Advertisement728 × 90

माया की बिल्ली सेवा से है फूली, धर्म की गाय खूंटे से बंधी असहाय

माया की बिल्ली सेवा से है फूली, धर्म की गाय खूंटे से बंधी असहाय

Wallpapers for Desktop with wallpaper, metallique, texture, grunge, effets, creer, images, importez, affiche, realiste, discount

पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

हमारा फेसबुक पेज लाइक कर लें. आपको प्रभु शरणम् के पोस्ट की सूचना मिलती रहेगी. यहां शेयर करने योग्य अच्छी-अच्छी धार्मिक पोस्ट आती है जिसे आप मित्रों से शेयर कर सकते हैं. आप स्वयं देखें कितने सुंदर-सुंदर पोस्ट मिल जाएंगे शेयर को.

इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.एक निःसन्तान सेठ अपने लिए उत्तराधिकारी की तलाश में था. उसने नगर में ढींढोरा पिटवाया कि उसे अपने उत्तराधिकारी की तलाश है. जो लोग इसके लिए इच्छुक हैं वे संपर्क करें.

धनवान सेठ को उत्तराधिकारी की तलाश है! सूचना ही ऐसी थी कि इसकी चाहत रखने वालों की कोई सीमा न रही. भला बैठ-बिठाए इतना धन-दौलत कौन नहीं प्राप्त करना चाहेगा.

अब प्रत्याशी इतने अधिक थे तो उचित व्यक्ति की तलाश एक मुश्किल बात थी.

यदि किसी नालायक के हाथ धन चला गया तो वह इसका नाश कर देगा. इसलिए सेठ ने उत्तराधिकारी चुनने के लिए एक परीक्षा रखने की सोची.

सेठ ने इच्छुक युवकों को बुलाया और प्रत्येक को एक बिल्ली और एक गाय दी.

उसके बाद सेठ ने कहा- एक माह में बिल्ली को इतना दूध पिलाकर तृप्त कर दो क़ि जब मैं एक माह बाद उसके समक्ष दूध रखूं तो वह दूध पीने से ही मना कर दे. उसे दूध से अरुचि हो जाए. जिसकी बिल्ली तृप्त होगी उसे मैं अपना उत्तराधिकारी बनाऊंगा.

सेठ ने सभी एक महीने बाद आने की हिदायत दी और सबको विदा कर दिया.सेठ के धन के लालच में सब बिल्ली की तो जी-जान से सेवा कर रहे थे लेकिन गाय माता की सबने उपेक्षा कर दी.

एक युवक को यह बात पसंद नहीं आई. उसने सोचा कि सेठ कितना मूर्ख है कि उसने अपनी शर्त में गाय की सेवा की बात न कही. वह अपने उत्तराधिकारी से एक बिल्ली की सेवा करवाना चाहता है!

ऐसे इंसान ने धन किस विधि जमा किया होगा कहना मुश्किल है.

इसलिए ऐसे व्यक्ति का उत्तराधिकारी तो मुझे नहीं बनना पर गोसेवा का असवर नहीं गंवाना चाहिए.

उसने बिल्ली की सेवा करने के स्थान पर गाय की पूरी लगन से खूब सेवा की.

उसे खिला पिला कर मोटा तन्दरुस्त किया. गाय ने भी सेवा के बदले खूब दूध दिया. सारे परिवार ने आनंद से दूध खाया और सारा परिवार भी तंदुरुस्त हो गया.

रही बात बिल्ली की तो वह उसके लिए सिर्फ आवश्यक भोजन करवाया. उतना ही जिससे वह जीवित रह सके.

रही दूध की बात तो वह उसके सामने जो दूध रखता वह खूब गर्म होता. बिल्ली लपककर दूध में मुंह डालती तो मुंह भी जलता. मुंह जलने से दुखी बिल्ली की दूध में मुंह डालने के लिए खूब पिटाई भी कर देता.

मुंह जलने और मार खाने दोनों ही वज़हों से बिल्ली दूध के नाम से ही डरने लग गई.प्रतियोगिता की परख का दिवस भी आया. सभी अपनी-अपनी बिल्लियों और गायों के साथ आए.

सबकी तन्दरूस्त बिल्लियां दूध पर टूट पड़ीं, गाय की उपेक्षा हुई लेकिन उस युवक की पतली दुबली बिल्ली ने दूध को मुँह भी न लगाया.

इस प्रकार वह युवक शर्त जीत गया. उसकी गाय भी सबसे ज्यादा स्वस्थ थी.

सेठ ने उसे उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा कर दी. हालांकि युवक निर्णय नहीं कर पा रहा था.

तभी सेठ ने युवक से पूछा- तुमने बिल्ली के बजाय गाय की सेवा की और तुम्हारी बिल्ली तुम्हारे नियंत्रण में है, ऐसा कैसे हुआ?

युवक ने कहा- इस संसार में बिल्ली को अनावशयक खिलाकर सन्तुष्ट नहीँ किया जा सकता उसे सिर्फ दण्ड से नियंत्रित किया जा सकता है. गाय की सेवा से उसने ज्यादा दूध दिया जिसे खाकर और दूध बेचकर मेरी आर्थिक स्थिति ठीक हुई.सेठ ने कहा- मुझे तुम्हारे जैसे उत्तराधिकारी की ही तलाश है. यह धन मैंने बड़े श्रम से उपार्जन किया. जो व्यक्ति इस गाय और बिल्ली के बीच का फर्क अच्छे से समझ सकता है वही इस धन का सदुपयोग करेगा.

मित्रों यही बात हमारे जीवन पर लागू होती है. बिल्ली हमारे जीवन में लोभ, लालच, कामना, वासना जैसे अवगुणों का प्रतीक है. इसे जितना भी पोषित करेंगे यह अतृप्त ही रहेगी. अनावश्यक-अत्यधिक पूर्ति से इसकी कभी तृप्ति हो ही नही सकती.

इसकी तृप्ति का लोभ दिखाकर ही धर्म आपकी परीक्षा लेगा. वह आपके तरह-तरह से परखेगा. यदि आप उसकी परीक्षा में सफल रहे तो अनंत ऐश्वर्य के स्वामी होंगे. अन्यथा कुछ भी हाथ न रहेगा.

गाय हमारी आत्मा का प्रतीक है. माया के प्रभाव में आत्मा की अनदेखी ही होती है. लालसाएं हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती हैं, उसके लिए हम आत्मा का तिरस्कार भी करते जाते हैं.

आत्मा को पोषित करने वाला ही वास्तिवक संपदा का अधिकारी होता है. आत्मा को संतुष्ट करिए जिससे ही सभी आध्यात्मिक और भौतिक सफलता प्राप्त होगी. असली सुख तो आत्मा के सुख में है.

धन-दौलत, लालसा, कामना ये सब माया हैं. उसे एक सीमा में बांधकर रखना होगा.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

आपको यह कथा कैसी लगी? क्या इसमें प्रेरित करने वाला कोई गुण था? कथा यदि पसंद आई हो तो आप प्रभु शरणम् से जुड़ जाएं. ऐसी कथाओं का सुंदर संसार वहां मिलेगा. लिंक नीचे है. आप हमारे साथ फेसबुक पर भी जुड़ें और इस अभियान को आगे बढ़ाने में हाथ बटाएं.

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

ये भी पढ़ें-
किसी को डराने वाले मैसेज भेजे या आपको ऐसा मैसेज मिला है? तो जरूर पढ़ें

आपका आत्मविश्वास किसी कारण हिला है तो इसे पढ़ें, संभव है आत्मविश्वास से भर जाएं आप.

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

error: Content is protected !!