सप्तश्लोकी दुर्गा-7 श्लोकों में पूरी दुर्गासप्तशती पाठ का फल
सप्तश्लोकी दुर्गा-सात श्लोकों में पूरी दुर्गासप्तशती पाठ का फल । Saptashloki Durga Stotra
नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखना और श्रीदुर्गासप्तशती के संपूर्ण 13 अध्यायों के पाठ का बड़ा माहात्म्य बताया गया है। शास्त्रों में कवच, अर्गला और कीलक के पाठ के उपरांत श्रीदुर्गासप्तशती के सस्वर पाठ से समस्त अमंगलों का नाश होता है। परंतु सप्तशती में सात सौ श्लोक हैं जो तेरह अध्यायों में आते हैं। इसमें समय काफी लगता है। निराश होने की जरूरत नहीं है। इसका विकल्प हैः सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र
यदि आपके पास नवरात्रि या अन्य दिनों में दुर्गा सप्तशती पाठ के सभी अध्यायों को पढ़ने का समय नहीं है, तो सप्तश्लोकी दुर्गा के केवल सात श्लोकों से आपको दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ का फल प्राप्त हो सकता है। आइए जानते हैं इस स्तोत्र के बारे में विस्तार से।

श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र क्या है?
ऋषियों ने संपूर्ण सप्तशती में से सिर्फ सात श्लोक निकालकर सप्त श्लोकी दुर्गा स्तोत्र की रचना की। इन सात श्लोकों में श्रीदुर्गासप्तशती के 700 श्लोकों के फल के माहात्म्य को संकलित किया गया है। इसके पाठ को सप्तशती के संपूर्ण पाठ के समान माना जाता है। इसका पाठ करने की छोटी सी विधि है। उस विधि का पालन करते हुए यदि श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ किया जाए तो पाठ पूर्ण माना जाता है।
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण और शॉर्टकट दोनों
सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र पाठ की सरल विधि
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सप्तश्लोकी का आरंभ करने से पूर्व श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ का पंचोपचार विधि से पूजन करना चाहिए।
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पंचोपचार अर्थात जल, धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, कुमकुम, सुगंध, नैवेद्य आदि उपलब्ध वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए। उनके लिए मंत्र हैं जो आपको प्रभु शरणम् ऐप में मिल जाएंगे। सप्तश्लोकी दुर्गा भी वहां उपलब्ध है। यदि आप सभी मंत्रों के उच्चारण आदि में समर्थ नहीं हैं तो कम से कम नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए ग्रंथ को धूप-दीप दिखाएं।
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फिर जल छिड़कें, पुष्प अर्पित करें, अक्षत आदि जो भी उपलब्ध सामग्रियां हैं समर्पित करें।
मंत्र:
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम्॥
इसके बाद ग्रंथ को पूरे श्रद्धा और आदरभाव के साथ प्रणाम करें और उनसे हाथ जोड़कर पाठ की अनुमति लें। अब आप सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ आरंभ कर सकते हैं।
।।अथ श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम्।।
शिव उवाच :
देवि त्वं भक्त सुलभे सर्वकार्य विधायिनी ।
कलौ हि कार्य सिद्धयर्थम् उपायं ब्रूहि यत्नतः ॥
देव्युवाच :
श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्ट साधनम् ।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बा स्तुतिः प्रकाश्यते ॥
विनियोग:
(हाथ में जल लें और फिर नीचे दिया गया विनियोग मंत्र पढ़ें)
ॐ अस्य श्रीदुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र मन्त्रस्य
नारायण ॠषिः,
अनुष्टुप छन्दः,
श्रीमहाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वत्यो देवताः,
श्री दुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकी दुर्गापाठे विनियोगः ।
(हाथ का जल नीचे गिरा दें और आचमनी से दो-चार बूंद जल लेकर हाथ धो लें। इसके बाद नीचे दिए गए श्लोकों का पाठ करें)
पहला श्लोकः
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ।।1।।
दूसरा श्लोकः
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता ।।2।।
तीसरा श्लोकः
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते ॥3॥
चौथा श्लोकः
शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ॥4॥
पाँचवां श्लोकः
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते ॥5॥
छठा श्लोकः
रोगानशेषानपंहसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥
सातवां श्लोकः
सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि ।
एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम् ॥7॥
॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्ण ॥
श्री सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का हिंदी रूपांतरण (Saptshloki Durga Stotram in Hindi)
सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का महत्व शिवजी ने दुर्गा स्वरूपा जगदंबा से पूछा। श्री दुर्गा जी ने जो बताया उसका हिंदी रूपांतरण इस प्रकार कहा जा सकता है।

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र हिंदी मेंः
भगवान शिव ने देवी से कहा-
हे देवी! आप ही सुलभ सहाय हो. समस्त सिद्धियों प्रदान कर मनोकामना पूरी करने वाली हो. कलियुग में भी भक्तों के कार्यों को, सिद्ध करने वाला कोई उपाय कहिए.
देवी बोलीं-
हे देवों के देव. कलियुग में सभी मनोकामनाएं सिद्ध होने वाला उपाय आपसे कहती हूं. आपसे अत्यधिक स्नेह के कारण मैं सर्व कामना सिद्ध करने वाली “अम्बा-स्तुति” बताती हूं.
