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विवाह में आपने मांगलिक दोष का जिक्र सुना होगा. क्या है मांगलिक दोष,और दोष दूर करने के सरल उपाय

विवाह में आपने मांगलिक दोष का जिक्र सुना होगा. क्या है मांगलिक दोष,और दोष दूर करने के सरल उपाय

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विवाह की चर्चा के दौरान हम एक बात कई बार सुनते हैं- वर मंगला है या कन्या मंगली है. इस कारण विवाह में बाधा आती है, विवाह नहीं भी होते हैं.

आज हम आपको इसी मंगल दोष के बारे में बता रहे हैं. मंगल ग्रह भी अन्य ग्रहों की भांति कुण्डली के बारह भावों में से किसी एक भाव में स्थित होता है.

सप्तम भाव से दाम्पत्य या विवाहित जीवन का विचार किया जाता है. अष्टम भाव से दाम्पत्य जीवन के मांगलिक सुख को देखा जाता है. इन भावों में मंगल का अनुकूल नहीं होना शुभ नहीं है.

मांगलिक दोष क्या है?

मंगल का दांपत्य जीवन पर बड़ा असर होता है. यदि जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में मंगल स्थित हो तो उस व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है.

इसी तरह यदि राशि (चंद्रमा) से भी पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें घर में मंगल हो तो उसे भी मांगलिक प्रभाव ही माना जाना चाहिए.

जिनके चतुर्थ, सप्तम और अष्टम भाव में मंगल हों तो वर को पूर्ण मंगला और कन्या को पूर्ण मंगली माना जाता है. ऐसे लोगों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है.

मांगलिक लोगों के विवाह के समय में क्या हो विचारःहमारा फेसबुक पेज लाईक करें.यदि कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में मंगल ग्रह स्थित हो साथ ही सूर्य, शनि, राहु, केतु जैसे पापग्रह भी उसके साथ स्थित हों तो इससे मंगल का प्रभाव कम हो जाता है.

यदि वर-वधू दोनों में से एक मांगलिक हों लेकिन पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें घर में पाप ग्रहों में से विशेषकर सूर्य और शनि स्थित हों, तो मंगल का प्रभाव कम हो जाता है और विवाह हो सकता है.

यदि वर और वधू दोनों मांगलिक हों तो ऐसा विवाह शुभ और मंगलकारी माना जाता है लेकिन यदि दोनों में से एक मांगलिक और दूसरा मांगलिक न हो तो कन्या को वैधव्य (विधवा होने) की आशंका रहती है.

मांगलिक का विवाह, मांगलिक से ही करना चाहिए. यदि वर-वधू में से एक मांगलिक हो पर दूसरा मांगलिक न हो, लेकिन उसके मांगलिक स्थानों में पापग्रह बैठा हो भी विवाह हो सकता है.

यदि भाव के विचार से मांगलिक दोष बनते हों लेकिन चंद्रमा यानी राशि के विचार से मांगलिक दोष दूर होते हों तब भी विवाह किया जा सकता है.

कैसे दूर कर सकते हैं विवाह में आती मांगलिक बाधाः

कई लोग बिना मंगल दोष विचारे ही विवाह कर लेते हैं. प्रेम विवाह आदि में यह देखने को मिलता है. बाद में ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण हो जाता है.

यदि किसी कारणवश मांगलिक दोष का विचार किए बिना ही विवाह करना है तो शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं जिसे करने से कन्या का वैधव्य दोष दूर हो सकता है.

कन्या का पहले घट विवाह यानी घड़े से विवाह, शालिग्राम विवाह या पीपल से विवाह कराने के बाद ही पुरुष से विवाह कराया जाए तो वैधव्य दोष दूर हो जाता है.

मंगलवार का व्रत, भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र के जाप से भी मांगलिक दोष दूर कर विवाह किया जा सकता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.विवाह से पूर्व मांगलिक-दोष दूर करने के लिए मंगल की इन 21 नामों से स्तुति करेः
1. ऊँ मंगलाय नम:
2. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
3. ऊँ ऋण हर्ते नम:
4. ऊँ धनदाय नम:
5. ऊँ सिद्ध मंगलाय नम:
6. ऊँ महाकाय नम:
7. ऊँ सर्वकर्म विरोधकाय नम:
8. ऊँ लोहिताय नम:
9. ऊँ लोहितगाय नम:
10. ऊँ सुहागानां कृपा कराय नम:
11. ऊँ धरात्मजाय नम:
12. ऊँ कुजाय नम:
13. ऊँ रक्ताय नम:
14. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
15. ऊँ भूमिदाय नम:
16. ऊँ अं अंगारकाय नम:
17. ऊँ यमाय नम:
18. ऊँ सर्वरोग्य प्रहारिण नम:
19. ऊँ सृष्टिकर्त्रे नम:
20. ऊँ प्रहर्त्रे नम:
21. ऊँ सर्वकाम फलदाय नम:

मंगल की आराधना करने से पहले किसी ज्योतिषी से चर्चा कर लें तो अच्छा क्योंकि अपूर्ण या दोषयुक्त पूजा प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है.

प्रस्तुतकर्ताः

डॉ. नीरज त्रिवेदी, ज्योतिषाचार्य, पीएचडी(ज्योतिष)
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

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