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चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता- जीने की कला सिखाती प्रेरक कहानी

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता- जीने की कला सिखाती प्रेरक कहानी

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है – एक गहरी प्रेरक कथा


आजकल आत्महत्या की प्रवृत्ति बहुत बढ़ रही है। लोगों में जीवन के प्रति उदासी बढ़ रही है। हमें पता नहीं होता, हमारे आसपास मौजूद कोई व्यक्ति अंदर से कितना खोखला, कितना अकेला, कितना टूटा हुआ महसूस कर रहा हो; जीवन को खत्म करने के ख्याल आ रहे हों। ऐसे लोगों में जीवन भरने में यह प्रेरक कहानी मददगार बनेगी। क्योंकि याद रखें चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

बस आपको पांच मिनट का धैर्य रखते हुए इसे आराम-आराम से अंत तक पढ़ना है।

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है- जीवन जीने की कला सीखें
चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है- जीवन जीने की कला सीखें

मैं कथाओं में अक्सर कहता हूं कि भगवान संघर्ष और दुख की घड़ी हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि चट्टान जैसा सख्त बनने के लिए देते हैं। जो उसका इस्तेमाल कर लेते हैं वे शीर्ष पर होते हैं और जो टूट जाते हैं, वे तो टूट ही जाते हैं। बहुत से लोगों ने कहा कि यह सब कहने-सुनने में तो अच्छा लगता है, पर व्यवहारिक नहीं है। यदि सचमुच ऐसा ही होता तो क्यों आज भी इसे ही जीवन की सबसे अच्छी थेरेपी माना जाता?

जीवन की एक व्यवहारिक बात आज मैं आपको व्यवहारिक तरीके से समझाऊंगा। इसका प्रयोग नर्क जैसे दुर्गम स्थानों में तैनात फौजियों तक में आत्मबल देने के लिए किया जाता है। सोना तपकर कुंदन बनता है; संघर्ष में इंसान सिर्फ टूट ही जाता है, ऐसा नहीं है।


चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता- धैर्य से पढ़ें यह जीवन कथा

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता- प्रेरक कहानी
सपने टूटने से जीवन नहीं मरा करता है- जीने की कला सिखाती कहानी

हो सकता है यह कथा आपने पहले कहीं सुनी हो। पर मकसद तो वह बात समझाना है जो कथा के बाद आती है। धैर्य से पूरा पढ़िएगा। उसके बाद शांत मन से उस बिंदु पर मंथन करिएगा जो कथा के अंत में आएगा। यह दुनियाभर में आजमाई हुई कारगर विधि है – motivational story भी है, और जीवन जीने की कला भी सिखाती है।

जापान समुद्र के बीच में स्थित है। वहां भूमि की कमी है, इसलिए सब्जियों आदि के स्थान पर जापानियों का मुख्य आहार हमेशा से मछलियां ही रहा है। मछलियां जितनी ताज़ी होती हैं, जापानी उसे खाना उतना ही पसंद करते हैं। लेकिन तटों के पास इतनी मछलियां होती नहीं जो जापानियों की जरूरत पूरी कर सके।

नतीजतन, लोगों की रुचि का ध्यान रखते हुए मछुआरों को दूर समुद्र में जाकर मछलियाँ पकड़नी पड़ती हैं। दूर समुद्र में जब इस तरह से मछलियां पकड़ने की शुरुआत हुई, तो मछुआरों के सामने एक गंभीर समस्या आ खड़ी हुई। वे समुद्र में जितनी दूर मछली पकड़ने जाते, उन्हें वापस तट पर लौटने में उतना ही अधिक समय लगता।

मछलियाँ बाजार तक पहुंचते-पहुंचते बासी हो जातीं और फिर कोई उन्हें खरीदना नहीं चाहता। यानी समस्या जस की तस रही।


फ्रीज़र और टैंक – समाधान, जो पूरा नहीं था

इस समस्या से निपटने के लिए मछुआरों ने अपनी नावों पर फ्रीज़र लगवा लिए। वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें फ्रीज़र में डाल देते। इस तरह से वे और भी देर तक मछलियाँ पकड़ सकते थे और उन्हें बाजार तक पहुंचा सकते थे। पर इसमें भी एक समस्या आ गई।

जापानी बर्फ में रखी मछलियों और ताज़ी मछलियों में आसानी से अंतर कर लेते। वे बर्फ की मछलियों को खरीदने से कतराते। उन्हें तो किसी भी कीमत पर ताज़ी मछलियां ही चाहिए होतीं।

एक बार फिर मछुआरों को इस समस्या से निपटना था। उन्होंने इस बार अपने बड़े-बड़े जहाजों पर बड़े-बड़े टैंक बनवा लिए। अब वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें पानी से भरे टैंकों में डाल देते।

टैंक में डालने के बाद कुछ देर तो मछलियाँ इधर-उधर भागतीं, पर जगह कम होने के कारण वे जल्द ही एक जगह स्थिर हो जातीं। जब ये मछलियां बाजार पहुंचतीं तो भले वे ही सांस ले रही होतीं, लेकिन उनमें वह बात नहीं होती जो आज़ाद घूम रही ताज़ी मछलियों में होती है।

जापानी इन मछलियों में भी अंतर कर लेते। तो इतना कुछ करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई थी। अब मछुआरे क्या करते? ताज़ी मछलियां लोगों तक कैसे पहुंचाई जाएं?

