भील ने माँस का भोग लगाया, भोले भंडारी को वह भी भाया

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें।
जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।
घने जंगल में एक भील को शिवमंदिर दिखा. रात हो रही थी. भील को लगा कि शिवजी इस सुनसान जंगल में रात को अकेला छोड़ दिया तो कहीं जंगली जानवर इन पर हमला न बोल दें. इसलिए उसने धनुष पर बाण चढ़ाया और प्रभु की पहरेदारी पर जम गया.
सुबह हुई तो भील ने सोचा भगवान को भूख लगी होगी. उसने एक पक्षी मारा और उसका माँस भूनकर शिवजी को खाने के लिए रखकर शिकार के लिए चला गया. शाम को लौटा तो शिवजी को फिर से अकेला पाया. उसने फिर रातभर पहरेदारी की और सुबह प्रभु को भूना हुआ माँस खाने को रख छोड़ा.
मंदिर में पूजा-अर्चना करने पास के गाँव से एक ब्राह्मण आते थे. रोज माँस देखकर वह दुखी थे. उन्होंने सोचा उस दुष्ट का पता लगाया जाए जो रोज मंदिर को अपवित्र कर रहा है. अगली सुबह वह फौ फटते पहुँचे. देखा कि भील सुरक्षा में तैनात है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भयभीत हो पास में पेड़ों की ओट में छुप गए. थोड़ी देर बाद भील माँस लेकर आया और शिवलिंग के पास रखकर जाने लगा. ब्राह्मण के क्रोध की सीमा न रही. उन्होंने भील से इस मूर्खता का कारण पूछा तो उसने भोलेपन में सारी बात कह सुनाई.
भील ने ब्राह्मण को धमकाया कि अगर ब्राह्मण ने रात में शिवजी को अकेला छोड़ा तो वह उसकी जान ले लेगा. ब्राह्मण ने कहा कि जो संसार की रक्षा करते हैं उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता नहीं लेकिन भील सुनने को राजी न था.
शिवजी तत्काल प्रकट हुए. उन्होंने भील को हृदय से लगाकर आदेश दिया कि तुम ब्राह्मण को छोड़ दो. मैं अपनी सुरक्षा का दूसरा प्रबंध कर लूंगा. ब्राह्मण ने शिवजी की वंदना के बाद कहा, “प्रभु में वर्षों से आपकी सेवा कर रहा हूँ.
इस जंगल में प्राण संकट में डालकर आपकी पूजा-अर्चना करने आता हूं. उत्तम फल-फूल से भोग लगाता हूँ किंतु आपने कभी दर्शन नहीं दिए. इस भील ने माँस चढ़ाकर तीन दिन तक आपको अपवित्र किया, फिर भी उस पर प्रसन्न हैं.”हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.शिवजी ने समझाया, “तुम मेरी पूजा के बाद फल की अपेक्षा रखते थे लेकिन इस भील ने निःस्वार्थ सेवा की. इसने मुझे अपवित्र नहीं किया. इसे अपने प्रियजन की सेवा का यही तरीका आता है. मैं तो भाव का भूखा हूँ. इसके भाव ने जो तृप्ति दी है वह फल-मेवे में नहीं है.”
प्रेम से बोलिए भोले भंडारी महादेव की जय
लेखकः मीरा श्रीवत्स
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली