रुद्राक्ष धारण करने के लाभ जानकर चौंक जाएंगे आपः कितने प्रकार के होते हैं रुद्राक्ष
रुद्राक्ष के प्रकार, धारण विधि, मंत्र और लाभ: शिवपुराण के नियम
रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय और पवित्र प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को शिव-स्मरण, आत्मसंयम, ध्यान और सात्त्विक जीवन की प्रेरणा मिलती है।
रुद्राक्ष के प्रकार जानने के साथ-साथ यह समझना भी आवश्यक है कि कौन-सा रुद्राक्ष किस धार्मिक मान्यता से जुड़ा है, उसे कैसे सिद्ध किया जाता है, गले में रुद्राक्ष पहनने के क्या नियम हैं और रुद्राक्ष धारण करने के मंत्र कौन-से हैं।
शिवपुराण और अन्य धार्मिक परंपराओं में रुद्राक्ष की उत्पत्ति, उसके मुख, देवता, मंत्र और धारण-विधि का वर्णन मिलता है। हालांकि अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में कुछ अंतर भी दिखाई देता है।
महत्वपूर्ण: रुद्राक्ष से जुड़े लाभ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसे किसी बीमारी, आर्थिक समस्या या अन्य परेशानी का निश्चित उपचार न समझें।
“रुद्राक्ष” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है—रुद्र और अक्ष।
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रुद्र भगवान शिव का एक नाम है।
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अक्ष का अर्थ आंख, अश्रु या धुरी माना जाता है।
इस प्रकार रुद्राक्ष का अर्थ भगवान रुद्र यानी शिव की आंख या अश्रु से जुड़ा हुआ माना जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की करुणा से निकले अश्रुओं से रुद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इसी कारण शिवभक्त रुद्राक्ष को केवल आभूषण नहीं, बल्कि शिव-स्मरण और साधना का प्रतीक मानते हैं।
रुद्राक्ष की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
रुद्राक्ष की उत्पत्ति को लेकर एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा मिलती है।
कहा जाता है कि एक समय देवतागण असुरों के अत्याचार से बहुत परेशान थे। वे अपनी रक्षा के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें अपनी पीड़ा बताई।
देवताओं की स्थिति सुनकर भगवान शिव का हृदय करुणा से भर गया। वे गहन ध्यान में चले गए। ध्यान समाप्त होने पर जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं, तो उनकी आंखों से करुणा के अश्रु धरती पर गिर पड़े।
कथा के अनुसार, उन अश्रु-बूंदों से रुद्राक्ष वृक्ष उत्पन्न हुआ। ब्रह्माजी ने उन बीजों को संभालकर रखा। भगवान शिव ने कहा कि इस बीज से उत्पन्न फल को उनके समान पवित्र समझा जाए।
भगवान रुद्र की आंखों से उत्पन्न होने के कारण इसका नाम रुद्राक्ष पड़ा।
रुद्राक्ष वृक्ष का फल सामान्य रूप से खाने के लिए नहीं होता। फल के भीतर मौजूद कठोर बीज को साफ और सुखाकर रुद्राक्ष के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अब हम जानेंगे रुद्राक्ष के प्रकार कितने हैं, उनके बारे में।
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रुद्राक्ष के कितने प्रकार हैं?
रुद्राक्ष की पहचान उसके ऊपर बनी प्राकृतिक धारियों या मुखों से की जाती है। सामान्य रूप से एकमुखी से चौदहमुखी रुद्राक्ष की चर्चा सबसे अधिक होती है।
कुछ धार्मिक परंपराओं में रुद्राक्ष के 27 प्रकार तक बताए गए हैं। इस लेख में एकमुखी से चौदहमुखी रुद्राक्ष का पारंपरिक विवरण दिया जा रहा है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष के प्रकार के बारे में।

एकमुखी रुद्राक्ष
एकमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके दर्शन और पूजन से शिवभक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक चेतना का भाव बढ़ता है।
यह अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। बाजार में इसके नाम पर नकली या दूसरे बीज बेचे जाने की संभावना रहती है। इसलिए इसे खरीदते समय प्रमाणित स्रोत का चयन करना चाहिए।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः
दोमुखी रुद्राक्ष
दोमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप से जोड़ा जाता है। इसे दांपत्य जीवन में संतुलन, मानसिक शांति और संबंधों में सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह मन के द्वंद्व को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने की भावना से धारण किया जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ नमः
तीनमुखी रुद्राक्ष
तीनमुखी रुद्राक्ष को अग्नि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे पुराने कर्मों, नकारात्मक भावनाओं और मानसिक बोझ से मुक्ति की भावना से जोड़ा जाता है।
इसे नई शुरुआत, आत्मविश्वास और भीतर की शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ क्लीं नमः
चारमुखी रुद्राक्ष
चारमुखी रुद्राक्ष को ब्रह्माजी का प्रतीक माना जाता है। इसे ज्ञान, वाणी, स्मरण शक्ति और अध्ययन से संबंधित माना जाता है।
विद्यार्थी और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग इसे श्रद्धापूर्वक धारण करते हैं।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः
पंचमुखी रुद्राक्ष
पंचमुखी रुद्राक्ष को कालाग्नि रुद्र का स्वरूप माना जाता है। यह सबसे अधिक प्रचलित और सामान्य रूप से उपलब्ध रुद्राक्ष है।
धार्मिक परंपरा में इसे ध्यान, जप, मानसिक शांति और नियमित शिवभक्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है। शुरुआती लोगों के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष को सरल विकल्प माना जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः
छह मुखी रुद्राक्ष
छहमुखी रुद्राक्ष को भगवान कार्तिकेय का प्रतीक माना जाता है। इसे ज्ञान, साहस, अनुशासन और आत्मसंयम से जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर जैसे आंतरिक दोषों पर नियंत्रण की प्रेरणा देता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं हुं नमः
सातमुखी रुद्राक्ष
सातमुखी रुद्राक्ष को धन, स्थिरता और समृद्धि से संबंधित माना जाता है। व्यापारी और नौकरीपेशा लोग इसे आर्थिक स्थिरता की धार्मिक भावना से धारण करते हैं।
इसे धारण करते समय मेहनत, ईमानदारी और अनुशासन को भी महत्व देना चाहिए।
धारण मंत्र:
ॐ हुं नमः
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आठमुखी रुद्राक्ष
अष्टमुखी रुद्राक्ष को भगवान गणेश और कालभैरव से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता में इसे विघ्नों को दूर करने, साहस बढ़ाने और यात्रा में सुरक्षा की भावना से धारण किया जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ हुं नमः
नौमुखी रुद्राक्ष
नौमुखी रुद्राक्ष को शक्ति के नौ रूपों से जोड़ा जाता है। इसे साहस, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
कुछ परंपराओं में इसे दाहिनी भुजा में धारण करने का उल्लेख मिलता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं हुं नमः
दसमुखी रुद्राक्ष
दसमुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु या नारायण का प्रतीक माना जाता है। इसे नकारात्मक प्रभावों और भय से रक्षा की धार्मिक भावना से धारण किया जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः
ग्यारहमुखी रुद्राक्ष
एकादशमुखी रुद्राक्ष को भगवान रुद्र और हनुमानजी से संबंधित माना जाता है। इसे साहस, आत्मबल और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक माना जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं हुं नमः
बारहमुखी रुद्राक्ष
द्वादशमुखी रुद्राक्ष को भगवान सूर्य का प्रतीक माना जाता है। इसे तेज, आत्मविश्वास, ऊर्जा और नेतृत्व से जोड़ा जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः
तेरहमुखी रुद्राक्ष
तेरहमुखी रुद्राक्ष को विश्वदेवों से संबंधित माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे सौभाग्य, आकर्षण, प्रसन्नता और भौतिक संतुलन से जोड़ा जाता है।
धारण मंत्र:
ॐ ह्रीं नमः
चौदहमुखी रुद्राक्ष
चौदहमुखी रुद्राक्ष को परमशिव का स्वरूप माना जाता है। इसे दुर्लभ और प्रभावशाली रुद्राक्षों में गिना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह विवेक, निर्णय क्षमता और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है।
धारण मंत्र:
ॐ नमः

रुद्राक्ष को सिद्ध कैसे करें?
