Advertisement728 × 90

संक्रांति को विशेष पुण्य के लिए राशि अनुसार इन मंत्रों से करें पूजा व दान

संक्रांति को विशेष पुण्य के लिए राशि अनुसार इन मंत्रों से करें पूजा व दान

Happy-Makar-Sankranti-2015-Suraya-namshkar-Photos

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें।

जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्यनारायण उत्तर दिशा की तरफ प्रयाण करते हैं. इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है. उत्तरायण का तात्पर्य है कि आकाश के देवता की कृपा से ह्दय में भी अनासक्ति करनी है.

संक्रांति के दिन स्नान एवं दान का विशेष रूप से महत्व कहा गया है. महर्षि याज्ञवल्क्य ने लिखा है कि संक्रांति को दान की भावना रखने वाले मनुष्य के प्रति देवतागण भी दयालु रहते हैं. उन्होंने तिल, कंबल और गुड़ के दान को विशेष रूप से महत्व दिया है.

संक्रांति से देवशक्तियां पुष्ट होनी आरंभ हो जाती हैं. इसलिए संक्रांति को हर व्यक्ति को स्नान के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए.

तीर्थस्थलों पर स्नान, गंगास्नान का विशेष महत्व है किंतु जिनके लिए यह संभव नहीं वह घर में भी मां गंगे का आह्वान करते हुए स्नान करें.

भारत के बहुत से हिस्सों में इसे तिल संक्रांति पर्व भी कहा जाता है. आज तिल का आहार एवं दही चूड़ा, खिचड़ी आदि के भोजन एवं दान की विशेष रूप से मान्यता है. क्या यह केवल एक परंपरा है या इसके पीछे एक बड़ा कारण है. यह सब मैं आपको विस्तार से बताउंगा.

मकर संक्रांति आलस्य का त्याग कर कर्म में जुट जाने का पर्व है. आज से शबी शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं. कृषक वर्ग इसे प्रसन्नता और उल्लास के साथ मनाता है. दान की महिमा तो अनंत है. हर व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए.

मैं आपको आज वे दान बताउंगा जो हर व्यक्ति के सामर्थ्य में होते हैं. चूंकि यह पर्व कृषक वृति से संबद्ध है इसलिए इसमें मैं कृषि आदि से जुड़े दान की चर्चा करूंगा.

दान करने से व्यक्ति अपने इष्ट देवता एवं राशि के प्रबल ग्रहों का छोटा सा स्मरण करके उनसे सुख-समृध्दि का वरदान और कष्टों से निदान की कामना करनी चाहिए. इससे विशेष लाभ होता है.

क्यों मकर संक्रांति को तिल एवं खिचड़ी का उपयोग एवं दान की इतनी महिमा कही गई है? किस ग्रह के जातक किस देवता या किस ग्रह की किन मंत्रों से स्मरण करें एवं कौन सा दान करें यह मैं आपको राशि अनुसार बताउंगा.

संक्रांति को किन मंत्रों से दें सूर्य को जल, अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.मकर संक्रांति की सुबह कैसे हो शुरुआतः

सुबह उठकर देवताओं का स्मरण करने के बाद दैनिक कार्यों से निपटकर स्नान करें.

एक तांबे के लोटे या स्टील के लोटे में जल लें. यदि गंगा जल है तो उसमें थोड़ा सा मिला लें.

उसमें थोड़े से काले तिल और थोड़ा गुड़ भी मिला लें.

लाल पुष्प या कुमकुम भी जल में मिला लें. फिर पूर्व दिशा की ओर खड़े होकर भगवान सूर्य को निम्न मंत्रों से जल दें.

ऊं मित्राय नमः
ऊं रवये नमः
ऊं सूर्याय नमः
ऊं भानवे नमः
ऊं खगाय नमः
ऊं पूष्णे नमः
ऊं हिरण्यगर्भाय नमः
ऊं मरीचये नमः
ऊं आदित्याय नमः
ऊँ सवित्रे नमः
ऊं अर्काय नमः
ऊं भास्कराय नमः
ऊं श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नमः

यदि इन सभी मंत्रो का स्मरण नहीं कर पा रहे तो जितने स्मरण हों उतने मंत्रों का उच्चारण करते हुए जल दें. इसके बाद ऊं घृणि सूर्याय नमः का ग्यारह बार उच्चारण कर लें.

सूर्यदेव को जल अर्पित करने के बाद उनसे अपने मन की अभिलाषा रखें. भगवान सूर्य को जल देने के बाद आपको अपनी राशि के अऩुसार 5 मिनट की पूजा और करनी है फिर संकल्प लेकर या बिना संकल्प लिए दान करना है.

राशि अनुसार क्या पूजा करनी है यह मैं आगे बता रहा हूं. उस पूजा के उपरांत ही दान करें. यदि दान की सामग्री सुबह-सुबह सुलभ नहीं हो सकी है तो मन में संकल्प ले लें एवं बाद में भी दान कर सकते हैं. प्रयास करें कि संक्रांति तिथि बीतने से पहले ही संकल्प पूरा कर लें.

