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अमर होने का मंत्रः एक प्रेरणादायक कथा

अमर होने का मंत्रः एक प्रेरणादायक कथा

अमर होने का मंत्रः एक प्रेरणादायक कथा

अमर होने का मंत्र – क्या सचमुच ऐसा कोई मंत्र होता है? अमर होने का मंत्र किस देवता को प्रसन्न करने करके मिल सकता है? अमर होने का मंत्र कितनी बार इस्तेमाल हो सकता है? आदि आदि. कहानी का टाइटल पढ़ने के साथ ही आपके दिमाग में कुछ इस तरह के विचार आए होंगे शायद.

अमर होने का मंत्रः अपनी कई मूर्तियां बनाकर यमराज को चकमा देने की कोशिश करता एक मूर्तिकार
मृत्यु को छकाने की कोशिश करके अमर होने की लालसा दर्शाती छवि

क्या सचमुच अमर होने का कोई मंत्र भी हो सकता है?

इसका पता लगाते हैं. पहले एक प्रेरणादायक कथा पढ़िए. शायद इससे कोई मंत्र मिल ही जाए.

यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिसने अमर होने का मंत्र या नुस्खा तलाशा था. पर क्या सच में अमर हो गया?

एक बहुत बडा मूर्तिकार हुआ. मूर्तिकार की बड़ी ख्याति थी. दूर-दूर के देशों तक उसकी कला के पारखी और प्रशंसक थे. वे उसकी कला देखने आते और दांतों तले उंगलियां दबा लेते.

लोग कहते थे कि अगर वह किसी की मूर्ति बना दे और उस मूर्ति के बगल में वह आदमी सांस रोककर खड़ा हो जाए जिसकी मूर्ति है, तो बताना मुश्किल है कि असली आदमी कौन है और मूर्ति कौन है?

मूर्तिकार के मौत की घड़ी करीब आई. उसने सोचा कि अपनी कला से क्यों न मौत को ही धोखा दिया जाए? उसने अपनी ही ग्यारह मूर्तियां बनाकर तैयार कर लीं.

जब यमदूत आए तो वह उन ग्यारह मूर्तियों के साथ छिप कर खडा हो गया. यमदूतों ने देखा कि वहां एक जैसे बारह इंसान हैं. यमदूत को भी भ्रम हो गया. एक को लेने आए थे, बारह लोग खड़े हैं. किसको ले जाएं?

फिर कौन असली है? कहीं चूक से गलत प्राण न हर लें. गलत प्राण हर लिया तो बड़ा कड़ा दंड मिलेगा. यमदूत परेशान हो गए. कुछ न सूझा तो इरादा बदला और वापस लौट गए. वहां जाकर परमात्मा को बताया कि बड़ी मुश्किल पड गई है. वहां बारह एक जैसे लोग हैं! असली को कैसे खोजूं?

परमात्मा ने उसके कान में एक सूत्र दिया और कहा इसे सदा याद रखना. जब भी असली और नकली के बीच में से असली को खोजना हो इस सूत्र से आसानी से खोज लेना.

परमात्मा का सूत्र लेकर यमदूत फिर वापस लौटे. फिर से उसी कमरे में गए. परमात्मा का दिया अब नुस्खा था उनके पास.

मूर्तियों को देखा और कहा- मूर्तियां बनी तो बहुत सुंदर हैं पर मूर्तिकार से सिर्फ एक भूल रह गई. काश वह भूल न हुई होती तो ये मूर्तियां संसार की सर्वश्रेष्ठ होतीं.

यह सुनना था कि मूर्तियों के बीच सांसे रोके खड़ा चित्रकार खुद को रोक न सका. उसकी कला जो विश्वविख्यात है उस पर प्रश्नचिह्न. ऐसा कैसे हो सकता है.

कलाकार से रहा न गया. सुनते ही बोल उठा- कौन सी भूल रह गई? मैंने तो अपनी सारी कला उड़ेल कर रख दी. फिर भी तुम कहते हो भूल है. बताओ मेरी भूल के बारे में.

यमदूतों ने कहा- कलाकार तुम्हारी भूल यही है कि कि तुम स्वयं को नहीं भूल सकते. बाहर आ जाओ.

