Advertisement728 × 90

मौन का संदेश जिससे ईश्वर की राह मिलती है

मौन का संदेश जिससे ईश्वर की राह मिलती है

मौन का शास्त्रों में बड़ा महत्व कहा गया है. संन्यास के लिए मौन धारण करने का अभ्यास अनिवार्य बताया गया है. इसे धर्म से जोड़ने के लिए मौनी अमावस्या तक होती है. मौन क्या है, इसकी अहमियत क्या है. सुंदर कथा जिससे सीखना चाहिए.

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना  WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर  9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें. फिर SEND लिखकर हमें इसी पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना  WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

मौन साधनापथ है जो आपको भीतर से मांजकर चमकाती है जैसे कोई बर्तन मांजता है. जो नियम से मौन का अभ्यास करने लगते हैं वे धीरे-धीरे ध्यान की स्थिति में जाने लगते हैं. ध्यान की स्थिति यदि सहजता से लगने लगे तो फिर ईश्वर की अनुभूति अवश्य होने लगती है. हर धर्मनिष्ठ की यही तो कामना होती है कि उसे ईश्वर की अनुभूति हो. यानी मौन ईश्वर की अनुभूति के मार्ग का पहला दरवाजा है जिसे आपको खोलना होगा.

मौन पर चर्चा करेंगे पहले एक छोटी सी प्रेरक कथा सुनाता हूं. एक अनुरोध है यदि आपको पोस्ट पसंद आए और आप फेसबुक के माध्यम से इस पोस्ट तक पहुंचे हैं. तो कृपया उस पोस्ट को शेयर कर दीजिएगा ताकि अन्य लोगों तक भी जाए. यदि अन्य माध्यम से पहुंचे हैं तो भी इसे फेसबुक पर शेयर बटन दबाकर शेयर कर दीजिएगा. अब मौन की कथा आरंभ करते हैं.

एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे. ढलान पर से गुजरते अचानक शिष्य का पैर फिसला. शिष्य तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा. वह तो बस खाई में गिरने ही वाला था. मौत स्पष्ट नजर आ रही थी कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया. उसने लपककर बांस के पौधे को मजबूती से पकड़ लिया. इस तरह वह खाई में गिरने से बच गया.उसकी जान बचाने के लिए वह धनुष की तरह मुड़ गया. न तो वह जमीन से उखड़ा और न ही टूटा. वह बांस को मजबूती से पकड़कर लटका रहा और सहायता की प्रतीक्षा करता रहा. कुछ ही पलों में उसके गुरू शिष्यों संग भागकर सहायता को पहुंचे.

उन्होंने हाथ का सहारा देकर शिष्य को ऊपर खींच लिया. इस तरह उसकी जान बच गई थी.

संत की संगति में रहता था, इसलिए कृतज्ञता का भाव था उसमें. जिसने जान बचाई थी उसका धन्यवाद करना ही चाहिए. उसने बांस के पौधे का हृदय से धन्यवाद किया. वह सोच रहा था कि बांस कितना परोपकारी है. गुरू के साथ वह आगे बढ़ चला. उसके मन में जो भाव चल रहे थे गुरू उसे सब पढ़ रहे थे.कुछ देर बात संत ने शिष्य से पूछा- पुत्र तुमने उस बांस का आभार किया यह बहुत अच्छी बात है. कृतज्ञ होना ही चाहिए. पर जब तुम उससे लटके थे तब जान बचाने वाले बांस ने तुमसे कुछ कहा भी था. तुमने उसे सुना क्या?

जान बचाने वाला बांस कुछ कह रहा था! मैं कितना मूर्ख हूं कि उसकी बात सुनी ही नहीं पर मैं सुनता कैसे. एक तो मेरे प्राण संकट में थे. दूसरा मुझे पेड़-पौधों की भाषा नहीं आती. पर शायद गुरूदेव ने सुना है.

शिष्य ने कहा- नहीं गुरुजी, शायद प्राण संकट में थे इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया और मुझे तो पेड़-पौधों की भाषा भी नहीं आती. आप ही बता दीजिए उसका संदेश.धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-गुरु मुस्कुराए- खाई में गिरते समय तुमने जिस बांस को पकड़ लिया था, वह पूरी तरह मुड़ गया था. फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और जान बची ली.

