शिव का किरात अवतारः अर्जुन की परीक्षा के लिए महादेव ने धरा किरात का रूप और घोर युद्ध करके किया अर्जुन के बलबुद्धि का आंकलन

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इंद्र के उपदेश तथा वेद व्यासजी के आदेश पर अर्जुन ने दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए भगावन शिव की ओर तपस्या आरंभ कर दी. कई महीने तक एक पैर पर खड़े होकर शिव बीजमंत्र का जप करते रहे.
उनके शरीर से तेज निकलने लगा. इस कारण ॠषि-मुनियों को पूजा-पाठ में बाधा होने लगी. ऋषियों के अनुरोध पर देवताओं ने महादेव से प्रार्थना की कि वे अर्जुन को दर्शन देकर उसका अभीष्ट पूर्ण करें.
महादेव ने देवताओं को आश्वस्त किया तो वे अपने स्थान को लौट गए. उनके जाने के बाद देवी पार्वती ने पूछा- अर्जुन को क्या चाहिए? महादेव ने बताया कि अर्जुन को दिव्य अस्त्र-शस्त्र चाहिए.
देवी ने पूछा- अर्जुन को दिव्यास्त्र प्रदान करने में क्या बाधा है? महादेव बोले कि अभी इस बात की परख नहीं हुई कि अर्जुन क्या उन दिव्यास्त्रों का प्रयोग कर लेगा? उसकी परीक्षा लेकर देखूंगा. यदि योग्यता हुई तो उसका अभीष्ट ही पूरा होगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
महादेव ने कहा- मैं किरात के भेष में जाकर अर्जुन से युद्ध करके उसकी योग्यता की परीक्षा करुंगा. देवी पार्वती ने कहा कि वह भी साथ चलेंगी. महादेव ने किरात का रूप धरा और पार्वती ने किरात-नारी का वेश धरा.
यह बात जब शिवगणों को मालूम हुई तो उन्होंने भी युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की और साथ चल पड़े. सभी किरात के भेष में इन्द्रनील वन की ओर चल पड़े.
इन्द्रनील पहुंचने पर माता पार्वती को एक विशाल शूकर दिखाई पड़ा. वह शूकर मूक नामक असुर था जिसे दुर्योधन ने अर्जुन की हत्या के लिए भेजा था. मूकासुर पर्वत शिखरों को उड़ाता, वन को छिन्न-भिन्न करता अर्जुन की ओर बढ़ा जा रहा था.
मूकासुर के उत्पात से वन में उपस्थित ॠषि-मुनि त्राहि-त्राहि करने लगे. उनकी चीख-पुकार से अर्जुन का ध्यान भंग हो गया. उन्होंने आंखें खोली और धनुष पर बाण चढ़ा लिया.
तभी किरात भेषधारी भगवान शिव अपने धनुष पर बाण चढ़ाए उसे आते दिखाई दिए. अर्जुन को शूकर का निशाना बनाते देख शिव ने कहा- ठहरो. इस शूकर पर बाण मत चलाना. यह शिकार मेरा है. मैंने बहुत देर तक इसका पीछा किया है.
अर्जुन ने कहा- किरात, शिकारी भीख नहीं मांगा करते. तुम इसे मार सको तो ले जाओ. दोनों ने तीर चलाए. शूकर के शरीर में एक साथ दो तीर आ घुसे. एक किरात भेषधारी शिव का और दूसरा अर्जुन का.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
मूकासुर ढेर हो गया. ज़मीन पर गिरते ही उसका असली रूप प्रकट हो गया. किरात नारियों के वेश में आए शिवगणों ने अपने स्वामी की जय-जयकार शुरू कर दी. इससे अर्जुन को विस्मय हुआ.
अर्जुन ने कहा- किरात शूकर मेरे बाण से मरा है. मेरे बाण से उसके प्राण निकल चुके थे तब तुम्हारे बाण ने उसे छुआ. परंतु तुम्हारे सेवक तुम्हारी जयकार कर रहे हैं. मुझे इससे कोई परेशानी नहीं परंतु तुम तो स्वीकार करो कि शूकर को तुमने नहीं मारा.
किरात ने कहा कि शूकर उन्हीं के बाण से मरा है. अर्जुन झूठ बोल रहे हैं. अर्जुन ने गर्व में भरकर चुनौती दे दी- कौन श्रेष्ठ धनुर्धर है इसका निर्णय होना चाहिए. मुझसे युद्ध को तैयार हो?
दोनों ने अपने अस्त्र-शस्त्र एक दूसरे की ओर चलाने शुरू कर दिए. देखते ही देखते भयंकर बाण-वर्षा शुरू हो गई लेकिन कुछ ही देर बाद अर्जुन का तूणीर बाणों से ख़ाली हो गया.
बाण खत्म हो गए तो अर्जुन ने किरात को लपककर अपने धनुष की प्रत्यंचा में फांस लिया किंतु एक ही क्षण में किरात ने अर्जुन से धनुष छीनकर दूर फेंक दिया.
अर्जुन चिढ़कर तलवार लेकर किरात की ओर झपटे किंतु जैसे ही अर्जुन ने तलवार किरात के सिर पर मारी, तलवार टूट गई. अर्जुन निहत्थे हो गए तो एक पेड़ उखाड़कर किरात पर फेंका.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
लेकिन किरात के शरीर से टकराते ही पेड़ किसी तिनके की भांति टूटकर नीचे जा गिरा. किरात ने अर्जुन को उठाकर धरती पर पटक दिया. बेबस होकर अर्जुन ने रेत का शिवलिंग बनाया और शिवलिंग पर एक माला चढाकर प्रार्थना करने लगे.
उनके शरीर में नई शक्ति आ गई. उन्होंने उठकर फिर से किरात को ललकारा लेकिन जैसे ही नजर किरात के गले में पड़ी फूलमाला पर पड़ी, वह स्तब्ध रह गए.
अर्जुन समझ गए कि किरात के भेष में स्वयं महादेव ही उनके सामने ख़ड़े हैं. अर्जुन किरात के चरणों में गिर पड़े, रुंधे गले से बोले- मेरे प्रभु मुझे क्षमा कर दें. मैंने गर्व किया था.
महादेव असली रूप में प्रकट हुए और बोले- मैं तुम्हारी भक्ति और साहस से प्रसन्न हूं. मैं तुम्हें पाशुपत अस्त्र का ज्ञान दूंगा. संकट के समय वह तुम्हारे काम आएगा. शिव का वचन सत्य हुआ.
महाभारत के युद्ध में अर्जुन अपने चिरशत्रु कर्ण का वध पाशुपत अस्त्र से ही करने में सफल हुए थे.
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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