कर्म का फल कर्मकांड से नहीं बदलता
पौराणिक कथाएं, जीवन में काम आने वाली कथाएं, व्रत त्यौहार की कथाएं, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें. लिंक इस लाइन के नीचे है
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंमहात्मा बुद्ध के समय की बात है. उन दिनों मृत्यु के पश्चात आत्मा को स्वर्ग में प्रवेश कराने के लिए कुछ विशेष कर्मकांड कराये जाते थे.
होता यह था कि कर्मकांडी घड़े देते थे. उन्हें वे विशेष घड़े बताते. एक घड़े में कुछ छोटे-छोटे पत्थर डाल दिए जाते और पूजा-हवन इत्यादि करने के बाद उस पर किसी धातु से चोट की जाती.
अगर घड़ा फूट जाता और पत्थर निकल जाते तो उसे इस बात का संकेत समझा जाता कि आत्मा अपने पाप से मुक्त हो गयी है और उसे स्वर्ग में स्थान मिल गया है.
चूँकि घड़ा मिटटी का होता था इसलिए इस प्रक्रिया में हमेशा ही घड़ा फूट जाता और आत्मा स्वर्ग को प्राप्त हो जाती और ऐसा कराने के बदले में कर्मकांडी खूब दान-दक्षिणा लेते.
अपने पिता की मृत्यु के बाद एक युवक ने सोचा क्यों न आत्मा-शुद्धि के लिए महात्मा बुद्ध की भी मदद ली जाए. वह अवश्य ही आत्मा को स्वर्ग दिलाने का कोई और बेहतर और निश्चित रास्ता जानते होंगे.
इसी सोच के साथ वह युवक महात्मा बुद्ध के समक्ष पहुंचा.
उसने बुद्ध से कहा- हे महात्मन! मेरे पिताजी नहीं रहे, कृपया आप कोई ऐसा उपाय बताएं कि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी आत्मा को स्वर्ग में ही स्थान मिल जाए.बुद्ध समझ गए कि वह प्रचलित कर्मकांडों से प्रभावित है. बुद्ध बोले- ठीक है, इसमें क्या परेशानी है. बस जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करना.
तुम उन पंडितों से दो घड़े लेकर आना. एक में पत्थर और दूसरे में घी भर देना. दोनों घड़ों को नदी पर लेकर जाना और उन्हें इतना डुबोना कि बस उनका उपरी भाग ही दिखे.
उसके बाद पंडितों ने जो मन्त्र तुम्हें सिखाए हैं उन्हें जोर-जोर से बोलना और अंत में एक हथौड़े से घड़ों को नीचे से चोट कर फोड़ देना. ये सब करने के बाद मुझे बताना कि क्या देखा?
युवक बहुत खुश था उसे लगा कि बुद्ध द्वारा बताई गयी इस प्रक्रिया से निश्चित ही उसके पिता के सब पाप काट जाएंगे और उनकी आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होगी.
अगले दिन उस युवक ने ठीक वैसा ही किया जैसा कहा गया था. सब करने के बाद वह बुद्ध के समक्ष उपस्थित हुआ. बुद्ध ने पूछा- बताओ तुमने क्या देखा?
युवक बोला- मैंने आपके कहे अनुसार पत्थर और घी से भरे घड़ों को पानी में डाल कर चोट की जैसे ही मैंने पत्थर वाले घड़े पर प्रहार किया घड़ा टूट गया और पत्थर पानी में डूब गए.उसके बाद मैंने घी वाले घड़े पर वार किया. वह घड़ा भी तत्काल फूट गया और घी नदी के बहाव की दिशा में बहने लगा.
बुद्ध बोले- ठीक है! अब जाओ और उन पंडितों से कहो कि कोई ऐसी पूजा, यज्ञ, इत्यादि करें कि वे पत्थर पानी के ऊपर तैरने लगें और घी नदी की सतह पर जाकर बैठ जाए.
युवक हैरान होते हुए बोला- यह आप कैसी बात करते हैं? पंडित चाहे कितनी भी पूजा करे लें पत्थर कभी पानी पर नहीं तैर सकता और घी कभी नदी की सतह पर जाकर नहीं बैठ सकता!
बुद्ध बोले- बिलकुल सही और ठीक ऐसा ही तुम्हारे पिताजी के साथ है. उन्होंने अपने जीवन में जो भी अच्छे कर्म किये हैं वे उन्हें स्वर्ग की तरफ उठाएंगे और जो भी बुरे कर्म किये हैं वे उन्हें नरक की ओर खीचेंगे. तुम चाहे जितनी भी पूजा करा लो, कर्मकाण्ड करा लो, तुम उनके कर्मफल को रत्ती भर भी नहीं बदल सकते.
युवक बुद्ध की बात समझ चुका था कि मृत्यु के पश्चात स्वर्ग जाने का सिर्फ एक ही मार्ग है और वो है जीवित रहते हुए अच्छे कर्म करना.
स्वर्ग और नर्क की गति जीवनकाल में किए हमारे कर्मों से निर्धारित होती है. शरीर से प्राण निकल जाने के बाद उसके लिए चाहे जितनी भी पूजा या कर्मकांड कर लें, कर्मों का फल बदलता नहीं है.गरूड़ पुराण में साफ-साफ कहा गया है कि आत्मा शरीर त्यागने के बारह दिनों बाद धर्मराज के पास पहुंचती है. इस बीच उसे बहुत से ऐसे पड़ावों से होकर गुजरना पड़ता है जहां सुख-दुख दोनों होते हैं.
मरने के बाद किए कर्मकांड ज्यादा से ज्यादा उस बारह दिन की गति में उस आत्मा का सहारा बन सकते हैं. उसके आगे का फल निर्धारण तो मृत्यु लोक यानी पृथ्वी लोक पर किए उस व्यक्ति के कार्यों से होता है.
परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं. उससे ही लोक-परलोक दोनों सुधारा जा सकता है. जीवनकाल में जितना संभव हो परोपकार करते रहें. किसी को दुख पहुंचाने के भाव से मुक्त हो जाएं.
हिंसा चाहे वह शारीरिक हिंसा हो या जिह्वा हिंसा उससे रहित मनुष्य को ईश्वर अपने बराबर में स्थान देते हैं.
क्या आपको यह कथा पसंद आई?
ऐसी अनगिनत कथाओं का सुंदर संसार है प्रभु शरणम् जहां आप धार्मिक-आध्यात्मिक कथाएं, जीवन को बदलने वाली प्रेरक कथाएं, रामायण-गीता, ज्योतिष और सभी प्रमुख मंत्रों को पढ़ सकते हैं. उन मंत्रों के क्या लाभ हैं, उसके बारे में जान सकते हैं.
एक बार स्वयं आजमाकर देख लें. इस लाइन के नीचे प्रभु शरणम् एप्प का लिंक है. उसे क्लिक करके एप्प को डाउनलोड करें, फिर निर्णय़ करें.
पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्योहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
ये भी पढ़ेंः
जानिए मृत्यु से पहले काल मनुष्य को भेजता है कौन से चार पत्र
खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएंगे.