संत ने बात आगे बढ़ाई- बांस ने तुम्हारे लिए जो संदेश दिया वह मैं तुम्हें दिखाता हूं. गुरू ने रास्ते में खड़े बांस के एक पौधे को खींचा औऱ फिर छोड़ दिया. बांस लचककर अपनी जगह पर वापस लौट गया. हमें बांस की इसी लचीलेपन की खूबी को अपनाना चाहिए. तेज हवाएं बांसों के झुरमुट को झकझोर कर उखाड़ने की कोशिश करती हैं लेकिन वह आगे-पीछे डोलता मजबूती से धरती में जमा रहता है.

बांस ने तुम्हारे लिए यही संदेश भेजा है कि जीवन में जब भी मुश्किल दौर आए तो थोड़ा झुककर विनम्र बन जाना लेकिन टूटना नहीं क्योंकि बुरा दौर निकलते ही पुन: अपनी स्थिति में दोबारा पहुंच सकते हो.शिष्य बड़े गौर से सुनता रहा.

गुरु ने आगे कहा- बांस न केवल हर तनाव को झेल जाता है बल्कि यह उस तनाव को अपनी शक्ति बना लेता है और दुगनी गति से ऊपर उठता है. बांस ने कहा कि तुम अपने जीवन में इसी तरह लचीले बने रहना. गुरू ने शिष्य को कहा- पुत्र पेड़-पौधों की भाषा मुझे भी नहीं आती. बेजुबान प्राणी हमें अपने आचरण से बहुत कुछ सिखाते हैं.जरा सोचिए कितनी बड़ी बात है. हमें सीखने के सबसे ज्यादा अवसर उनसे मिलते हैं जो अपने प्रवचन से नहीं बल्कि कर्म से हमें लाख टके की बात सिखाते हैं. हम नहीं पहचान पाते, तो यह कमी हमारी है.

ईश्वर विराट हैं, अथाह हैं. सोचें तो वह सारी सृष्टि में नहीं समा सकते और सोचें तो छोटे से हृदय में भी बस जाएंगे. यह सब उनकी इच्छा से है. आपके घर में कोई अतिथि आने वाला होता है तो आप क्या करते हैं? घर को सजाते-संवारते हैं न. उसे स्वच्छ करते हैं. प्रयास करते हैं कि आगंतुक को आते ही ऐसा लगे कि यही सबसे सुंदर स्थान है. यहां से तो जाने का विचार भी नहीं किया जा सकता.जो मन बहुत व्यग्र रहता है, वह अपवित्र रहता है. वहां कैसे विराजेंगे ईश्वर. अगर आपकी वर्षों की साधना से प्रसन्न होकर आ भी गए तो कितनी घड़ी ठहरेंगे? यदि वह ठहरे नहीं तो फिर सारी साधना का फल तो व्यर्थ गया न. मन के विकार को, कचरे को झाड़ू लगाने की क्रिया है मौनव्रत. मौन से मन का मैल निकलता है, शांति आती है. मन के अंदर में जो तूफान चलते रहते हैं उसे थामने के लिए मौन जरूरी है.

आप प्रतिदिन कुछ घंटे के लिए मौन साधना करके देखें, आपके व्यक्तित्व पर चमत्कारी असर दिखने लगेगा. मौन का अर्थ यह नहीं कि बस मुंह से उतनी देर नहीं बोलेगें लेकिन दिमाग की कसरत कई गुना ज्यादा बढ़ा देंगे. मौन का अर्थ है मन को कुछ देर के लिए विराम देना.

आपको यह पोस्ट कैसी लगी. अपने विचार लिखिएगा.  मैं प्रयास करूंगा कि और भी ऐसे पोस्ट लाऊं. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे बहुत सारे पोस्ट मिल जाएंगे. वहां आप मेरे पोस्ट ज्यादा सरलता से पढ़ सकते हैं. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. नीचे में लिक दे रहा हूं प्रभु शरणम् का.
-राजन प्रकाश

प्रभु शरणम् का लिंकः-

वेद-पुराण-ज्योतिष-रामायण-हिंदू व्रत कैलेंडेर-सभी व्रतों की कथाएं-व्रतों की विधियां-रामशलाका प्रश्नावली-राशिफल-कुंडली-मंत्रों का संसार. क्या नहीं है यहां! सब फ्री भी है. एक बार देखें जरूर…

Android ऐप्प के लिए यहां क्लिक करें


लिंक काम न करता हो तो प्लेस्टोर में सर्च करें-PRABHU SHARNAM

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam

error: Content is protected !!