अागे पेज पर राशि अनुसार पूजा एवं दान

आगे पेज पर पढ़ें राशि अनुसार दान से पूर्व करनी है छोटी सी पूजा. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.राशि अनुसार संक्रांति को मंत्र का जप एवं दान

मेषः

आपकी राशि का स्वामी मंगल है. आपको भगवान सूर्य को जल देने के बाद एक माला “ऊं अं अंगारकाय नमः” एवं एक माला “ऊं हं हनुमते नमः” की जप लेनी है.

दानः किसी गरीब या ब्राह्मण को मूंग, मसूर की दाल, गेहूं, गुड, आदि दान कर दें. समर्थवान हैं तो किसी लाल वस्त्र, लाल बैल या गाय, सोना, तांबा, मूंगा या भूमिदान संकल्प लेने के साथ करें.

वृषः

आपकी राशि का स्वामी शुक्र है. सूर्यदेव को अर्ध्य देने के साथ ही आपको “ऊं नमः शिवाय” की एक माला और “ऊं शुं शुक्राय नमः” की एक माला जप लेनी है.

दानः आपको मन्दिर में गाय का घी दान करना है. घी के अतिरिक्त चावल, चीनी, दही, का दान सामर्थ्य अनुसार करना चाहिए.

मिथुनः

इस राशि का स्वामी बुध है. आपको सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद ऊं गं गणपत्यै नमः की एक माला जपनी है. इसके बाद ऊं बुं बुधाय नमः की एक माला जपनी है.

दानः किसी गरीब को सब्जियों का दान करें. सक्षम हैं तो हरा वस्त्र, घी आदि का सामर्थ्य अनुसार दान करें. किन्नरों को हरे वस्त्र एवं हरी चुड़ियां दान दें.

कर्कः

कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं. आपको सूर्य को अर्ध्य देने के पश्चात ऊं सोम सोमाय नमः की एक माला और ऊं नमः शिवाय की एक माला का जप करना है.

दानः घी, चावल, दही का दान अवश्य करें. समर्थवान हैं तो किसी गरीब या ब्राह्मण को सफेद धोती, शंख, मोती और चांदी का दान करें.

सिंह, कन्या, तुला वृश्चिक की पूजा अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सिंहः
आपकी राशि के स्वामी सूर्य ही हैं इसलिए यह दिन आपके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. आपको ऊं घृणि सूर्याय नमः की एक माला का जप करना है और आदित्य हृद्य स्तोत्र का पाठ करना है.

दानः
गेहूं, गुड़, का दान अवश्य करें. संमर्थवान हैं तो तांबा और सोना आदि का दान करें.

कन्याः
कन्या राशि का स्वामी बुध है. आपको सूर्य कोजल देने के बाद ऊं गं गणपत्यै नमः की एक माला जपनी है. इसके बाद ऊं बुं बुधाय नमः की एक माला भी जपनी है.

दानः
गाय को कल हरा चारा जरूर खिला दें. उससे आपके बहुत से कष्ट दूर होंगे. हरी सब्जी का दान करें. हरे वस्त्र और घी का दान गरीबों और ब्राह्मणों को सामर्थ्य अनुसार अवश्य करें.

तुलाः

आपकी राशि का स्वामी शुक्र है. आपको सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं नमः शिवाय की एक माला जपनी है. इसके बाद ऊं शुं शुक्राय नमः की एक माला का जप करना है.

दानः मन्दिर में गाय का घी दान दें. गरीबों को चावल, चीनी, दही का दान करें. समर्थवान हैं तो ब्राह्मणों, गरीबों और घर के बड़ों को कल श्वेत पदार्थ का दान सामर्थ्य अनुसार करें.

वृश्चिकः

आपकी राशि का स्वामी मंगल है. आपको सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं हं हनुमते नमः की एक माला जपनी है. इसके बाद ऊं अं अंगारकाय नमः की एक माला भी जपनी है.

दानः
किसी गरीब को मूंग, मसूर की दाल, गेहूं, गुड, आदि दान कर दें. समर्थवान हैं तो लाल वस्त्र, लाल बैल या गाय, सोना, तांबा, मूंगा या भूमिदान भी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए.

धनु, मकर, कुंभ व मीन राशि की पूजा अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.धनुः

धनु राशि का स्वामी बृहस्पति है. बृहस्पति देवगुरू हैं. आपको सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं नमो भगवते वासुदेवाय की एक माला जपनी है. फिर ऊं बृं बृहस्पत्यै नमः की एक माला जपनी है.

दानः गाय को चारा अवश्य दें. आपको चने की दाल, चीनी, पीले फल जैसे केला, पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए. किसी ब्राह्मण या गुरूजन को आदर सहित मीठा भोजन अवश्य कराएं.

