बुराई की फुनगी यानी कोपलें नहीं जड़ को पहचानो, तभी संकट का समाधान होगाः आश्रम में दूध की चोरी पर एक गुरू ने शिष्यों को दी प्रेरक शिक्षा

बुराई की फुनगी यानी कोपलें नहीं जड़ को पहचानो, तभी संकट का समाधान होगाः आश्रम में दूध की चोरी पर एक गुरू ने शिष्यों को दी प्रेरक शिक्षा

rama
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एक आश्रम को भक्तों ने बहुत सारी गाएं दान की थीं. जल्द ही आश्रम में सैकड़ों गाएं हो गईं. गायों के दूध से जो भी धन मिलता था, उससे आश्रम का संचालन होता था.

एक दिन एक शिष्य गुरूजी के पास पहुंचा और बताया- गुरूजी आश्रम के दूध में पानी मिलाया जा रहा है. आश्रम में बेईमानी की प्रवृति आए यह अच्छा नहीं, इसे रोकेने का प्रयास करना चाहिए.

गुरुजी ने शिष्य से ही पूछा कि क्या करना चाहिए. शिष्य ने सुझाया- क्यों न एक कर्मचारी रख लिया जाए जो दूध की निगरानी करे और मिलावट को रोके. गुरूजी की स्वीकृति से एक कर्मचारी रख लिया.

एक सप्ताह के बाद वही शिष्य गुरूजी के पास फिर से आया और बताने लगा- गुरुजी इस कर्मचारी के रखने के बाद तो मिलावट और बढ़ गई है. गुरूजी ने फिर शिष्य से इसका उपाय पूछा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

शिष्य बोला- गुरुजी, ऐसा करते हैं कि आदमी और रख लेते हैं जो पहले वाले आदमी पर निगरानी रखे. इस तरह उसे भय रहेगा और मिलावट रूक जाएगी. गुरूजी ने एक और कर्मचारी रख लिया.

कुछ दिनों बाद आश्रम में सुबह-सुबह झगड़ा होने लगा. आश्रम से बाजार के लिए जाने वाले दूध को जब बड़े बर्तन में रखा जा रहा था तो अचानक दूध के बर्तन से एक मछली निकल आई.

बात गुरूजी तक पहुंची. वह गौशाला में आए. शिष्यों की सारी बात उन्होंने बड़े धैर्य से सुनने के बाद कहा- किसी अनैतिक कार्य को रोकने के लिए जितने अधिक निरीक्षक रखा जाए, समस्या उतनी बड़ी होती जाती है.

पहले दूध में पानी मिलाने के अनैतिक कार्य में हिस्सेदारी कम लोगों की थी. वे थोड़ी मिलावट करके अपने लिए पैसे बना रहे थे. जैसे-जैसे उन पर नजर रखने वाले बढ़े, उनके हिस्से भी तय हुए और मिलावट बढ़ती चली गई.

इतना पानी मिलाया जाने लगेगा तो दूध में से तो मछली निकलनी ही थी. मुझे आभास था कि ऐसा ही कुछ होगा मैं तो बस तुम सब को जीवन की एक व्यावहारिक शिक्षा देना चाहता था.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

गुरूजी बोले- हम समस्याओं की असली जड़ को नहीं समझते. ऊपरी फुनगी देखकर ही हम समस्या के बारे में एक राय बना लेते हैं. हमें भ्रम होता है कि यदि उस फुनगी को शाखा बनने से पहले काट दिया जाए तो समस्या खत्म हो जाएगी.

जबकि ऐसा नहीं है. आप फुनगी को जितना काटोगे उतनी ज्यादा नई शाखाएं फूटेंगी और समस्या की जड़ से आपका ध्यान भटक जाएगा.

शिष्यों ने इसका निदान पूछा तो गुरूजी बोले- पहली कोशिश उन लोगों को धर्म और ईमानदारी की राह पर लाने की होनी चाहिए जो भटके हैं ताकि वे अधर्म का मार्ग छोड़ें.

सोचकर देखिए क्या दंड दे देने भर से बुराई का अंत हो जाता है. जब तक उस बुरे कार्य के परिणामों का बोध अधर्म पर चलने वाले व्यक्ति को नहीं होता वह, वह अधर्म का रास्ता नहीं छोड़ता.

इसलिए बुद्ध ने कहा है- बुरे व्यक्ति से नहीं, बुराई से नफरत करनी चाहिए और उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए.

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संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्