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वशीकरण का अचूक मंत्रः जिसको चाहें वश में कर लें.

वशीकरण का अचूक मंत्रः जिसको चाहें वश में कर लें.

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इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.बहुत से सवाल मेरे पास आते हैं कि मुझे अमुक को वश में करना है- कैसे करूं? क्या उपाय करूं. नींबू के उपाय करूं, लौंग के उपाय करूं. और पता नहीं क्या-क्या?

ऐसे उपायों से वशीकरण होता है मुझे लोगों से ही सुनने को मिला है. तंत्र साधना से वशीकरण नहीं होता हो- ऐसा मैं नहीं कहता लेकिन तंत्र के साथ बारूद का सिद्धांत लागू होता है.

बारूद जब फटता है तो आप जिसे लक्ष्य करें उसका तो अनिष्ट करता ही है जो उसका प्रयोग कर रहा है उसे भी घात होता है. गोली चलाने वाले को भी झटका लगता है.

यदि गोली चलाने वाला सिद्धहस्त नहीं हुआ तो जिसे गोली मारेंगे उसे गोली लगेगी या नहीं यह तो कहना मुश्किल है लेकिन चलाने वाला बुरी तरह घायल हो जाएगा यह बात पक्की है. कई बार जान भी चली जाती है.

बीन की धुन पर सांप को नाचते देखा है? क्यों आखिर बीन की धुन के वश में सांप हो जाता है. यह भी तो एक प्रकार का वशीकरण ही है. तंत्र के अलावा भी मोहन के अस्त्र बताए गए हैं. जो बड़े सरल है और जिनके प्रयोग से बारूद वाले खतरे की संभावना नहीं रहती.

इसे एक सुंदर कथा के माध्यम से समझाता हूं.

एक सन्यासी हिमालय की पहाड़ियों में रहकर साधना करते थे. उनके ज्ञान और बुद्धिमानी की ख्याति दूर-दूर तक थी. एक औरत उनके पास दुखड़ा लेकर आई.

उसने कहा- मेरा पति पहले मुझसे बहुत प्रेम करता था, लेकिन वह जबसे युद्ध से लौटा है उसका बर्ताव बदल गया है. वह अब ठीक से बात तक नहीं करता.

संन्यासी ने महिला से कहा जो युद्ध की त्रासदी का सामना कर चुके होते हैं, उन्हें कई बार विरक्ति हो जाती है. चिंता न करो समय के साथ सब ठीक हो जाएगा.

महिला तो सुनने को राजी न थी. वह काफी दूर से चलकर आई थी. इसलिए उसे हर हाल में ऐसा उपाय चाहिए था जिससे उसका पति पहले की तरह प्रिय हो जाए.

उसने संन्यासी की चापलूसी शुरू कर की- लोग कहते हैं कि आपकी दी हुई जड़ी-बूटी पशुओं तक को इंसान बना देती है. मुझे ऐसी बूटी दें जिससे मेरे पति का वैराग खत्म हो जाए.

संन्यासी समझ गए कि महिला भली तो है लेकिन फिलहाल इसके मन पर किसी ज्ञानवर्धक बात का असर नहीं होगा.संन्यासी ने कहा- मैं ऐसी दवा बनाकर तुम्हें दे तो सकता था लेकिन उसे तैयार करने के लिए एक खास वस्तु चाहिए जो अभी नहीं है मेरे पास.

महिला को हौसला मिला कि ऐसी दवाई होती तो है जो ये बाबा बनाते हैं. बस दवाई बनाने के लिए जरूरी किसी सामान का अभाव है.

उसने कहा- बाबा आप मुझे बताइए. मैं लाकर देती हूं आपको वह खास वस्तु. जहां भी मिलती हो, जिस मोल मिलती हो मैं लेकर आऊँगी.

संन्यासी ने बताया- उस दवा में पड़ने वाली बाकी सारी चीजें तो मेरे पास हैं बस एक चीज नहीं है- बाघ की मूंछ का एक बाल. बाघ की मूंछ का एक बाल मिलाए बिना दवा बेअसर है.

अब बाघ की मूंछ का एक बाल मिलना इतना सरल तो हैं नहीं इसलिए दवा नहीं बन पाएगी. मुझे दुख है.

