आध्यात्म व्यवहारिक विवेक के द्वार खोलता है, ढोंग का आवरण नहीं बनताः प्रेरक कथा

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हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तीन व्यक्ति एक सिद्ध गुरु से दीक्षा प्राप्तकर वापस लौट रहे थे. गुरुजी ने उन्हें कहा था कि आध्यात्मिक ज्ञान के साथ- साथ व्यवहारिक ज्ञान भी हो तो व्यक्ति अवश्य सफल होता है.
तीनों सभी ग्रंथों पर चर्चा करते आगे बढ़ते जा रहे थे. कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि अब थोड़ा विश्राम करना चाहिए और रात गुजार कर ही आगे बढ़ना चाहिए.
वे स्थान पर रूक गए. खाने की पोटली खोली पर दुर्भाग्यवश उसमे एक ही रोटी बची थी. तीनों ने सोचा एख रोटी को तीन हिस्से में बांटकर खाने से किसी की भूख तो नहीं मिटेगी.
अच्छा हो कि तीनों में से कोई एक ही इसे खा ले. पर वह एक व्यक्ति कौन हो ये कैसे पता चले? चूँकि वे आध्यात्मिक अनुभव कर लौट रहे थे इसलिए तीनों ने तय किया कि इसका निर्णय भगवान पर छोड़ देंगे.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.भगवान ही कुछ ऐसा इशारा करेंगे कि समझ में आ जायेगा कि रोटी किसे कहानी चाहिए. ऐसा सोच कर वे तीनों लेट गए. थके होने के कारण जल्द ही सबकी आँख लग गयी.
अगली सुबह उठे तो पहले व्यक्ति ने कहा- कल रात मेरे सपने में एक देवदूत आए, मुझे स्वर्ग की सैर पर ले गए. सचमुच इससे पहले मैंने कभी ऐसे दृश्य नहीं देखे थे. असीम शांति, असीम सौंदर्य.
मैंने हर जगह देखी. जब मैं भ्रमण के अंतिम चरण में था तो सफ़ेद वस्त्र पहने एक महात्मा ने मुझसे कहा- पुत्र ये रोटी लो. इसे प्रसाद समझो और अपनी भूख मिटाओ.
पहले ने बात खत्म ही की थी कि दूसरा बोला- कितनी अजीब बात है. मैंने भी बिलकुल ऐसा ही सपना देखा. अंत में महात्मा ने मुझे स्पष्ट आदेश दिया कि मैंने जीवन भर लोगों का भला किया है इसलिए रोटी पर मेरा ही हक़ बनता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.दोनों की बातें सुन तीसरा व्यक्ति चुपचाप बैठा रहा. दोनों ने पूछा- तुमने भी सपना देखा? तब वह बोला- सपने में ऐसा कुछ भी नहीं देखा न कहीं गया और न ही मुझे महात्मा दिखे लेकिन रात में जब मेरी नींद टूटी तो मैंने रोटी खा ली.
दोनों ने गुस्से से भरकर कहा- तुमने ये क्या अनर्थ किया. ऐसा करने से पहले तुमने हमें बताया क्यों नहीं.
तीसरे ने कहा- कैसे बताता, तुम दोनों अपने-अपने सपने में इतने दूर जो चले गए थे. और कल ही तो गुरुजी ने हमें बताया था कि आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान का महत्व समझना चाहिए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.मेरे मामले में भगवान ने जल्द ही मुझे संकेत दे दिया कि भूखों मरने से अच्छा है कि रोटी खा ली जाए क्या पता कल बासी रोटी खाने लायक ही न रह जाए और मैंने वही किया.
आध्यात्म आपको शक्ति देता है, आपके विवेक के द्वार को खोलता है, उसे अवरूद्ध नहीं करता. जो उसका मर्म नहीं समझ पाते वे भ्रम में होते हैं. आध्यात्म उनके लिए मिथ्याप्रचार का साधन बन जाता है. ऐसे कपट मुनियों से बचना चाहिए.