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शिवजी के पांच नागकन्या पुत्रियां भी हैं!

शिवजी के पांच नागकन्या पुत्रियां भी हैं!

क्या शिवजी की पुत्रियां भी हैं? क्या शिवजी पांच नागकन्या के पिता हैं. विस्मय में पड़ गए. स्वयं पार्वतीजी को भी यह विस्मय हुआ था, जब उन्होंने सुना कि शिवजी पांच नागकन्या के पिता हैं. जीवन की एक बड़ी सीख छिपी है इस कथा में. पढ़िए, सीखिए..

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भक्त जब भावविभोर हो जाता है, वह ईश्वर को अपने जैसा ही समझने लगता है. इसे ही भावातिरेक भक्ति अवस्था कहते हैं. भक्त अपने स्वभाव मेंं भगवान के स्वभाव को खोजने लगता है. आज एक कथा ऐसी सुनेंगे जिसमें शिवजी की पांच बेटियों का प्रसंग आएगा. शिवजी पांच नागकन्याओं के पिता कैसे हुए?

शिवजी के दो पुत्र कार्तिकेयजी और गौरीपुत्र गणेश के बारे में तो आप जानते हैं, पर पांच नागकन्या हैं शिवजी की पुत्रियां! अचरज में डालने की बात है न! शिवजी की पांच नागकन्या पुत्रियों की कथा भावातिरेक भक्ति की कथा है. नागकन्या पुत्रियों की बात सावन मास में मनाए जाने वाले एक उत्सव से आती है. कथा लोकपरंपरा से जुड़ी है पर है तो शिवजी से जुड़ी. इसलिए शिवभक्तों को आनंद आएगा भगवान की इस कथा में. पहले इसका बैकग्राउंड जान लेते हैं-

शिवजी की पांच नागकन्या पुत्रियों की बात कहां से आई?

एक त्योहार है मधुश्रावणी. 13 दिनों का यह पर्व विशेष रूप से बिहार के मिथिलांचल में मनाया जाता है. इसमें शिव-पार्वती की पूजा होती है.  उत्सव में नवविवाहित जोड़े शिव-पार्वती की पूजा करके सुखद दांपत्य का आशीर्वाद लेते हैं. इसके बाद शुरू होता है भक्त और भगवान के बीच हंसी-मजाक का आयोजन. भक्तगण भगवान के दांपत्य जीवन, प्रेम संबंध, आपसी नोंकझोंक, हंसी-ठिठोली आदि के किस्से इस भाव में कहते हैं जैसे शिव-पार्वती उनके घर-परिवार के सदस्य हों. जैसे किसी भी नवविवाहित जोड़ी के साथ हास-परिहास हंसी ठिठोली होती है वैसे ही शिवजी के साथ स्त्रियां भाव से ठिठोली करती हैं.

इन 13 दिनों के उत्सव में हर दिन कोई न कोई ऐसी कथा होती है जिसके केंद्र में शिव-पार्वती होते हैं. उनके संबंध को आम पति-पत्नी के संबंधों जैसा दर्शाने वाला भाव होता है. वास्तव में यह नवविवाहितों को विवाह की गाड़ी को खींचने का गुर सिखाने का बहाना है. इस गाड़ी में बीच-बीच कई बार ब्रेक लगेंगे, कई बार पटरी से उतरती दिखेगी, फिर संभलेगी भी. यह सब कुछ शिव-पार्वतीजी की कपोल कथाओं के माध्यम से सिखाया जाता है.आज मधु श्रावणी की एक प्रचलित कथा सुनेंगे जिसमें शिवजी की पांच नागकन्या पुत्रियों की बात आती है. ये कथाएं भक्तों के भाव से उपजी कथाएं हैं. इनकी प्रामाणिकता की पड़ताल से बेहतर है भक्त का भाव देखना जिसमें वह परमात्मा को भी अपने जैसा समझने लगता है. भगवान तो बस उसी भाव के भूखे हैं. विभिन्न कथाओं में सुनिए एक कथाः

नागकन्या पुत्रियों की कथा आरंभः

एक बार भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती एक सरोवर में जल क्रीड़ा कर रहे थे. जलक्रीडा के बीच ही संयोगवश महादेव का तेज स्खलित हो गया. भगवान का तेज है व्यर्थ तो जाएगा नहीं. कोई बुरी शक्ति उसे धारण कर ले तो जीव जन्म जाए वह न जाने कैसा हो. भगवान ने उस तेज को एक बड़े से पत्ते पर रख दिया.

वास्तव में वह पत्ता नहीं था. शिव-पार्वती की क्रीडा का आनंद लेने के लिए एक सर्पिणी ने पत्ते का रूप धर लिया था. उसने वह तेज धारण कर लिया इसे पांच कन्याओं का जन्म हो गया है. धारण करने वाली सर्पिणी थी इसलिए वे कन्याएं देवरूप या मनुष्य रूप में न होकर नागकन्या हुईं. पार्वतीजी को इस रहस्य की जानकारी नहीं हुई. शिवजी के भी मन में न जाने क्या आया, उन्होंने पार्वतीजी को यह बताई नहीं. भोलेनाथ पांचों नागकन्या की बात पार्वतीजी से छुपा गए.महादेव के मन में अपने तेज से प्रकट हुई उन पांचों नागकन्याओं के प्रति अनुराग उत्पन्न हुआ. वह उन्हें पुत्री मानने लगे. पुत्रीमोह में पड़े महादेव रोज सरोवर पर पाचों नागकन्या के पास आने लगे.

