हिरणी के शाप से बाघ बन गए राजा प्रभंजन, नंदा के उपदेश से हुई शापमुक्ति
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हिरणी ने राजा से कहा- तूने एक माता को तब मारा है, जब वह अपने बच्चे को दूध पिला रही थी. मेरे मांस के लोभ में तुमने एक नवजात बच्चे से उसका आहार छीना है.
राजा मैं तुझे शाप देती हूं कि तू हिंसक पशु बन जाएगा. तुम बाघ बन जाओ. जंगल में रहकर अपना पेट भरने के लिए जीवों की हत्या करके उनका कच्चा मांस खाओ.
हिरणी के पशु बनकर कच्चा मांस खाने के शाप से राजा दुखी हो गया. उसने कहा- राजा होने के कारण मुझे शिकार का अधिकार है परंतु किसी बच्चे से आहार छीनने का अधिकार नहीं है.
परंतु हे कल्याणी! मैं यह नहीं जानता था कि तुम उस समय अपने बच्चे को दूध पिला रही हो. मेरे अपराध क्षमा करो और शाप से मुक्ति का मार्ग बताओ.
हिरणी ने बताया- तुम सौ वर्षों तक बाघ की योनि में रहोगे. उसके बाद नन्दा नाम की एक गाय आएगी. उससे शास्त्रों का ज्ञान मिलने के बाद तुम्हें शाप से मुक्ति मिलेगी.
शाप के कारण प्रभंजन बाघ की योनि में चले गए. पशुओं और मनुष्यों को मारकर पेट भरने लगा. इस योनि में दुखी राजा शापमुक्ति की प्रतीक्षा करता रहा.जीवों की हत्या करते और कच्चा मांस खाते राजा को सौ वर्ष बीत गए. एक दिन उस वन में गायों का एक झुंड आया. उस झुंड की प्रधान नंदा नामक गाय थी.
एक दिन नंदा गाय अपने झुंड से बिछड़ गई और भटकती हुई बाघ के सामने पड़ गई. बाघ ने उससे कहा- विधाता ने आज तुम्हें मेरा भोजन बनने को भेजा है.
यह सुनकर नंदा सन्न रह गई. उसे अपने बछड़े की याद आई. नंदा ने विनती की- मैंने हाल में ही बछड़े को जन्म दिया है. अभी वह घास नहीं खा पाता.
भूख से व्याकुल होकर वह मेरी राह देख रहा होगा. मैं विनती करती हूं कि मुझे अभी जाने दो. मैं बच्चो को दूध पिलाकर और उसके पालन की जिम्मेदारी सखियों को सौंपकर वापस आ जाउंगी.
बाघ सुनने को राजी न था लेकिन ने नंदा बार-बार विनती की और बाघ को वापस आने का वचन दिया तो बाघ मान गया. उसने नंदा को जाने दिया.
नंदा ने बछड़े को प्यार किया और सबको बाघ की बात बताई. सभी ने कहा कि एक बार जान बची है इसलिए दोबारा काल के गाल में जाने की जरूरत नहीं.नंदा अपना वचन निभाने की बात पर अटल रही. उसने अपने बच्चे और सखियों को नीति का ज्ञान दिया और उनके हवाले अपना बच्चा छोड़कर बाघ के पास पहुंची.
गाय को वापस आया देखकर बाघ हैरान रह गया. गाय के पीछे उसका बछड़ा भी आ गया. बाघ ने कहा- ऐसा सत्यवादी पशु मैंने पहले कभी नहीं देखा. मैं तुम्हारी हत्या नहीं करुंगा.
बाघ ने उसे बहन कहकर, उसका नाम पूछा- उसने अपना नाम नंदा बताया तो राजा को पूर्वजन्म की बातें याद आने लगीं. नंदा ने उसे नीति का अनमोल ज्ञान दिया.
नंदा के प्रभाव से प्रभंजन शापमुक्त हो गया. नंदा की धर्मनिष्ठा को देखकर धर्मराज वहां प्रकट हुए. उन्होंने प्रसन्न होकर नंदा को दो वरदान दिए.
पहले वरदान से नंदा बछड़े के साथ स्वर्गलोक चली गई. दूसरा वरदान यह था कि जिस स्थान पर उसे धर्मराज के दर्शन हुए वहां सरस्वती नदी का नाम नंदा हो जाए. उस क्षेत्र में सरस्वती का एक नाम नंदा भी है.
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