घर में शिवलिंग है या रखना चाहते हैंः10 जरूरी सावधानियां
घर में शिवलिंग स्थापित है या शिवलिंग लाने की सोच रहे हैं? 10 जरूरी बातें जिनका रखें ध्यान
महादेव की कृपा पाने के लिए भक्त मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं। कई भक्त घर में शिवलिंग स्थापित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में शिवलिंग की स्थापना के कुछ नियम हैं जिनका पालन जरूरी है? आज के इस लेख में हम जानेंगे घर में शिवलिंग स्थापित करते समय किन 10 महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
यदि आप नीचे बताई गई 10 महत्त्वपूर्ण बातों का ध्यान रख सकते हैं तभी घर में शिवलिंग स्थापना की सोचें, अन्यथा शिव-पार्वती के चित्र की पूजा कर लें। जिनके घर में शिवलिंग स्थापित हैं, या जो लोग घर में शिवलिंग रखना चाहते हैं- उन सबको यह पोस्ट जरूर पढ़नी चाहिए।
घर में शिवलिंग स्थापना और पूजा की Step-by-step-guide है ये पोस्ट

इस पोस्ट में आप जानेंगे:
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घर में शिवलिंग रखने के नियम एवं सावधानियाँ
- घर में शिवलिंग की नित्य पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप सरल विधि
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घर में कैसा शिवलिंग रखें-काला या सफेद?
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स्त्रियां शिवलिंग को छू सकती हैं या नहीं (महत्वपूर्ण नियम)
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शिवलिंग का टूटना शुभ है या अशुभ?
- शिव जी को क्या अर्पित करें क्या नहीं?
- शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खाना चाहिए या नहीं?
1. घर में शिवलिंग रखना चाहिए या नहीं?
घर में शिवलिंग रखा जा सकता है या नहीं इसको लेकर अलग-अलग तरह के मत हैं। शिव पुराण में इस पर कुछ खास नहीं कहा गया है। पहले जीवन में इतनी भागदौड़ नहीं थी। समय का इतना अभाव नहीं था जैसा आज है। शिव मंदिर भी हर जगह थे इसलिए घर में शिवलिंग स्थापना की आवश्यकता नहीं पड़ती थी।
हो सकता है इसलिए शास्त्रों में घर में शिवलिंग रखने के विषय पर कुछ विशेष न कहा गया है। लेकिन शास्त्र एक बात अवश्य कहते हैं। ऐसे किसी भी कार्य से मुख न मोड़ें जिससे ईश्वर के प्रति श्रद्धा भक्ति बढ़ती हो। इसी नियम को आधार बनाकर हम यह मानकर चलेंगे कि पूजा घर में शिवलिंग रखने में कोई दोष नहीं है।
लेकिन घर में शिवलिंग रखते हैं तो कुछ बातों का ध्यान अवश्य देना चाहिए। शिवलिंग रखने का अर्थ है कि आप उसमें शिवजी के अंश को जाग्रत कर रहे हैं। यानी घर में रखे गए शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए।
शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के कुछ विधि विधान हैं। यह कार्य किसी कर्मकांड या धर्मशास्त्र के जानकार के द्वारा ही कराना चाहिए।
फिर भी शिव पुराण और अन्य ग्रंथों के आधार पर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा के नियम जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं। पोस्ट का लिंक इस लाइन के नीचे है।
शिवलिंग पूजा विधि: क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं? शिव प्रसाद खाना चाहिए?
2. घर में शिवलिंग रखने के क्या नियम हैं?