पार्वतीजी को इससे बड़ा विस्मय हुआ. आजकल भोलेनाथ प्रतिदिन नियम से कहां चले जाते हैं. पति के नियम में बदलाव होने पर पत्नी सशंकित होती है. खासतौर पर शांत रहने वाला पति घूमने-फिरने का अचानक शौकीन हो जाए. पार्वतीजी ने सोचा इसका पता लगाना चाहिए.

रोज की तरह शिवजी नागकन्या पुत्रियों से मिलने चले तो पीछे-पीछे पार्वतीजी भी चुपके से चल पड़ीं. वह उन्हें खोजते-खोजते उस सरोवर पर पहुंच गईं. महादेव वहां नागकन्या पुत्रियों के साथ साथ खेल रहे थे.धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-पार्वतीजी को रहस्य तो पता न था. उन्होंने महादेव को खेलता देखता तो उन्हें क्रोध आ गया. वह उन नागकन्याओं को मारने दौड़ीं. पार्वतीजी उन नागकन्याओं को मारने ही वाली थीं कि शिवजी बोले- ये पांच नागकन्या हमारी पुत्रियां हैं.नागकन्या और पुत्रियां वह भी शिव-पार्वती की. यह सुनकर उनके आश्चर्य की कोई सीमा न रही. पर शिवजी कह रहे हैं तो शंका भी नहीं करनी है. सतीरूप में शिवजी की बात पर शंका की थी तो न जाने क्या-क्या हो गया था. यह सब विचारकर पार्वतीजी शांत हुईं. उन्होंने शिवजी से पूछा- आखिर ये नागकन्या हमारी पुत्री कैसे हुईं? इनका कब जन्म हुआ… आदि, आदि.. प्रश्नों की झड़ी पार्वतीजी ने शिवजी के सामने लगा दी.

शिवजी ने कन्याओं के जन्म की सारी कथा सुना दी. कथा सुनकर पार्वतीजी हंसने लगीं.पार्वतीजी ने कहा-भोलेनाथ! आप यह रहस्य छुपा क्यों रहे थे? आप अपराधबोध से क्यों ग्रस्त थे जबकि आपने कोई भूल की ही नहीं थी? पति-पत्नी के बीच कोई राज-रहस्य ऐसा होना नहीं चाहिए जो दांपत्य को सशंकित करे,कलंकित करे. इन नागकन्याओं को आपने प्रेमवश पुत्री माना यह बात मुझे बताते तो मुझे प्रसन्नता होती. आप देवाधिदेव हैं. जीवों पर अनुराग ही आपकी प्रकृति है.

पार्वतीजी यह सब कहती जातीं और खूब हंसती जातीं. उनकी हंसी रूकती ही न थी.

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धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-निष्काम महादेव तो जैसे मोह में पड़े थे. पार्वतीजी को खिलखिलाकर हंसते देख वह भी हंस पड़े.

फिर उन्होंने बताया- शिवे! अभी तुमसे हंसने का और अवसर मिलने वाला है. मैंने तो इन कन्याओं का नामकरण भी कर रखा था. जैसे अपनी पुत्रियों का करते हैं.

यह सुनकर पार्वतीजी सच में फिर से बहुत खिलखिलाकर हंस पड़ीं. उन्होंने कहा- बिना माता के आपने नामकरण संस्कार कैसे कर दिया देव. जरा सुनूं तो क्या नाम रखा है मेरी पांचों नागकन्या पुत्रियों का.

शिवजी ने कन्याओं का नाम बताकर पार्वतीजी से परिचय कराना शुरू किया. पाचों नागकन्याका नाम रखा था- जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि.शिवजी के इस भोलेपन पर पार्वतीजी फिर खिलखिलाकर हंस दीं.  महादेव ने कहा सावन में जो भी इन कन्याओं की पूजा करेगा उसे सर्प भय नहीं रहेगा. उसके परिवार को भी सांप नहीं डंसेगे. तब से सावन में नागों की विशेष पूजा होने लगी.

पार्वतीजी ने कहा- दांपत्य जीवन पारदर्शिता वाला होना चाहिए. इसमें छोटी-छोटी बातों का बेवजह तूल नहीं देना चाहिए. क्रोधावेश में आज मैंने इन कन्याओं को मार दिया होता. सच्चाई जानने के बाद मुझे कितनी ग्लानि होती. दांपत्य का यह रहस्य है. पति-पत्नी कही सुनी बातों पर न जाएं. कई बार जो दिख रहा हो वह सत्य ही है यह आवश्यक नहीं. पति-पत्नी के बीच के संवाद की ध्वनि चार हाथ की दूरी से ज्यादा तक सुनाई पड़ने वाली नहीं होनी चाहिए. इस कथा का मूल ऐसे ही निकाला जाए.आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे उपयोगी पोस्ट बहुत मिल जाएंगे. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा.

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