राजा भोज और माघ पंडित जैसे विद्वानों की चतुराई पर कैसे भारी पड़ी एक गांव की बुढ़िया

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राजा भोज की नगरी बुद्धिमानों के लिए जानी जाती थी। स्वयं राजा भी विद्वानों की संगति में रहते थे. उनके राज्य में लोग पहेलियां बुझाने में बड़ी रुचि लेते थे.
एक दिन राजा भोज और उनके मंत्री माघ पंडित वेश बदलकर घूमने निकले. बातों-बातों में बहुत दूर चले गए। लौटते समय दोनों रास्ता भूल गये।
दोनों उलझन में थे कि रास्ता भूल गए, अब पूछें किससे। दोनों को एक बुढ़िया खेतों में काम करती दिखी।
माघ पंडित ने मशवरा दिया- क्यों न बुढिया से पूछा जाए।
दोनों बुढ़िया के पास गए. उनसे कहा- राम राम मांजी, यह रास्ता कहां जाएगा।
बुढिया ने उत्तर दिया कि यह रास्ता तो यहीं रहेगा इसके ऊपर चलने वाले कहीं भले ही जाएं। पहले यह तो बताओ कि तुम हो कौन?
माता हम तो पथिक हैं, राह भटक गए हैं- राजा भोज ने अपनी पहचान गोपनीय ही रखनी चाही.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.बुढ़िया बोली- पथिक तो दो हैं एक सूरज और एक चन्द्रमा। तुम कौन से पथिक हो?
अब भोज को लगा कि बात ऐसे बनेगी नहीं. वह बोले हम तो राजा हैं।
राजा तो दो हैं एक इन्द्र और एक यमराज। तुम कौन से राजा हो- बुढ़िया बोली।
माता हम तो क्षमतावान हैं-माघ बोला।
क्षमतावान तो दो हैं- एक पृथ्वी और दूसरी स्त्री। भाई तुम कौन हो बुढ़िया बोली?
हम तो साधु हैं- राजा भोज ने कहा।
साधु तो दो हैं- एक तो शनि और दूसरा सन्तोष। भाई तुम कौन हो बुढ़िया ने पूछा?
माता, हम तो परदेसी हैं- दोनों साथ-साथ बोले।हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.परदेसी तो दो हैं- एक जीव और दूसरा पे़ड़ का पत्ता। भाई तुम कौन हो बुढ़िया ने फिर सवाल दागा।
हम तो गरीब हैं- माघ पंडित बोला।
गरीब तो दो हैं- एक तो बकरी का बच्चा और दूसरी लड़की। बुढ़िया ने जवाब दिया। तुम कौन हो?
माता, हम तो चतुर हैं- माघ पंडित बोला।
चतुर तो दो हैं, एक अन्न और दूसरा पानी। तुम कौन हो सच-सच बताओ?
दोनों ने हार मान ली. बुढ़िया के चरण पकड़ लिए. माता हम कुछ भी नहीं जानते। अनभिज्ञ हैं, जानकार तो आप हैं।
तब बुढ़िया बोली- तुम राजा भोज हो और यह पंडित माघ है। जाओ यही उज्जैन का रास्ता है।हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.चलने लगे तो बुढ़िया ने कहा- राजा अपने राज्य के लोगों को चतुराई पर संदेह न करना। यहां उड़ती चिड़िया के पर गिनने वाले घर-घर में हैं।
राजा भोज बुढ़िया की बात का आशय समझ गए और फिर कभी अपने प्रदेश में वेश नहीं बदलने का निर्णय किया।
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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