मां दुर्गा कौन सा भोग लगने से प्रसन्न होती हैंः नवरात्रि की 9 तिथियों पर क्या कहता है श्रीमद्देवीभागवत

मां दुर्गा कौन सा भोग लगने से प्रसन्न होती हैंः नवरात्रि की 9 तिथियों पर क्या कहता है श्रीमद्देवीभागवत

मां दुर्गा का प्रिय भोग: तिथि अनुसार संपूर्ण नैवेद्य विधान

मां जगदम्बे की प्रसन्नता के लिए सच्चे भाव से की गई पूजा ही सर्वश्रेष्ठ है, पर पूजा के साथ यदि शास्त्रों में बताए गए विधान के अनुसार मां दुर्गा का प्रिय भोग भी अर्पित हो जाए, तो मनोवांछित फल की प्राप्ति में तनिक भी देर नहीं लगती।

श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के आठवें स्कंध में एक अत्यंत पावन प्रसंग आता है। एक समय देवर्षि नारद जी ने भगवान श्रीविष्णु से जिज्ञासा की—“हे भगवन! माता दुर्गा को किसी दिन विशेष पर प्रसाद चढ़ाने का भी कोई विधि-विधान है क्या? किस तरह के खास प्रसाद से कौन से विशेष फल प्राप्त होते हैं?”

नारद जी के इस प्रश्न पर भगवान नारायण ने बताया—“हे नारद! मां जगदम्बा की पूजा के लिए हर तिथि, वार और नक्षत्र का अलग-अलग विधान है। यद्यपि माँ भक्तों द्वारा भावपूर्वक अर्पित हर प्रसाद को सहर्ष स्वीकार करती हैं, फिर भी तिथिवार कुछ विशेष प्रसादों का विधान शास्त्रों में निश्चित है, जिन्हें अर्पण करने से भगवती अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं।”

माँ दुर्गा का प्रिय भोग क्या हैः किस तिथि को लगाएं कौन सा भोग
माँ दुर्गा का प्रिय भोग क्या हैः किस तिथि को लगाएं कौन सा भोग

पक्ष की 15 तिथियों में किस दिन क्या अर्पित करेंः तिथि अनुसार भोग और संपूर्ण नवरात्रि भोग लिस्ट

पक्ष की 15 तिथियों में देवी भागवत के अनुसार अर्पित किए जाने वाले नैवेद्य का क्रम इस प्रकार है, जिसे आप दैनिक पूजा अथवा संपूर्ण नवरात्रि भोग लिस्ट के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं:

  1. प्रतिपदा (पहली तिथि): प्रथम तिथि को मां की पूजा गाय के शुद्ध घी से करनी चाहिए और इस घी को किसी सुपात्र ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए। इससे साधक सदैव निरोगी रहता है और शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं।

  2. द्वितीया (दूज): द्वितीया को माता को चीनी अथवा मिश्री का भोग लगाएं। इससे आयु बढ़ती है और दीर्घायु का वरदान मिलता है।

  3. तृतीया (तीज): तृतीया के दिन माता के प्रसाद में दूध और दूध से बनी चीजें (जैसे खीर, पेड़ा) अर्पित करनी चाहिए। इससे समस्त विघ्नों और दुःखों का नाश होता है।

  4. चतुर्थी (चौथ): चतुर्थी तिथि को भक्तिपूर्वक मालपुआ चढ़ाने से मां जगदम्बा जीवन के सारे संकट और मार्ग की बाधाएं दूर करती हैं।

  5. पंचमी: पंचमी के दिन यदि पके केले का भोग लगाया जाए, तो बुद्धि, ज्ञान और विवेक में वृद्धि होती है।

  6. षष्ठी (छठ): षष्ठी के दिन शुद्ध मधु (शहद) चढ़ाने से चेहरे का तेज और शारीरिक सुंदरता निखरती है।

  7. सप्तमी: सप्तमी तिथि को गुड़ का भोग लगाने से मानसिक संताप दूर होते हैं और व्यक्ति हर प्रकार की चिंता से मुक्त रहता है।

