वेश बदलकर आए शिवजी का ऋषियों ने किया अपमानः ब्रह्मा बोले श्वेत मुनि सा खोजो शिवोपासना में निदान- भाग2

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हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.पिछली कथा
दारूवन के ऋषियों ने अंजाने में शिवजी का अपमान कर दिया. वे ब्रह्माजी के पास पहुंचे. ब्रह्माजी ने उन्हें एक कथा सुनाई कि कैसे अतिथि को शिवस्वरूप समझकर एक ब्राह्मण ने मृत्यु को जीत लिया.
ब्रह्माजी ने ऋषियों से कहा- तुम सब शिव के अपराधी हो. इसलिए उनकी शरण में जाकर उन्हें प्रसन्न करो. उनकी कृपा से श्वेत मुनि ने सारे असंभव को संभव किया था. ऋषियों की विनती पर ब्रह्माजी ने श्वेत मुनि की कथा सुनानी शुरू की.
एक बार की बात है. श्वेत नामक एक मुनि पहाड़ की गुफा में रहकर रुद्रमंत्र का निरंतर जप करते हुए महेश्वर की आराधना करते थे. श्वेत मुनि को तपस्या करते बहुत से वर्ष बीत गये.
भगवान शिव सिद्ध हुए या नहीं यह तो स्पष्ट न हो सका पर श्वेत मुनि की आयु अवश्य पूरी हो गयी. गुफा में भगवान शिव की तपस्या में लीन शिवभक्त श्वेत मुनि को लेने के ले जाने के लिए काल स्वयं आया.
श्वेत मुनि ने गुफा में मिट्टी का शिवलिंग स्थापित कर रखा था और उसी की पूजा निरंतर करते थे. उनका विश्वास था कि इस शिवलिंग में भगवान शिव साक्षात बिराजते हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.काल को देखकर बिना भयभीत हुए श्वेत मुनि ने भगवान शिव को पुकारा. आह्वान किया और गरज कर काल से बोले- मृत्यु मेरा क्या कर सकती है. मैं मृत्यु का भी मृत्यु हूं. काल तू मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता. मैं परम रुद्र भक्त हूं.
यह सुनकर काल बोला- हे श्वेत, चलो अब आपका समय पूरा हो चुका. तुम्हारी इस धमकी से मैं पीछे हटने वाला नहीं. एक बार मैं यदि किसी का प्राण हरने आ गया तो कोई नहीं ब सकता चाहे वह कितनी भी स्तुति कर ले. यमलोक चलो.
यह सुनकर श्वेत मुनि विलाप करने लगे. पर वे अधीर हुए बिना पूरे विश्वास से बोले- मेरे नाथ वृषभध्वज हैं. मुझ जैसे शिवभक्तों का तू कोई अनिष्ट नहीं कर सकता. मेरी आराधना पूर्ण होने तक तुम मुझे छू भी नहीं सकते. तुम लौट जाओ.
काल न माना. एक कुटिल हंसी के साथ उसने श्वेत मुनि को अपने पाश में बांध ही लिया और बोला- देख मैंने तुझे बांध लिया. इस लिंग में स्थित शिवजी ने तेरी रक्षा नहीं की. काल के आगे किसी की गति नहीं चलती.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तेरी इस तरह अटूट भक्ति और समय व्यर्थ करने वाली पूजा ने आखिर क्या फल दिया है. यह कहकर हंसते हुए गर्व में भरा काल मूर्खता में शिवजी का उपहास करता श्वेत मुनि को लेकर यमलोक की ओर चला.
तभी सामने अचानक अम्बा, गणपति और नंदी प्रकट हो गए. उन्हें देखकर काल ने मुनि को तत्काल छोड़ दिया. काल वहीं भयानक पीड़ा से चीखता हुआ पछाड़ खाकर गिर पड़ा.
कालों के भी काल महाकाल के अंश को देखकर काल स्वयं निश्चेष्ट पड़ा था. अपने भक्त की रक्षा के लिए दौड़े महाकाल की इस कृपा को देखकर देवगण फूलों की वर्षा ऊंचे स्वर में शिव और अम्बा की स्तुति करने लगे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.ब्रह्मा बोले- श्वेत मुनि ने अपने विश्वास से न सिर्फ महादेव को प्राप्त किया बल्कि, भगवती और गणेश की कृपा भी एक साथ मिल गई. इसलिए हे ब्राह्मणों सबको भक्ति व मुक्ति देने वाले मृत्युंजय भगवान शिव की पूजा ही श्रेष्ठ है.
तुम सब शिवजी की शरण में जाओ. विधिवत पार्थिव लिंग बनाकर पूजा करो और अज्ञानता में हुए अपराध के लिए क्षमा मांगते हुए स्तुति करो. शिवजी की कृपा से तुम्हारा अभीष्ट प्राप्त होगा. सभी मुनिगण शिवोपासना के लिए तत्पर होकर लौटे.
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संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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