हनुमान जी की पूजा की सरल विधि, क्या स्त्रियां कर सकती हैं पूजा?
हनुमान जी की पूजा विधि। क्या स्त्रियां कर सकती हैं हनुमान जी की पूजा
हनुमान जी की पूजा कैसे करें — यह प्रश्न अनेक भक्तों के मन में आता है। विशेषकर यह शंका अधिक होती है कि क्या स्त्रियां हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं या नहीं। कुछ लोग मानते हैं कि हनुमान जी की पूजा औरतें क्यों नहीं करतीं, जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। जानते हैं हनुमान जी की पूजा विधि, पूजा के मंत्र, लाभ और हनुमान जी की पूजा से जुड़े भ्रम।
हनुमान का अर्थ है — अहंकार रहित। हनुमानजी संकटमोचक, भय-निवारक और कलियुग के सबसे शक्तिशाली देवता माने जाते हैं। उनकी कृपा सभी भक्तों पर समान रूप से बरसती है, चाहे वह पुरुष हों या स्त्री।
इस पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे:
- हनुमान जी की पूजा विधि- पूजा का सरल तरीका
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स्त्रियां हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं या नहीं
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विधवा स्त्री हनुमान जी की पूजा कर सकती है या नहीं
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हनुमान जी को सिंदूर कैसे चढ़ाएं और इसका महत्व क्या है
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हनुमान जी को भोग लगाने की सही विधि
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घर में हनुमान जी की पूजा कैसे करें
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हनुमान जी की पूजा के 10 सरल नियम
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हनुमान जी की पूजा के लाभ

घर में हनुमान जी की पूजा कैसे करें
घर में हनुमान जी की पूजा स्थापित करने और करने के लिए ये सरल चरण अपनाएं:
1. पूजा स्थल की व्यवस्था
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घर के ईशान कोने (उत्तर-पूर्व दिशा) में पूजा स्थल बनाएं।
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हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर रखें।
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पास में रामदरबार का चित्र भी रख सकते हैं।
2. दैनिक पूजा
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प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद पूजा करें।
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दीपक जलाएं, फूल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
3. साप्ताहिक पूजा
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मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा करें।
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इन दिनों सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें।
4. त्योहार और विशेष दिन
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हनुमान जयंती, मंगलवार, शनिवार और संकष्टि चतुर्थी को विशेष पूजा करें।
हनुमान जी की पूजा विधिः सबसे सरल 10 नियम
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स्नान और स्वच्छता: पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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सही दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
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आसन: कुशासन या लाल कपड़ा बिछाएं।
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दीपक: घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
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फूल: लाल फूल चढ़ाएं (गुलाब, गुड़हल)।
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सिंदूर: हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें।
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भोग: चूरमा, भीगे चने, गुड़ या केला अर्पित करें।
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मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें।
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पाठ: हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
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आरती: अंत में आरती करके प्रसाद वितरित करें।
हनुमान जी की पूजा विधि (विस्तृत)

1. स्नान और पवित्रता
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प्रातःकाल स्नान-ध्यान से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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पूजा स्थल को साफ करें।
2. आसन और दिशा
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पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
