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पुरुषों को विवाह में यदि आ रही हो बाधाएं, तो कारगर हो सकते हैं ये उपायः पुरुषों के विवाह में विलंब का ज्योतिषीय निदान

पुरुषों को विवाह में यदि आ रही हो बाधाएं, तो कारगर हो सकते हैं ये उपायः पुरुषों के विवाह में विलंब का ज्योतिषीय निदान

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ज्योतिषशास्त्र में मंगल, शनि, सूर्य, राहु और केतु को विवाह में विलंब का कारक बताया गया है.

अगर आपकी जन्मकुंडली के सप्तम भाव में अशुभ या क्रूर ग्रह बैठ जाए, या फिर सप्तमेश और उसके कारक ग्रह बृहस्पति व शुक्र कमजोर हो जाएं तो विवाह में बाधा आती है.

अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो 28 साल की आयु तक विवाह न होना एक सामान्य बात है. 28 के बाद विवाह की प्रबल संभावना बनती है.

बृहस्पति विवाह के कारक ग्रह कहे जाते हैं. इसलिए गुरु को ठीक करके तथा दूसरे ग्रहों के दोषों को कम करके विवाह का योग बनाया जा सकता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]

लड़के के विवाह में विलंब हो रहा है तो उसके लिए शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं. कुछ उपाय आपको स्वयं करने हैं, कुछ में प्रशिक्षित वैदिक ब्राह्मणों की सहायता लेनी होगी.

वैदिक ब्राह्मणों द्वारा कराई जाने वाली पूजाः

शीघ्र विवाह के लिए दुर्गासप्तशती का संपुट पाठ नौ दिनों तक कराना चाहिए. संपुट पाठ सामान्य पाठ से थोड़ा अलग होता है इसलिए प्रशिक्षित वैदिक व्यक्ति से कराएं. यदि संपुट पाठ नवरात्रों में किया जाए तो उसका विशेष फल मिलता है लेकिन अन्य दिनों में भी कराया जा सकता है. चैत्र मास के नवरात्र जल्द ही आने वाले हैं.

दो-तीन उपाय जो आपको स्वयं करने होंगेःहमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]

दुर्गास्वरूपा माता गौरी का ध्यान करें. उसके बाद इस मंत्र का जितना संभव हो पाठ करें-

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्त अनुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भभवाम्।।

(हे गौरी! इच्छा के अनुसार चलने वाली मनोहर पत्नी प्रदान करें जो दुर्गम संसार सागर से तारने वाली तथा उत्तम कुल में उत्पन्न हुई हो.)
यह पाठ विवाह तक जारी रखना होगा. इसके अलावा शिवजी को प्रतिदिन जल चढ़ावें. उस जल में थोड़ी हल्दी मिला लें.

शिव मंदिर में जल चढ़ाने का विशेष लाभ है क्योंकि वहां देवी पार्वती का वास रहता है. लेकिन अगर मंदिर आस-पास में नहीं है तो शिवलिंग घर में स्थापित करके भी जल चढ़ा सकते हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[sc:mbo]

शादी तय होकर कट जाती हो, या बात बनते-बनते रूक जाती है तो इसका अर्थ है कि बाधा कुछ ज्यादा ही है. इसके लिए बृहस्पतिवार का व्रत करें और पुखराज धारण करें तो काफी लाभ होगा.

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प्रस्तुतकर्ताः
डॉ. नीरज त्रिवेदी, ज्योतिषाचार्य व पीएचडी
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

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