Advertisement728 × 90

शुभकर्म व्यर्थ नहीं जानतेः कौन थे राजा दशरथ और कैकेयी?

load ram danush hd wallpaper

प्रभु शरणम् को अपना सबसे उपयोगी धार्मिक एप्प मानने के लिए लाखों लोगों का हृदय से आभार- 100 THOUSAND CLUB में शामिल हुआ प्रभु शरणम्
तकनीक से सहारे सनातन धर्म के ज्ञान के देश-विदेश के हर कोने में प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रभु शरणम् मिशन की शुरुआत की गई थी. इस मोबाइल एप्पस से देश-दुनिया के कई लाख लोग जुड़े और लाभ उठा रहे हैं. सनातन धर्म के गूढ़ रहस्य, हिंदू ग्रथों की महिमा कथाओं और उन कथाओं के पीछे के ज्ञान-विज्ञान से हर हिंदू को परिचित कराने के लिए प्रभु शरणम् मिशन कृतसंकल्प है. देव डराते नहीं. धर्म डरने की चीज नहीं हृदय से ग्रहण करने के लिए है. इस पर कभी आपको कोई डराने वाले, अफवाह फैलाने वाले, भ्रमित करने वाले कोई पोस्ट नहीं मिलेगी. तभी तो यह लाखों लोगों की पसंद है. आप इसे स्वयं परखकर देखें. नीचे लिंक है, क्लिककर डाउनलोड करें- प्रभु शरणम्. आइए साथ-साथ चलें; प्रभु शरणम्!!

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

इसके साथ-साथ प्रभु शरणम् के फेसबुक पर भी ज्ञानवर्धक धार्मिक पोस्ट का आपको अथाह संसार मिलेगा. जो ज्ञानवर्धक पोस्ट एप्प पर आती है उससे अलग परंतु विशुद्ध रूप से धार्मिक पोस्ट प्रभु शरणम् के फेसबुक पर आती है. प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े. लिंक-बहुत से लोग ऐसे होते हैं कि उनके किए एक नेक कार्य का फल नहीं मिलता या फिर जिनके साथ नेकी की वह अहित कर दे तो प्रण कर लेते हैं कि आज के बाद नेकी के कार्य नहीं करेंगे.

संभव है भगवान आपकी इस तरह परीक्षा ले रहे हों कि बंदे ने नेकी क्या त्वरित फल की चाहत में ही की या फिर हृदय से वह ऐसा है. नेकी के लिए तो कहा ही गया है- नेकी कर दरिया में डाल.

स्मरण रखने और प्रति उपकार की आशा में किया गया नेक कार्य परोपकार नहीं व्यापार होता है. नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती. यह कथा आपके मन में नेकी के भाव को दृढ़ करेगी. शांत मन से पढ़ें और विचारें.

धर्मदत्त नामक एक पवित्र और सदाचारी ब्राह्मण था. वह व्रत-उपवास आदि विधिवत किया करता था. उसने निर्जला एकदशी का व्रत रखा था.

अगली सुबह वह पूजा के लिए मंदिर जा रहा था.

रामनाम रूपी यज्ञ करने वाले उस ब्राह्मण ने पुष्प, फल, अक्षत और तुलसी आदि यथोचित पूजन सामग्री एक थाली में रखी और प्रातःकाल मंदिर की ओर चला जा रहा था.

मार्ग में एक प्रेतात्मा विकराल राक्षसी का रूप धारण करके अचानक उसके सामने आयी.

उसे देखकर वह घबरा गया और हड़बड़ी में उसने पूजा की थाली जोर से उस राक्षसी पर दे मारी.

पूजा की थाली में रखे हुए तुलसीपत्र उसके शरीर को छू गए. तुलसीदल का स्पर्श होते ही उस प्रेतात्मा की पूर्वजन्म की स्मृति जाग उठी और वह कांपती हुई दूर जा खड़ी हुई.

थोड़ी सहज होने पर प्रेतात्मा स्त्री के स्वर में बोली- “हे ब्राह्मण! आपकी इस पूजा की थाली का स्पर्श होते ही मेरा कुछ उद्धार हुआ है और मुझे अपने पूर्वजन्म का स्मरण हो रहा है. अब आप जैसे भगवत्प्रेमी भक्त मुझ पर कृपा करें तो मेरा उद्धार हो जाए.

अब ब्राह्मण को चैन में चैन आया कि यह उसका कोई अहित नहीं करेगी.

