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आपकी कुंडली में प्रेम विवाह के योग हैं? प्रेम विवाह की अड़चनेंं दूर करने के उपाय

आपकी कुंडली में प्रेम विवाह के योग हैं? प्रेम विवाह की अड़चनेंं दूर करने के उपाय

क्या आपकी किस्मत में है लव मैरिज? जानिए कुंडली में प्रेम विवाह के ज्योतिष योग, हथेली में प्रेम विवाह रेखा के संकेत, अचूक प्रेम विवाह मंत्र और अड़चनों को दूर करने के लिए विशेष शिव पूजा व उपाय।

आज के आधुनिक समय में हर युवा यह जानना चाहता है कि उसकी कुंडली में प्रेम विवाह के ज्योतिष योग हैं या नहीं। प्रेम विवाह करने वाले लड़के व लड़कियां एक-दूसरे की रुचि, स्वभाव और पसंद-नापसंद को अधिक कुशलता से समझ पाते हैं। ऐसे जोड़े भावनाओं व स्नेह की प्रगाढ़ डोर से बंधे होते हैं, जिससे जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी दोनों का साथ बना रहता है।

परंतु, कई बार कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल न होने के कारण विवाह के बाद परिस्थितियां इसके विपरीत हो जाती हैं।

प्रेम विवाह के ज्योतिष उपाय एवं योग.
प्रेम विवाह के ज्योतिष उपाय एवं योग.

आइए ज्योतिष शास्त्र के आईने से विस्तार से देखें कि कुंडली और हथेली में प्रेम विवाह के ज्योतिष योग और संकेत क्या हैं?

इस लेख में आप जानेंगे :

  • 1. कुंडली में बनने वाले प्रमुख प्रेम विवाह के ज्योतिष योग

    • 1.1 राहु के प्रभाव से प्रेम विवाह की संभावनाएं

    • 1.2 ग्रहों की युति और दृष्टि से बनने वाले अन्य योग

  • 2. हथेली में दिखने वाली प्रेम विवाह रेखा और संकेत

  • 3. प्रेम विवाह के अचूक उपाय और शक्तिशाली मंत्र

    • 3.1 प्रेम विवाह के लिए विशेष शिव पूजा

    • 3.2 मनचाहे जीवनसाथी के लिए प्रेम विवाह मंत्र

    • 3.3 ग्रहों को अनुकूल करने के अन्य उपाय

  • 4. प्रेम विवाह से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंडली में बनने वाले प्रमुख प्रेम विवाह के ज्योतिष योग

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का पंचम भाव प्रेम का और सप्तम भाव विवाह का माना जाता है। जब इन दोनों भावों या इनके स्वामियों का आपस में संबंध बनता है, तो प्रबल प्रेम विवाह के ज्योतिष योग का निर्माण होता है।

1. राहु के प्रभाव से प्रेम विवाह की संभावनाएं

  • प्रेम विवाह के ज्योतिष योग में राहु का प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। राहु लग्न में स्थित हो परंतु सप्तम भाव पर देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि हो, तो जातक का प्रेम विवाह होने की संभावनाएं बहुत मजबूत हो जाती हैं। राहु का संबंध जब भी विवाह भाव से होता है, तो व्यक्ति सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं से हटकर विवाह करने का निर्णय लेता है।

  • प्रेम विवाह के ज्योतिष योग में राहु के साथ मंगल और शनि भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि जन्म कुंडली में मंगल का शनि अथवा राहु से संबंध या युति हो रही हो, तब भी प्रेम विवाह के रास्ते खुलते हैं। जब ये ग्रह विवाह भाव या भावेश से संबंध बनाते हैं, तो व्यक्ति परिवार की असहमति के बाद भी अपने प्रेम को विवाह तक ले जाने का साहस जुटा पाता है।

  • जिस जातक की कुंडली में सप्तमेश (सातवें भाव का स्वामी) व शुक्र पर शनि या राहु की दृष्टि हो, उनके जीवन में भी लव मैरिज का संयोग बनता है।

  • जब पंचम भाव के स्वामी की उच्च राशि में राहु या केतु स्थित हों, तब भी प्रेम संबंधों को विवाह की मंजिल मिलती है।

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2. ग्रहों की युति और दृष्टि से बनने वाले प्रेम विवाह के अन्य ज्योतिष योग

  • जब कुंडली में मंगल अथवा चंद्रमा, पंचम भाव के स्वामी के साथ पंचम भाव में ही स्थित हों, या फिर सप्तम भाव के स्वामी के साथ सप्तम भाव में बैठे हों, तो यह प्रेम विवाह के अकाट्य ज्योतिष योग एवं संकेत है।