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चुनौतियां जीवन में ताज़गी भर देती हैं- डरने की बजाय इनका इस्तेमाल करें

उन्होंने कुछ नया नहीं किया। वे अब भी मछलियां टैंकों में ही रखते, पर इस बार हर टैंक में एक छोटी सी शार्क मछली भी डाल देते। शार्क कुछ मछलियों को जरूर खा जाती थी, पर ज्यादातर मछलियाँ बिल्कुल ताज़ी पहुंचतीं।

ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि शार्क बाकी मछलियों के लिए एक चुनौती की तरह थी। उसकी मौजूदगी बाकी मछलियों को हमेशा चौकन्ना रखती। अपनी जान बचाने के लिए वे हमेशा सतर्क रहती थीं। इसीलिए कई दिन तक टैंक में होने पर भी उनमें स्फूर्ति और ताजापन बना रहता।

आज बहुत से लोगों की ज़िन्दगी टैंक में पड़ी उन मछलियों की तरह हो गई है, जिन्हें जगाने के लिए कोई शार्क जैसी चुनौती मौजूद नहीं है। जीवन में न कोई नया लक्ष्य, न कोई संघर्ष, न कोई रोमांच – बस एक जैसा बासी रूटीन।

एक छोटी सी मछली जैसे जीव की कद्र चुनौतियों के कारण बढ़ जा रही है, तो मनुष्य तो ब्रह्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति है। हममें तो चुनौतियों को अवसर की तरह लेने की क्षमता होती है।

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चुनौतियाँ हमें हमेशा तोड़ती नहीं – वे हमें गढ़ती भी हैं

चंद सपने टूटने से पूरा जीवन नहीं मरा करता- प्रेरक कहानी
चंद सपने टूटने से पूरा जीवन नहीं मरा करता- प्रेरक कहानी

जीवन की चुनौतियां हमेशा तोड़ती नहीं हैं। आपके साथ भी अगर लगातार ऐसा हो रहा है कि आप हर चुनौती से टूट रहे हैं, तो अपने जीवन में चुनौतियों से भागने की बजाय उनसे भिड़ना सीखिए। अब इसे अपने जीवन के उदाहरण से समझिए।

याद करिए पिछली बार जब आप पर कोई विपत्ति आई थी। आपको लगा होगा – इससे तो मैं पार ही नहीं पा सकूंगा। अब तो जीवन खत्म ही हो गया। सप्ताह भर चिंतित रहने के बाद आपको उसका सामना करने की कहीं से प्रेरणा मिली होगी या मजबूरी में ही राह बनाई होगी।

शुरू-शुरू में आप बहुत खीजते होंगे, झुंझलाहट होती होगी। लेकिन फिर एक सप्ताह बाद आप उस फेज को पार कर चुके होंगे। अब जो बात आपको सप्ताह भर पहले बेचैन कर रही थी, धीरे-धीरे आप उसे सहजता से लेने लगे होंगे।

एक समय ऐसा भी आया होगा, जब कोई और ऐसे ही संकट में फंसा आपको दिखा होगा, तो आप उसके लिए मार्गदर्शक बन गए होंगे। जो खुद एक दिन किसी परेशानी में टूट रहा था, अब वह औरों को हौसला दे रहा है।

क्या यह एक बड़ी उपलब्धि नहीं है? हारा हुआ महसूस करने वाला इंसान किसी के लिए प्रेरक या मोटिवेटर बन जाए, उसकी कद्र होने लगे – यह आत्मचिंतन और जीवन परिवर्तन की कहानी है।

दिमाग पर जोर डालिए, हर आदमी के साथ कम से कम एक ऐसा अनुभव तो होता ही है। जीवन के उसी अनुभव को याद करिए, आत्मबल मिलेगा।


चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है

चंद सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है। आप जिस रूटीन के आदि हो चुके हैं, आपको उससे कुछ अलग करना होगा।

अपना दायरा बढ़ाना होगा और एक बार फिर ज़िन्दगी में रोमांच और नयापन लाना होगा, नहीं तो बासी मछलियों की तरह आपका भी मोल कम हो जाएगा।

लोग आपसे मिलने-जुलने की बजाय बचते नजर आएंगे। अगर आपके जीवन में चुनौतियां हैं, बाधाएं हैं, तो उन्हें कोसते मत रहिए। कहीं न कहीं ये आपको ताज़ा और जीवंत बनाए रखते हैं। इन्हें स्वीकारिए और अपना तेज बनाए रखिए। जीवन जीने की यह कला जीवन भर काम आएगी।


संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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