हमें जीवन क्यों मिला है, हम कष्ट क्यों भोगते हैं? एक प्रेरक कथा जो आपको सोचने को विवश करेगी.

तो प्रश्न है कि फिर अमर होने का मंत्र क्या हुआ?

जीवन के साथ ही हम एक ही चीज अपने साथ ऐसी लेकर आते हैं जो कभी भी बदल नहीं सकती—मृत्यु. मरना एक दिन तय है. लेकिन मरना चाहता कौन है. कुछ लोग तो सारा जीवन अमर होने के नुस्खे खोजते बिता देते हैं. थोड़े धैर्य से इसे समझिएगा.

मृत्युलोक यानी पृथ्वी पर जो भी आएगा उसे मरना ही है. इस नियम से तो स्वयं परमात्मा भी बंधे हैं. उन्हें भी शरीर त्यागना पड़ा. श्री राम, श्री कृष्ण आदि ईश्वर के जितने अवतार हुए उन्होंने अंततः मनुष्य का शरीर छोड़ा. लेकिन उन्हें संसार एक दिन के लिए भी नहीं भूल पाया. देह छोड़ने के बाद भी आप याद रखे जाएं वास्तव में इसे ही अमर होना कहते हैं.

फिर दूसरा प्रश्न यहां खड़ा होता है क्या किसी को मोक्ष नहीं मिलता?

मोक्ष मिलता है. वह एक दूसरा विषय है. लेकिन यहां हम बात अमर होने की कर रहे हैं. तो पहले यह समझना होगा कि बार-बार जन्म ही क्यों होता है. क्योंकि जन्म होता है तभी तो मरना पड़ता है. यह सब बातें बहुत दार्शनिक हैं. और सच पूछें तो दार्शनिक भी इस पर एक राय नहीं बना सके. हम एक साधारण भक्त स्वभाव वाले व्यक्ति की तरह सोचें और सीखें.

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि, आपका चेहरा आपके मन का भाव बता देता है: प्रेरक कथा

जिसके मन से जीवन के अंत तक लालसा मिटती ही नहीं उसे भगवान बार-बार धरती पर भेजते हैं. जा पूरी कर ले अपनी लालसा. जो आस रह गई हो उसे भी मिटा ले. अब किस भाव में हमने आस की थी उसके आधार पर भगवान तय कर देते हैं कि  हमारा अगला जीवन कैसा होगा. यह लालच इतना हावी रहता है कि भगवान के यहां से भी हम मोक्ष नहीं, कष्टों से भरा जीवन ही मांग लाते हैं.

मरना किसे पड़ता है- जो स्वयं को नहीं भूल सकता उसे मरना ही पडेगा. और जो अपने को भूल जाए उसे मारने का कोई उपाय ही नहीं. वह तो समझ ही लेता है कि इस शरीर की एक एक्सपायरी डेट है. आज नहीं तो कल आएगी ही. जिस दिन उसने ऐसा समझ लिया और फिर ईश्वर के बताए रास्ते पर चल लिया- वह अमृत को उपलब्ध हो जाता है.

अमृत यानी अमरत्व का रास्ता.अपना अस्तित्व, अपना सुख, अपनी सुविधा, अपने लोग. सब मेरा,सब अपना इसी सोच में फंसे जीवन निकल जाता है. भागवत सुनते हैं. उसमें अनेक कथाएं हैं जो कहती हैं कि जो अपना-अपना की रट छोड़ता है उसे ही नारायण के लोक में स्थान मिलता है.

इसलिए कहा जाता है- मानव जीवन अनमोल है. विधाता पर्याप्त समय देते हैं संसार में अच्छे कार्य के यश अर्जित करने के. अमर होने का एक ही मंत्र हो सकता है- सत्कर्म.  कर्मों से अर्जित यश व्यक्ति को अमर बना सकते हैं. अन्य कोई मार्ग नहीं. शेष सब मोहमाया है.

आपको यह पोस्ट कैसी लगी. अपने विचार लिखिएगा.  मैं प्रयास करूंगा कि और भी ऐसे पोस्ट लाऊं. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे बहुत सारे पोस्ट मिल जाएंगे. वहां आप मेरे पोस्ट ज्यादा सरलता से पढ़ सकते हैं. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. नीचे में लिक दे रहा हूं प्रभु शरणम् का.

संकलनः
राजन प्रकाश

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