राधा कृष्ण की कथाः भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख क्यों धारण करते हैं
राधा कृष्ण की कथाः भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख क्यों धारण करते हैं
राधा कृष्ण की कथा उनकी लीलाओं की कथाएं हैं। कुछ लीलाएँ श्री राधा रानी करती हैं तो कुछ हैं कृष्ण लीला। राधा कृष्ण की लीलाएँ में एक सुंदर कथा आती है मोर की। आज हम वही कथा जानेंगे कि आखिर भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख क्यों धारण करते हैं?
राधा कृष्ण की कथा को आगे बढ़ाते हुए हम भगवान के एक बड़े भक्त मोर की कहानी सुनेंगे। राधा रानी के नाम की कितनी बड़ी महिमा है वह भी इस कथा से समझ आएगी।
गोकुल का भक्त मोर
गोकुल में एक मोर रहता था। वह रोज भगवान श्रीकृष्ण के दरवाजे पर बैठकर एक भजन गाता था—
“मेरा कोई न सहारा बिना तेरे,
गोपाल सांवरिया मेरे,
माँ-बाप सांवरिया मेरे।”
रोज आते-जाते भगवान श्रीकृष्ण के कानों में उसका भजन पड़ता था, लेकिन वे उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं देते थे। मोर श्रीकृष्ण के विशेष स्नेह की आशा में रोज भजन गाता रहा।
एक-एक दिन करते-करते पूरा एक साल बीत गया। मोर बिना चूके भजन गाता रहा। प्रभु उसका भजन सुनते, उसकी ओर एक नजर देखते और प्यारी-सी मुस्कान देकर आगे बढ़ जाते। लेकिन सालभर तक ऐसा ही चलता रहा तो मोर की आस धीरे-धीरे टूटने लगी।
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधिः व्रत, मंत्र, भोग और जन्मोत्सव की सबसे सरल विधि
राधा कृष्ण की कथाः मोर पहुँचा राधा रानी के दरबार में
एक दिन सालभर की भक्ति के बाद भी प्रभु की विशेष कृपा न मिलने पर मोर रोने लगा। वह भगवान को याद करते हुए जोर-जोर से रो रहा था कि तभी वहाँ से एक मैना उड़ती हुई जा रही थी।
मैना ने मोर को रोते हुए देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ। उसे आश्चर्य इस बात पर था कि श्रीकृष्ण के द्वार पर भी कोई रो सकता है—उस द्वार पर, जहाँ सबके कष्ट दूर हो जाते हैं।
मैना मोर के पास आई और बोली, “तुम क्यों रो रहे हो?”
मोर ने कहा, “मैं पिछले एक साल से बाँसुरी वाले छलिये को रिझा रहा हूँ। उनकी प्रशंसा में गीत गा रहा हूँ, लेकिन उन्होंने आज तक मुझे पानी तक नहीं पिलाया।”
यह सुनकर मैना बोली, “मैं बरसाने से आई हूँ। तुम भी मेरे साथ चलो।”
दोनों उड़ते-उड़ते बरसाने पहुँच गए। मैना राधा रानी के दरवाजे पर पहुँची और गाने लगी—
“श्री राधे-राधे-राधे,
बरसाने वाली राधे।”
मैना ने मोर से भी राधा रानी का भजन गाने को कहा। मोर ने प्रयास तो किया, लेकिन उसे श्रीकृष्ण का भजन गाने की ही आदत थी। इसलिए उसने बरसाने में भी अपना पुराना गीत गाना शुरू कर दिया—
“मेरा कोई न सहारा बिना तेरे,
गोपाल सांवरिया मेरे,
माँ-बाप सांवरिया मेरे।”
राधा रानी के कानों में जैसे ही यह गीत पड़ा, वे दौड़कर मोर के पास आईं और उसे प्रेम से गले लगाकर दुलार करने लगीं।
राधा रानी मोर के साथ ऐसा व्यवहार कर रही थीं, जैसे उनका कोई पुराना खोया हुआ परिजन वापस आ गया हो। उन्होंने मोर की खातिरदारी की और प्रेम से पूछा, “तुम कहाँ से आए हो?”
मोर भाव-विभोर हो गया। उसने कहा, “जय हो राधा रानी! आज तक सुना था कि आप करुणा की मूर्ति हैं, लेकिन आज आपने इसे सिद्ध कर दिया।”
राधा रानी ने पूछा, “तुम मुझे करुणामयी क्यों कह रहे हो?”
मोर ने बताया कि कैसे वह एक साल तक श्रीकृष्ण का नाम लेकर भजन करता रहा, लेकिन कन्हैया ने कभी उसका हाल तक नहीं पूछा।
राधा रानी मुस्कराईं। वे मोर के मन की पीड़ा और उसके कारण को समझ गई थीं। उन्होंने मोर से कहा, “तुम गोकुल लौट जाओ। लेकिन इस बार पुराने गीत की जगह यह गाना—‘जय राधे राधे राधे, बरसाने वाली राधे।’”
श्रीकृष्ण की अद्भुत लीला

मोर का मन राधा रानी को छोड़कर जाने का नहीं था, फिर भी वह उनकी आज्ञा मानकर गोकुल लौट आया। इस बार वह श्रीकृष्ण के द्वार पर बैठकर राधा रानी का नाम गाने लगा—
“जय राधे राधे राधे,
बरसाने वाली राधे।”
भगवान श्रीकृष्ण के कानों में जैसे ही राधा नाम का यह भजन पड़ा, वे दौड़ते हुए मोर के पास आए। उन्होंने मोर को गले से लगा लिया और प्रेम से उसका हाल-चाल पूछने लगे।
श्रीकृष्ण ने पूछा, “मोर, तुम कहाँ से आए हो?”
