धर्म कथाएं

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भय और प्रज्वर की सहायता से जरा ने पुरंजन को घेरा, पुरंजन को अविज्ञाता ने दिया मोक्ष का ज्ञानः भागवत कथा में पुरंजन प्रसंग- दूसरा भाग

पुरंजन कथा के पहले भाग में आपने पढ़ा कि पुरंजन आसक्ति में डूबा सब कुछ भूल गया था. सांसारिकता में फंसकर उसे अपने परिवार के अलावा कुछ नजर…

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मन की दासता यानी बुद्धि-विवेक का अंतः भागवत में पढ़ें पुरंजन की कथा- पहला भाग

सभी मित्रों को प्रभु शरणम्! आशा है भागवत पुराण की कथाएं प्रस्तुत करने का यह तरीका आपको पसंद आ रहा होगा. आप सभी से एक अनुरोध है- यदि…

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ध्रुव के वंश में जन्मे अधर्मी वेण के पुत्र पृथु ने किया धरा का दोहन, इंद्र ने चुराया पृथु के यज्ञ का घोड़ाः आज भागवत में महान राजा पृथु की कथा

ध्रुव के बड़े पुत्र उत्कल की राजकाज में रुचि न थी. इसलिए उनके छोटे भाई वत्सर को राजा बनाया गया. वत्सर ने अनेक वर्षों तक कुशलता से शासन…

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माता ने किया घोर तिरस्कार, नारायण ने दिया प्रेम अपारः भागवत कथा में बालक ध्रुव के ध्रुवतारा होने के वरदान का प्रसंग

मनु और शतरूपा की संतानों में हमने अभी तक उनकी पुत्रियों के विषय में चर्चा की. आज उनके पुत्र उत्तानपाद और उनकी संतानों की कथा आरंभ करते हैं.…

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शिव का सुरेश्वर अवतारः उपमन्यु की परीक्षा के लिए महादेव ने धर लिया इंद्र का रूप, भक्त को प्रदान किए संसार के सारे ऐश्वर्य

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके…

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कैसे प्रकट हुआ था ओंकारतीर्थ का परमेश्वर लिंगः ओंकारेश्वर तीर्थ का महात्म्य बताती शिव पुराण की कथा

शास्त्रों में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को ओंकारेश्वर धाम में परमेश्वर लिंग का दर्शन उत्तम फलदायक और मोक्षदायक बताया गया है. आज वैशाख शुक्ल चतुर्दशी पर आपके लिए लेकर…

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ब्रह्मा ने क्यों किया मृत्यु निर्माण का विचारः महाभारत में वर्णित मृत्यु देवी की उत्पत्ति कथा

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर…

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क्षमा बड़ी या दंड, शास्त्र को शस्त्र बनाकर प्राण लेने वाले के प्राण संकट में आते हैः महर्षि अष्टावक्र की कथा

उद्दालक ऋषि ने अपने प्रिय शिष्य कहोड़ के साथ अपनी पुत्री सुजाता का विवाह कर दिया था. एक बार जब सुजाता गर्भवती थी और कहोड़ वेद पाठ कर…

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दशरथ और शनि में संघर्ष, राजा के पराक्रम से प्रसन्न शनि ने की अयोध्या पर कृपा. राजा दशरथ द्वारा शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिस्तोत्र रचने की कथा

एकबार नारदजी ने राजा दशरथ को बताया कि रोहिणी पर शनि दृष्टि के कारण सूखा पड़ा है. प्रजा त्रस्त है इसलिए आप आनंद छोडकर प्रजा के संकट का…

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दक्ष ने दिया शिव को शाप, फिर शिव अपमान के लिए किया यज्ञ का आयोजन. उसी यज्ञ में सती का आत्मदाहः भागवत कथा में शिव का प्रसंग

मनु और शतरूपा ने ब्रह्मा के आदेश से पांच संतानों प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक पुत्र और आकूति, देवहुति एवं प्रसूति नामक कन्याओं को जन्म दिया. आकूति का विवाह…

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नारायण अवतार ने माता को दिखाया संसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्गः भागवत कथा में कपिल द्वारा देवहूति को योगज्ञान का प्रसंग

ईश्वर ने माता देवहूति के पुत्र रूप में जन्म लिया. उनका नाम कपिल हुआ. कर्दम को स्मरण था कि उनके पुत्र के रूप में स्वयं भगवान श्रीहरि ने…

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कर्दम ने श्रीविष्णु से गुणी पत्नी व श्रीहरि को पुत्ररूप का लिया वरः भागवत कथा में कर्दम व सप्तर्षियों के विवाह का प्रसंग

शुकदेव ने परीक्षित को कथा सुनानी जारी रखी. सृष्टि निर्माण के आरंभ में ब्रह्मा की उत्पत्ति और उनका उद्देश्य बताकर, उन्होंने ब्रह्मा की संतानों के बारे में बताना…

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श्रीहरि से उत्पन्न ब्रह्मा ने किया सृष्टि का आरंभ. आज भागवत कथा में मनु-शतरूपा की उत्पत्ति और ब्रह्मा के देहत्याग का प्रसंग

शुकदेव ने राजा परीक्षित को भागवत की कथा सुनानी प्रारंभ की श्री हरिविष्णु शेषशैया पर योगनिद्रा में लीन थे. उनकी नाभि से एक विशाल डंठल वाला कमल खिला.…

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महादेव ने दिया पार्वती को अमरत्व का ज्ञान, पार्वती की जगह एक तोते ने सुन लिया सारा ज्ञानः परीक्षित को भागवत सुनाने वाले शुकदेव की कथा

हमने श्रीभागवत में कल शुकदेव द्वारा परीक्षित को भागवत सुनाने की बात बताई थी. भागवत कथा वहीं से प्रारंभ होती है. भागवत चर्चा को आगे बढ़ाने से पहले…

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परीक्षित को ऋंगी का शाप, सांप काटने से सात दिनों में होगी मृत्युः मोक्ष के लिए शुकदेव ने परीक्षित को दिया भागवत ज्ञान

राजा परीक्षित ने कलियुग को स्वर्ण में निवास का स्थान दिया. कलियुग राजा के स्वर्ण मुकुट में स्थित हो गया. परीक्षित कलियुग के प्रभाव में आ चुके थे.…

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कलियुग को परीक्षित ने दिया स्वर्ण में वास का आदेश, राजा के स्वर्ण मुकुट में समा गया कलियुगः भागवत में परीक्षित की कथा

परीक्षित ने अनेक वर्षों तक धर्मपूर्वक राज्य किया. उनका विवाह उत्तरकुमार की पुत्री इरावती से हुआ था. परीक्षित का एक परम प्रतापी पुत्र हुआ जनमेजय. एक बार परीक्षित…

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