रुद्राक्ष को सिद्ध करने का अर्थ है—उसे श्रद्धापूर्वक शुद्ध करके भगवान शिव को अर्पित करना और मंत्र-जप के साथ धारण करना। कई परंपराओं में इसे रुद्राक्ष की पूजा या प्राण-प्रतिष्ठा भी कहा जाता है।
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रुद्राक्ष सिद्ध करने की सरल विधि
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सोमवार, शिवरात्रि, सावन के सोमवार या किसी शुभ दिन का चयन करें।
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स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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पूजा स्थान को साफ करें।
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रुद्राक्ष को साफ जल या गंगाजल से शुद्ध करें।
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शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
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रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराएं।
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रुद्राक्ष पर चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
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धूप और दीप दिखाएं।
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“ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जप करें।
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अपने रुद्राक्ष के मुख के अनुसार धारण-मंत्र पढ़ें।
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रुद्राक्ष को लाल धागे, चांदी या अपनी परंपरा के अनुसार धारण करें।
यदि रुद्राक्ष दुर्लभ, महंगा या किसी विशेष साधना के लिए है, तो उसकी प्राण-प्रतिष्ठा किसी योग्य आचार्य से करवाना उचित है।
क्या रुद्राक्ष सिद्ध करना जरूरी है?
सामान्य पंचमुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लिए जटिल अनुष्ठान आवश्यक नहीं माना जाता। इसे श्रद्धा से शुद्ध करके “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हुए धारण किया जा सकता है।
विशेष मुखी रुद्राक्ष या साधना संबंधी प्रयोग में गुरु या आचार्य का मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
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गले में रुद्राक्ष पहनने का महत्व
गले में रुद्राक्ष पहनने की परंपरा शिवभक्तों में बहुत प्रचलित है। गले में धारण की गई रुद्राक्ष माला व्यक्ति को लगातार शिव-स्मरण और मंत्र-जप की याद दिलाती है।
गले में रुद्राक्ष पहनते समय इन बातों का ध्यान रखें:
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माला साफ और मजबूत धागे में पिरोई हो।
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रुद्राक्ष त्वचा पर बहुत कसकर न लगा हो।
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माला को दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।
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माला टूटने या दाने खराब होने पर उसे सम्मानपूर्वक अलग रखें।
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सोते समय माला निकालना सुविधाजनक और सुरक्षित माना जाता है।
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माला पहनते समय “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
कुछ परंपराओं में गले की माला में 36, 54 या 108 दानों का उल्लेख मिलता है। दैनिक उपयोग के लिए 108 दानों वाली जपमाला और छोटी धारण-माला अलग रखना सुविधाजनक रहता है।
रुद्राक्ष माला धारण करने के नियम
रुद्राक्ष धारण करने से पहले इन सामान्य नियमों का ध्यान रखें:
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रुद्राक्ष को साफ और सम्मानपूर्वक रखें।
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धारण करने वाला व्यक्ति सात्त्विक और संयमित जीवन का प्रयास करे।
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सुबह-शाम भगवान शिव का ध्यान करें।
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प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
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किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पहना हुआ रुद्राक्ष बिना शुद्धि और उचित संस्कार के न पहनें।
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जप के लिए अलग माला और धारण के लिए अलग माला रखें।
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रुद्राक्ष को अत्यधिक नमी और रसायनों से बचाएं।
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सोते समय माला उतारकर स्वच्छ स्थान पर रख सकते हैं।
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मासिक धर्म के समय रुद्राक्ष धारण करने या उतारने के संबंध में अलग-अलग परंपराएं हैं। अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार निर्णय लें।
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मांस और मदिरा से बचने का नियम कुछ धार्मिक परंपराओं में बताया गया है। इसे आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में समझें, सार्वभौमिक नियम के रूप में नहीं।
रुद्राक्ष कहां धारण करें?

