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पांडव जिस संयोग के लिए जीवनभर तरसते रहे, आज बना है वह संयोगः सोमवती अमावस्या पर जरूर करें यह काम

पांडव जिस संयोग के लिए जीवनभर तरसते रहे, आज बना है वह संयोगः सोमवती अमावस्या पर जरूर करें यह काम

Shani-Dev-
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यह कथा प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प में प्रकाशित हो चुकी है.
आज 18 मई 2015 को उदया तिथि से सोमवती अमावस्या है. अमावस्या का आरंभ कल ही हो गया था लेकिन आज सूर्योदय से सुबह 9:45 तक भी अमावस्या रही इसलिए यह सोमवती अमावस्या कही गई है.

ज्योतिषशास्त्र में उदया तिथि से आरंभ हुई तिथि की गणना पूरे दिन करने का भी प्रावधान है इसलिए आज दिनभर सोमवती अमावस्या कही जाएगी. सोमवार की अमावस्या बड़े भाग्य से ही होती है.

प्रत्येक मास अमावस्या आती है परंतु ऐसा बहुत कम होता है जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़े. कहते हैं पाण्डव पूरे जीवन तरसते रहे, परन्तु उनके जीवनकाल में सोमवती अमावस्या नहीं आई.

इसलिए सोमवती अमावस्या की महिमा बड़ी है. इस दिन को नदियों, तीर्थो में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

सोमवार चंद्रमा का दिन है. इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चंद्र एक सीध में स्थित रहते हैं. इस कारण भी यह विशेष फल देने वाला होता है. सोमवार शिवजी का दिन है इसलिए सोमवती अमावस्या महादेव को भी बड़ी प्रिय है.

इस दिन गंगास्नान करके शिव-पार्वती और फिर तुलसी की पूजा करनी चाहिए. यदि गंगास्नान संभव नहीं है तो स्नान के जल में कुछ गंगाजल मिला सकते हैं.

सोमवती अमावस्या अखंड सौभाग्य के साथ-साथ दरिद्रता का नाश करने वाली भी बताई गई है. आज सोमा धोबन और उसके आशीर्वाद से अपना वैधव्य दोष मिटाने वाली ब्राह्मण कन्या की कथा सुननी और सुनानी चाहिए.

सोमा धोबन की कथा हमने कल प्रकाशित की थी. आपके एप्प में मौजूद है. उसे स्वयं वांचिए और दूसरों को भी सुनाइए तो विशेष फल होता है.

कहा गया है कि यदि सोमवती अमावस्या को भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए 108 बार तुलसी की प्रदक्षिणा की जाए तो घर से दरिद्रता का अंत होता है. प्रदक्षिणा करते समय श्री हरि, श्री हरि, बोलते रहें.

आज महादेव के पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जप तो करना ही चाहिए इसके साथ-साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी अवश्य करें तो ज्यादा कल्याणकारी रहेगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

पांडव जिस मुहूर्त के लिए तरसते रहे वह हमें नारायण की कृपा से सुलभ हुआ है. इसे गंवाना तो जैसे हाथ में आए किसी खजाने को कुंए में डाल देने जैसा होगा.

आज एक और अच्छा संयोग है. आज शनिदेव की जयंती है. शनिदेव भगावन शिव की कृपा से ग्रहों के बीच दंडाधिकारी बने हैं, और वह श्रीहरि के शिष्य हैं. अर्थात यह संयोग तो अद्भुत है.

इसलिए आज शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिमंत्र ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनिश्चरायै नमः का जप और दशरथकृत शनिस्तोत्र भी पढ़ना चाहिए. काले कपड़े, काला तिल, छतरी या जूता या तेल गरीबों को दान करें. संभव हो तो कोई काला वस्त्र धारण कर मंदिर जाएं.

विष्णुसहस्त्रनाम में नारायण के नाम बड़े-बड़े पदों में हैं इसलिए उन लोगों को थोड़ी परेशानी होती है जो इसके अभ्यस्त नहीं है. हमने प्रभु शरणं एप्प में पदों का विच्छेद करके सबसे सरल रूप में और सिर्फ वही पद दिए हैं जिनमें श्रीहरि के नाम का वर्णन है.

दशरथकृत शनि स्तोत्र और विष्णुसहस्त्रनाम भी आपके एप्प में है. यह सब मंत्र-चालीसा सेक्शन में है. श्रीविष्णुशरणम् सेक्शन और शनिदेव शरणम् सेक्शम में देख सकते हैं.

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प्रभु शरणम्

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