ब्राह्मण ने पूछा- तुम कौन हो,अपना परिचय दो? प्रेत योनि में क्यों भटक रही हो, ऐसा क्या पाप हुआ है तुमसे? बिना यह सब जाने-सुने मैं तुम्हारी सहायता नहीं कर पाऊंगा. सब विस्तार से कहो.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उस प्रेतात्मा ने अपनी कथा सुनानी शुरू की- हे भूदेव! मैं पूर्वजन्म में कलहा नामक ब्राह्मणी थी. जैसा मेरा नाम था वैसे ही मेरे कर्म थे. स्वभाव अनुसार मैं अपने पति के साथ खूब कलह-क्लेश किया करती थी.

यह देखकर मेरे पति बहुत परेशान हो गये और अपने किसी मित्र के साथ उन्होंने विचार-विमर्श किया.

पति ने बताया कि मैं पत्नी से जो भी कहता हूं, वह उसका उलटा ही करती है, तब मित्र ने निषेध युक्ति से काम लेने का सुझाव दिया.

निषेध युक्ति यानी जो कार्य कराना है उसके लिए मना कर देना. मेरे पति घर आये और बोले- “कलहा! मेरा जो मित्र है न, वह बहुत खराब है. अतः उसे कभी भोजन के लिए नहीं बुलाना है.

तब मैंने कहा- नहीं, वह तो बहुत सज्जन है इसलिए उसे आज ही भोजन के लिए बुलाना है. फिर मैंने उसे बुलाकर अच्छे से भोजन करवाया.

कुछ दिन बीतने पर मेरे पति ने पुनः निषेध युक्ति अपनाते हुए कहा- कल मेरे पिता का श्राद्ध है किंतु हमें श्राद्ध बिल्कुल नहीं करना है. श्राद्ध व्यर्थ का कार्य है.

मैंने कहा- धिक्कार है तुम्हारे ब्राह्मणत्व पर! श्राद्ध है और हम श्राद्ध न करें तो फिर यह जीवन किस काम का है? आप श्राद्ध की महिमा नहीं जानते इसलिए अनर्गल बोल रहे हैं.

तब पति बोले- अच्छा ठीक है. तुम्हारी जिद पर कर लते हैं पर बस एक ब्राह्मण को बुलाना और इस बात का ध्यान रखना कि जो ब्राह्मण हो वह संस्कारी बिल्कुल न हो. मास-मदिरा का सेवन करने वाला, शास्त्रों से विमुख और भ्रष्ट हो.

मैंने कहा- धिक्कार है, तुम ऐसे ब्राह्मण को पसंद करते हो! जो संयमी हो, विद्वान हों ऐसे अठारह ब्राह्मणों को बुलाना है. उन्हें भोजन-दान आदि कराउंगी मैं तो.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.निषेधयुक्ति से पति के मन की बातें हो रही थीं इससे वह प्रसन्न थे. फिर वह बोले- अच्छा ठीक है अठारह बुला लो किंतु पकवान मत बनाना, केवल दाल रोटी बनाकर खिला देना.

मैं चिढ़ गई. मैंने फिर तो खूब पकवान बनाए. मेरे पति जो-जो भी निषेधयुक्ति से कहते मैं उसका उलटा ही मैं करती. मेरे पति भीतर से प्रसन्न थे किंतु बाहर से ऐसा दिखाते जैसे अप्रसन्न हैं. इससे मैं संतुष्ट रहती.

पर दैवयोग से पति आगे निषेधयुक्ति की बात भूल गये और बोल पड़े- यह जो पिण्ड है इसे किसी अच्छे तीर्थ में डाल आना.

मैंने वह पिण्ड वहीं नाली में डाल दिया. यह देखकर उन्हें दुःख हुआ किंतु सावधान हो गए.

निषेधयुक्ति का सहारा लिया और बोले- “हे प्रिये! अब उस पिण्ड को नाली से निकालकर नदी में बिलकुल मत डालना. इसे तो यहीं पड़ा रहने देना.
यह सुनते ही मैं तो उस पिण्ड को तुरंत नाली से निकालकर नदी में डाल आयी.

प्रेतात्मा इस प्रकार कथा सुनाती रही. हे ब्राह्मण! इस प्रकार मेरे पति जो भी कहते मैं उसका उलटा ही करती. सावधानीपूर्वक काम लेते रहते तो भी मेरा स्वभाव कलहप्रिय ही था और उन्हें कष्ट देती रहती थी.

