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विवाह में विलंब का ज्योतिषीय निदान- कन्या के शीघ्र विवाह के आजमाए हुए कारगर उपाय

विवाह में विलंब का ज्योतिषीय निदान- कन्या के शीघ्र विवाह के आजमाए हुए कारगर उपाय

Shiva kajri teej
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विवाह को जीवन का आवश्यक संस्कार बताया गया है. विवाह के योग प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में होते हैं लेकिन कुछ ऐसे कारक हैं जो उसमें विलंब कराते हैं. ज्योतिषशास्त्र में मंगल, शनि, सूर्य, राहु और केतु को विलंब का कारक बताया गया है.

जन्मकुंडली के सप्तम भाव में अशुभ या क्रूर ग्रह के स्थित होने अथवा सप्तमेश व उसके कारक ग्रह बृहस्पति व शुक्र के कमजोर होने से विवाह में बाधा आती है.

आम बोलचाल के शब्दों में कहें तो अगर आपके जीवन में विवाह का योग पैदा करने वाले ग्रहों के मुकाबले वे ग्रह ज्यादा हावी हैं जो विवाह योग को रोकते हैं, तो विवाह में बाधा आती है.

अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो 28 साल की आयु तक विवाह न होना एक सामान्य बात है. घबराएं नहीं, 28 के बाद विवाह की प्रबल संभावना बनती है. बस आपको ध्यान यह रखना है कि किसी अन्य ग्रह के कारण उसमें विघ्न न आए.

महिलाओं के लिए बृहस्पति पति, पुत्र तथा धन का प्रतिनिधि ग्रह है. इसलिए कन्याओं के विवाह पर गुरु की स्थिति का सबसे ज्यादा प्रभाव होता है.
बृहस्पति या गुरु ऐसा ग्रह है जो विवाह का कारक बनता है. इसलिए अगर गुरु को ठीक कर लिया जाए तो दूसरे ग्रहों के दोषों को कम कर विवाह का योग बनाया जा सकता है.

इन ग्रहों के दोष के अलावा पूर्वजन्म के कारक और पितरों (माता-पिता औऱ पूर्वजों तक) का दोष भी विवाह में विलंब कराता है. ज्योतिषशास्त्र में अगर विलंब के कारण बताए गए हैं तो उसे दूर करने के उपाय भी हैं.

आज हम कन्याओं के शीघ्र विवाह के उपाय बता रहे हैं. ग्रहों की स्थिति और पितरों का दोष- दो कारक आपके विवाह में बाधक बन रहे हैं. दोनों की शांति कैसे करें-

पितरों का दोष शांत करने के घरेलू व मुफ्त के उपायः
1. माता का सम्मान करें. उनकी खूब सेवा करें.
2. यदि घर में भाभी या चाची हों तो उनका सम्मान करें. सेवा से उनको प्रसन्न रखें. गौरी कृपा से उन्हें वर मिला है. इसलिए उनका सम्मान कर आप गौरी का आशीर्वाद ले रही हैं.
3. घर की पहली रोटी गाय को खिलाएं.
4. सूर्यदेव को प्रणाम करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.ग्रह शांति के उपायः
ग्रह शांति के उपाय भी घरेलू, सरल और बिना खर्च वाले हैं. बस थोड़ा समय निकालना पड़ेगा.

मां पार्वती ने घोर तप करके शिवजी को पतिरूप में प्राप्त किया था. इसलिए गौरी का ध्यानकर निम्नमंत्रों का श्रद्धापूर्वक और नियमपूर्वक 21 दिनों तक पाठ करना होगा. ध्यान रहे 21 दिनों में कात्यायनी मंत्र का कम से कम 41,000 बार जप होना चाहिए.

पहले दिन 1000 मंत्रजप से आरंभ करें और बढ़ते हुए क्रम में जारी रखें. यानी अगले दिन 2000, उसके बात 2001, 2002… इसी तरह संख्या को 21 दिनों में 41,000 के ऊपर ले जाना है.

किसी भी माह के शुक्लपक्ष के गुरुवार से जप शुरू करें. पाठ समाप्तकर शिवजी को प्रतिदिन जल एवं हल्दी तथा माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं. अगर आप यह पाठ मंदिर में कर सकें तो बहुत अच्छा नहीं तो घर में भी किया जा सकता है.

शिवलिंग लाकर घर में स्थापित करें. देवी पार्वती की फोटो रख लें और कात्यायनी मंत्र का जप करें. आपके जप के दौरान जब भी सोमवार आए शिवजी के मंदिर जाकर गाय का कच्चा दूध चढ़ा दें. शहरों में लोग पैकेट वाले दूध चढ़ाने लगे हैं. वह कच्चा नहीं, पाश्चुराइज्ड होता है. उससे बचें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कात्यायनी मंत्र इस प्रकार से हैः

कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नंद गोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नमः॥

(हे कात्यायनि, महामाया, महायोगियों की अधीश्वरि! मुझे भगवान श्रीकृष्ण जैसा पति प्रदान करें. यह कात्यायनि मंत्र श्रीमद्भागवत में बताया गया है)
यदि विवाह बार-बार तय होकर कट जाता है या विवाह होते-होते रह जाता है तो आप कात्यायनी मंत्र के साथ-साथ प्रतिदिन एक माला इस मंत्र का भी जपें. बाधाएं दूर हो जाएंगी

हे गौरी! शंकर अर्धाङ्गिनी यथा त्वं शंकरप्रिया।
तथा माँ कुरुं कल्याणि कान्तं कान्तां सुदुर्लभाम्‌।

(हे गौरी! शंकर की अर्द्धांगिनी, जिस प्रकार आप शिवप्रिया हैं उसी तरह हे कल्याणी! मुझ कन्या को भी दुर्लभ वर प्रदान करें)हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अगर केले के वृक्ष के नीचे बैठकर ये अनुष्ठान किए जाएं तो सोने में सुगंध जैसी बात होती है क्योंकि शिव आराधना से पापग्रहों की शांति तो होती ही है, केले के नीचे कम से कम 11 बार बृहस्पति मंत्र के जप से गुरु उच्च हो जाते हैं. गुरु विवाह के प्रबल कारक हैं. गुरु आराधना मंत्र इस प्रकार हैः

ऊं बृं बृहस्पत्ये नमः

प्रस्तुतकर्ताः
डॉ. नीरज त्रिवेदी, ज्योतिषाचार्य व पीएचडी
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली

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