संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए, उत्तम संतान प्राप्ति के शास्त्रसम्मत उपाय 

संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए, उत्तम संतान प्राप्ति के शास्त्रसम्मत उपाय 

संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? उत्तम संतान प्राप्ति के उपाय

हर दंपत्ति की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनकी संतान स्वस्थ, तेजस्वी और गुणवान हो। लेकिन कई बार अनेक प्रयासों के बाद भी जब गर्भधारण नहीं होता, तो मन में यह प्रश्न उठता है कि उत्तम संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में इसके लिए कई अचूक संतान प्राप्ति के उपाय और गर्भधारण के नियम बताए गए हैं।

शास्त्रों में संतान उत्पत्ति के लिए किए जाने वाले समागम को ‘संतान यज्ञ’ कहा गया है और उसके लिए आवश्यक मिलन को आहुति का दर्जा दिया गया है। गर्भधारण से पूर्व बहुत से ऐसे शास्त्रीय विधान और नियम हैं जिनका पालन करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।

उत्तम संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? जानें गर्भधारण के शास्त्रीय नियम, गर्भाधान मुहूर्त, संतान बाधा निवारण और संतान प्राप्ति के उपाय।
संतान प्राप्ति के उपाय

यह पोस्ट किसके लिए उपयोगी है?

  • जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं।

  • जिनका विवाह हो चुका है या भविष्य में विवाह की योजना बना रहे हैं।

  • उन माता-पिता के लिए जिनकी विवाह योग्य संतानें हैं और वे उन्हें सही शास्त्रीय मार्गदर्शन देना चाहते हैं।

  • जिन्हें संतान प्राप्ति में लगातार बाधाएं आ रही हैं।


संतान बाधा के प्रमुख ज्योतिषीय कारण

जन्मकुंडली में पंचम भाव (5th House) को संतान का भाव माना जाता है।

  • यदि पंचम भाव में शुभ ग्रह स्थित हों अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक को स्वस्थ, दीर्घायु और बुद्धिमान संतान का सुख मिलता है।

  • यदि पंचम भाव पाप ग्रहों से पीड़ित हो, पंचमेश कमजोर हो या बृहस्पति (गुरु) की स्थिति अनुकूल न हो, तो गर्भधारण में बाधा आती है, गर्भ ठहरता नहीं या संतानहीनता की स्थिति बनती है।

  • इसके अतिरिक्त पितृदोष और पूर्वजन्म के कर्म दोष भी संतान उत्पत्ति में बाधा के बड़े कारण होते हैं।


संतान प्राप्ति में बाधा के कारण

ज्यादातर लोगों को गर्भधारण के लिए बताए गए शास्त्रीय विधानों का पता ही नहीं है. गर्भधारण के लिए यौन समागम और कामपीड़ा की तृप्ति के लिए यौन समागम में अंतर है. ज्यादातर लोग इसमें भूल करते हैं जिससे संतान के साथ जीवनभर बाधाएं रहती हैं. ज्योतिष की भी सीमा है.

आप यदि जन्म के पूर्व से ही उसके नियमों का पालन करते रहेंगे तो संतान का भविष्य वांचना आगे बहुत सरल रहता है. संतान में बाधा करने वाले ग्रह दोषों को यदि समझ लिया जाए तो संतान प्राप्ति के उपाय अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होते हैं:

  • ग्रहदोष बाधाः जन्मकुंडली में पांचवां भाव संतान का भाव होता है. यदि पांचवें भाव में शुभ ग्रह स्थिति हों अथवा शुभ्र ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक स्वस्थ और बुद्धिमान संतान से युक्त होता है.
  • यदि पंचम भाव अगर पीड़ित हो तो दंपत्ती को संतान प्राप्ति में बहुत सी बाधाएं आती हैं. गर्भधारण बाधित रहता है. गर्भ ठहरता नहीं. ठहर जाए तो असमय नष्ट हो जाता है. इससे कई बार तो दंपत्ती संतानहीन रह जाते हैं.
  • ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों या किसी एक की भी कुंडली का पंचम भाव यदि पापग्रह से पीड़ित हो तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है. पंचम भाव लग्न से या चंद्रमा से पीड़ित हो अथवा पंचम भाव से पंचम भाव और बृहस्पति की स्थिति अच्छी न हो तो भी संतान प्राप्ति में बाधा आती है.

ग्रह बाधाएं दूर करके संतान प्राप्ति के उपायः

उत्तम संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? जानें गर्भधारण के शास्त्रीय नियम, गर्भाधान मुहूर्त, संतान बाधा निवारण और संतान प्राप्ति के उपाय।
संतान प्राप्ति के उपायः संतान गोपाल मंत्र का जप

पोस्ट ज्योतिषशास्त्र की व्यापक मान्यता पर आधारित है. जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति पर यह सटीक हो ही जाए क्योंकि संतानबाधा में पूर्वजन्म के दोष, पितृदोष भी बड़े कारक होते हैं. फिर भी ज्यादातर मामलों में यह सटीक साबित होता है.

संतान प्राप्ति एक बड़ा यज्ञ है. उस यज्ञ से जुड़ी सारी बातें हर व्यस्क को अच्छे से पता होनी चाहिए.

शास्त्रों में संतान की कामना पूरा करने के कुछ कारगर और सरल उपाय बताए गए हैं. उनसे संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, उत्तम संतान प्राप्ति होती है. आज मैं इसके दो सरल उपायों पर चर्चा करूंगा.

  1. पंचम भाव की शांति पूजाः जो ग्रह पंचम भाव को पीड़ित कर रहे हों सबसे पहले उनकी शांति करानी चाहिए. उन ग्रहों की शांति किसी अच्छे ज्योतिषी के परामर्श पर वैदिक मंत्र, बीज मंत्र और तंत्र-मंत्र से करा लेनी चाहिए.
  2. देवगुरु बृहस्पति की साधना: यदि गुरु दोष के कारण बाधा हो, तो गुरुवार का व्रत रखें, केले के वृक्ष में जल दें, पीले वस्त्र धारण करें और बृहस्पति के बीज मंत्र का जप करें।
  3. संतान गोपाल मंत्र का जप: संतान बाधा निवारण और तेजस्वी संतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल मंत्र का जप सबसे अचूक उपाय माना गया है। मंत्र और इसके जप की सरल विधि भी आगे पढ़ेंगे.
  4. पुत्रदा एकादशी का व्रतः पुत्रदा एकादशी के व्रत की जुड़ी जानकारी प्रभु शरणं पर प्रकाशित हुई है. लिंक नीचे मिल जाएगा-

संतान प्राप्ति व संतान के सुखद भविष्य हेतु करें पुत्रदा एकादशी

संतान गोपाल मंत्र:

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुतं गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।

मंत्र जप की सरल विधि:

  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें और जप का संकल्प लें।

  • जप के लिए तुलसी की माला का प्रयोग करें।

  • पूजाघर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) की प्रतिमा स्थापित करें।

  • चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी दल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं, फिर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

  • मंत्र जप के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण से दीर्घजीवी, निरोगी और गुणवान संतान की प्रार्थना करें।


संतान गोपाल यंत्र की प्रतिष्ठा व उपयोग

  • गुरु-पुष्य नक्षत्र या किसी शुभ मुहूर्त में संतान गोपाल यंत्र का विधिवत पूजन और प्रतिष्ठा करें।

  • यंत्र स्थापना के बाद ‘संतान गोपाल स्तोत्र’ का पाठ करने से शीघ्र ही कुलदीपक और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है।

  • गोशाला में संतान गोपाल यंत्र प्रतिष्ठित करके गोपाल मंत्र का जप करने से असाध्य बाधाएं भी दूर होती हैं।


उत्तम संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? (गर्भधारण के शास्त्रीय नियम)

उत्तम संतान प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए? जानें गर्भधारण के शास्त्रीय नियम, गर्भाधान मुहूर्त, संतान बाधा निवारण और संतान प्राप्ति के उपाय।
संंतान प्राप्ति के उपायः गर्भाधान के नियम

संतान प्राप्ति में बाधा का एक बड़ा कारण संभोग के शास्त्रीय नियमों की उपेक्षा भी है। विलास और संतानोत्पत्ति के समागम में बड़ा अंतर होता है। शास्त्र सम्मत रीति से शुभ मुहूर्त में गर्भाधान करने पर ही मनोनुकूल संतान प्राप्त होती है:

1. समागम के लिए श्रेष्ठ समय और तिथियां

  • ऋतुकाल (मासिक धर्म) की उत्तरोत्तर रात्रियों में गर्भाधान श्रेष्ठ माना गया है (11वीं व 13वीं रात्रि वर्जित है)।

  • पुत्र प्राप्ति की इच्छा: ऋतुकाल की 8वीं, 10वीं, 12वीं, 14वीं या 16वीं रात्रि में से किसी एक शुभ मुहूर्त का चयन करें।

  • पुत्री प्राप्ति की इच्छा: ऋतुकाल की 5वीं, 7वीं, 9वीं या 15वीं रात्रि का चयन करें।

  • कृष्ण पक्ष में गर्भ ठहरने पर पुत्र और शुक्ल पक्ष में कन्या की संभावना अधिक रहती है।

  • हस्त, स्वाति, अश्विनी, मृगशिरा, अनुराधा, धनिष्ठा और रोहिणी नक्षत्रों में स्नान करने से स्त्री शीघ्र गर्भधारण करती है।

2. गर्भाधान हेतु निषिद्ध तिथियां व समय

शास्त्रों के अनुसार इन समयों में गर्भधारण हेतु समागम पूर्णतः वर्जित है:

  • पूर्णिमा, अमावस्या, प्रतिपदा, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण और उत्तरायण के दिन।

  • जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, होली, नवरात्रि और श्राद्ध पक्ष की रात्रियां।

  • चतुर्मास, प्रदोष काल, क्षय तिथि और मासिक धर्म के शुरुआती 4 दिन।

  • भरणी, मघा, रेवती और मूल नक्षत्रों की संधि वेला में गर्भाधान नहीं करना चाहिए।

  • माता-पिता की पुण्यतिथि या स्वयं की जन्मतिथि पर तथा दिन के समय समागम करने से आयु व बल का ह्रास होता है।


गर्भाधान हेतु शय्या पर जाने का शास्त्रीय विधान

गर्भाधान एक पवित्र यज्ञ है, इसलिए पति-पत्नी को शय्या पर जाने से पूर्व सूक्ष्म रूप में उपस्थित दिव्य आत्माओं से प्रार्थना करनी चाहिए:

“हे ब्रह्माण्ड में विचरण कर रहीं सूक्ष्म रूपधारी पवित्र आत्माओं! हम दोनों पति-पत्नी आपकी प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर में जन्म धारण कर कृतार्थ करें। हम दोनों अपने शरीर, मन, प्राण व बुद्धि को आपके योग्य बनाएंगे।”

  • प्रार्थना के बाद पुरुष दायां पैर पहले रखकर शय्या पर जाए।

  • स्त्री बाएं पैर से पति के दाहिनी ओर शय्या पर आए।

  • इसके बाद इस पवित्र वैदिक मंत्र का पाठ करें:

अहिरसि आयुरसि सर्वतः प्रतिष्ठासि धाता त्वां दधातु विधाता त्वां दधातु ब्रह्मवर्चसा भवेति ब्रह्मा बृहस्पति र्विष्णुः सोम सूर्यस्तथाऽश्विनौ भगोऽथ मित्रावरुणौ वीरं ददतु मे सुतम्।

(अर्थ: हे गर्भ! तुम सूर्य के समान तेजस्वी हो, मेरी आयु और प्रतिष्ठा हो। धाता और विधाता तुम्हारी रक्षा करें। ब्रह्मा, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, चंद्र, अश्विनीकुमार और मित्रावरुण तुम्हें ब्रह्मतेज और हमें  वीर संतान प्रदान करें।)

संस्कृत पढ़ना संभव नहीं होता बहुत से लोगों के लिए इसलिए हिंदी में भी पाठ कर सकते हैं.


प्रस्तुतिः
डॉ. नीरज त्रिवेदी
सहायक प्रोफेसर, ज्योतिषशास्त्र, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान
ज्योतिषाचार्य, पीएचडी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय)

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख पौराणिक ग्रंथों, पारंपरिक मान्यताओं और केवल धार्मिक ज्ञानवर्धन पर आधारित है। यह किसी योग्य चिकित्सक (Doctor/Gynaecologist) के परामर्श का विकल्प नहीं है और न ही हम इसके परिणामों का कोई वैज्ञानिक या वैधानिक दावा करते हैं। यह सामग्री भारत सरकार के PC-PNDT अधिनियम का पूर्ण सम्मान करती है तथा किसी भी प्रकार के लिंग चयन या निर्धारण का कतई समर्थन नहीं करती है। पाठक अपने स्वविवेक से निर्णय लें।


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