मकरः

इसी राशि में सूर्य के प्रवेश के कारण तो मकर संक्रांति हैं. इस राशि के लोगों के लिए सबसे खास दिन है मकर संक्रांति. आपकी राशि के स्वामी शनि है. आपको सूर्यदेव को जल देने के बाद ऊं शं शनैश्चरायै नमः की एक माला जपनी है. उसके बाद ऊं नमः शिवाय एवं ऊं हं हनुमते नमः की एक माला का जप करना है.

दानः काली उड़द, काला तिल, सरसों तेल, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काला कंबल, जूते आदि दान करना चाहिए. कल खिचड़ी और काले तिल के लड्डू का दान आपके लिए विशेष फलदायी रहेगा.

कुंभः

कुंभ के स्वामी भी शनि ही हैं. सूर्यदेव को जल चढ़ाने के बाद आपको ऊं शं शनैश्चरायै नमः की एक माला जपनी है. ऊं नमः शिवाय की भी एक माला जपनी है.

दानः काली उड़द, काला तिल, सरसों का तेल, किसी जरूरतमंद को काला कंबल दान करना चाहिए. उड़द के दाल की खिचड़ी, काले तिल का लड्डू दान करना चाहिए.

मीनः
आपकी राशि का स्वामी बृहस्पति है. सूर्य को जल देने के पश्चात ऊं नमो भगवते वासुदेवाय की एक माला का जप करें. ऊं बं बृहस्पत्यै नमः की एक माला जप करें.

दानः गाय को चारा अवश्य दें. आपको चने की दाल, चीनी, पीले फल जैसे केला, पीले वस्त्र आदि का दान करना चाहिए. किसी ब्राह्मण या गुरूजन को आदर सहित मीठा भोजन अवश्य कराएं.

खिचड़ी का दान और आहार क्यों जरूरी है आज अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.संक्रांति को क्यों जरूरी है खिचड़ी खाना और खिचड़ी दान करना

संक्रांति पर्व दान का सबसे उत्तम मुहूर्त है. इसमें दान की महिमा के बारे में अनेक शास्त्रों में उल्लेख है. परंतु सर्वाधिक तिल और खिचड़ी की महत्ता है.

संक्रांति के लिए गृहस्थ को उपवास करने से मनाही है. उसे दिन में खिचड़ी और तिल के सेवन के लिए विशेष रूप से कहा गया है. रात्रि में भोजन करने से बचना चाहिए. रात्रिकाल में मीठा भोजन ग्रहण करना चाहिए.

खिचड़ी खाने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है. सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही देवतागण बलिष्ठ होने लगते हैं. देवताओं की शक्तियों का लाभ प्राप्त करने के लिए हमें उनकी आराधना करनी चाहिए.

राशि के ग्रह भी देवता हैं. संक्रांति के दिन सभी का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए. खिचड़ी का दान एक तरह से सभी ग्रहों को प्रसन्न करने का त्वरित प्रयास माना जा सकता है.

खिचड़ी चावल, काले उड़ड, मूंग, मसूर की दाल, हरी सब्जियों, हल्दी, घी एवं जल आदि से बनती है. चावल चंद्रमा एवं शुक्र का प्रतीक है. काले उड़द शनि को प्रिय हैं. हल्दी बृहस्पति को प्रिय है. हरा बुध का रंग हैं इसलिए सब्जियों के प्रयोग से बुध को प्रसन्न किया जा सकता है. मसूर की दाल मंगल एवं सूर्य के लिए बताया गया है.

प्रस्तुतिः
डॉ. नीरज त्रिवेदी
सहायक प्रोफेसर, ज्योतिष
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, जयपुर
ज्योतिषाचार्य एवं पीएचडी (ज्योतिषशास्त्र)
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
संपर्क मेलः niraj.trivedibhu@gmail.com

मित्रों हम खोज-खोजकर धार्मिक, आध्यात्मिक और प्रेरक कहानियां लेकर आते हैं. आप फेसबुक के माध्यम से यहां तक पहुंचते हैं. आपको सरल रास्ता बताता हूं एक साथ ऐसी धार्मिक और प्रेरक कई सौ कहानियां पढ़ने का.

आप प्रभु शरणम् का एप्प ही डाउनलोड कर लें. प्रभु शरणम् हिंदू धर्मग्रंथों के प्रचार का एक धार्मिक अभियान है. धर्मग्रंथों से जुड़े गूढ़ ज्ञान से परिचित होना है तो प्रभु शरणम् का एप्प डाउनलोड कर लेना ज्यादा सरल विकल्प है. इसका लिंक नीचे दिया गया है.

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

शनिपीड़ा से निश्चित तौर पर मुक्ति दिलाते हैं ये उपाय

लक्ष्मी कब कर देती हैं किसी के घर और कोष का त्यागः स्वयं महालक्ष्मी ने इंद्र को बताया यह राज

मकर संक्रांति को पतंग उडाना क्यों शुभ है?

error: Content is protected !!