भक्त भगवान रुद्र (शिव) से प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु! न हमारे बड़ों को, न बच्चों को, न हमारे युवा या वृद्धजनों को कोई नुकसान होने पाए। हमारे माता-पिता की रक्षा करें और हमारे शरीर व प्रियजनों को किसी भी प्रकार की हानि न पहुँचने पाए।
  • ऊँ नमोsस्तु नीलग्रीवाय” मंत्रोच्चार के साथ पाद्य यानी पैर धोने का जल समर्पित करें. यह भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र वैदिक मंत्र है, जिसका उल्लेख यजुर्वेद के श्री रुद्रम (रुद्र सूक्तम्) में किया गया है।
    मंत्र का अर्थ: “समुद्र मंथन में विष पीने के कारण नीलवर्ण (नीले) गले वाले और सहस्रों नेत्रों (या अनंत रूपों) वाले रुद्र को बारंबार नमस्कार है।” 
  • अब रूद्र गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य समर्पित करें।
    रूद्र गायत्री मंत्रः
    ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात
  • महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करते हुए आचमनीय समर्पित करें.
  • “पयः पृथ्वियां पयो अंतरिक्षे” मंत्र से स्नान के लिए शुद्ध सुगंधित जल समर्पित करें.
    मूल मंत्र:
    ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयोधाः ।
    पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम् ।।
    मंत्र का भावार्थ:
    प्रकृति और ब्रह्मांड में जीवनदायिनी ऊर्जा (पयः अर्थात् जल, दूध, और पोषक रस) व्याप्त है। इस मंत्र में प्रार्थना की गई है कि पृथ्वी पर, औषधियों (वनस्पतियों) में, अंतरिक्ष और आकाश (दिवि) में अमृत तुल्य जल और पोषण उपस्थित रहे। साथ ही, सभी दिशाएं मेरे लिए पोषण और कल्याण से परिपूर्ण हों।
  • “नमो घृष्णवे” का उच्चारण करते हुए वस्त्र और फिर उत्तरीय यानी गमछा समर्पित करें.
  • “नमः श्वभ्यः नमः पार्याय” मंत्र से बिल्वपत्र, गंध, पुष्प तथा अक्षत आदि अर्पित करें. यह मंत्र यजुर्वेद के श्री रूद्रम में आता है।
    नमः श्वभ्यः” का अर्थ है— श्वानों (कुत्तों) के रूप में विद्यमान या श्वपतियों (शिकारियों या पशुपालकों) के रूप में रहने वाले रुद्र को नमस्कार है।
    नमः पार्याय” का अर्थ है— संसार सागर के उस पार पर विराजने वाले या संसारातीत (माया से परे) जीवन्मुक्त रूप को नमस्कार है।
  • ऊँ कपर्दिने नमः” मंत्र से धूप समर्पित करें.
  • नमः आशवे” का उच्चारण करते हुए दीप दिखाएं.
  • इमा रूद्राय कपर्दिने” से फल चढ़ावें। यह इस मंत्र का संक्षिप्त रूप है। मूल मंत्र थोड़ा बड़ा है। लेकिन इससे भी काम चल जाता है।
  • हिरण्यगर्भः समवर्ताग्रे” मंत्र से दक्षिणा चढ़ावें। पूरा मंत्र इस प्रकार से है लेकिन संक्षिप्त रूप से भी काम चला सकते हैं।
    मंत्रः

    हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्।
    स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम॥

  • “मानस्नोक” मंत्र से साष्टांग प्रणाम करना चाहिए।
    मंत्रः
    ॐ मानस्तोके तनये मा न आयुषि मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः।
    वीरान् मा नो रुद्र भामिनो वधीर्हविष्मन्तः सन्तः सदाम त्वा हवामहे॥

    मंत्र का भावार्थ:
    हे रुद्र (शिव)! हमारे बच्चों, हमारी आयु, हमारी गायों और हमारे घोड़ों को नष्ट मत कीजिए। हमारे वीर पुत्रों/सैनिकों को अपने क्रोध का भाजन न बनाइए। हम उत्तम हविष्य (आहुति) लेकर हमेशा आपका आह्वान करते हैं।

ध्यान मंत्रः

इसके उपरांत नीचे दिए गए मंत्र से शिवलिंग का ध्यान करना चाहिएः

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचन्द्रावतंसम्,
रत्नाकल्पोज्जवलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।

पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैः व्याघ्रकृत्तिं वसानम्,
विश्ववाद्यम् विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।

मंत्र का अर्थ:

