बनने लगेंगे काम यदि ऐसे लगाएंगे तिलक
सूने मस्तक को मंगलकार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता इसलिए तिलक का विधान है। ज्यादातर लोग तिलक से जुड़े विधानों से अपरिचित हैं और चूक करते हैं। हम आपको तिलक लगाने से जुड़े सभी शास्त्रीय विधानों से इस पोस्ट में परिचित कराएंगे।
हिन्दू परंपराओं में सिर, मस्तक, गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल बारह स्थानों पर तिलक लगाने का विधान है पर सबसे अधिक महत्व सिर पर दोनों भौंहों के बीच लगने वाले तिलक का है।
शुभफल के लिए किस उंगली से किस अवसर पर लगाएं तिलक-
विष्णु संहिता में इस बात का उल्लेख है कि किस प्रकार के कार्य में किस अंगुली से तिलक लगाना उचित होता है।
किसी भी तरह के शुभ और वैदिक कार्य करे समय अनामिका अंगुली यानी रिंग फिंगर(चौथी अंगुली) से तिलक लगाना चाहिए.
पितृ कार्य यानी पितरों से जुड़े कार्य करते समय मध्यमा उंगली से तिलक लगाना चाहिए.
ऋषि कार्य यानी ऋषि स्तुति, ऋषि पूजन, गुरू पूजन आदि में कनिष्ठिका या छोटी उंगली से तिलक लगाना चाहिए.
तांत्रिक क्रियाओं में प्रथम यानि तर्जनी अंगुली से तिलक किया जाना चाहिए.
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तिलक लगाने के लिए भिन्न-भिन्न अंगुलियां का प्रयोग अलग-अलग फल प्रदान करता है।
अगर तिलक अनामिका अंगुली से लगाया जाता है तो इससे शांति मिलती है।
मध्यमा अंगुली से तिलक करने पर आयु में बढ़ोत्तरी होती है। रक्षाबंधन के समय बहिनें अपने भाई को मध्यमा या अनामिका से तिलक करती हैं।
अंगूठे से तिलक करना पुष्टिदायक माना गया है। रणक्षेत्र में योद्धा अंगूठे से तिलक लगाते हैं।
सप्ताह के किस दिन लगाएं कौन सा तिलक तो होगा विशेष लाभ, अगले पेज पर पढ़ें.विशेष लाभ के लिए सप्ताह के किस दिन किसका तिलक करें.
सोमवार:
सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है तथा इस वार का स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं।चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए आप सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इस दिन विभूति या भस्म भी लगा सकते हैं।
मंगलवार:
मंगलवार को हनुमानजी का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है।मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है। इससे मन की उदासी और निराशा हट जाती है और दिन शुभ बनता है।
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बुधवार:
बुधवार को भगवान श्री गणेश और मां जगदंबा का दिन भी माना गया है। इस दिन का ग्रह स्वामी है बुध ग्रह। इस दिन सूखे सिंदूर जिसमें कोई तेल न मिला हो का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है और दिन शुभ रहता है।
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गुरुवार:
बृहस्पति ऋषि देवताओं के गुरु हैं। इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा। इस दिन का स्वामी ग्रह है बृहस्पति ग्रह। गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। इस दिन सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे मन में पवित्र और सकारात्मक विचार तथा अच्छे भावों का उद्भव होगा जिससे दिन भी शुभ रहेगा और आर्थिक परेशानी का हल भी निकलेगा।
शुक्रवार, शनिवार और रविवार के तिलक के बारे में जानें अगले पेज पर…शुक्रवार:
शुक्रवार का दिन श्रीविष्णुप्रिया लक्ष्मीजी का है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है। हालांकि इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहां तनाव दूर रहता है वहीं इससे भौतिक सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि होती है। इस दिन सिंदूर भी लगा सकते हैं।
शनिवारः
शनिवार को भैरव, शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है शनि ग्रह। शनिवार के दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिए जिससे भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देते। दिन शुभ रहता है।
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रविवार:
रविवार का दिन भगवान श्री विष्णु और सूर्यदेव का दिन रहता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है सूर्य ग्रह जो ग्रहों के राजा हैं।इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाएं। भगवान श्री विष्णु की कृपा रहने से जहां मान-सम्मान बढ़ता है वहीं निर्भयता आती है।
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तिलक कई प्रकार के होते हैं.
कुमकुम,
केशर,
चंदन,
भस्म
हल्दीअगले पेज पर जानें तिलक के फायदे?