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कुशासन या लाल कपड़ा बिछाएं।
3. मूर्ति या चित्र स्थापना
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हनुमान जी की मूर्ति या रामदरबार का चित्र स्थापित करें।
4. ध्यान और मंत्र
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हाथ में चावल, पुष्प, दूर्वा लेकर इस मंत्र का उच्चारण करें:
ध्यान मंत्र:
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
5. अर्पण
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हनुमान जी को गंध, सिंदूर, कुमकुम, चावल, फल और हार चढ़ाएं।
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प्रसाद में चूरमा, भीगे हुए चने या गुड़ अर्पित करें।
6. पाठ और आरती
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हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
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घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर आरती करें।
7. प्रसाद वितरण
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पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
हनुमान जी को सिंदूर कैसे चढ़ाएं, सिंदूर चढ़ाने का महत्व
सिंदूर का महत्व
हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सीता हनुमान जी को सिंदूर दे रही थीं, तो हनुमान जी ने पूछा — “माता, आप यह सिंदूर क्यों लगा रही हैं?” माता सीता ने उत्तर दिया — “जिससे श्रीराम जी की लंबी आयु हो।” हनुमान जी ने तुरंत अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि इससे भी प्रभु राम की लंबी आयु होगी।
इसलिए हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से:
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आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
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संकटों से रक्षा मिलती है।
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मंगल और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
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विजय और सफलता मिलती है।
सिंदूर चढ़ाने की विधि
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शुद्ध सिंदूर लें: बाजार से शुद्ध सिंदूर खरीदें।
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तिल का तेल मिलाएं: सिंदूर में थोड़ा सा तिल का तेल मिलाएं।
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मूर्ति पर लगाएं: हनुमान जी की मूर्ति के माथे और शरीर पर सिंदूर का तिलक लगाएं।
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मंत्र जाप: “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें।
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स्वयं भी लगाएं: पूजा के बाद अपने माथे पर भी सिंदूर का तिलक लगाएं।
स्त्रियों के लिए सावधानी
कुछ परंपराओं में स्त्रियों को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से मना किया जाता है। यदि आपके क्षेत्र में ऐसा लोकाचार है, तो उसका पालन करें। अन्यथा, स्त्रियां भी सिंदूर चढ़ा सकती हैं।
हनुमान जी का मंत्र, हरेगा सारे कष्ट
क्या स्त्रियां हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?

हाँ, स्त्रियां हनुमान जी की पूजा निश्चित रूप से कर सकती हैं। यह एक आम भ्रम है कि हनुमान जी की पूजा केवल पुरुष ही कर सकते हैं। वास्तव में, शास्त्रों में महिलाओं के लिए हनुमान पूजा पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
किन बातों का ध्यान रखें:
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रजस्वला अवस्था में पूजा न करें: इस दौरान किसी भी देवता की पूजा वर्जित मानी गई है।
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विशेष साधनाएं: 40 दिनों या उससे अधिक की विशेष साधनाएं महिलाएं मध्य में व्यवधान के कारण पूर्ण नहीं कर पातीं, इसलिए वे पुरुषों द्वारा ही की जाती हैं।
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सामान्य पूजा: दैनिक पूजा, हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड पाठ — ये सभी स्त्रियां सहजता से कर सकती हैं।
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हनुमान जी को पिता तुल्य मानें: स्त्रियों को हनुमान जी को पिता या भाई के समान मानकर पूजा करनी चाहिए।
विधवा स्त्री हनुमान जी की पूजा कर सकती है?
हाँ, विधवा स्त्री भी हनुमान जी की पूजा कर सकती है। हनुमान जी सभी भक्तों के प्रति समान भाव रखते हैं। विधवा होने के कारण किसी भी देवता की पूजा से वंचित नहीं किया जाता।
विधवा स्त्रियां विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें तो अधिक लाभ मिलता है। वे हनुमान चालीसा, बजरंग बाण (यदि उचित हो) और सुंदरकांड का पाठ कर सकती हैं।
हनुमान जी की पूजा औरतें क्यों नहीं करतीं?
यह प्रश्न इसलिए उठता है क्योंकि:
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लोक-परंपरा और भ्रम: कुछ क्षेत्रों में यह मान्यता प्रचलित है कि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, इसलिए स्त्रियां उनकी पूजा नहीं करें।
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विशेष साधनाओं की जटिलता: लंबी साधनाएं महिलाएं पूर्ण नहीं कर पातीं, इसलिए यह भ्रम फैला कि पूजा ही वर्जित है।
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कुछ मनाहियां: स्त्रियों को कुछ विशेष चीजें (जैसे वस्त्र, लंगोट, पंचामृत स्नान) अर्पित करने से मना किया गया है, जिससे गलतफहमी हुई।
वास्तविकता यह है कि सामान्य पूजा सभी स्त्रियां कर सकती हैं, बस कुछ सावधानियों का पालन जरूरी है।
हनुमान जी को भोग लगाने की सही विधि
भोग में क्या अर्पित करें:
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चूरमा: हनुमान जी को चूरमा अत्यंत प्रिय है।
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भीगे हुए चने: रात भर भिगोए हुए चने अर्पित करें।
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गुड़: शुद्ध गुड़ अर्पित करें।
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केला: केला भी अर्पित कर सकते हैं।
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पान का पत्ता: पान के पत्ते पर भोग रखें।
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घी: घी का प्रयोग सबसे उत्तम माना गया है।
भोग लगाने की विधि:
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स्वच्छ थाली: एक स्वच्छ थाली या कटोरी में भोग रखें।
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पान का पत्ता: पान के पत्ते पर भोग रखकर अर्पित करें।
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मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र बोलते हुए अर्पित करें।
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प्रसाद: पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटें।
किन चीजों से बचें:
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नमक: भोग में नमक का प्रयोग न करें।
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लहसुन-प्याज: इनका प्रयोग बिल्कुल न करें।
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बासी भोजन: हमेशा ताजा भोग अर्पित करें।
हनुमान जी की पूजा के लाभ
हनुमान जी की पूजा विधि विधान से करने से अनेक लाभ मिलते हैं:
- हनुमान जी संकटमोचक हैं। उनकी पूजा से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। भय और बाधाओं का नाश होता है। भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियों और ऊपरी बाधाओं से रक्षा होती है।
- हनुमान जी की पूजा से शनि और मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
- सिंदूर चढ़ाने और नियमित पूजा से स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है। शत्रुओं पर विजय और सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
- हनुमान चालीसा पाठ से मन को शांति मिलती है। परिवार में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है। धन की प्राप्ति और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- हनुमान जी की पूजा विधि विधान से करने से रोग-व्याधि से मुक्ति मिलती है. गंभीर रोगों से मुक्ति और शीघ्र स्वस्थ के लिए हनुमद् आराधना का विधान कहा गया है।
स्त्रियों के लिए विशेष सावधानियां
महिलाएं हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं, बस इन बातों का ध्यान रखें:
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मूर्ति को स्पर्श न करें: कुछ परंपराओं में महिलाओं को मूर्ति को सीधे स्पर्श करने से मना किया गया है। महिलाएं आंचल से स्पर्श करती हैं।
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पंचामृत स्नान न कराएं: कुछ शास्त्र महिलाओं द्वारा मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराने बचने को कहते हैं।
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वस्त्र या चोला न चढ़ाएं: हनुमान जी को वस्त्र, चोला लंगोट या जनेऊ पुरुष से अर्पित करवाएं।
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सिंदूर चढ़ाने में सावधानी: कुछ मंदिरों में स्त्रियों को सिंदूर चढ़ाने से मना किया जाता है। यदि संकोच हो, तो केवल फूल और दीपक अर्पित करें।
- रजस्वला अवस्था में पूजा न करें।
शिवलिंग पूजा विधि: क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं? शिव प्रसाद खाना चाहिए?