घर में शिवलिंग रखते हैं तो कुछ छोटी-छोटी बातें हैं जिनका ध्यान अवश्य रखना चाहिए। घर में शिवलिंग बस एक ही रखना चाहिए। एक से अधिक शिवलिंग कभी न रखें।
प्राण प्रतिष्ठाः घर में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करानी चाहिए।
आकारः घर के मंदिर में रखे जाने वाले शिवलिंग का आकार अँगूठे के बराबर (लगभग 2 से 3 ईंच) ही रखना चाहिए।
पात्रः शिवलिंग को कभी सीधे भूमि या फर्श पर न रखें। यदि आसन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पा रही तो भी कम से कम एक प्लेट जरूर रखें। ऐसा प्रबंध हो कि अभिषेक का जल सीधे फर्श पर न गिरे बल्कि किसी पात्र में इकट्ठा हो जाए। इस जल को वहां न छोड़े। उसके निकालकर पौधों में या फिर किसी स्वच्छ स्थान पर प्रवाहित कर दें।
दिशाः घर में शिवलिंग के जलाधारी का मुख उत्तर दिशा में रखना चाहिए। यह कैलाश पर्वत की दिशा कही जाती है। उत्तर के अलावा उत्तर-पूर्व दिशा जो ईशान कोण कहलाती है वह भी अच्छा विकल्प है।
जलाधारीः जलाधारी यानी जल निकलने का मार्ग कभी दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए
नियमित पूजाः घर में शिवलिंग की स्थापना कर रहे हैं तो ध्यान रहे इसकी पूजा नियमित होनी चाहिए। केवल सूतक की स्थिति में ही पूजा नहीं हो सकती। इसलिए ऐसे घर जहां पूजा के लिए प्रतिदिन कोई व्यक्ति उपस्थित न रहता हो, वहां शिवलिंग नहीं स्थापित करें। घर में शिवलिंग की स्थापना की मनाही के पीछे यही सबसे बड़ा कारण है।
3. घर में शिवलिंग की नित्य पूजा कैसे करें- स्टेप-बाय-स्टेप सरल विधि

घर में शिवलिंग स्थापित है तो इसकी नियमित पूजा करनी चाहिए। यह विधि इस तरह रखी गई है कि कोई भी साधक बिना पंडित बुलाए रोज़ घर में शिव पूजा कर सके:
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ध्यान और नमस्कार
आसन पर बैठकर हाथ जोड़ें, आँखें बंद करें और मन में भगवान शिव का ध्यान करें – जटाधारी, नीलकंठ, त्रिपुरारी, करुणामय भोले शंकर हम आपको प्रणाम करते हैं। हे देवाधिदेव! ऋषि, मुनि, देव, गंधर्व आदि भी आपके पूजन अर्पण में समर्थ नहीं हैं। फिर मैं तो एक साधारण भक्त हूँ। मैं अपने परिवार की सुख-शांति के लिए आपकी पूजा कर रहा हूँ। जो भी भूल-चूक, अपराध हो जाए उसे क्षमा करें और मुझे पूजन का अनुमति प्रदान करें। - सही दिशा:
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। यह नियम मंदिर के लिए आवश्यक है लेकिन घरों में इतना संभव नहीं हो पाता। प्रयास करें कि आपका मुख उत्तर-पूर्व या पूर्व में हो। दक्षिण और पश्चिम दिशा से बचने की कोशिश करें। फिर कहेंगे कि भगवान को विधि-विधान से अधिक भाव प्रिय है। भाव श्रद्धा का हो तो विधि-विधान में कमी-बेसी बहुत मायने नहीं रखती। भूल के लिए क्षमा प्रार्थना कर लें। -
जल से अभिषेक
घर में शिवलिंग पर स्वच्छ जल (यदि संभव हो तो गंगाजल मिला लें),सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल की धीमी धारा प्रवाहित करें। इस समय आप “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते रहें। जल देते समय मन में यह भाव रखें कि आपके दोष, चिंताएँ और भूल-चूक इस जल के साथ बह रही हैं। - पात्र:
तांबे या पीतल के लोटे का प्रयोग करें। दही या पंचामृत चढा रहे हैं तो तांबे का प्रयोग न करें। -
पंचामृत अभिषेक
प्रतिदिन की पूजा में इसकी आवश्यकता नहीं है। किसी विशेष अवसर पर आप पंचामृत अभिषेक जरूर करें। दूध, दही, शहद, घी और शक्कर को मिलाकर पंचामृत बनाएं और बहुत थोड़ी‑थोड़ी मात्रा में शिवलिंग पर अर्पित करें। प्रत्येक द्रव्य के बाद थोड़ा जल डालकर शिवलिंग को साफ भी करते रहें, ताकि सबकुछ सुगंधित और स्वच्छ रहे। यह चरण सोमवार, सावन, प्रदोष या किसी विशेष तिथि व शुभ अवसर पर किया जा सकता है। रोज़ाना करने की बाध्यता नहीं है। -
चंदन, बेलपत्र और पुष्प अर्पण
अब शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएँ। त्रिपुंड बना सकें तो बना लें, नहीं तो कई बात नहीं। उसके बाद एक‑एक करके बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला, कटा-छटा न हो), सफेद पुष्प, धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र, अक्षत, काले तिल, चंदन, मिठाई आदि अर्पित किया जा सकता है। इनमें से जो कुछ भी संभव हो कर सकते हैं। घर में स्थापित शिवलिंग पर कुछ स्थानों पर हल्दी और सिंदूर चढ़ाने से मना किया गया है। -
धूप‑दीप और आरती
धूप, घी या तिल के तेल का दीपक, कपूर जो भी उपलब्ध हो उसे जलाकर आरती अवश्य करनी चाहिए। दीपक जलाकर शिवलिंग के सामने घुमाएँ, धूप और कपूर से वातावरण को सुगंधित करें। -
मंत्रजाप
आरती के बाद शांत भाव से बैठकर कम से कम 11, 21 या 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। संख्या से ज़्यादा अहम यह है कि हर उच्चारण के साथ आप भीतर से थोड़ा‑थोड़ा हल्का और जागरूक महसूस करें। - आरती
पूजन के अंत में शिवजी की आरती अवश्य कर लेनी चाहिए। माना जाता है कि किसी भी देवी-देवता के पूजन के विधि-विधान में जो कमी रह जाती है उसकी पूर्ति आरती से होती है। -
प्रार्थना और प्रसाद
अंत में भगवान शिव से प्रार्थना करें – केवल इच्छाएँ माँगने के बजाय यह भी माँगें कि आपको सही निर्णय लेने की शक्ति, गलत रास्तों से दूर रहने की प्रेरणा और दूसरों के लिए उपयोगी बनने का अवसर मिले। फिर भोग‑रूप में अर्पित फल या मिठाई परिवार के बीच प्रसाद रूप से बाँटें।
4. घर में शिवलिंग पूजा के दौरान क्या न करें?