कुमकुम का तिलकः
कुमकुम या रोली को हल्दी और चूना को मिलाकर बनाया जाता है। कुमकुम का तिलक आज्ञा चक्र की शुद्धि करते हुए उसे केैल्शियम देते हुए ज्ञान चक्र को प्रज्जलित करता है। कुमकुम से मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटाएंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन होता है। मेधा शक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट नहीं होती साथ ही कुंकुम का तिलक त्वचा रोगों से मुक्ति दिलवाता है। इसलिए कुमकुम का तिलक ही सबसे ज्यादा प्रचलित है।
केशर का तिलकः
केसर ओज को बढ़ाता है। जिसका मस्तिष्क ठंडा शीतल होता है उसको केसर का तिलक प्रज्ज्वलित करता है। त्वरित निर्णय जहां करना हो वहां केसर का तिलक लगाकर जाना चाहिए।
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चंदन का तिलकः
दिमाग को शीतलता प्रदान करते हुए मानसिक शान्ति भी देता है।
भस्मः
वैराग्य की अग्रसर करते हुए मस्तिष्क के रोम कूपों के विषाणुओं को भी नष्ट करता है।
जो भी व्यक्ति बिना तिलक लगाए भोर या संध्या का हवन करता है उसे इसका फल नहीं प्राप्त होता।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि तिलक धारण किया जाता है तो सभी पाप नष्ट हो जाते है सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव और अन्य मतों के अलग-अलग तिलक होते हैं। चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है, व्यक्ति संकटों से बचता है, उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है, ज्ञानतंतु संयमित व सक्रिय रहते हैं। यदि वार अनुसार तिलक धारण किया जाए तो उक्त वार से संबंधित ग्रहों को शुभ फल देने वाला बनाया जा सकता है।
अगले पेज पर जानें तिलक लगाने का मंत्र और क्यों लगाना चाहिए तिलकतिलक लगाने का मंत्र
केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम ।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु ।।
कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम् ।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम् ।।
किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इससे क्या लाभ है? टीका लगाने के पीछे आध्यात्मिक भावना के साथ-साथ दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है।
आम तौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का तिलक लगाने का विधान है. अगर कोई तिलक लगाने का लाभ तो लेना चाहता है, पर दूसरों को यह दिखाना नहीं चाहता, तो शास्त्रों में इसका भी उपाय बताया गया है. कहा गया है कि ऐसी स्थिति में ललाट पर जल से तिलक लगा लेना चाहिए.
तिलक लगाने का लाभः
तिलक करने से व्यक्तित्व प्रभावशाली हो जाता है।
इसके पीछे धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी हैं। बहुत से विधर्मी तिलक लगाने पर हंसते हैं, उन्हें सही उत्तर देने के लिए हमें तिलक लगाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण को जानना आवश्यक है।
नाड़ी विज्ञान के अनुसार हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है।
मस्तक पर भौंहे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहीं हमारा आज्ञाचक्र स्थित होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं। ये तीनों नाडि़यां इतनी महत्वपूर्ण हैं कि इनके मिलन स्थल की तुलना त्रिवेणी या संगम से की जाती है। आज्ञाचक्र त्रिवेणी कहलाता है।
यह गुरु स्थान है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी कारण शरीर में यह स्थान सबसे अधिक पूजनीय है। इसलिए जब हम तिलक लगाकर रखते हैं तो आज्ञाचक्र सक्रिय रहता है। आप खुद महसूस करें कि जब आप तिलक लगाए रखते हैं तो महसूस होता है कि तिलक के स्थान पर कुछ दबाव है। जब तिलक नहीं लगाते तो ऐसा अनुभव नहीं होता।
तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्ति के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर वृद्धि होती है।
स्त्रियां बिंदी लगाने में ऐसा अनुभव कर सकती हैं।
ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग शांति व सुकून अनुभव करते हैं. यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है.
दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है, जिससे उदासी दूर होती है और मन में उत्साह जागता है. यह उत्साह लोगों को अच्छे कामों में लगाता है
इससे सिरदर्द की समस्या में कमी आती है.
हल्दी से युक्त तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध होती है. हल्दी में एंटी बैक्ट्रिवयल तत्व होते हैं, जो रोगों से मुक्त करता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन का तिलक लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है. लोग कई तरह के संकट से बच जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है.
माना जाता है कि चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है.
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