त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंगः गौतम के तप से प्रसन्न हो महादेव ने गंगा के साथ दिया दर्शन, सभी देवताओं ने कहा कुंभ अवधि में गौतमी के तट पर करेंगे वास
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पिछले भाग में आपने पढ़ा-गौतम और अहल्या ने तप से वरुणदेव को प्रसन्न करके अक्षय जलकुंड प्राप्त किया. 100 वर्ष के भीषण सूखे के कारण जीवविहीन हो गए ब्रह्मगिरी क्षेत्र में प्राणियों का पुनः निवास शुरू हुआ.
गौतम कुंड के आसपास बहुत से ब्राह्मण और ऋषि आकर बसे. जल को लेकर अहल्या के साथ ब्राह्मणियों ने विवाद किया और अपने पतियों को गौतम के अनिष्ट के लिए उकसाया.
गणेशजी को प्रसन्न करके सबने गौतम को दुखी करने के लिए उन्हें बाध्य किया. गणेशजी दुर्बल गाय बने और गौतम पर उस गाय की हत्या का आरोप लगा. गोहत्या के अपराधबोध से ग्रस्त गौतम दुख में डूब गए. (अब आगे)
ऋषियों द्वारा अपमानित किए जाने से गौतम वहां से चले गए और अन्यत्र कुटिया बनाई. वे ब्राह्मण वहां भी पहुंच गए और गौतम को गोहत्या दोष से मुक्ति मिलने तक वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ-आदि कर्म करने से रोक दिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
धर्म-कर्म से वंचित होने से गौतम का जीवन कष्टमय हो गया. उन्होंने उन मुनियों, ब्राह्मणों से गोहत्या का प्रायश्चित बताने की विनती की.
सबने कहा– तीन बार यह बोलते हुए पृथ्वी की परिक्रमा करो कि मैंने गोवध किया. उसके बाद एक महीने तक व्रत करो. व्रत के बाद ब्रह्मगिरि की एक सौ एक परिक्रमा करो. तब गोहत्या दोष से मुक्ति होगी.
गौतम ने कहा कि पृथ्वी की तीन परिक्रमा तो मनुष्य के जीवन में संभव ही नहीं. उन्हें दूसरा विकल्प बताना होगा जिसे वह पूर्ण करके पापमुक्त हो सकें.
ब्राह्मणों ने विकल्प कहा- यदि गंगाजी को यहां लाकर उनके जल में स्नान करो. फिर एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाकर महादेव की उपासना करो. ब्रह्मगिरि पर्वत की ग्यारह परिक्रमा के बाद एक सौ कलश के गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक करो तो शुद्धि होगी.
गौतम ने अहल्या के साथ ब्रह्मगिरि की परिक्रमा की. निष्ठा के साथ पार्थिव लिंगों का निर्माण कर महादेव की आराधना करने लगे. इनकी अटूट भक्ति से भोलेनाथ प्रसन्न हो गए.
प्रकट होकर महादेव ने कहा- मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हूं. अपनी इच्छा बताओ. गौतम ने शिव स्तुति की और बोले- प्रभु मैंने गोवध जैसा पाप किया. आप मुझे निष्पाप बनाने की कृपा करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
भोलेनाथ ने कहा– आपने कोई पाप नहीं किया है. उन दुष्टों ने छल-कपट से घोर अत्याचार किया. इसलिए वे ही पापी, हत्यारे और दुराचारी हैं. उन कृतघ्नों का कभी उद्धार नहीं होगा. उन दुरात्माओं पर जिनकी दृष्टि पड़ जाएगी वे भी पापी बन जाएंगे.
भगवान की बात सुनकर गौतम उन्हें बार-बार स्तुतिकर शांत किया और कहा– भगवान् उन्होंने तो मेरा बड़ा उपकार किया. उनके दुराचार से ही मेरा महान कार्य सिद्ध हुआ है. उनके व्यवहार से ही हमें आपके दुर्लभ दर्शन प्राप्त हो सके.
गौतम की दयालुता से महादेव अभिभूत हो गए और बोले– विप्रवर! आप सभी ऋषियों में श्रेष्ठ हैं. मैं आप पर अत्यंत प्रसन्न हूँ, इसलिए आप अपने लिए कोई उत्तम वर माँग लें.
गौतम ऋषि ने कहा- प्रभु मुझे स्वयं के लिए कुछ नहीं चाहिए. लोक कल्याण के लिए आप मुझे गंगा प्रदान कीजिए. यह कहते हुए गौतम ने भगवान शिव के चरण पकड़ लिए.
तब भगवान महेश्वर ने पृथ्वी और स्वर्ग के सारतत्व रूपी उस जल का आह्वान किया जो ब्रह्माजी ने उन्हें उनके विवाह के अवसर भेंट किया था. वह परम पवित्र जल स्त्री रूप धारण करके वहां पहुंचा. गौतम ने उसकी स्तुति और स्वागत किया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
गौतम बोले– सम्पूर्ण लोकों को पवित्र करने वाली गंगे! नरक में गिरते हुए मुझ गौतम को आप पवित्र कर दें. महादेव ने भी कहा– ‘देवि! इस मुनि को पवित्र करो और वैवस्वत मनु के अट्ठाइसवें कलियुग तक यहीं वास रहो.
गंगा ने भगवान शिव से कहा- प्रभु मैं अकेली यहां अपना निवास बनाने में असमर्थ हूं. यदि भगवान महेश्वर, अम्बिका और अन्य गणों के साथ यहां रहें तथा मैं नदियों में श्रेष्ठ स्वीकार की जाऊं, तभी इस धरातल पर रह सकती हूं.
भगवान शिव ने गंगा का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा- तुम्हारी इच्छा के अनुसार मैं भी यहां रहूंगा. उसके बाद विविध देवता, ऋषि, अनेक तीर्थ तथा सम्मानित क्षेत्र भी वहां आ पहुँचे.
उन सभी ने गौतम, गंगा तथा महादेव का पूजन किया. उनकी आराधना से प्रसन्न गंगा और महेश्वर ने कहा– हम आपका प्रिय भी करना चाहते हैं. इसलिए मन में कोई अभिलाषा हो तो कहें.
देवताओं ने महादेव और गंगा से कहा- प्रभु हमारे और मनुष्यों का प्रिय करने के लिए आप और देवी गंगा यहीं निवास करने की कृपा करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
गंगा ने कहा- मैं गौतम को पापमुक्त कर चली जाऊंगी. यदि देवगण सबका प्रिय करना चाहते हैं तो आपसब यहां क्यों नहीं निवास करते? यदि आप मानवों में मेरी उपयोगिता और मेरी महिमा सिद्ध कर सकें तो मैं अवश्य यहां रह सकती हूं.
देवताओं ने कहा- जब सिंह राशि पर गुरू बृहस्पति का पदार्पण होगा, उस समय हम सभी आकर यहां निवास करेंगे. ग्यारह वर्षों तक लोगों का गो-पातक यहां क्षालित होगा. उस पाप को धोने के लिए हम सभी नदियों में आप गंगा के पास आया करेंगे.
महादेवी! समस्त लोगों पर अनुग्रह करते हुए हमारा प्रिय करने हेतु तुम्हें और भगवान शंकर को यहाँ पर नित्य निवास करना चाहिए. गौतमी नदी के किनारे महादेव त्र्यंबकम शिवलिंग के रूप में विराजमान हुए क्योंकि इसी शर्त पर गंगा वहां ठहरने को तैयार हुई थीं.
गौतम ने गंगा की आराधना करके पाप से मुक्ति प्राप्त की. गौतम तथा अन्य मुनियों को गंगा ने पूर्ण पवित्र कर दिया और गौतमी के रूप में वहां स्थित हुईं. बृहस्पति जब सिंह राशि पर आते हैं तो त्र्यंबकेश्वर महातीर्थ में कुंभ का आयोजन होता है.
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संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्