Advertisement728 × 90

उत्तम संतान की लालसा रखते हैं तो ये पोस्ट जरूर पढ़ें

उत्तम संतान की लालसा रखते हैं तो ये पोस्ट जरूर पढ़ें

संतान प्राप्ति के लिए  समागम को शास्त्रों में संतान यज्ञ कहा गया है. उसके लिए आवश्यक मिलन को आहुति जैसा दर्जा है. गर्भधारण से पूर्व बहुत से ऐसे विधान हैं जिनका पालन करने से होती है उत्तम संतान. गर्भधारण से जुड़ी शास्त्राधारित बातें जिनका रखें ध्यान तो होगी उत्तम संतान.

शिव-पार्वती के आशीर्वाद से गर्भधारण करके पाएं उत्तम संतान

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना  WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर  9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें. फिर SEND लिखकर हमें इसी पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना  WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

यह पोस्ट क्यों पढ़ें, किसके लिए है?

यह पोस्ट हर उस सनातनी के लिए है जिसका विवाह हुआ है और जो संतान प्राप्ति की लालसा रखता है. जिसे भविष्य में विवाह और संतान उत्पन्न करने की लालसा है. उन माता-पिता के लिए जरूरी है जिनकी विवाह योग्य संतानें हैं. विवाह से पूर्व उन्हें संतान को कुछ जानकारियां देनी हैं.  जिनकी संतान हो चुकी है परंतु उसे कई बाधाएं आ रही हैं उनके लिए भी कई उपयोगी जानकारियां हैं.

  • संतान प्राप्ति में होने वाली बाधा के क्या कारण हैं?
  • बाधा दूर करने के क्या उपाय हैं?
  • उत्तम संतान प्राप्ति के लिए गर्भधारण की सही विधि क्या हो?
  • गर्भधारण के लिए पति-पत्नी को सहवास करने से पहले क्या नियम हैं?
  • संतान प्राप्ति की लालसा से पति-पत्नी शैय्या पर किन नियमों का पालन करें, समागम से पूर्व किस देवता की प्रार्थना करें?

ज्यादातर लोगों को गर्भधारण के लिए बताए गए शास्त्रीय विधानों का पता ही नहीं है. गर्भधारण के लिए यौनसमागम और कामपीड़ा की तृप्ति के लिए यौनसमागम में अंतर है. ज्यादातर लोग इसमें भूल करते हैं जिससे संतान के साथ जीवनभर बाधाएं रहती हैं. ज्योतिष की भी सीमा है. आप यदि जन्म के पूर्व से ही उसके नियमों का पालन करते रहेंगे तो संतान का भविष्य वांचना आगे बहुत सरल रहता है.

पोस्ट ज्योतिषशास्त्र की व्यापक मान्यता पर आधारित है. जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति पर यह सटीक हो ही जाए क्योंकि संतानबाधा में पूर्वजन्म के दोष, पितृदोष भी बड़े कारक होते हैं. फिर भी ज्यादातर मामलों में यह सटीक साबित होता है. संतान प्राप्ति एक बड़ा यज्ञ है. उस यज्ञ से जुड़ी सारी बातें हर व्यस्क को अच्छे से पता होनी चाहिए. धैर्य के साथ इस पोस्ट को पढ़िएगा. उत्तम संतान प्राप्ति कैसे हो, इसका मार्ग दिखाएगी. 

आइए सबसे पहले जानते हैं कि संतान बाधा के कारक क्या हैं?

  • जन्मकुंडली में पांचवां भाव संतान का भाव होता है. यदि पांचवें भाव में शुभ ग्रह स्थिति हों अथवा शुभ्र ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक स्वस्थ और बुद्धिमान संतान से युक्त होता है.
  • यदि पंचम भाव अगर पीड़ित हो तो दंपत्ती को संतान प्राप्ति में बहुत सी बाधाएं आती हैं. गर्भधारण बाधित रहता है. गर्भ ठहरता नहीं. ठहर जाए तो असमय नष्ट हो जाता है. इससे कई बार तो दंपत्ती संतानहीन रह जाते हैं.

शास्त्रों में संतान की कामना पूरा करने के कुछ कारगर और सरल उपाय बताए गए हैं. उनसे संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, उत्तम संतान प्राप्ति होती है. आज मैं इसके दो सरल उपायों पर चर्चा करूंगा.

