पांचवां अध्यायः देवताओं द्वारा देवी की स्तुति, चंड-मुंड के मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना और दूत का निराश लौटना
।।ऊं नमश्चंडिकायैः नमः।। महर्षि मेधा कहते हैं- पूर्वकाल में शुम्भ और निशुम्भ नामक असुरों ने अपने बल के घमंड में आकर शचीपति इंद्र के हाथ से तीनों लोकों…
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