रुद्राक्ष को सामान्य रूप से इन स्थानों पर धारण किया जाता है:
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गले में।
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कलाई में।
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हृदय के समीप माला के रूप में।
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बाजू पर।
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जपमाला के रूप में अलग से।
कुछ शास्त्रीय परंपराओं में निश्चित संख्या में रुद्राक्ष धारण करने का उल्लेख मिलता है। दैनिक जीवन में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है—माला की गुणवत्ता, स्वच्छता, श्रद्धा और धारण करने वाले व्यक्ति का आचरण।
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कौन सी राशि पर कौन सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए?
राशि के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे निश्चित परिणाम देने वाला नियम नहीं माना जाना चाहिए।
जन्मकुंडली, ग्रहस्थिति, दशा और व्यक्ति की आवश्यकता के अनुसार रुद्राक्ष का चयन अलग हो सकता है। फिर भी सामान्य रूप से प्रचलित सुझाव इस प्रकार हैं:
राशि के अनुसार रुद्राक्ष चुनते समय सावधानी
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केवल राशि देखकर महंगा या दुर्लभ रुद्राक्ष न खरीदें।
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जन्मकुंडली के आधार पर चयन करना हो तो योग्य ज्योतिषी से सलाह लें।
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शुरुआती लोगों के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष सामान्य विकल्प माना जाता है।
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असली रुद्राक्ष और प्रमाणपत्र पर ध्यान दें।
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रुद्राक्ष को ग्रहों का निश्चित उपचार न समझें।
रुद्राक्ष पहनने के फायदे
रुद्राक्ष पहनने के फायदे धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में बताए गए हैं। श्रद्धालु इसे मन, वाणी और आचरण को संयमित रखने का माध्यम मानते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से:
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मन को शांति और स्थिरता मिलती है।
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ध्यान और जप में एकाग्रता बढ़ती है।
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नकारात्मक विचारों से दूरी बनाने में सहायता मिलती है।
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आत्मविश्वास और धैर्य का भाव मजबूत होता है।
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शिवभक्ति और आध्यात्मिक अनुशासन बढ़ता है।
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क्रोध, भय और बेचैनी पर नियंत्रण की प्रेरणा मिलती है।
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व्यक्ति सात्त्विक और संयमित जीवन की ओर बढ़ता है।
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कठिन परिस्थितियों में मानसिक सहारा मिलता है।
इन लाभों को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना चाहिए। रुद्राक्ष किसी बीमारी, मानसिक समस्या, आर्थिक संकट या कानूनी मामले का निश्चित उपचार नहीं है।
रुद्राक्ष से जुड़ी सावधानियां
नकली रुद्राक्ष से बचें
दुर्लभ मुखी रुद्राक्षों की कीमत अधिक हो सकती है। इसलिए बाजार में नकली, तराशे हुए या जोड़कर बनाए गए दाने मिल सकते हैं।
खरीदते समय:
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प्रमाणित विक्रेता चुनें।
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लिखित प्रमाणपत्र मांगें।
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केवल तस्वीर या रंग देखकर असली-नकली का निर्णय न लें।
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बहुत कम कीमत में मिलने वाले दुर्लभ रुद्राक्ष से सावधान रहें।
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खरीद से पहले विशेषज्ञ से जांच कराएं।
चिकित्सीय दावों से सावधान रहें
रुद्राक्ष को औषधि की तरह प्रयोग करने या गंभीर रोग ठीक करने का दावा नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
रुद्राक्ष श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुशासन का माध्यम हो सकता है, चिकित्सा का विकल्प नहीं।
धागे और धातु का ध्यान रखें
रुद्राक्ष को लाल धागे, काले धागे, चांदी या सोने में पिरोने की परंपरा मिलती है। त्वचा पर खुजली, एलर्जी या असुविधा हो तो उसे तुरंत निकाल दें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रुद्राक्ष के प्रकार कितने होते हैं?
सामान्य रूप से एकमुखी से चौदहमुखी रुद्राक्ष की चर्चा सबसे अधिक होती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में रुद्राक्ष के 27 प्रकार तक बताए गए हैं।
रुद्राक्ष का अर्थ क्या है?