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों या किसी एक की भी कुंडली का पंचम भाव यदि पापग्रह से पीड़ित हो तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है. पंचम भाव लग्न से या चंद्रमा से पीड़ित हो अथवा पंचम भाव से पंचम भाव और बृहस्पति की स्थिति अच्छी न हो तो भी संतान प्राप्ति में बाधा आती है.संतान बाधा दूर करने के उपायः

पंचम भाव को जो ग्रह पीड़ित कर रहे हों सबसे पहले उनकी शांति करानी चाहिए. उन ग्रहों की शांति किसी अच्छे ज्योतिषी के परामर्श पर वैदिक मंत्र, बीज मंत्र और तंत्र-मंत्र से करा लेनी चाहिए.

यदि बृहस्पति के दोष के कारण बाधा आ रही है तो उसके लिए बृहस्पति को प्रसन्न करने के उपाय स्वयं भी करने चाहिए. इसके लिए केले में जल देना, गुरूवार को व्रत रखना, पीला वस्त्र धारण करना और बृहस्पति के बीज मंत्र की साधना स्वयं पति-पत्नी को करना चाहिए.

इन उपायों के साथ-साथ संतान गोपाल मन्त्र का जप जरूर करना चाहिए. छोटा सा संतान गोपाल मंत्र बहुत प्रभावशाली कहा गया है. इस मंत्र का सवा लाख जप या यथासंभव जप करके इसे सिद्ध करने का प्रयास करना चाहिए. यदि स्वयं संभव न हो तो किसी वैदिक ब्राह्मण से कराना चाहिए.

स्वस्थ्य, सुंदर संतान प्राप्ति के लिए यह मंत्र पति-पत्नी दोनों के द्वारा किया जाए तो परिणाम सुंदर होता है.

संतान गोपाल मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुतं गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।

संतान प्राप्ति में बाधा या जन्मी हुई संतान के स्वास्थ्य या अन्य समस्याओं का एक बड़ा कारण है- समागम विचार की उपेक्षा. संतान प्राप्ति एक यज्ञ है. इसमें देवताओं की कृपा से ओज गर्भ में स्थापित होता है. इसलिए जैसे किसी भी यज्ञ में मुहूर्त आदि का विचार होता है उसी प्रकार संतान प्राप्ति के लिए किए गए समागम में भी विचार करना चाहिए.यौन आनंद की प्राप्ति के उद्देश्य से किए गए संभोग से ठहरा गर्भ बाधित रहता ही है. हम आपको संतान प्राप्ति के लिए समागम के जो विधान कहे गए हैं उससे परिचित कराते हैं.


हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

 

अगले पेज पर संतान प्राप्ति के उपाय, समागम कब करें, कब नहीं. समागम मुहूर्त का विचार नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
संतान गोपाल मंत्र के जप की विधिः
– पति-पत्नी दोनों सुबह स्नानकर पूरी पवित्रता के साथ उपरोक्त मंत्र के एक निश्चित अवधि में जप का संकल्प लें.

– जप के लिए तुलसी की माला का प्रयोग करें.

– पूजाघर में या मंदिर देवालय में भगवान श्रीकृष्ण की बालस्वरूप मूर्ति या चित्र की चन्दन, अक्षत, फूल, तुलसी दल और माखन का भोग लगाकर घी के दीपक जलाएं एवं कर्पूर से आरती करें.

– भगवान की पूजा के बाद या आरती के पहले उपरोक्त संतान गोपाल मंत्र का जप करें. मंत्र जप के बाद भगवान से समर्पित भाव से निरोग, दीर्घजीवी, अच्छे चरित्रवाला, सेहतमंद पुत्र की कामना करें.

– यह मंत्र जप पति-पत्नी साथ में या अकेले भी कर सकते हैं.

– संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ भी कराए जाते हैं. पुत्रेष्टि यज्ञ एवं संतान गोपाल यंत्र के द्वारा अवश्य ही संतान की प्राप्ति होती है.संतान गोपाल यंत्र उपयोग विधिः

– संतान गोपाल यंत्र की गुरुपुष्य नक्षत्र में पूजन एवं प्रतिष्ठा करें.
– उसके पश्चात् संतान गोपाल स्त्रोत्र का पाठ करने से शीघ्र ही गृह में कुलीन एवं अच्छे गुणों से युक्त संतान की उत्पत्ति होती है तथा माता पिता की सेवा में ऐसी संतानें हमेशा तत्पर रहती हैं.