मेरे पति को संतान की इच्छा थी पर मैंने उन्हें संतान ही नहीं देने की ठान ली थी. मेरे पति खूब दुःखी हुए. हारकर संतान प्राप्ति हेतु उन्होंने दूसरा विवाह कर लिया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.तब मैंने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली और वह भी इसलिए कि मेरे पति की बहुत बदनामी हो और लोग उन्हें परेशान करें. आत्महत्या के कारण ही मुझे यह प्रेतयोनि मिली है.

अभी तक मैं किसी पुरुष के शरीर में प्रविष्ट हुई थी और सभी को परेशान कर रही थी किंतु जब वह व्यक्ति कृष्णा और वेणी नदियों के संगमतट पर पहुंचा, तब भगवान शिव और विष्णु के दूतों ने मुझे उसके शरीर से दूर भगा दिया.

अब मैं किसी अन्य शरीर में प्रविष्ट होने के लिए ही इधर आ रही थी कि सामने आप मिल गए.

मैं आपको डराकर आपका मनोबल गिराना चाहती थी ताकि आपके श्वास द्वारा आपके शरीर में प्रविष्ट हो सकूं.

तुलसीदल का स्पर्श होने से मेरा कुछ उद्धार हुआ है. मेरे कुछ पाप नष्ट हुए हैं किंतु अभी मेरी सदगति नहीं हुई है. अतः आप कुछ कृपा करें.

धर्मदत्त ब्राह्मण ने उसकी कथा सुनी तो बड़े व्यथित हुए. वह उसे प्रेतयोनि से तत्काल छुटकारा दिलाने को व्याकुल हो गए. उन्हें एक युक्ति सूझी.

संकल्प करके जन्म से लेकर उस दिन तक उन्होंने जितने भी कार्तिक व्रत किए थे, उसका आधा पुण्य प्रेतयोनि में भटकती कलहा को अर्पित कर दिया. इस दान का तत्काल परिणाम दिखा.

वहाँ भगवान श्रीविष्णु के सुशील एवं पुण्यशील नामक दो प्रिय पार्षद विमान लेकर आए और कलहा को प्रेतयोनि से मुक्तकर आदर से विमान में बैठने को कहा.

फिर पार्षदों ने धर्मदत्त से कहा- हे ब्राह्मण! जो परहित में रत रहते हैं उनके पुण्य दुगने हो जाते हैं. अपनी दोनों पत्नियों के साथ तुम लम्बे समय तक सुखपूर्वक रहते हुए बाद में विष्णुलोक को प्राप्त करोगे. यह कलहा भी तुम्हें वहीं मिलेगी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.विष्णुलोक में भी वर्षों तक रहकर फिर तुम लोग मनु-शतरूपा के रूप में पृथ्वी पर अवतरित होकर घोर तप करोगे और भगवान को पुत्ररूप में अपने घर आमंत्रित करोगे.

तप से प्रसन्न होकर भगवान तुम्हें पुत्ररूप में आने का वरदान देंगे. जिसके फलस्वरूप तुम राजा दशरथ के रूप में जन्म लोगे और यह आधे पुण्यों की फलभागिनी कलहा तुम्हारी कैकेयी नामक रानी होगी. स्वयं भगवान विष्णु साकार रूप लेकर श्रीराम के रूप में तुम्हारे घर अवतरित होंगे.

कलहा भगवान को स्वयं तो जन्म नहीं देगी किंतु भगवान के प्रिय सेवक इसके गर्भ से जन्मेंगे.

भगवान एक लीला में कलहा का सहयोग लेंगे और उसी लीला के क्रम में बहुत से जीवों का उद्धार करेंगे.

यह कहते हुए दोनों पार्षद कलहा को लेकर चल दिए.

कालांतर में बात अक्षरशः चरितार्थ हुई. जब दशरथ-कौशल्या के घर निर्गुण-निराकार ने सगुण-साकार रूप धरकर पृथ्वी को पावन किया.

कितनी महत्ता है हरिनाम एवं हरिध्यान की! श्वास-श्वास में प्रभुनाम के रटने के प्रभाव से धर्मदत्त ब्राह्मण को दशरथ के रूप में भगवान के पिता होने का गौरव प्रदान कर दिया! सच ही है कि शुभ कर्म व्यर्थ नहीं जाते.

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं. इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

ये भी पढ़ें-

किसी को डराने वाले मैसेज भेजे या आपको ऐसा मैसेज मिला है? तो जरूर पढ़ें

आपका आत्मविश्वास किसी कारण हिला है तो इसे पढ़ें, संभव है आत्मविश्वास से भर जाएं आप.

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page

error: Content is protected !!