इतना सुनते ही मोर नाराज होकर बोला, “वाह छलिये! एक साल से मैं आपके नाम की धुन में रमा हुआ था, लेकिन आपने कभी पानी तक नहीं पूछा। आज जब मैंने पार्टी बदल ली तो आप दौड़े चले आए।”
भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराने लगे। उन्होंने फिर प्रेम से पूछा, “मोर, तुम कहाँ से आए हो?”
मोर श्रीकृष्ण से मिलने के लिए बहुत तरसा था। वह अपनी सारी शिकायतें दूर कर लेना चाहता था। उसने कहा, “प्रभु, मैं वही मोर हूँ जो पिछले एक साल से आपके द्वार पर यह भजन गाता था—
‘मेरा कोई न सहारा बिना तेरे,
गोपाल सांवरिया मेरे,
माँ-बाप सांवरिया मेरे।’
मैं सर्दी-गर्मी सहकर पूरे एक साल तक आपके दरवाजे पर डटा रहा और आपकी स्तुति करता रहा, लेकिन आपने मुझसे पानी तक नहीं पूछा। इसके बाद मैं बरसाने

चला गया। वहाँ राधा रानी मिलीं। उन्होंने मुझे पूरा प्रेम और दुलार दिया।”
मोर की बात सुनकर भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, “मोर, तुमने राधा का नाम लिया। यह तुम्हारे लिए वरदान साबित होगा। मैं वरदान देता हूँ कि जब तक यह सृष्टि रहेगी, तुम्हारा पंख सदैव मेरे शीश पर विराजमान रहेगा।”
लड्डू गोपाल की सेवा विधि: नियम, दैनिक दिनचर्या, सूतक और पीरियड्स में पूजन के नियम
श्रीकृष्ण मोरपंख क्यों धारण करते हैं?
इस राधा कृष्ण की कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण मोरपंख इसलिए धारण करते हैं क्योंकि यह मोर की सच्ची भक्ति, राधा रानी की कृपा और भगवान के प्रेमपूर्ण वरदान का प्रतीक है।
मोरपंख श्रीकृष्ण के मुकुट की शोभा बढ़ाने वाला आभूषण ही नहीं, बल्कि राधा नाम की महिमा और राधा-कृष्ण के प्रेम का सुंदर प्रतीक भी माना जाता है। इस कृष्ण लीला का संदेश है कि जो भक्त राधा रानी का आश्रय लेता है, वह सहज ही श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकता है।
।। मोर मुकुट वाले की जय! ।।
।। राधे-कृष्ण की जय! ।।
Radha Krishna राधाकृष्ण के प्रेम की अनूठी कथा
कथा से मिलने वाला संदेश
इस राधा कृष्ण की कथा से हमें सीख मिलती है कि भक्ति में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। मोर ने एक वर्ष तक बिना किसी शिकायत के श्रीकृष्ण का भजन किया। राधा रानी की कृपा मिलने के बाद उसकी भक्ति पूर्ण हुई और उसे स्वयं श्रीकृष्ण का वरदान प्राप्त हुआ।
राधा नाम भक्त और भगवान के बीच प्रेम का सेतु है। इसलिए श्रद्धा से राधे-राधे का स्मरण करते रहना चाहिए।
यदि आपको राधा कृष्ण की कथा पसंद आई हो तो इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ अवश्य साझा करें। अधिक से अधिक लोगों को प्रभु शरणम् ऐप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। हरिनाम प्रचार को एक आंदोलन की तरह आगे बढ़ाने में आप सभी की भागीदारी अपेक्षित है।
ये भी पढ़ेंः
भागवत में राधाजी का जिक्र क्यों नहीं आया?
भगवान जगन्नाथ की पौराणिक कथाः पुरी मंदिर के अद्भुत रहस्य
भगवान जगन्नाथ बीमार क्यों पड़े? जगन्नाथधाम के विचित्र पौराणिक रहस्य
संकलनः राजन प्रकाश
धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्द:
सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिन्दू ग्रंथों की महिमा कथाओं और उनके पीछे छिपे ज्ञान-विज्ञान से हर जन को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है। देव डराते नहीं, धर्म डरने की नहीं बल्कि हृदय से धारण करने की वस्तु है। आइए, सनातन संस्कृति के इस पावन प्रवाह से जुड़ें— प्रभु शरणम्!
वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! सब फ्री भी है. एक बार देखें जरूर… प्ले स्टोर में टाइप करें Prabhu Sharnam और डाउनलोड कर लें.
प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.
इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. लिंक-
https://www.facebook.com/share/1CJXhLfxzt/
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइ करें. प्रभु शरणं फेसबुक ग्रुप का लिंक