  8. अष्टमी: अष्टमी का भोग मां भगवती को अत्यंत प्रिय है। यदि अष्टमी को नारियल (श्रीफल) का भोग मां जगदम्बा को लगाया जाए, तो साधक हर प्रकार के संताप और कष्ट से मुक्त रहता है तथा घर में सुख-समृद्धि आती है।

  9. नवमी: नवमी तिथि को देवी दुर्गा को धान का लावा (खील) अर्पण करने से व्यक्ति परलोक में अपना सुख और सद्गति सुनिश्चित करता है।

  10. दशमी: दशमी के दिन काला तिल चढ़ाने से यमलोक और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

  11. एकादशी: एकादशी के पावन दिन ताजा दही का भोग लगाना चाहिए। इससे चित्त की शुद्धि और कार्यसिद्धि होती है।

  12. द्वादशी: द्वादशी को चिवड़े (पोहा) का भोग लगाने से मां अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्त पर अपने वात्सल्य की वर्षा करती हैं।

  13. त्रयोदशी: त्रयोदशी के दिन चने का नैवेद्य (उबले या भुने चने) अर्पण करने से संतान सुख और कुल की वृद्धि होती है।

  14. चतुर्दशी: चतुर्दशी को माता को सत्तू का भोग लगाएं। इससे मां दुर्गा के साथ-साथ देवाधिदेव महादेव भी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

  15. पूर्णिमा व अमावस्या: पूर्णिमा के दिन मां को गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाना चाहिए। अमावस्या के दिन भी वही प्रसाद चढ़ाने का विधान है जो पूर्णिमा के दिन चढ़ाया जाता है।

शास्त्रीय नियम: जिन तिथियों में जो भोग चढ़ाए जाते हैं, उसी सामग्री से हवन करने का भी विधान है। ऐसा करने से समस्त पारिवारिक कष्ट और ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। ध्यान रहे कि जो भोग चढ़ाया गया है, उसका एक अंश परिवार सहित प्रसाद रूप में ग्रहण करें और शेष भाग ब्राह्मण अथवा जरूरतमंदों को दान कर दें।


वार (दिन) के अनुसार दुर्गा जी का भोग

तिथि अनुसार भोग - मां दुर्गा का प्रिय भोग प्रसाद थाली
तिथि अनुसार भोग – मां दुर्गा का प्रिय भोग प्रसाद थाली

नारद जी ने पूछा—“प्रभु! आपने तिथिवार चढ़ाए जाने वाले भोग की चर्चा की। अब मुझे दिवस (दिन) के अनुसार अर्पित किए जाने वाला मां दुर्गा का प्रिय भोग बताएं जिससे वे प्रसन्न होती हैं।”

श्रीविष्णु बोले—“हे नारद! मां जगदम्बे को वार के अनुसार भी भोग अर्पित किया जाता है:”

  • रविवार: मां जगदम्बे को खीर चढ़ाने का विधान है।

  • सोमवार: ताजा और मीठा दूध अर्पित करना उत्तम माना गया है।

  • मंगलवार: केला चढ़ाने से मां बहुत प्रसन्न होती हैं।

  • बुधवार: ताजे मक्खन (मिश्री युक्त) का भोग माता को अति प्रिय है।

  • गुरुवार: माता को खांड अथवा पीली मिठाइयां अर्पित करना शुभ है।

  • शुक्रवार: सफेद चीनी या मखाने की खीर अर्पित करें।

  • शनिवार: शनिवार के दिन गाय का शुद्ध घी अथवा घी से बने पदार्थ चढ़ाना चाहिए।

12 मास और ऋतु अनुसार नैवेद्य विधान

नारद जी ने पुनः जिज्ञासा की—“हे भगवन! क्या विभिन्न मासों के अनुसार भी विशेष प्रसाद चढ़ाने का विधान है?”

