अपना विवाह नहीं होने से नाराज गणेशजी डालने लगे देवों के विवाह में विघ्न- दक्षिण भारत की प्रचलित कथा
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गणेशजी के धड़ में हाथी के बच्चे का मस्तक जोड़ा गया था. हाथी की सुंदरता बढ़ाने वाले दो दांत होते हैं. लेकिन परशुराम के साथ युद्ध में गणेशजी का एक दांत भी टूट गया और एकदंत कहलाए. शरीर भी उनका थुलथुल. लंबे पेट वाले लंबोदर की सुंदरता की हानि हो गई.
कोई सुशील कन्या गणेशजी से विवाह को राजी नहीं थी. जबकि अन्य देवताओं का विवाह हो रहा था. गणेश को बड़ा क्रोध आया. गणेशजी ने सोचा कि अगर उनका विवाह नहीं हो रहा तो वह किसी और का विवाह भी नहीं होने देंगे.
उन्होंने अपने वाहन चूहे को आदेश दिया कि जिस रास्से से किसी भी देवता की बारात गुजरने वाली हो, उस रास्ते को और विवाह मंडप की भूमि को अंदर से खोखला करके विघ्न डालो.
चूहे ने स्वामी की आज्ञा मानी. इससे देवताओं को विवाह में बड़ी दिक्कतें आने लगीं. कोई भी बारात समय पर नहीं पहुंचती. विवाह शुभ मुहूर्त में हो नहीं पाते.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सारे देवता शिवजी के पास अपनी शिकायत लेकर गए. शिवजी को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. देवी पार्वती ने सलाह दी कि ब्रह्माजी से इसका हल निकालने को कहा जाए.
ब्रह्माजी योग में लीन हुए और योग से दो कन्याएं ऋद्धि और सिद्धि अवतरित हुईं. दोनों ब्रह्मा की मानस पुत्री थीं. ब्रह्माजी ऋद्धि-सिद्धि को लेकर गणेशजी के पास पहुंचे.
गणेशजी से अनुरोध किया कि वह उनकी दोनों मानस पुत्रियों को अपनी मित्र मंडली में शामिल कर लें और उन्हें शिक्षा दें. गणेशजी तैयार हो गए. चूहा जब भी गणेशजी के पास किसी विवाह की सूचना लेकर आता, ऋद्धि-सिद्धि उनका ध्यान बंटाने के लिए कोई ज्ञान का प्रसंग छेड़ देतीं.
इस तरह देवों के विवाह निर्विघ्न होने लगे. एक दिन चूहे को मौका लगा. उसने गणेशजी को पिछले दिनों में हुए देवताओं के कई निर्विघ्न विवाह के बारे में बताया. गणेशजी को मामला समझ में आ गया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इससे पहले कि वह क्रोधित हों, ब्रह्माजी ऋद्धि-सिद्धि के साथ प्रकट हुए और गणेशजी से बोले- आपने स्वयं इन दोनों को शिक्षा दी. अब मुझे इनके लायक आपसे श्रेष्ठ वर दूसरा नहीं मिल रहा. आप इनसे विवाह कर लें.
इस तरह ऋद्धि(बुद्धि-विवेक की देवी) और सिद्धि(सफलता की देवी) से गणेशजी का विवाह हो गया जिनसे शुभ-लाभ नामक दो पुत्र हुए. इसीलिए विवाह कार्य में सबसे पहले गणेशजी के साथ ऋद्धि-सिद्धि का आह्वान कर उसे निर्विघ्न करने की प्रार्थना की जाती है.
संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली
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