देवी ने दिया अंगबाधा का शाप, रावण ने किया शनिदेव पर आघात- शनि की चाल के वक्री होने की प्रचलित कथा

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शनिदेव की दृष्टि पड़ने से गणेशजी का मस्तक छिन्न हो गया था. शीशविहीन पुत्र के शोक में दुखी पार्वती माता ने शनिदेव को अंग-भंग होने का शाप दे दिया.
बाद में श्रीहरि आदि देवताओं ने देवी को अहसास कराया कि शनिदेव की गलती नहीं है तो उन्होंने शनिदेव को कई वरदान दिए.
शाप को समाप्त तो नहीं कर सकती थीं लेकिन उन्होंने उसमें थोड़ा सुधार कर दिया. उन्होंने कहा शनि आप अपंग न होकर अंग बाधित हो जाएंगे.
शिवजी को प्रसन्नकर रावण अपार शक्तियों का स्वामी बन बैठा. वह सभी देवों को परास्तकर उनको अपमानित करने लगा.
रावण का अहंकार इतना बढ़ गया था कि अपने पुत्र मेघनाथ को अपराजेय और सर्वशक्तिमान बनाने के लिए सभी उसने ग्रहों को मेघनाथ के जन्म के समय उच्च राशि में स्थापित होने का आदेश दिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]
रावण का आदेश ठुकराने साहस किसी में न था. लेकिन शनिदेव ने मेघनाथ के जन्म के ठीक पहले एक पग बढ़ाकर अपनी राशि बदल दी.
नतीजा हुआ कि मेघनाथ अपराजेय नहीं हो सका. रावण आग-बबूला हो गया. उसने क्रोध में शनिदेव के पैर पर गदा से जोरदार प्रहार किया.
आघात इतना तीव्र था कि शनिदेव की चाल में लंगड़ाहट आ गई. इसीलिए शनि की चाल वक्री हो जाती है. इस तरह देवी के शाप के कारण शनिदेव लंगड़े हो गए.
(ब्रह्मवैवर्त पुराण से संबद्ध कथा)
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संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली