स्त्री-पुरुष सभी करें हनुमद् आराधना, बस रखें थोड़ी सी सावधानी- हनुमद् आराधना से जुड़ी खास बातें

पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंहनुमानजी की आराधना से जुड़े प्रश्न लगातार आ रहे हैं. उनमें से सबसे ज्यादा प्रश्न इस संदर्भ में होते हैं कि क्या स्त्रियों को हनुमद् आराधना करनी चाहिए? सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि हनुमद् आराधना का अर्थ क्या है.
हनुमानजी चिरंजीवी अर्थात हमेशा जीवित रहने वाले देवता हैं. हनुमान का एक अर्थ है अहंकार रहित. हनु का मतलब हनन करना और मान का मतलब अहंकार. हनुमान अर्थात जिसने अपने अहंकार का हनन कर लिया हो.
हनुमानजी विनम्रता के पर्याय हैं. हनुमानजी ने जो भी कार्य किए वे असाध्य थे. उनके गुण ऐसे प्रेरणास्त्रोत हैं जिनका पालनकर हम अपना व्यक्तित्व निखार सकते हैं. हनुमानजी की कृपा सिर्फ आसुरी प्रवृति के इंसानों, भूत-प्रेतों, दूसरों का अनिष्ट चाहने वालों को नहीं मिलती. शेष सभी जन उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं. इसलिए स्त्रियों पर प्रतिबंध का प्रश्न ही नहीं. हां इससे जुड़ी कुछ बाते हैं.स्त्रियों द्वारा हनुमद् आराधना:-
हनुमानजी की उपासना के संदर्भ में एक आम भ्रम है महिलाएं उनकी पूजा नहीं कर सकतीं. महिलाओं के लिए हनुमानजी की साधारण पूजा कभी वर्जित नहीं है. बस रजस्वला स्थिति में पूजा करना मना है.
हनुमानजी की साधना और विशेष पूजा की प्रक्रिया लंबे अवधि की होती है और जिसे महिलाएं नहीं कर सकतीं हैं क्योंकि बीच में व्यवधान उत्पन्न हो जाते हैं. इसलिए हनुमान सधना केवल पुरुषों ही करते हैं. परंतु सामान्य पूजा स्त्रियां जरूर करें. स्त्रियां हनुमानजी को उपवस्त्र समर्पित न करें. वे केवल जनेऊ चढ़ाएं.
ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से जिन राशियों के स्वामी मंगल और शनि हैं उन्हें हनुमानजी की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए. जो हनुमानजी को अपना इष्ट मानते हैं उन्हें रोजाना हनुमद् आराधना और पाठ करना चाहिए.
हनुमद आराधना के साथ एक सुमगता की बात यह है कि इसके लिए कोई बहुत विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती. विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए हनुमानजी के विशिष्ट मंत्र और पाठ हैं जिनके जप से सारी अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं.
यदि हनुमान साधक किसी कारणवश किसी दिन विधिवत पूजा नहीं कर पाते तो भी उनके एक विशिष्ट मंत्र
“ऊं हं हनुमते नम:” की यदि एक माला जप लें तो भी पूजा पूर्ण हो जाती है.
जिन्हें भूत-प्रेत से बहुत भय होता है यदि वे इस मंत्र का रात को सोने से पहले जप करें तो कुछ ही दिनों में एक ऐसा कवच तैयार हो जाता है जो उन्हें भूत-प्रेत के भय से मुक्त रखता है. इसका जप करने से पहले पवित्र होकर स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिएं.
यदि आप किसी पीड़ा से परेशान हैं तो ऐसे में हनुमानजी के साबर मंत्र शीघ्र समाधान या राहत देने वाले होते हैं. इस मंत्र की साधना में एक सावधानी जरूरी है इस मंत्र का प्रयोग वही लोग करें जिनका खान-पान शुद्धता और वे अन्य बुराईयों से दूर हों अन्यथा लेने के देने पड़ जाते हैं. हर बाधा के लिए अलग साबर मंत्र बताए गए हैं जो किसी हनुमान साधक के परामर्श से ही करनी चाहिए.रोग-व्याधि, भय से पीड़ा में हनुमान उपासना
एकाग्रचित होकर 21 दिन तक विधि-विधान से “बजरंग बाण” का पाठ करने से शत्रुओं के भय और रोग-व्याधि में बहुत आराम मिलता है. यदि आप निर्दोष और निरपराध हैं तो इस साधना से शत्रुओं को दंड मिलता है. यदि आपके अभीष्ट कर्म अनुचित हैं तो लाभ होने के स्थान पर हानि ही हो सकती है.
यदि परिवार में किसी के हिंसक प्रवृति से आप परेशान हैं तो हनुमानजी से उसकी बुद्धि सुधारने की प्रार्थना करें. यदि किसी अपराध के कारण बंधन दोष यानी जेल जाना पड़ गया है तो दोषी व्यक्ति अगर 108 बार “हनुमान चालीसा” का पाठ करके यह संकल्प ले कि वह स्वयं को बुरे कार्यों से मुक्त रखकर हनुमानजी की शरण में रहेगा तो वह दोबारा बंधन दोष से मुक्त हो जाता है.
ध्यान रहे हनुमानजी तभी तक रक्षा करते हैं जब तक आपकी भावना पवित्र है. यदि उस व्यक्ति ने दोबारा उन्हीं कार्यों में लिप्तता बढ़ाई तो बंधन दोष कई गुना बढ़ जाता है और उसे फिर उसकी मुक्ति आसानी से संभव नहीं होती.
यदि आप लगातार किसी कार्य को करने में असमर्थ हो रहे हैं और वह कार्य ऐसा है जिसमें कोई बुरी भावना नहीं और जिससे दूसरों का कल्याण हो सकता है तो आपको हनुमानजी के द्वादश(बारह) नाम जप करके उसे आरंभ करना चाहिए. एक माला जप लें.
उस कार्य से जुड़े हर प्रयास से पूर्व कम से कम एक बार द्वादश नाम जप लें. इससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है. द्वादश नाम प्रभु शरणम् एप्प के हनुमान आराधना सेक्शन में हैं.हनुमद आराधना में रखी जाने वाली कुछ सामान्य सावधानियां–
- – हनुमानजी की साधना अवधि में और व्रत में संयम की परम अवश्यकता है. इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन होना चाहिए.
- – हनुमानजी को चढ़ाया जाने वाला प्रसाद शुद्ध होना चाहिए. उसमें घी का प्रयोग सबसे उत्तम बताया गया है.
- – हनुमानजी की पूजा में यदि दीपक जला रहे हैं तो घी के दीपक की ही प्रयोग करें.
- – हनुमानजी को लाल फूल प्रिय हैं. अत: उन्हें लाल फूल विशेष रूप से चढ़ाएं.
- – हनुमानजी की मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तिल का तेल मिलाकर उसका लेप करना चाहिए. इससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं.
- – हनुमान साधना हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके ही शुरू करना चाहिए.
- – स्त्रियां हनुमानजी को वस्त्र न अर्पित करें. वे ज्यादा से ज्यादा जनेऊ उन्हें अर्पित कर सकती हैं.
- – हनुमानजी की पूजा आरंभ करने से पूर्व श्रीरामजी की स्तुति जरूर कर लें. श्रीरामरक्षा स्तोत्र या श्रीरामस्तुति पाठ कर लें अथवा निम्न मंत्र पढ़ेः
यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृत मस्तककांजलिम्।
वाष्प वारि परिपूर्णलोचनं मारूति नमत राक्षसान्तकम्।।
यदि यह स्तुति भी स्मरण न हों तो “ऊं राम रामाय नमः” का ही जप कर लें.
हनुमानजी का कोई विशेष अनुष्ठान मंगलवार और शनिवार को आरंभ करें तो सबसे उत्तम फलदायी होगा. यदि किसी कारण से कोई भी पूजा नहीं कर पाते तो पावित्रीकरण मंत्र के स्मरण से पवित्र होने के बाद हनुमान चालीसा का ही पाठ कर लें तो भी हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है. पावित्रीकरण मंत्र और हनुमान चालीसा दोनों एप्प में मौजूद है.
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. फेसबुक पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा. https://www.facebook.com/PrabhuSharanam कथा पसंद आने पर हमारे फेसबुक पोस्ट से यह कथा जरुर शेयर करें.
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam