लड़कों के विवाह में आ रही हो बाधाएं, तो करें ये सरल ज्योतिषीय उपाय
लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय: 5 ज्योतिषीय सलाह
कन्या के विवाह में देरी को लेकर तो अक्सर उपाय पूछे जाते हैं, लेकिन लड़कों के विवाह में लगातार आ रही रुकावट को लेकर भी बहुत से लोग प्रश्न करते हैं। कई बार विवाह की बात चलती है, रिश्ता पसंद भी आता है, लेकिन किसी न किसी कारण से बात आगे नहीं बढ़ पाती। कहीं रिश्ता तय होकर टूट जाता है तो कहीं लंबे समय तक योग्य जीवनसाथी नहीं मिल पाता। इसलिए आज बात करेंगे लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय की।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लड़कों के विवाह में देरी के कई कारण हो सकते हैं। ज्योतिष में जन्मकुंडली के सप्तम भाव, सप्तमेश तथा विवाह के कारक ग्रहों की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है।
पिछले दिनों मैंने कन्या के विवाह में आ रही बाधाएं और उन्हें दूर करने के उपायों पर चर्चा की तो बहुत से लोगों ने लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय पूछे। ऐसे प्रश्नों का अंबार लग गया कि लड़के की शादी नहीं हो रही है क्या करें। लड़के की शादी में बार-बार बाधा क्यों आती है। आखिर लड़के के विवाह में देरी के क्या कारण हैं। इस बाधा को कैसे दूर किया जा सकता है. आदि, आदि. ऐसे अनेक प्रश्न थे।
ज्योतिष में लड़कों के विवाह की बाधा और उन्हें दूर करने के उपायों पर चर्चा है. आइए जानते हैं लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय जो आपको लाभ दे सकते हैं.

लड़कों के विवाह में बाधा या देरी के ज्योतिषीय कारण
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार विवाह के मामले में बृहस्पति और शुक्र महत्वपूर्ण ग्रह माने जाते हैं। वहीं मंगल, शनि, राहु और केतु की प्रतिकूल स्थिति या प्रभाव विवाह में विलंब अथवा बाधा का कारण बन सकता है।
यदि जन्मकुंडली के सप्तम भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो, सप्तमेश कमजोर हो या विवाह के कारक ग्रह शुभ स्थिति में न हों तो विवाह में अड़चन आने की संभावना मानी जाती है।
मंगल दोष को भी विवाह में विलंब से जोड़कर देखा जाता है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में मंगल की परिपक्वता के कारण 28 वर्ष के बाद उसके प्रभाव में कमी मानी जाती है, लेकिन केवल उम्र के आधार पर विवाह का निर्णय नहीं किया जा सकता। पूरी कुंडली देखकर ही स्थिति का सही आकलन किया जाना चाहिए।
इसलिए यदि लंबे समय से विवाह नहीं हो रहा है तो केवल किसी एक ग्रह को दोषी मानने के बजाय पूरी जन्मकुंडली का विश्लेषण कराना अधिक उचित है।
लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय और सरल नियम

विवाह में बाधा दूर करने के लिए ज्योतिष और धार्मिक परंपरा में कई उपाय बताए गए हैं। इनमें कुछ उपाय व्यक्ति स्वयं कर सकता है, जबकि विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य या वैदिक विद्वान की सहायता लेना उचित रहता है।
1. माता गौरी का ध्यान करके करें इस मंत्र का जाप
शीघ्र विवाह के लिए माता गौरी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए लड़कों के विवाह की बाधा दूर करने के उपायों में सर्वप्रथम है माता गौरी की प्रार्थना।
प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत्त होकर शांत मन से माता का ध्यान करें और इस मंत्र का यथासंभव जाप करें—
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥
इसका भाव है—
हे माता! मुझे ऐसी मनोहर और सद्गुणों से युक्त पत्नी प्रदान करें, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों में साथ निभाने वाली हो और अच्छे कुल में उत्पन्न हुई हो।
विवाह की इच्छा रखने वाले पुरुष इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जाप कर सकते हैं। इसे केवल किसी इच्छा की पूर्ति का साधन न मानकर माता के प्रति प्रार्थना और समर्पण के भाव से करना अधिक महत्वपूर्ण है। यह मंत्र दुर्गा सप्तशती से संबंधित प्रार्थना के रूप में भी प्रचलित है।
2. शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं

लड़कों के विवाह में आती बाधा दूर करने का दूसरा उपाय है शिवलिंग पर जलाभिषेक। भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर में जाकर जल चढ़ाएं।
यदि विवाह योग्य पुरुष स्वयं नहीं जा रहा तो उसके स्थान पर माता-पिता भी अर्चना कर सकते हैं। जलाभिषेक करते समय मन में प्रार्थना करें मैं अपने लड़के के विवाह में बाधा दूर करने के उपाय हेतु आपकी शरण में हूँ। हे प्रभु सारी बाधाएं हरें और मेरा मनोरथ पूरा करें।
धार्मिक परंपरा में शिव-पार्वती को आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना गया है। इसलिए विवाह की कामना रखने वाले युवक भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर सकते हैं।
3. गुरुवार को करें बृहस्पति से जुड़े उपाय
विवाह के लिए बृहस्पति की स्थिति को ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन स्नान के जल में थोड़ी हल्दी मिलाकर स्नान करना और केले के वृक्ष में जल अर्पित करना परंपरागत उपायों में बताया गया है। गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा और उसमें जल अर्पित करने की परंपरा का संबंध गुरु और शुभता से जोड़ा जाता है।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह बृहस्पति का प्रचलित मूल मंत्र है।
4. रिश्ता तय होकर बार-बार टूट रहा हो तो कुंडली दिखाएं
कई बार विवाह के लिए रिश्ते आते हैं, बात लगभग तय हो जाती है और फिर अचानक किसी कारण से संबंध समाप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में बार-बार नए उपाय करने के बजाय अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिषी को दिखाना चाहिए।
कुंडली में सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, बृहस्पति तथा विवाह से जुड़े अन्य ग्रहों की स्थिति देखकर ही यह समझने का प्रयास किया जा सकता है कि देरी का कारण क्या है।
दुर्गासप्तशती का संपुट पाठ
यदि विवाह में लंबे समय से बाधा बनी हुई है तो दुर्गासप्तशती का संपुट पाठ भी कराया जा सकता है। संपुट पाठ सामान्य पाठ से अलग विधि से किया जाता है, इसलिए इसे किसी योग्य वैदिक विद्वान या प्रशिक्षित आचार्य की देखरेख में कराना उचित रहेगा।
नवरात्रि में देवी की उपासना और दुर्गासप्तशती के पाठ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हालांकि किसी विशेष अनुष्ठान का चयन कुंडली और व्यक्ति की परिस्थिति देखकर करना अधिक उचित है।
पुखराज पहनने से पहले यह बात जरूर जानें
विवाह में देरी होने पर कई लोग सीधे पुखराज पहनने की सलाह दे देते हैं। लेकिन रत्न धारण करना केवल सामान्य उपाय नहीं है। पुखराज बृहस्पति से संबंधित रत्न माना जाता है और इसे धारण करने से पहले जन्मकुंडली में बृहस्पति की स्थिति देखना जरूरी है।
इसलिए बिना कुंडली दिखाए पुखराज धारण न करें। किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेकर ही रत्न पहनना बेहतर है।
लड़कों के विवाह में बाधा दूर करने के लिए आखिर क्या उपाय करें?
यदि लड़के का विवाह लंबे समय से नहीं हो रहा है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। माता गौरी और भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक आराधना करें, बताए गए मंत्रों का नियमित जाप करें और गुरुवार से जुड़े उपाय अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं।
लेकिन यदि काफी समय बीत जाने के बाद भी विवाह की बात आगे नहीं बढ़ रही है, रिश्ते तय होकर टूट रहे हैं या बार-बार कोई नई बाधा सामने आ रही है, तो जन्मकुंडली का विधिवत परीक्षण किसी योग्य ज्योतिषी से जरूर कराएं।
ज्योतिषीय उपायों को धैर्य और श्रद्धा के साथ करना चाहिए। किसी भी उपाय को निश्चित समय में विवाह कराने की गारंटी समझना उचित नहीं है। विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है, इसलिए धार्मिक साधना के साथ व्यवहारिक रूप से भी योग्य जीवनसाथी की तलाश जारी रखना चाहिए।
प्रस्तुतकर्ताः
डॉ. नीरज त्रिवेदी,
सहायक प्रोफेसर (ज्योतिषशास्त्र)
ज्योतिषाचार्य व पीएचडी (ज्योतिष)
( डिस्कलेमरः यह पोस्ट ज्योतिष और धर्मशास्त्र के मान्यता के आधार पर तैयार की गई है। इस पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ एक प्रचलित ज्योतिषीय अनुमान देना है। इसका उद्देश्य कोई गलत जानकारी देना या अंधविश्वास फैलाना नहीं है।)
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