मैं प्रतिदिन उन महेश्वर का ध्यान करता हूँ, जिनका शरीर कैलाश के समान श्वेत है, जो सिर पर सुंदर चंद्रमा धारण करते हैं और रत्नों से जगमगाते हैं। उनके चारों हाथों में परशु (कुल्हाड़ी), हिरण, वर और अभय मुद्रा है।

वे प्रसन्न मुद्रा में कमल पर विराजमान हैं और देवतागण उनकी स्तुति करते हैं। बाघांबर पहनने वाले, सृष्टि के आदि, जगत के मूल कारण, सभी भयों को हरने वाले और पाँच मुख व तीन नेत्र वाले शिव का हम नित्य स्मरण करते हैं।

सांष्टांग दंडवत प्रणाम के बाद अपराध क्षमा प्रार्थना करना आवश्यक है. दोनों हाथ जोड़ लें और इस प्रकार स्तुति करें-

शिवलिंग पूजा विधिः क्षमा प्रार्थना

अब शिवलिंग पूजा विधि में हुई हर प्रकार की त्रुटि, अपराध के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगनी चाहिए। क्षमा याचना के समय निम्न मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं या कान पकड़कर सामान्य रूप से भी क्षमा मांग सकते हैं।

मंत्रः

अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानात् जपं पूजादिकं मया।
कृतं तदस्तु सफलं कृपया तव शंकर।।

हिंदी अर्थः
हे शंकर (शिव)! मैंने अज्ञानतावश या जानबूझकर जो भी जप और पूजा आदि की है, वह आपकी कृपा से सफल हो जाए।” (अर्थात, मेरी पूजा में हुई त्रुटियों को क्षमा कर दें और मुझे इसका पूर्ण फल प्रदान करें।)

इस प्रकार भगवान की विधिवत पूजा करके पूजा की सफलता की प्रार्थना करें फिर प्रदक्षिणा करें।

पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन

आपने पार्थिव शिवलिंग पूजा विधि सीखी और पूजन किया। इसके बाद शिवलिंग का विसर्जन कर देना चाहिए। विसर्जन के लिए देवागात्विति मंत्र का पाठ करना चाहिए-

देवागात्विति मंत्र और उसका अर्थ

मंत्र:

ॐ वेदोऽसि येन त्वं देव वेदेभ्यो वेदोऽभवस्तेन मह्यं वेदो भूयाः।
देवागातु विदो गातुं वित्वा गातुमित।
मनसस्पत इमं देव यज्ञं स्वाहा वातेधाः ।। [1]

हिंदी भावार्थः

हे वेद स्वरूप देव! जिस प्रकार आप संपूर्ण देवताओं के ज्ञान का स्रोत हैं, उसी प्रकार मुझे भी ज्ञान प्रदान करें। हे देवों! सत्य मार्ग (गातु) को जानो और उस पर आगे बढ़ो। “हे मन के स्वामी (मनसस्पते), यह यज्ञ और उसका फल मैं आपको समर्पित करता हूँ, इसे वायु में स्थापित करें।”

इस प्रकार षोडशोपचार विधि से पार्थिव शिवलिंग का पूजन और विसर्जन किया जाता है। जो शिवलिंग पूजा विधि अभी बताई गई वह बहुत विस्तृत है। मंत्रों आदि के पाठ में भूल भी हो सकती है। लेकिन शिवजी से क्षमा प्रार्थना करके संभव हो तो आप पूजन कर सकते हैं।

जो इतना नहीं कर सकते उनके लिए हम और संक्षिप्त शिवलिंग पूजन विधि की पोस्ट डाल रहे हैं। आप उसका पालन कर सकते हैं। शिवलिंग पूजा विधि के संक्षिप्त पोस्ट का लिंक ठीक इसके नीचे हैः

शिवलिंग पूजा विधि: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका और नियम

शिवलिंग पूजा विधि: जलाभिषेक कैसे करें

शिवलिंग पूजा विधि- क्या स्त्रियां कर सकती हैं शिवलिंग का स्पर्श
शिवलिंग पूजा विधि- क्या स्त्रियां कर सकती हैं शिवलिंग का स्पर्श. शिवजी का जलाभिषेक कैसे करें.

अब तक हमने विस्तार से पार्थिव शिवलिंग बनाने से लेकर विसर्जन तक की विधि समझी। अब जानेंगे कि मंदिर में या घर में शिवलिंग पर जल अर्पण करने का सही तरीका क्या है:

  • दिशा: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें।

  • पात्र: तांबे या पीतल के पात्र का उपयोग करें।

  • धारा: जल की धारा अत्यंत धीमी और निरंतर होनी चाहिए।

  • मंत्र: जल चढ़ाते समय मन ही मन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।

  • सावधानी: शिवलिंग की जलाधारी को लांघना नहीं चाहिए। जल के साथ ही बिल्वपत्र भी श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

क्या स्त्रियों भी शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं?

स्त्रियाँ शिवलिंग पूजा विधि विधान से कर सकती हैं या नहीं इस पर लेकर एक बहस अक्सर रहती है। बहुत से लोग स्त्रियों को शिवलिंग पूजा विधि वत करने से मना करते हैं। लेकिन क्या यह यह सच है? क्या स्त्रियों को शिवलिंग पूजा विधि विधान से करने की मनाही है?

स्त्रियों द्वारा शिवलिंग पूजा विधि पर क्या कहता है शिव पुराणः

शिव पुराण में प्रसंग आता है कि ऋषियों ने सूत जी के सामने अपना प्रश्न रखा कि क्या स्त्रियां भी शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं। इस पर सूत जी ने जो कहा वह जानना चाहिए।

क्या स्त्रियां शिवलिंग पूजा कर सकती हैं?

सूतजी बोले- ऋषियों! शिवलिंग की पूजा का अधिकार केवल पुरुषों या ब्राह्मणों को ही नहीं है। शिव पूजा का समान अधिकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्रों और हर वर्ण की महिलाओं को भी है।

यहां तक कि शंकर संतानें यानी एक वर्ण के वीर्य के अन्य वर्ण की स्त्री में स्थापित होने से उत्पन्न संतान को भी शिवलिंग पूजा का अधिकार है। हर वर्ण के स्त्री-पुरुष शिवलिंग पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

इसमें बाधा डालना शिवद्रोह करने जैसा है। यह घोर पाप है। इसलिए स्त्रियों को शिव जी की पूजा का पूरा अधिकार है।

शिवजी को अर्पित प्रसाद ग्रहण करना चाहिए?

शिवजी को समर्पित नैवेद्य, मिष्ठान्न, प्रसाद आदि के संबंध में ऋषियों ने सूत जी से प्रश्न किया- हे ऋषिश्रेष्ठ! शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद किसके लिए ग्रहण करने योग्य और कब नहीं ग्रहण करने योग्य होते हैं?

सूतजी इस शंका का समाधान करते हए बोले- शुद्ध, पवित्र, सदाचारी शिवभक्त द्वारा शिवजी को समर्पित नैवेद्य को श्रद्धापूर्ण ग्रहण करना चाहिए। शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद हर प्रकार से ग्रहण करने योग्य है। इसे ग्रहण करने से आनाकानी करता है वह पाप का पापी होता है।

ऐसे सभी पुष्प, पत्र, फल, जल एवं नैवेद्य जो अग्राह्य हों लेकिन यदि शिवलिंग से उनका स्पर्श हो जाए तो वे पवित्र और ग्राह्य हो जाते हैं।

शिवलिंग के स्पर्श होते ही प्रसाद परम पवित्र और हर प्रकार से ग्रहण योग्य हो जाता है. इसे नकारने की मूर्खता नहीं करनी चाहिए।

।।जय भोलेनाथ।।

संकलन व संपादनः

राजन प्रकाश

(यह पोस्ट शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में बताई गई शिवलिंग पूजा विधि पर आधारित है। इसे तैयार करने में शुद्धता का भरपूर प्रयास किया गया है। शिवलिंग पूजा विधि की यह पोस्ट धर्मशास्त्र और कर्मकांड के जानकारों के साथ परामर्श के बाद तैयार की गई है। फिर भी शिवलिंग पूजा विधि की इस पोस्ट में त्रुटि की संभावना हो सकती है। यदि कोई भूल हो गई हो तो हम क्षमा प्रार्थी हैं। विस्तृत जानकारी के लिए किसी वेदपाठी विद्वान से संपर्क का परामर्श दिया जाता है। )

धार्मिक प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः 

सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!

प्रभु शरणम् का लिंकः-

वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! सब फ्री भी है. एक बार देखें जरूर…

प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें। जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।

गृह क्लेश, मानसिक पीड़ा और कर्ज मुक्ति के उपाय जो बताए गए हैं, यदि यह पोस्ट पसंद आई हो तो प्रभु शरणं के फेसबुक पेज से जुड़ाएं। वहां हम ऐसे पोस्ट देते रहते हैं।

इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. लिंक-
https://www.facebook.com/share/1CJXhLfxzt/

धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइ करें. प्रभु शरणं फेसबुक ग्रुप का लिंक

https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam

 

error: Content is protected !!