समस्या निदान करने वाला अचूक मंत्र
सबकी चाहत होती है कि कोई ऐसा मंत्र मिल जाए जिससे सारी परेशानी पलक झपकते फुर्र हो जाए. सबको चाहिए समस्याओं का समाधान करने वाला अचूक मंत्र. जैसे मास्टर Key सारे ताले खोल देता है वैसे ही सारी समस्याओं का निदान करने वाला जुगाड़.
एक राजा अक्सर परेशान हो जाया करता था. आए दिन कोई न कोई परेशानी आती रहती थी. वह इससे बुरी तरह खीझ गया था. कोई भी खीझ जाए अगर एक के बाद एक परेशानी उसे घेरे ही रहे. राजा ने सोचा कि कोई ऐसा अचूक मंत्र हो जिसे परेशानियों के आते ही मार दो. वह परेशानी तत्काल खत्म हो जाए. अचूक मंत्र तो ऐसा कोई न होता ही होगा.
अब राजा को धुन सवार हो गई अचूक मंत्र खोजने की. पर समस्या यह थी कि उसे यह अचूक मंत्र दे कौन.
उसे कुछ न सूझा तो मंत्रियों की राय लेने का निश्चय किया. राजा ने मंत्रियों से कहा- कोई ऐसा मंत्र बताएं जिससे हर समस्या का निदान हो जाए. एकदम अचूक मंंत्र हो जो कभी फेल न होता हो.राजा ने मंत्रियों को चेतावनी दे दि कि अगर वे उसे अचूक मंत्र न बता पाए तो सबकी छुट्टी कर दी जाएगी. उनकी जगह नए और योग्य मंत्री लाए जाएंगे जो राह सुझा सकें.
मंत्रियों ने सुना तो पसीने छूट गए. खूब दिमाग दौड़ाया लेकिन उन्हें कुछ समझ में न आया. भय भी हुआ कि कहीं कोई मंत्र बता दें और वह कारगर न रहे, चूक जाए तो राजा गर्दन उड़ा देगा.
बड़ी विकट समस्या आ गई.
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पास के एक आश्रम में एक सिद्ध योगी रहते थे. मंत्री योगी के पास पहुंचे और उन्हें समस्या बताई. योगी ने सारी बातें सुनीं और मुस्कुराए. उन्होंने एक कागज पर कुछ लिखा और उसे लाल कपड़े में बांध दिया.
योगी ने कहा- राजा को कहना इसे खोले नहीं. अपने खजाने में सुरक्षित रख दे. जब वह जीवन में हार जाए, कोई रास्ता न सूझे तभी इसे खोले. यह अचूक मंत्र है- इसे बस एक बार ही देखा जा सकता है.राजा ने योगी के कहे अनुसार किया. कई बार मंत्र देखना चाहा लेकिन उसे योगी की बात याद आती कि यह सिर्फ एक बार इस्तेमाल होगा. इसलिए वह इसे सबसे बड़े मौके के लिए उसे सुरक्षित रखना चाहता था.
कई साल बाद उसके राज्य पर पड़ोसी राजा ने हमला कर दिया. राजा हार गया. अपने खजाने से जो भी धन उठा सकता था, उठाया और दूर वन में छुप गया.
उसने योगी की दी हुई पोटली भी खजाने से निकालकर साथ रख ली थी.राजा जंगल में जहां छुपा था. वहां दुश्मन के गुप्तचर पहुंच गए. उन्होंने राजा को घेरना शुरू किया. दुश्मन सैनिक नजदीक आते जा रहे थे. राजा के प्राण संकट में थे. प्राण संकट से बड़ा संकट क्या हो सकता है.
राजा ने सोचा योगी का मंत्र आज ही काम आएगा. आज तो इसे प्रयोग कर ही लेना चाहिए. यह सोचकर उसने योगी की दी पोटली खोली.उसमें रखे कागज पर एक छोटा सा वाक्य लिखा था- धैर्य रखना. जैसे अच्छा समय स्थाई नहीं होता उसी तरह बुरा समय भी स्थाई नहीं है. जल्द ही समाप्त हो जाएगा. अगर तुमने हिम्मत दिखाई तो बुरा वक्त तुम्हारी उम्मीद से पहले कट जाएगा. अंत समय तक प्रयत्न करो. जूझते हुए हारने वाला जीतने वाले से कम महान नहीं होता. उसके किस्से भी उसी गर्व से सुनाए जाते हैं.
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राजा को उस अचूक मंत्र का मर्म समझ में आया. उसे पुरानी बातें याद आ रही था. राजा को अपना बचपन सबसे सुखद लगता था. न चाहते हुए भी वह युवा हो गया और राज्य की जिम्मेदारी संभाली. माता-पिता की सलाह पर राजकाज करता था.एक दिन माता-पिता नहीं रहे. वह बहुत दुखी था पर जीवन रूकता तो नहीं. उसके ऊपर प्रजा का दायित्व था. उसने प्रयास किया और धीरे-धीरे खुद राजपाट चलाना सीख गया. जवानी नहीं रुकी; पिता नहीं रुके, पत्नी नहीं रुकी, बेटे नहीं रुके; कुछ नहीं रुका. तो यह बुरा वक्त क्यों रुकेगा. कब तक रूकेगा.
इसके आगे मैं क्यों हार रहा हूं? धैर्य से प्रतीक्षा करता हूं. प्रयत्न भी करता हूं. फिर ईश्वर राह दिखाएगा.उसने हिम्मत जुटाई. गुप्तचरों को संपर्क किया. गुप्तचरों को दुश्मनों के बीच छोड़ा जो उसे खतरे से आगाह करते रहे. राजा ने वन में रहने वाली प्रजा को संगठित कर सेना बनाई. पुराने सैनिकों से संपर्क किया. गुपचुप एक रात शत्रुओं के सबसे बड़े शिविर पर चढ़ाई कर दी.जोरदार युद्ध हुआ. शत्रु सैनिकों को इस हमले आशा ही न थी. कुछ ही देर में शत्रु ढेर हो गए. राजा को बहुत हथियार और रसद हाथ लगी. उसने राज्य वापस हासिल कर लिया.
राजा का महल में भव्य स्वागत हुआ. प्रजा फूल बरसा रही थी. उत्सव मनाया जा रहा था. राजा को योगी की बात याद आई. उसने समझ लिया था कि यह सुख भी स्थाई नहीं है. उसने तय किया कि योगी के मंत्र को वह अपनी प्रजा को देगा ताकि वे संकट के लिए तैयार रहे.
-राजन प्रकाश
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