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जे जस करहिं से तस फल चाखा

जे जस करहिं से तस फल चाखा

draupadi-krishna

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आप प्रभु शरणम् का फेसबुक पेज लाइक कर लें. इससे आपको प्रभु शरणम् में आने वाले पोस्ट की सूचना मिलती रहेगी. फेसबुक लिंक इस लाइन के नीचे ही है.एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयीं. भोर का समय था तभी उनका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लंगोटी थी.

साधु स्नान के पश्चात अपनी दूसरी लंगोटी लेने गए तो वह लंगोटी अचानक हवा के झोंके से उडकर पानी मे चली गयी ओर नदी की धारा के साथ बह गयी.

संयोगवश साधु ने जो लंगोटी पहनी थी वह भी पूरी न थी, कुछ फटी हुई थी.

अंधेरा होने के कारण साधु उसे पहनकर नहा रहे थे इसलिए चसोच मे पड़ गया कि अब वह अपनी लाज कैसे बचाए थोडी देर मे सूर्योदय हो जाएगा और घाट पर भीड़ बढ जाएगी.

साधु तेजी से पानी के बाहर आया और झाडी में छिप गया. द्रौपदी ने यह सारा दृश्य देखा और उनकी विवशता समझ गईं.

उन्होंने अपनी साड़ी आधी फाड़ी और साधु को आधी साडी देते हुए बोलीं- तात मैं आपकी परेशानी समझ गयी. अभी यही वस्त्र उपलब्ध था. आप इस वस्त्र से अपनी लाज ढंक लीजिए.

साधु ने सकुचाते हुए साडी का टुकडा ले लिया और आशीष दिया- पुत्री जिस तरह आज तुमने मेरी लाज बचायी उसी तरह एक दिन भगवान तुम्हारी लाज बचाएंगे.

जब भरी सभा में दुःशासन द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास कर रहा था तो द्रौपदी की करूण पुकार नारद ने भगवान तक पहुचायीं.

भगवान ने कहा- कर्मों के बदले मेरी कृपा बरसती है क्या कोई पुण्य है द्रौपदी के खाते में.जांचा परखा गया तो उस दिन साधु को दिए वस्त्रदान का पुण्य दिखा. वह पुण्य बढ़ता-बढ़ता अनंत योजन लंबी साड़ी का रूप ले चुका था जिसे चुकता करने भगवान पहुंच गए. द्रौपदी की सहायता को.

दुःशासन खींचता गया और द्रौपदी के पुण्यस्वरूप जमा हजारों गज कपडा बढता गया. संभव है यह कथा एक क्षेपक कथा हो.

आप इसे स्वीकार करें या न करें किंतु इस बात से कोई मना नहीं कर सकता कि अच्छे कर्म इंसान का सदैव साथ देते हैं.

दूध से दही जमने में समय लगता है. उस दही को मथकर उसका सार तत्व मक्खन निकालने में और समय लगता है किंतु उस दूध को अगर फाड़ना या बिगाड़ना हो तो एक पल पर्याप्त है.

जो लोग अच्छे कर्म करते हैं उन्हें यह भी संभव है कि सफलता में विलंब हो रहा हो लेकिन ईश्वर देख रहा है. पहले पूर्वजन्म में किए आपके किसी अनुचित कर्मों को काटता है फिर आपको अच्छे कर्मों को परिणाम देता है.ईश्वर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि अच्छे इंसान को मिली सफलता या सद्गुण उन्हें लंबे समय तक सहेजकर रखना है. यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो पूर्वजन्म के कर्म आकर समय-समय पर अपना हिसाब मांगने खड़े हो जाएंगे और एक सद्गुणी में अवगुण आने का खतरा बना रहेगा.

परमात्मा की लीला को समझना साधारण मानवों के लिए संभव ही नहीं. आपने सुने होंगे चमत्कारों के बारे में. ईश्वर की यह माया ही तो है.

ईश्वर सबकुछ देख रहे हैं. हम हमेशा उनकी निगाहों में हैं. अपना कर्म अच्छा रखिए. ऊपरवाले के यहां देर तो है अंधेर नहीं.

क्या आपको यह कथा पसंद आई?

ऐसी अनगिनत कथाओं का सुंदर संसार है प्रभु शरणम् जहां आप धार्मिक-आध्यात्मिक कथाएं, जीवन को बदलने वाली प्रेरक कथाएं, रामायण-गीता, ज्योतिष और सभी प्रमुख मंत्रों को पढ़ सकते हैं. उन मंत्रों के क्या लाभ हैं, उसके बारे में जान सकते हैं.

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