भगवान नारायण ने कहा—“हे मुने! ऋतु और मास के अनुसार भी माता को विशिष्ट नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं:”

  • वैशाख: गुड़ से बना भोग लगाएं।

  • ज्येष्ठ (जेठ): शुद्ध शहद से युक्त भोग अर्पण करें।

  • आषाढ़: महुए के रस में भीगा हुआ अथवा मौसमी भोग लगाना चाहिए।

  • श्रावण (सावन): दही तथा पंचामृत का भोग।

  • भाद्रपद (भादो): चीनी या मिश्री मिला शीतल भोग उत्तम फल देता है।

  • आश्विन (क्वार): गाय के दूध से बनी खीर।

  • कार्तिक: गाढ़ा और मीठा दूध।

  • मार्गशीर्ष (अगहन): फेनी अथवा भुने हुए अन्न का भोग।

  • पौष (पूस): दही में मिले उबले चावल चढ़ाएं।

  • माघ: गाय का शुद्ध घी और तिल से बने पदार्थ।

  • फाल्गुन: नारियल और ऋतु अनुसार ताजे फल।

  • चैत्र: शीतल जल, मौसमी फल और ऋतु अनुसार नैवेद्य।

किन वृक्षों में माना जाता है मां दुर्गा का वास?

इसके बाद नारद जी ने पूछा कि माता को कौन-से वृक्ष प्रिय हैं और किन वृक्षों में उनका साक्षात वास मानना चाहिए?

श्रीविष्णु जी बोले—पीपल, बरगद, नीम, आम, कैथ, बेर, कटहल, मदार, करील और महुआ—ये दस वृक्ष देवी के स्वरूप माने गए हैं।

पांच प्रकार के नैवेद्यों के साथ जो भक्त चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को, अथवा प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को महुए या नीम के पेड़ में भगवती के स्थित होने की भावना करके पूजा करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं, उन पर मां जगदम्बा शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

हे नारद!  मैंने मां दुर्गा का प्रिय भोग क्या है इसकी समस्त जानकारी तुम्हें दीं। इस प्रकार दिन, मास, नक्षत्र, योग और तिथियों का ध्यान रखकर श्रद्धापूर्वक मां जगदम्बा की पूजा करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं, बुद्धि निर्मल होती है और अंत में परम पद की प्राप्ति होती है।

(संदर्भ: श्रीमद्देवीभागवत महापुराण, आठवां स्कंध)


मां दुर्गा का प्रिय भोग विषय पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मां दुर्गा का सबसे प्रिय भोग क्या है?

शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा को गाय के दूध से बनी खीर, मालपुआ, शुद्ध घी और नारियल अत्यंत प्रिय हैं। इसके अतिरिक्त तिथियों के अनुसार अलग-अलग नैवेद्य अर्पित करने का विधान श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में दिया गया है।

2.नवरात्रि की अष्टमी को क्या भोग लगाना चाहिए?

अष्टमी तिथि को माता रानी को नारियल (श्रीफल) का भोग लगाना चाहिए। शास्त्रों में अष्टमी का भोग अत्यंत कल्याणकारी माना गया है, जिससे सभी प्रकार के कष्टों का शमन होता है।

3. क्या वार (दिन) के अनुसार भी दुर्गा जी का भोग लगाया जा सकता है?

हाँ, यदि आप तिथियों का ध्यान न रख सकें, तो दिनों के अनुसार भी दुर्गा जी का भोग निश्चित कर सकते हैं। जैसे रविवार और शुक्रवार को खीर, सोमवार को मीठा दूध, मंगलवार को केला, बुधवार को मक्खन, गुरुवार को पीली मिठाई और शनिवार को गाय का घी अर्पित करना शुभ फलदायी होता है।

4. क्या देवी को चढ़ाए गए भोग से हवन भी किया जा सकता है?

बिल्कुल। श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार तिथि अनुसार भोग की सामग्री से ही हवन करने पर समस्त ग्रह दोष, पारिवारिक कलह और अरिष्ट शांत हो जाते हैं।

5. नवरात्रि भोग लिस्ट के अनुसार नवमी पर क्या चढ़ाना चाहिए?

नवमी तिथि को देवी दुर्गा को धान का लावा (खील) और हलवा-चना अर्पित करने से जीवन और परलोक दोनों सुधरते हैं।

6. पूजा के बाद मां दुर्गा के प्रिय भोग का क्या करना चाहिए?

भोग लगाने के उपरांत उसका एक छोटा अंश स्वयं और परिवारजनों में प्रसाद रूप में वितरित करना चाहिए और शेष भाग किसी सुपात्र ब्राह्मण, कन्या अथवा जरूरतमंदों को दान कर देना चाहिए।


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