April 30, 2026

भक्त की रक्षा को आए भगवान, दुर्वासा भागे बचाने जानः भागवत में वर्णित हरिभक्त अंबरीश की कथा

lord vishnu 3d
व्रत त्यौहार सम्बंधित जानकारियों एवं लेटेस्ट कथाओं के लिए प्रभु शरणम् ऐप्प डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

राजा अंबरीश भगवान विष्णु के महान भक्त थे. उनकी कीर्ति देवलोक तक में फैली थी. एक बार, अंबरीश ने एकादशी व्रत किया. एकादशी का व्रत अगले दिन यानी द्वादशी को तोड़ा जाता है.

व्रत तोड़ने के बाद साधुजनों को भोजन कराना होता है. द्वादशी को जब अंबरीश के व्रत तोड़ने का समय हुआ, वहां दुर्वासा ऋषि पधारे. अंबरीश ने दुर्वासा से पहले भोजन करने का आग्रह किया.

दुर्वासा ने अंबरीश का आग्रह स्वीकार कर लिया. उन्होंने अंबरीश से कहा कि वह स्नान करने नदी तक जा रहे हैं. जब तक वह स्नान करके नहीं आते, तब तक अंबरीश अपना व्रत न तोड़ें.

काफी समय बीत गया, लेकिन दुर्वासा नहीं आए. दुर्वासा बड़े ही मनमौजी ऋषि थे. कई बार वह यजमान को भोजन तैयार करने का आदेश देकर चले जाते थे और लौटकर आते ही नहीं थे.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  गणेश अवतारः मद का नाश करने वाला है गणेशजी का एकदंत अवतार, ऋणमुक्ति का मंत्र
Share: