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मां की पहचान उसके रंग-रूप से नहीं, ममता से होती है. मातृ प्रेम को समर्पित कथा

मां की पहचान उसके रंग-रूप से नहीं, ममता से होती है. मातृ प्रेम को समर्पित कथा

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हमारा फेसबुक पेज लाइक कर लें इससे आपको प्रभु शरणम् के पोस्ट की सूचना मिलती रहेहगी. इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.राजा के बारे में यह मशहूर था कि वह स्वयं भी बुद्धिमान है और उसके सभी दरबारी और मंत्री भी बड़े बुद्धिमान थे.

सौदागर ने राजा से कहा- महाराज ये गायें माँ-बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन, क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है. लेकिन मुझे इसकी पहचान करनी है.

मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ-बेटी की पहचान नहीं कर पाया. मुझे लोगों ने बताया कि केवल आप ही हैं जहां इसका निर्णय हो सकता है.

राजा के दरबार में एक बुजुर्ग मंत्री थे जो राजा के मुख्य सलाहकार थे और उनकी बुद्धि का सभी लोहा मानते थे. राजा ने मंत्री से सौदागर की मुश्किल का हल निकालने को कहा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सभी दरबारी मंत्री की ओर देखने लगे. उसके राज्य, उसके राजा की साख दांव पर थी और उसकी बुद्धि की परख भी होनी थी. ऐसी बड़ी चुनौतियों के साथ मंत्री ने उस आगंतुक को देखा.

फिर मंत्री अपने स्थान से उठकर गायों की तरफ गया. उसने दोनों का बारीकी से निरीक्षण किया किंतु वह भी नहीं पहचान पाया कि वास्तव में कौन मां है और कौन बेटी?

अब मंत्री बड़ी दुविधा में फंस गया था. उसने सौदागर से निर्णय करने के लिए एक दिन की मोहलत मांगी. सौदागर राजी हो गया.

मंत्री अपने घर आया और वह बेहद परेशान रहा. उसकी पत्नी ने परेशानी का कारण पूछा तो मंत्री ने सारी बात कह सुनाई.

उसे जब पति की परेशानी का कारण सुना तो हंसने लगी.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उसने मंत्री को कहा- अरे! बस इतनी सी बात है. आप इसके लिए इतने परेशान हैं. इसका निर्णय तो मैं भी कर सकती हूं.

मंत्री ने कहा- तुम हंसी ठठ्ठा न करो. यह अवसर विनोद का नहीं है. वह व्यापारी कई राज्यों में होकर आया है और कोई उसके प्रश्न का उत्तर नहीं दे सका. यदि कोई राह सुझा सको तो सुझाओ.

मंत्री की पत्नी ने कहा- आप चिंता न करें. मैं कोई राह नहीं सुझाउंगी ब्लकि स्वयं निदान करूंगी. कल आप मुझे दोनों गायें दिखा दें, मैं तुरंत निर्णय कर दूंगी.

मंत्री के पास कोई राह तो सूूझ रही नहीं थी इसलिए उसने सोचा कि चलो यह भी आजमा लिया जाए. अगले दिन मंत्री अपनी पत्नी को वहाँ ले गया जहाँ गायें बंधी थीं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.मंत्री की पत्नी दोनों गायों के लिए भोजन लेकर आई थी. उसने दोनों गायों के आगे अलग-अलग अच्छा भोजन रखा. फिर कुछ ही देर बाद उसने बता दिया कि इनमें से कौन माँ है और कौन बेटी.

लोग यह देखकर चकित रह गए. सबने पूछा कि आखिर वह विश्वास से ऐसा कैसे कह सकती है.

इस पर मंत्री की पत्नी बोली- पहली गाय ने अपने अंश का भोजन जल्दी-जल्दी खा लिया फिर दूसरी गाय के भोजन में मुंह मारने लगी.

दूसरी वाली गाय ने भले ही भरपेट न खाया था लेकिन पहली वाली के लिए अपना भोजन छोड़ दिया. ऐसा तो केवल एक मां ही कर सकती है. इसलिए दूसरी वाली गाय माँ है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.एक माँ ही बच्चे के लिए भूखी रह सकती है. माँ में ही त्याग, करुणा, वात्सल्य, ममता जैसे गुण मौजूद होते हैं.

मां की पहचान का फर्क उसके रंग-रूप से नहीं स्वभाव से हो सकती है. अगर सौदागर ने इसे समझा होता तो उसे इतनी दूर न आना होता.

सभी उस स्त्री के विचारों और सूझ-बूझ की प्रशंसा करने लगे.

एक साधारण महिला ने कितना बड़ा सत्य बताया. ईश्वर ने जन्म के साथ ही सबसे अनमोल भेंट मां के रूप में दी. इस भेंट के लिए हम जितने आभारी रहें, कम हैं. ईश्वर ने भी माता को ही सर्वप्रथम पूजनीय बताया है.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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