हनुमान जी की पूजा विधिः पांच सरल मंत्र
1. मूल मंत्र
ॐ हं हनुमते नमः
इस मंत्र की एक माला जप से भी हनुमानजी की पूजा पूर्ण हो जाती है।
2. श्रीहनुमान स्तुति
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
अर्थ: अतुलनीय बल के धाम, सोने के पर्वत के समान कांतिमान शरीर वाले, राक्षस रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि के समान, ज्ञानियों में अग्रगण्य (श्रेष्ठ), संपूर्ण गुणों के खान, वानरों के स्वामी और श्री रघुपति (भगवान राम) के प्रिय भक्त पवनपुत्र (श्री हनुमान जी) को मैं प्रणाम (नमन) करता हूँ।
3. सरल जप
यदि स्तुति स्मरण न हो, तो केवल “ॐ राम रामाय नमः” का जप करें।
4. हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा का पाठ हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है। प्रतिदिन 11 बार इसका पाठ करने से मानसिक पीड़ा से शांति मिलती है। धैर्य, आत्मविश्वास, साहस और बल में वृद्धि होती है। भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
5. रामबाण है द्वादश नाम जपः
हनुमान जी ने अपने प्रभु श्रीराम के वे कार्य सिद्ध किए जो असंभव जैसे ही थे। श्रीराम ने उन्हें आशीर्वाद दिया है कि अगर हनुमानजी का स्मरण करके कठिन कार्य किया जाए तो वह सरल हो जाएगा।
यदि आप लगातार किसी कार्य को करने में असमर्थ हो रहे हैं और वह कार्य ऐसा है जिसमें कोई बुरी भावना नहीं और जिससे दूसरों का कल्याण हो सकता है तो आपको हनुमानजी के द्वादश (बारह) नाम जप करके उसे आरंभ करना चाहिए। इसकी कम से कम एक माला जप लें।
मंगलवार को इसका जप अवश्य करना चाहिए. हनुमान जी की भक्ति में एक खास बात यह भी है कि उनकी पूजा के लिए विशेष प्रयोजन की जरूरत नहीं होती.
हनुमान जी की भक्ति निष्काम है इसलिए उन्हें प्रसन्न करने से सभी देवताओं की कृपा मिल जाती है. हनुमानजी प्रसन्न होते हैं उनके 12 नामों के जप से क्योंकि उन नामों में हनुमानजी के आराध्यों के नाम हैं.
1. हनुमान
2. अंजनीसुत
3. वायुपुत्र
4. महाबल
5. रामेष्ट
6. फाल्गुण सखा
7. पिंगाक्ष
8. अमित विक्रम
9. उदधिक्रमण
10. सीता शोक विनाशन
11. लक्ष्मण प्राणदाता
12. दशग्रीव दर्पहा
हनुमान जी की पूजा विधिः कुछ सावधानियां जिनका ध्यान रखें

हनुमान जी की पूजा में तो वैसे बहुत अधिक विधान नहीं हैं। फिर भी अपने आराध्य की पूजा में कुछ तो सावधानियां रखनी ही चाहिए. हनुमद् आराधना में ध्यान रखने योग्य बातें-
- हनुमान जी की साधना अवधि में और व्रत में संयम रखें. उपासना अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन होना चाहिए.
- हनुमान जी को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद शुद्ध होना चाहिए. उसमें घी का प्रयोग सबसे उत्तम बताया गया है.
- हनुमान जी की पूजा में यदि दीपक जला रहे हैं तो घी के दीपक की ही प्रयोग करें.
- हनुमान जी को लाल फूल प्रिय हैं. अत: उन्हें लाल फूल विशेष रूप से चढ़ाएं.
- हनुमान जी की मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तिल का तेल मिलाकर उसका लेप करना चाहिए. इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं.
- हनुमान साधना हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही शुरू करना चाहिए.
- स्त्रियां हनुमानजी को वस्त्र न अर्पित करें. वे ज्यादा से ज्यादा जनेऊ उन्हें अर्पित कर सकती हैं.
- हनुमान जी को चमेली का तेल भी चढ़ाया जाता है.
- हनुमान जी की पूजा आरंभ करने से पूर्व श्रीराम जी की स्तुति जरूर कर लें.
निष्कर्ष
हनुमान जी की पूजा कैसे करें — इसका उत्तर सरल है: श्रद्धा, पवित्रता और नियम से करें। स्त्रियां हनुमान जी की पूजा निश्चित रूप से कर सकती हैं, बस कुछ सावधानियों का पालन जरूरी है। विधवा स्त्री भी हनुमान पूजा कर सकती है और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति पा सकती है।
हनुमानजी की भक्ति निष्काम है। उन्हें प्रसन्न करने से सभी देवताओं की कृपा मिल जाती है। उनके 12 नामों का जप, हनुमान चालीसा पाठ, और सरल पूजा विधि से आप संकटों से मुक्त हो सकते हैं।
संकलन व संपादनः
राजन प्रकाश
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