– संतान गोपाल यंत्र को गोशाला में प्रतिष्ठित करके गोपालकृष्ण का मंत्र का जप श्रद्धापूर्वक करने से वध्या को भी शीघ्र ही पुत्ररत्न उत्पन्न होता है तथा सभी गुणों से सम्पन्न होता है.

हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है. Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

 

गर्भधारण के लिए समागम से पहले ध्यान में रखें कुछ बातें. जानिए अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
 

गर्भधारण में रखें ध्यान, काम की बातेंः

मनुष्य धन-सम्पत्ति बढ़ाने में जितना ध्यान देता है उतना संतान पैदा करने में नहीं देता यदि शास्त्रोक्त रीति से शुभ मुहूर्त में गर्भाधान कर संतानप्राप्ति की जाय तो संतान परिवार का यश बढ़ाने वाली होती है. संतान प्राप्ति के लिए सर्वप्रथम पति-पत्नी का तन-मन स्वस्थ होना चाहिए. वर्ष में केवल एक ही बार संतानोत्पत्ति हेतु समागम करना हितकारी है.

गर्भाधान के लिए समय के विचार पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है. इससे मनोनुकूल संतान प्राप्त होती है.गर्भधारण के लिए समागम के श्रेष्ठ समय का विचार:

-ॠतुकाल की उत्तरोत्तर रात्रियों में गर्भाधान श्रेष्ठ है लेकिन 11वीं व 13वीं रात्रि वर्जित है.

-यदि पुत्र की इच्छा हो तो पत्नी को ॠतुकाल की 8, 10, 12, 14 व 16वीं रात्रि में से किसी एक रात्रि के शुभमुहूर्त में समागम करना चाहिए.

-यदि पुत्री की इच्छा हो तो ॠतुकाल की 5, 7, 9 या 15वीं रात्रि में से किसी एक रात्रि का शुभ मुहूर्त पसंद करना चाहिए.

-कृष्णपक्ष के दिनों में गर्भ रहे तो पुत्र व शुक्लपक्ष में गर्भ रहे तो पुत्री पैदा होती है.

-रजोदर्शन दिन को हो तो वह प्रथम दिन गिनना चाहिए.

-सूर्यास्त के बाद हो तो सूर्यास्त से सूर्योदय तक के समय के तीन समान भाग कर प्रथम दो भागों में हुआ हो तो उसी दिन को प्रथम दिन गिनना चाहिए.

-रात्रि के तीसरे भाग में रजोदर्शन हुआ हो तो दूसरे दिन को प्रथम दिन गिनना चाहिए.

-हस्त, स्वाति, अश्विनी, मृगशीर्ष, अनुराधा, धनिष्ठा, ध्रुव संज्ञक (तीनों उत्तरा एवं रोहिणी) एवं ज्येष्ठा नक्षत्रों में शुभतिथियों एवं शुभवारों को ऋतुमति स्त्री को स्नान करना चाहिए.

-मृगशीर्ष, रेवती, स्वाती, हस्त, अश्विनी एवं रोहिणी नक्षत्रों में स्नान करने से स्त्री अतिशीघ्र गर्भधारण करती है.
डाण्त, नक्षत्र गडाण्त और लग्न गडाण्त का विचार अवश्य करना चाहिए.

समागम के लिए कुछ रात्रियां निषिद्ध कही गई हैं. उन रात्रियों में समागम से जन्मी संतान योग्य नहीं होती. वह कुल को कलंकित करने वाली होती है.जानिए गर्भधारण हेतु समागम के लिए निषिद्ध रात्रियां, अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
गर्भधारण हेतु समागम के लिए निषिद्ध हैं ये रात्रियां:

– पूर्णिमा, अमावस्या, प्रतिपदा, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, ऊत्तरायण, जन्माष्टमी, रामनवमी, होली, शिवरात्रि, नवरात्रि आदि पर्वों की रात्रि, श्राद्ध के दिन गर्भाधारण के लिए समागम नहीं करना चाहिए.

– चतुर्मास, प्रदोषकाल, क्षयतिथि (दो तिथियों का समन्वय काल) एवं मासिक धर्म के चार दिन तक गर्भधारण की कामना से समागम नहीं चाहिए.

– शास्त्रवर्णित मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.

– तिथिगंड मूल, भरणी, अश्विनी, रेवती, मघा नक्षत्रों में गर्भाधान यज्ञ यानी गर्मधारण के लिए समागम नहीं करना चाहिए.

– नक्षत्रों की संधिकाल में भी गर्भधारण के लिए समागम नहीं करना चाहिए.

– माता पिता की मृत्यु तिथि, स्वयं की जन्म तिथि को भी संतान प्राप्ति की कामना से समागम नहीं करें. दिन में समागम करने से आयु व बल का बहुत ह्रास होता है.

पति-पत्नी संतान यज्ञ के लिए समागम हेतु पर शैय्या पर जाएं तो उस संदर्भ में भी कुछ विधान कहे गए हैं. उनका पालन करना चाहिए.

अगले पेज पर समागम हेतु शैय्या पर जाने का विधान. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
संतान प्राप्ति हेतु समागम के लिए शैय्या पर जाने का विधानः

गर्भाधान को शास्त्रों में संतान प्राप्ति यज्ञ कहा गया है. इसलिए संतान प्राप्ति की कामना के साथ किए समागम में विलास नहीं बल्कि एक यज्ञ की भावना रखनी चाहिए.

पति-पत्नी को गर्भधारण हेतु समागम से पूर्व देवताओं एवं उत्तम आत्माओं की प्रार्थना के बाद उनका आह्वान करना चाहिए:

हे ब्रह्माण्ड में विचरण कर रहीं सूक्ष्म रूपधारी पवित्र आत्माओं! हम दोंनो पति-पत्नी आपकी प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर में जन्म धारण कर कृतार्थ करें. हम दोनों अपने शरीर, मन, प्राण व बुद्धि को आपके योग्य बनाएंगे.

इस प्रार्थना के बाद पहले पुरुष शय्या पर जाए.

-उसे दायां पैर पहले रखना चाहिए. स्त्री बायें पैर से पति के दाहिनी ओर शय्या पर चढ़े.  फिर शय्या पर यह मंत्र पढ़ना चाहिएः

अहिरसि आयुरसि सर्वतः प्रतिष्ठासि धाता त्वां दधातु विधाता त्वां दधातु ब्रह्मवर्चसा भवेति ब्रह्मा बृहस्पति र्विष्णुः सोम सूर्यस्तथाऽश्विनौ भगोऽथ मित्रावरुणौ वीरं ददतु मे सुतम्

(हे गर्भ ! तुम सूर्य के समान हो तुम मेरी आयु हो, तुम सब प्रकार से मेरी प्रतिष्ठा हो धाता (सबके पोषक ईश्वर) तुम्हारी रक्षा करें, विधाता (विश्व के निर्माता ब्रह्मा) तुम्हारी रक्षा करें. तुम ब्रह्मतेज से युक्त होकर ब्रह्मा, बृहस्पति, विष्णु, सोम, सूर्य, अश्विनीकुमार और मित्रावरुण जो दिव्य शक्तिरूप हैं, वे मुझे वीर पुत्र प्रदान करें.)

आशा है आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी होंगी. ऐसी पोस्ट प्रभु शरणम् एप्प में प्रकाशित होती रहती है. आप सीधे एप्प से ही जुड़ जाएं ताकि आप किसी उपयोगी जानकारी से वंचित न रहें. ऐप्प का लिंक नीचे पुनः दिया जा रहा है.

प्रस्तुतिः
डॉ. नीरज त्रिवेदी
सहायक प्रोफेसर, ज्योतिषशास्त्र, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान
ज्योतिषाचार्य, पीएचडी (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय)

आपको यह पोस्ट कैसी लगी, अपने विचार लिखिएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प में ऐसे उपयोगी पोस्ट बहुत मिल जाएंगे. छोटा सा ऐप्प है. करीब पांच लाख लोग उसका प्रयोग करके प्रसन्न हैं. आप भी ट्राई करके देखिए. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा.

हिंदू धर्म से जुड़ी शास्त्र आधारित ज्ञान के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है. तकनीक के प्रयोग से सनातन धर्म के अनमोल ज्ञान को प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से इसे बनाया गया है. आप इसका लाभ लें. स्वयं भी जुड़े और सभी को जुड़ने के लिए प्रेरित करें. धर्म का प्रचार सबसे बड़ा धर्मकार्य है
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

धार्मिक अभियान प्रभु शरणम् के बारे में दो शब्दः 

सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदूग्रथों की महिमा कथाओं ,उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इससे देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. आप स्वयं परखकर देखें. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!

इस लाइऩ के नीचे फेसबुक पेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे. धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-

हम ऐसी कहानियां देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

धार्मिक चर्चा करने व भाग लेने के लिए कृपया प्रभु शरणम् Facebook Group Join करिए: Please Join Prabhu Sharnam Facebook Group

error: Content is protected !!