महिला ने कहा- बाबा मुझे तो अपने पति को हर हाल में वश में करना है. मैं लेकर आऊंगी बाघ की मूंछ का बाल फिर आप उससे दवा बनाइएगा.

संन्यासी ने कहा कि ठीक है लेकर आओ फिर देखते हैं. महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी.खोजते-खोजते उसे नदी के किनारे एक बाघ दिख भी गया. भोजन करने के बाद वह बाघ पानी पीने आया था. बाघ उस महिला को देखते ही दहाड़ा.

डर के मारे वह वहां से भागी लेकिन उसे तो पति का प्रेम जीतना ही था क्योंकि उसके बिना जीवन फिजूल था. सो उसने प्राण संकट में डालने का निश्चय किया.

वह कई दिनों तक उसी समय नदी किनारे पहुंचती जब बाघ पानी पीने आता. बाघ भोजन करके पानी पीने आता था इसलिए उसे भोजन की आवश्यकता थी नहीं जो महिला पर हमला करे.

धीरे-धीरे उस महिला के मन से बाघ का खौफ कम होता गया. उधर बाघ को भी महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी.

दोनों ही एक दूसरे के साथ पहले के मुकाबले कुछ सहज हो गए. अब तो बाघ ने उसे देखकर दहाड़ना भी बंद कर दिया था.

महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी.

बाघ किसी पर तभी हमला करता है जब वह भूखा हो. बिना वजह वह शिकार कभी करता नहीं. लेकिन वह तो तब आती थी जब भोजन कर चुका होता था और अब तो वह बाघ के लिए उपहार भी लाने लगी.

तो भला बाघ उससे क्यों बैर करता!

कई महीनों के लगातार प्रयास के बाद आखिरकार दोनों में दोस्ती हो गई. दोस्ती धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि अब वह बाघ के पास जाकर पुचकारने-थपथपाने भी लगी थी.

एक दिन हिम्मत करके बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया और संन्यासी को दिया.संन्यासी ने वह बाल लिया और उसे आग में झोंक दिया. पलभर में वह खाक हो गया.

महिला बिफर गई. वह सिर्फ एक बाल नहीं था, महिला के कई महीनों की मेहनत और सेवा का परिणाम था जिसके लिए उसने प्राण भी संकट में डाला था.

क्रोध को किसी तरह नियंत्रित करते हुए उसने कहा- बाबा, जिस बाल को प्राप्त करने के लिए मैंने प्राण संकट में डाले उसे आपने जला दिया. अब बूटी कैसे बनेगी?

संन्यासी ने कहा- बेटी तुम्हें अब किसी बूटी की ज़रुरत नहीं है. सोचो जब तुमने बाघ जैसे हिंसक जीव को अपने प्रेम से वश में कर लिया तो पति को वश में करने के लिए किसी औषधि या तंत्र-मंत्र की क्या सचमुच आवश्यकता है?

धैर्यपूर्ण प्रेम से पत्थर को भी पिघलाया जा सकता है. अखबारों में तरह-तरह के वशीकरण के विज्ञापन आ रहे हैं. रिश्ते वशीकरण से नहीं बनते. उसमें प्रेम के जल से सींचने का प्रयास करें. संसार की सबसे मीठी वस्तु मीठी बोली है. बात की मधुरता से ज्यादा मिठास का स्वाद और कहां मिल सकता है.

गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं- वशीकरण एक मंत्र है, तजदे वचन कठोर. वशीकरण का एक ही मंत्र है- कठोर वाणी का त्याग कर दो.

उसी तरह रहीम कहते हैं-

कागा काको धन हरे कोयल काको देय।
मीठे वचन सुनाय कर जग वश में कर लेय।।

मधुर भाषण एक ईश्वरीय वरदान है, मोहनास्त्रों में इसे शिरोमणि कह सकते हैं. अपने मीठे बोल और अच्छे आचरण से किसी को जीतने का प्रयास कीजिए. यही स्वाभाविक वशीकरण है.

अन्य प्रयास तो बल प्रयोग जैसे हैं. जिस दिन बल क्षीण हुआ आपका सम्मोहन बिखरते और सच्चाई सामने आते देर नहीं लगेगी. इस तरह तोन माया मिली न राम वाली स्थिति हो जाएगी.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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