रुद्राक्ष का संबंध रुद्र यानी भगवान शिव और अक्ष यानी आंख या अश्रु से माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न पवित्र बीज है।
रुद्राक्ष पहनने के क्या फायदे हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष पहनने से ध्यान, जप, मानसिक शांति, आत्मसंयम और शिवभक्ति में सहायता मिलती है।
गले में रुद्राक्ष पहनने का क्या महत्व है?
गले में रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति को शिव-स्मरण, मंत्र-जप और सात्त्विक आचरण की प्रेरणा मिलती है। इसे स्वच्छ और सुरक्षित माला में धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष को सिद्ध कैसे करें?
रुद्राक्ष को जल या गंगाजल से शुद्ध करके शिवलिंग से स्पर्श कराएं, धूप-दीप दिखाएं और “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जप करके धारण करें।
कौन सी राशि पर कौन सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए?
राशि के अनुसार रुद्राक्ष का चयन ज्योतिषीय परंपरा पर आधारित है। सामान्य सुझावों में मेष के लिए तीनमुखी, मिथुन के लिए चारमुखी, सिंह के लिए बारहमुखी और मीन के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष बताया जाता है। सही चयन के लिए कुंडली और योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
क्या पंचमुखी रुद्राक्ष सभी पहन सकते हैं?
धार्मिक परंपरा में पंचमुखी रुद्राक्ष को सामान्य रूप से सभी के लिए सहज माना जाता है। फिर भी इसे श्रद्धा और स्वच्छता के साथ धारण करना चाहिए।
क्या महिलाएं रुद्राक्ष धारण कर सकती हैं?
धार्मिक परंपराओं में महिलाएं रुद्राक्ष धारण करती हैं। मासिक धर्म के समय इसे धारण करने या उतारने के संबंध में अलग-अलग परंपराएं हैं। अपनी आस्था, पारिवारिक परंपरा और गुरु के निर्देश का पालन करें।
क्या रुद्राक्ष पहनकर सोना चाहिए?
इस विषय में परंपराएं अलग-अलग हैं। बहुत से लोग सोते समय रुद्राक्ष उतारकर स्वच्छ स्थान पर रखते हैं, ताकि माला टूटे नहीं और दाने सुरक्षित रहें।
क्या किसी दूसरे व्यक्ति का पहना हुआ रुद्राक्ष पहन सकते हैं?
बिना शुद्धि और उचित संस्कार के किसी अन्य व्यक्ति का पहना हुआ रुद्राक्ष धारण न करें। यदि आवश्यक हो, तो पहले उसकी सफाई और पूजा कराएं।
क्या रुद्राक्ष से रोग ठीक होते हैं?
रुद्राक्ष से रोग ठीक होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लें और रुद्राक्ष को केवल धार्मिक या आध्यात्मिक आस्था के रूप में धारण करें।
निष्कर्ष
रुद्राक्ष के प्रकार, उनके धार्मिक महत्व, धारण-मंत्र और नियमों का वर्णन अनेक शिवभक्त परंपराओं में मिलता है। रुद्राक्ष भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, संयम और साधना का पवित्र प्रतीक है।
रुद्राक्ष धारण करने का उद्देश्य केवल मनोकामना पूरी करना नहीं, बल्कि अपने जीवन में शिवत्व—शांति, संयम, करुणा, सत्य और आत्मअनुशासन—को विकसित करना होना चाहिए।
यदि रुद्राक्ष के साथ आचरण सात्त्विक हो, वाणी संयमित हो और मन शिव-स्मरण में लगा हो, तो यही उसकी सबसे बड़ी साधना है।
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— राजन प्रकाश
अस्वीकरणः
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और परंपरागत धारणाओं पर आधारित है। विभिन्न ग्रंथों और संप्रदायों में रुद्राक्ष के प्रकार, मंत्र, लाभ और धारण-विधि में अंतर हो सकता है। रुद्राक्ष चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं है। गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
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धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः
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