  • यदि शुक्र देव लग्न से पंचम या नवम भाव में हों, अथवा चंद्र लग्न से पंचम भाव में स्थित हों, तो जातक को अपना मनपसंद जीवनसाथी मिलता है।

  • यदि पंचम भाव में मंगल स्थित हो तथा पंचमेश व एकादशेश का आपस में राशि परिवर्तन हो रहा हो, अथवा दोनों कुंडली के किसी भी एक भाव में एक साथ बैठे हों, तो प्रेम विवाह अवश्य सफल होता है।

  • कुंडली के पंचम व सप्तम भाव के स्वामी अथवा सप्तम व नवम भाव के स्वामी यदि एक-दूसरे के साथ युति बनाकर बैठे हों, तो लव मैरिज की संभावनाएं बहुत अधिक बढ़ जाती हैं।

  • यदि सप्तम भाव में शनि और केतु की स्थिति हो, तो भी जातक का प्रेम विवाह होने का अनुमान लगाया जाता है।

  • लग्न व पंचम भाव के स्वामी एक साथ स्थित हों या फिर लग्न व नवम भाव के स्वामी एक साथ बैठे हों, अथवा एक-दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हों, तो यह भी एक शुभ संकेत है।

  • जब चंद्रमा और सप्तम भाव के स्वामी का आपस में दृष्टि संबंध बन रहा हो, तब भी जातक प्रेम की ओर आकर्षित होता है और उसे विवाह में बदलता है। यह प्रेम विवाह का ज्योतिष योग बड़ा प्रभावी माना जाता है।

  • जब सप्तम भाव का स्वामी स्वयं सप्तम भाव में ही स्थित हो, तो विवाह का भाव अत्यंत बली हो जाता है, जिससे जातक अपनी पसंद से विवाह कर पाता है।

  • जब सप्तमेश की दृष्टि, युति या स्थिति शुक्र के साथ कुंडली के द्वादश (12वें) भाव में हो, तब भी प्रेम विवाह का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • द्वादश भाव में लग्नेश और सप्तमेश की युति हो और भाग्येश उन पर अपनी दृष्टि डाल रहा हो, तो भाग्य के सहयोग से प्रेम विवाह संपन्न होता है।

  • जब जन्म कुंडली में शनि किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर मंगल, सप्तम भाव या सप्तमेश से संबंध बनाता है, तब भी सामाजिक बंधनों को तोड़कर प्रेम विवाह होने की संभावना बनती है।

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हथेली में दिखने वाली प्रेम विवाह रेखा और संकेत

कुंडली के साथ-साथ हस्तरेखा शास्त्र में भी हथेली की लकीरें विवाह के बारे में बहुत कुछ कहती हैं। हथेली में निम्नलिखित स्थितियों को प्रेम विवाह रेखा के मुख्य संकेत के रूप में देखा जाता है:

  • हृदय रेखा से गुरु पर्वत का संबंध: यदि आपकी हृदय रेखा से कोई छोटी शाखा निकलकर तर्जनी उंगली के नीचे स्थित गुरु पर्वत तक जाती है, तो यह दर्शाता है कि जातक अपने प्रेम के प्रति बेहद गंभीर है और उसका प्रेम विवाह सफल रहेगा।

  • स्पष्ट विवाह रेखा: सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठिका) के नीचे बुध पर्वत पर स्थित विवाह रेखा यदि पूरी तरह से साफ, गहरी हो और बिना किसी कट-निशान के हृदय रेखा की तरफ हल्की झुकी हो, तो जातक मनचाहा विवाह करता है।

  • शुक्र पर्वत का उभार: अंगूठे के नीचे का भाग शुक्र पर्वत कहलाता है, जो प्रेम और आकर्षण का कारक है। यदि यह पर्वत अच्छा विकसित हो और इस पर कोई जाली या क्रॉस का अशुभ चिह्न न हो, तो प्रेम संबंधों में भाग्य का पूरा साथ मिलता है।

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प्रेम विवाह के अचूक उपाय और शक्तिशाली मंत्र

यदि आपकी कुंडली में योग होने के बावजूद परिवार की असहमति, जातिगत बंधन या अन्य कारणों से विवाह में अड़चनें आ रही हैं, तो शास्त्रों में कुछ बेहद प्रभावशाली प्रेम विवाह उपाय बताए गए हैं:

प्रेम विवाह के ज्योतिष उपायः प्रेम विवाह के योग, उपाय, मंत्र
प्रेम विवाह के ज्योतिष उपायः प्रेम विवाह के योग, उपाय, मंत्र

प्रेम विवाह के लिए विशेष शिव पूजाः

भगवान शिव और माता गौरी को सृष्टि का सबसे आदर्श और दिव्य जोड़ा माना जाता है। प्रेम विवाह की बाधाओं को दूर करने के लिए प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या जल में थोड़ा सा गंगाजल व कच्चा दूध मिलाकर अभिषेक करें। माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग की सामग्री (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां) अर्पित करें। ऐसा करने से वैवाहिक मार्ग के सभी दोष शांत होते हैं।

मनचाहे जीवनसाथी के लिए प्रेम विवाह मंत्रः

शिव पूजा के दौरान या प्रतिदिन सुबह सात्विक भाव से घी का दीपक जलाकर मां दुर्गा या शिव-परिवार के सामने इस चमत्कारी मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें:

हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।

तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्तां सुदुर्लभाम॥

ग्रहों को अनुकूल करने के अन्य उपायः

  • शुक्र ग्रह की मजबूती: शुक्र देव प्रेम के अधिपति हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन सफेद या हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र पहनें। मां लक्ष्मी की कपूर से आरती करें और सफेद रंग की मिठाई या खीर का दान करें।

  • मांगलिक दोष का निवारण: यदि मंगल की क्रूर दृष्टि के कारण विवाह में अड़चन आ रही हो, तो हर मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें और हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें।Radha Krishna राधाकृष्ण के प्रेम की अनूठी कथा

निष्कर्ष:

ज्योतिष शास्त्र और हस्तरेखा के ये संकेत हमें मार्ग दिखाते हैं, लेकिन किसी भी रिश्ते को सफल बनाने के लिए आपसी समझ, सम्मान और समर्पण का होना सबसे अनिवार्य है। सही समय पर किए गए सात्विक उपाय और ईश्वर पर भरोसा आपके प्रेम को विवाह के पवित्र बंधन तक अवश्य पहुंचाएगा।

प्रेम विवाह से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: कुंडली में प्रेम विवाह का मुख्य कारक कौन सा ग्रह है?

उत्तर: ज्योतिष शास्त्र में शुक्र देव को प्रेम, आकर्षण और विवाह का मुख्य कारक माना जाता है। इसके अलावा देवगुरु बृहस्पति (कन्याओं के लिए) और मंगल (पुरुषों के लिए) भी प्रेम विवाह के ज्योतिष योग बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 2: हथेली में प्रेम विवाह रेखा कहाँ होती है?

उत्तर: हथेली में सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठिका) के नीचे बुध पर्वत पर स्थित रेखा को विवाह रेखा कहते हैं। यदि यह रेखा पूरी तरह साफ हो और इसका झुकाव नीचे हृदय रेखा की तरफ हो, तो यह प्रेम विवाह होने का प्रबल संकेत देती है।

प्रश्न 3: प्रेम विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए कौन सी पूजा सबसे बेस्ट है?

उत्तर: प्रेम विवाह के लिए शिव पूजा को सबसे अचूक माना गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध और गंगाजल से अभिषेक करने और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाने से विवाह के मार्ग की सभी अड़चनें दूर हो जाती हैं।

प्रश्न 4: मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

उत्तर: प्रेम विवाह को सफल बनाने और मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए इस शक्तिशाली मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करना चाहिए:

“हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्तां सुदुर्लभाम॥”

प्रश्न 5: क्या मांगलिक दोष के कारण प्रेम विवाह टूट सकता है?

उत्तर: हाँ, यदि कुंडली में मंगल भारी हो तो प्रेम संबंधों में अनबन या विवाह में देरी हो सकती है। यह प्रेम विवाह के ज्योतिष योग का बड़ा बाधक माना जाता है। इससे बचने के लिए हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना और हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है।

संकलनः राजन प्रकाश

( डिस्कलेमरः यह पोस्ट ज्योतिर्विदों के साथ परामर्श के बाद तैयार की गई है। इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ एक प्रचलित ज्योतिषीय अनुमान देना है। यह ज्योतिष की प्राचीन मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य कोई गलत जानकारी देना या अंधविश्वास फैलाना नहीं हैं। किसी भी परामर्श पर अमल करने का विचार करने से पहले विषय के विशेषज्ञ से परामर्श लें।)

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