विनियोगः
इस सप्तश्लोकीदुर्गा स्तोत्र के रचयिता श्रीनारायण ऋषि हैं. इसमें अनुष्टुप छंद हैं. श्रीमहाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवता हैं. श्री दुर्गा माता की प्रसन्नता के लिए सप्तश्लोकी दुर्गा नामक स्तोत्र के पाठ का विनियोग करता/करती हूं.
पहला श्लोकः
यह महामाया देवी भगवती ज्ञानियों के भी मन को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं।
दूसरा श्लोकः
हे दुर्गे! स्मरण करने पर आप सब जीवों का भय हर लेती हैं। स्वस्थ लोगों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें अच्छी बुद्धि देती हैं। दरिद्रता, दुःख और भय हरने वाली आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका मन सबका उपकार करने के लिए हमेशा दयालु रहता हो।
तीसरा श्लोकः
सब प्रकार का मंगल करने वाली मंगलमयी, कल्याण करने वाली, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण लेने योग्य, तीन नेत्रों वाली, गौरी और नारायणी देवी, आपको नमस्कार है।
चौथा श्लोकः
शरण में आए हुए दीनों और दुःखों की रक्षा में लगे रहने वाली, सबकी पीड़ा दूर करने वाली हे देवि नारायणी, आपको नमस्कार है।
पांचवां श्लोकः
सब रूप धारण करने वाली, सबकी स्वामिनी, सब शक्तियों से युक्त, हे माँ दुर्गा! सब प्रकार के भयों से हमारी रक्षा कीजिए, आपको नमस्कार है।
छठा श्लोकः
आप प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हैं और नाराज होने पर चाहने वाली सभी कामनाएं छीन लेती हैं। जो लोग आपकी शरण में जाते हैं, उन पर कोई विपत्ति नहीं आती।
सातवां श्लोकः
तीनों लोकों की स्वामिनी! आप हमारे समस्त संकटों और बाधाओं को शांत करें तथा हमारे शत्रुओं का नाश करें।
।। हिंदी पाठ संपूर्ण।।
ध्यान देंः
भक्तजनों को प्रयास करना चाहिए कि वे संस्कृत वाले श्लोकों का ही उच्चारण करें.
उनका विच्छेद करके बहुत सरल कर दिया गया है. साथ ही साथ श्रीदुर्गासप्तशती पुस्तक की पूजा के बाद ही उस पुस्तक से सप्तश्लोकी दुर्गा पाठ आरंभ करें.
इंटरनेट पर दिए गए इस पोस्ट का प्रयोग अभ्यास के लिए ही करें. पूजा तो पुस्तक से ही करनी चाहिए. सारी जानकारियां ज्यादा सरलता से देखने के लिए एप्प डाउनलोड कर लें.
अपराध की क्षमा प्रार्थना
श्री सप्त-श्लोकी दुर्गा या मां दुर्गा की किसी भी आराधना-उपासना के बाद माता का क्षमा प्रार्थना स्तोत्रम् अवश्य पढ़ें। उसके बाद माता से दंडवत होकर क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
क्षमा प्रार्थना स्तोत्र प्रभु शरणम् ऐप्पस में भी है। यहां भी दिया जा रहा है। हम इसका हिंदी भावार्थ भी दे रहे हैं।
अथ अपराधक्षमापणस्तोत्रम्
ॐ अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि।।१।।
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि।।२।।
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।।३।।
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।
यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः ।। ४।।
सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके ।
इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु ।। ५।।
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रोन्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि ।। ६।।
कामेश्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वरि ।। ७।।
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसात्सुरेश्वरि।।८।।
।। इति अपराधक्षमापणस्तोत्रं समाप्तम्।।
अपराधक्षमापणस्तोत्रं का हिंदी भावार्थः
- श्लोक 1-3: हे परमेश्वरी! दिन-रात होने वाले हजारों अपराधों के लिए, मुझे अपना दास मानकर क्षमा करें। न मैं आह्वान की विधि जानता हूँ, न विसर्जन की और न ही पूजा विधि से परिचित हूँ। इसलिए मेरी इस मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन पूजा को भी आप पूर्ण करें।
- श्लोक 4-6: हजारों अपराधों के बाद भी मां के शरण में आकर ‘जगदम्बा’ शब्द मात्र का उच्चारण करने पर ऐसी गति मिलती है जो देवताओं को भी दुर्लभ है। मैं अपराधी हूँ और आपकी शरण में हूँ। इसलिए हे माँ! अज्ञानता व भ्रमवश हुई मेरी सभी गलतियों को क्षमा करके, आप मुझ पर प्रसन्न हों। अपनी कृपा बरसाएं।
सप्तश्लोकी पाठ के क्या लाभ हैं?
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केवल 10 मिनट में संपूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ का फल प्राप्त होता है।
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माता भगवती की कृपा से जीवन के सभी कष्ट, भय और दरिद्रता दूर होती है।
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घर में सुख-शांति, आरोग्य, यश और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः
सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!
दुर्गा सप्तशती संपूर्ण प्रभु शरणम् ऐप्प में उपलब्ध है. वेबसाइट पर भी पढ़ सकते हैं. नवरात्रि पूजन के लिए श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ का ही प्रयोग करें. यहां पढ़ें सिर्फ जानकारी के लिए.
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