Advertisement728 × 90

विपरीत परिस्थिति में जो गर्म हो जाए वह कांच, जो शीतल रहे वह हीराः प्रेरक कथा

विपरीत परिस्थिति में जो गर्म हो जाए वह कांच, जो शीतल रहे वह हीराः प्रेरक कथा


आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
एक राजा का दरबार लगा था. सर्दी के दिन थे इसलिए दरबार खुले में लगा था. महाराज के सिंहासन के सामने टेबल जैसी कोई कीमती चीज रखी थी पंडित लोग दीवान आदि सभी दरवार मे बैठे थे राजा के परिवार के सदस्य भी बैठे थे

उसी समय एक व्यक्ति आया और उसने कहा मेरे पास दो वस्तुएं हैं. मै हर राज्य के राजा के पास जाता हूं और अपनी बात रखता हूं कोई परख नहीं पाता. अभी तक सभी हारे ही हैं. अपराजित हूं, अब आपके नगर में आया हूं.

राजा के आदेश पर उसने दोनों वस्तुएं टेबल पर रख दीं. बिल्कुल समान आकार, समान रुप-रंग, समान प्रकाश सब कुछ एक जैसा. राजा ने कहा ये दोनों वस्तुएं तो एक ही हैं फिर क्या भेद?

उस व्यक्ति ने कहा- महाराज, दोनों वस्तुएं दिखाई तो एक सी देती हैं लेकिन हैं भिन्न. इनमे से एक बहुत कीमती हीरा है और एक कांच का टुकडा है. दोनों रूप-रंग में एक हैं लेकिन कोई परख नहीं पाया कि कौन सा हीरा है और कौन सा कांच.

यदि इस राज्य में किसी ने परख लिया तो मैं हार जाउंगा और यह हीरा राजकोष में जमा करा दूंगा. यदि नहीं पहचान पाया तो हीरे की कीमत के बराबर पैसा आपको मुझे देना होगा. कई राज्यों से जीतता आया हूं. यदि स्वीकार हो तो परखने के लिए लोगों को बुलाइए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.राजा ने कहा- मुझे तो हीरे की परख का ज्ञान नहीं. मंत्री बोले- हम भी हिम्मत नहीं कर सकते क्योंकि दोनों समान हैं. हारने पर धन के गंवाने की चिंता नहीं लेकिन इससे राजा की प्रतिष्ठा गिरेगी. इसलिए हम भी नहीं हिम्मत करेंगे.

एक अंधा आदमी लाठी खटखाता आगे आया और राजा से प्रार्थना की- मैं तो जन्म से अंधा हू फिर भी मुझे एक अवसर दें ताकि मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूं. हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं. यदि सफल न भी हुआ तो वैसे भी आप तो हारे ही हैं.

राजा को लगा कि इसे अवसर देने मे क्या हर्ज है! राजा ने उसे बुद्धि आजमाने की आज्ञा दे दी. उस अंधे आदमी को दोनो चीजें छुआ दी गयीं फिर पूछा गया इसमें कौन सा हीरा है और कौन सा कांच?

उस आदमी ने दोनों को मुठ्ठी में रखा फिर मिनटभऱ बता दिया कि कौन हीरा है और कौन कांच. उसने सही पहचान की थी. हीरे का मालिक जो इतने राज्यों से जीतता आया था वह हैरान होकर नतमस्तक हो गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसने कहा- अपने वचन के मुताबिक हीरा मैं राजकोष में जमा कर रहा हूं. सब बहुत खुश हो गए. राजा और अन्य सभी ने अंधे की प्रशंसा की. राजा ने उससे पूछा- तुमने यह कैसे पहचाना कि यह हीरा है और वह काँच?

उस अंधे ने एक गहरी बात कही- महाराज, धूप में हम सब बैठे हैं. मैंने दोनों को छुआ जो ठंडा रहा वह हीरा जो गरम हो गया वह कांच.

जीवन में भी जो बात-बात में गरम हो जाए, व्यर्थ की बातों में उलझ जाए वह कांच है. जो विपरीत परिस्थिति में भी ठंडा रहे वह अनमोल है, वह हीरा है. ऐसे पुरुषों का साथ कभी नहीं त्यागना चाहिए.

संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group

error: Content is protected !!