कई बार लोग उत्साह में घर में शिवलिंग लेकर आ जाते हैं। कुछ दिन तो पूजा-पाठ भी विधिवत करते हैं। लेकिन कई बार उत्साह ठंढ़ा पड़ने लगता है। यह गलत है। इसका नुकसान हो सकता है। इससे अच्छा है कि शिव-पार्वती जी की छवि की पूजा कर लें।
लेकिन यदि घर में शिवलिंग रखना ही है तो कुछ सामान्य सावधानियाँ हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए:
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शिवलिंग कोई शो‑पीस नहीं है। इसलिए यदि आप इस बात के लिए आश्वस्त हैं कि घर में इनकी नियमित रूप से सेवा करने में सक्षम हैं तभी लेकर आएं। यदि जरा सी भी शंका है तो इसे मंदिर के सजावट की चीज समझने से बचें।
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शिवजी की पूजा में विधि-विधान का कितना पालन होता है उससे अधिक महत्त्वपूर्ण है कि आ जितनी देर भी पूजा कर रहे हैं उस दौरान आप मन से वहां हैं कि नहीं। फोन आदि जो भी चीजें पूजा के दौरान आपका ध्यान से भटकाती हैं उनसे बचें। थोड़ी देर के लिए यह समय केवल शिव और आपकी आत्मा के बीच संवाद का रखा जाए। ऐसा किसी भी पूजा में होना चाहिए।
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अत्यधिक तामसिक भोजन, नशा या अपवित्र आदतों के तुरंत बाद शिवलिंग पूजा से बचें। स्वच्छ होकर ही पूजा‑स्थल पर जाएँ।
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जो जल या पंचामृत शिवलिंग पर चढ़ाया गया हो, उसे फर्श पर फैलने न दें; सम्मान के साथ किसी पौधे या स्वच्छ भूमि पर प्रवाहित करें।
- सबसे महत्त्वपूर्ण बात- जिस घर में शिवलिंग स्थापित हों वहां कलह का वातावरण नहीं होना चाहिए। शिवलिंग को स्थापित करने वाले परिवार को मुखिया को अपने अंदर शिव जी की उपस्थिति अनुभव करनी होगी। एक शिव ही हैं जो विष भी सहर्ष पीते हैं। एक शिवजी ही हैं जो संपूर्ण परिवार सहित विराजमान हैं। इसलिए जिसमें सहनशक्ति भरपूर हो, अपमान आदि का विष पी सकने में समर्थ हो, परिवार को एक रखने में सक्षम हो वही शिव का उपासक हो सकता है। शेष सभी की पूजा स्वांग भर है।
5. शिवलिंग पर कौन सा चंदन लगाएं?
शिवलिंग पर हमेशा शुद्ध, ठंडक देने वाला सफेद या हल्का पीला चंदन ही चढ़ाना श्रेयस्कर माना जाता है। सफेद चंदन लगाना चाहिए। यह शीतलता का प्रतीक है और महादेव को अत्यंत प्रिय है। यह मन की एकाग्रता बढ़ाता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए अनामिका (रिंग फिंगर) से त्रिपुंड या हल्का तिलक जैसा चंदन लगाएं।
प्राकृतिक चंदन की लकड़ी घिसकर या अष्टगंध चंदन का प्रयोग करना बेहतर होता है। लाल चंदन आमतौर पर दुर्गा या शक्तिपीठों में उपयोग होता है, इसलिए शिवलिंग पर उससे तिलक करने से बचना चाहिए।
6. शिवलिंग को कौन छू सकता है?
