एक हंस जिसके दर्शन से इंसान हो जाता है धनवान- वह हंस आपके आसपास भी है

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एक किसान को विरासत में खूब संपत्ति मिली थी. इस धन-संपत्ति ने उसे आलसी बना दिया. वह दिनभर चापलूसों से घिरा उनके साथ गप्पें हांकता. जिंदगी पूरी ऐश-मौज में कट रही थी.
इस लापरवाही का नौकर-चाकर, सगे-संबंधी सभी नाजायज फाय़दा उठा रहे थे. जिसको जहां मौका लगता, किसान की संपत्ति लूटने में लगा रहता.
एक बार किसान का एक पुराना दोस्त उससे मिलने उसके गांव आया. दो दिन में ही दोस्त को घर में मची लूट-खसोट का पता चल गया. उसने किसान को समझाने की कोशिश भी की लेकिन उसने अनसुना कर दिया.
एक दिन किसान के दोस्त ने किसान से एक ऐसे महात्मा से मिलने को कहा जो बैठे-बिठाए अमीर होने का तरीका बताते हैं. किसान ने महात्मा से मिलकर अमीर होने का तरीका पूछा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.महात्माजी सारा माजरा समझ गए. उन्होंने किसान से कहा कि अमीर होने का तरीका है. वह कठिन तो नहीं पर तुम कर नहीं पाओगे.
उसने महात्माजी के पैर पकड़ लिए- महात्माजी कठिन हो या सरल, आप मुझे बस वह तरीका बताएं.
महात्माजी ने बताया- ‘हर रोज सूर्योदय से पहले एक हंस आता है. उस हंस के दर्शन आसान तो नहीं हैं लेकिन जो भी उसे एकबार देख ले, उसका धन दिन दोगुना, रात चौगुना बढ़ता है. हंस के दर्शन की कोशिश तुम्हें लगातार करनी होगी.’
किसान सूर्योदय से पहले उठा. हंस को खोजने खलिहान की ओर गया. वहां उसने देखा कि एक रिश्तेदार अनाज चुराकर भाग रहा है. पकड़े जाने पर वह माफी मांगने लगा. रिश्तेदार ने पहले की सारी चोरियों का माल लौटाया. उसने यह भी बताया कि इस चोरी मैं और कौन-कौन शामिल है.
उसके बाद वह गौशाला पहुंचा. वहां एक नौकर दूध चुरा रहा था. गौशाला में गंदगी के कारण बुरा हाल था. चूंकि मालिक ही देर तक सोता था तो नौकर भी देर तक सोते रहते थे. उसने नौकरों को फटकार लगाई और उन्हें धमकाया कि अगर काम में लापरवाही हुई तो नौकरी से निकाल देगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.किसान नौकरों पर नजर रखने के लिए रोज आने लगा. खेत-गौशाला के साथ वह बाग-बगीचों के चक्कर भी लगाने लगा. वहां की व्यवस्था भी सुधरी. घर पहुंचकर दिन हिसाब-किताब लेते बीतता. इस तरह घर में होने वाली बेकार की जमघट बंद हो गई. किसान की आमदनी बढ़ गई.
हंस की तलाश में जल्दी उठने और घूमने-फिरने से किसान का स्वास्थ्य सुधर गया. उसके बच्चे भी साथ घूमने लगे. वे भी तंदुरूस्त हो गए. किसान का धन तो बढ़ा लेकिन उसे हंस नहीं दिखा. उसने कुछ दिन तक और हंस को तलाशा पर हंस मिला नहीं.
शिकायत करने किसान महात्माजी के पास पहुंचा. महात्माजी ने कहा, ‘किसान, तुम्हें हंस के दर्शन तो हो गए बस तुम उसे पहचान नहीं पा रहे. धन बढ़ाने वाला वह हंस है तुम्हारा परिश्रम. तुमने परिश्रम किया, जिसका लाभ अब तुम्हें मिलने लगा है.’
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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