शुद्ध और पवित्र मन से पूजा करने वाला कोई भी भक्त शिवलिंग को स्पर्श कर सकता है। केवल रजस्वला स्त्री को स्पर्श से बचना चाहिए। अन्य सभी भक्त पूर्ण अधिकार के साथ महादेव की सेवा कर सकते हैं।
7. शिवलिंग का टूटना शुभ है या अशुभ?
घर में रखा शिवलिंग यदि अनजाने में खंडित हो जाए, उसमें दरार आ जाए तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए। उसे नदी या किसी जलाशय में विसर्जित कर देना चाहिए। नया शिवलिंग स्थापित करना चाहिए। बहुत से लोग फिल्मों या टीवी के प्रभाव में प्रतिमाओं के खंडित हो जाने पर तरह-तरह की अनहोनी से आशंकित हो जाते हैं। अंजाने में हुई भूल के लिए शिवजी या कोई भी देवी-देवता दंडित नहीं करते। इसलिए इतना आतंकित होने की जरूरत नहीं। भूल की क्षमा प्रार्थना कर लें और निश्चिंत रहें।
8. घर में शिवलिंग काला रखें या सफेद? घर के लिए कौन सा शिवलिंग सबसे अच्छा है?
घर में स्थापना के लिए शिवलिंग चुनते समय उसके आकार, सामग्री और भाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, रंग को नहीं। रंग को लेकर ज्यादा माथापच्ची से बेहतर है कि आकार का विचार करें। शिवलिंग का आकार क्या हो वह हमने ऊपर बताया है। सामान्यतः अंगूठे के बराबर आकार वाला काला पाषाण शिवलिंग गृहस्थ जीवन के लिए सर्वाधिक प्रचलित और सुरक्षित माना जाता है। इसका मुख्य कारण है कि पत्थर मजबूत होता है और नित्य अभिषेक से जल्दी खंडित नहीं होता। सफेद शिवलिंग या स्फटिक शिवलिंग भी अत्यंत शुभ माने जाते हैं। रंग में नहीं भक्तिभाव में ध्यान दें।
9. क्या स्त्रियाँ शिवलिंग पूजा कर सकती हैं?
हाँ, शिव पुराण के अनुसार हर वर्ण की महिलाओं को शिव पूजा का समान अधिकार है। इसमें बाधा डालना शिवद्रोह है। रजस्वला स्त्री शिवलिंग का पूजन या स्पर्श न करे ऐसा शास्त्रों में स्पष्ट रूप से आता है।
कुछ परंपराओं में अविवाहित कन्याओं द्वारा सीधे शिवलिंग स्पर्श पर सावधानी की सलाह पढ़ने को मिलती है। जबकि विवाहित स्त्रियाँ मर्यादा और शुचिता के साथ जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर सकती हैं। अलग‑अलग क्षेत्रों की मान्यताओं के कारण अंतिम निर्णय में अपने परिवार की परंपरा और कुल‑पुरोहित की सलाह मानना बुद्धिमानी है।
यदि किसी स्त्री को शिवलिंग के स्पर्श को लेकर संकोच हो, तो वह न करे। वह चाहे तो शिवलिंग के सामने बैठकर मंत्र जाप, आरती और ध्यान के माध्यम से पूर्ण भक्ति से पूजा कर सकती है। कुल मिलाकर मुख्य बात है शुद्ध भाव और सात्विक जीवन।
10. क्या शिव जी पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण करना चाहिए?
हाँ, शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद परम पवित्र है। इसे नकारना पाप माना गया है। इसको लेकर भ्रम के पीछे मुख्य कारण यह है कि बहुत‑सी लोकमान्यताओं और कथाओं में शिवलिंग पर सीधे रखे गए प्रसाद को शिवगणों का अंश माना जाता है। इसलिए उसे मनुष्यों द्वारा न खाने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा शिवजी पर भांग-धतूरा आदि विषैले पदार्थ भी चढ़ते हैं। यह मनुष्य के लिए सेवनयोग्य नहीं हैं। इसलिए प्रसाद में कहीं यह मिक्स न हो जाए इससे बचने के लिए शिवजी पर चढ़े प्रसाद को खाने से कई लोग मना कर देते हैं।
इसका रास्ता है कि भक्त स्वयं व स्नेहीजनों के लिए अलग थाली या पात्र में भोग‑प्रसाद अर्पित करें जिससे ग्रहण करने योग्य और अग्राह्य आपस में मिल ही न पाएं। शिवलिंग पर चढ़े ग्राह्य प्रसाद को अवश्य ग्रहण करना चाहिए।
(संकलन व संपादन: राजन प्रकाश)
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