भगवान वामन ने तीन पग में नाप लिया बलि का सर्वस्व, स्वयं बन गए बलि के दुर्ग के पहरेदारः श्रीहरि के उपेंद्र होने का प्रसंग
पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंबलि के इंद्रपद की प्राप्ति के लिए नर्मदा के तट पर चल रहे सौंवे अश्वमेध यज्ञस्थल पर वामन अवतार श्रीहरि पधारे. बलि ने उनके चरण पखारे और उत्तम आसन दिया.
बलि ने उनकी प्रशंसा के बाद कहा- हे ब्राह्मण देवता आपके पधारने से यज्ञस्थल पवित्र हो गया. मैं आपको प्रसन्न करने के लिए क्या करूं.
वामन बोले- आप शुक्राचार्य के शिष्य और प्रहलाद के वंशज हैं. आपसे बड़ा दानी कोई नहीं. आप वचन देकर पीछे भी नहीं हटते. प्रतीज्ञा पूरी करने के कारण आपकी संसार में ख्याति है. महाराज मुझे आपसे निवास के लिए केवल तीन पग भूमि की आवश्यकता है.
बलि ने उनके शरीर का आकार देखने के बाद कहा- आपके आशीर्वाद से मुझमें द्वीप का द्वीप दान करने का सामर्थ्य है. आपने बहुत कम दान मांगा और कुछ चाहे तो वह भी मांग लें.
वामन भगवान ने कहा- मुझे तो सिर्फ तीन पग भूमि की आवश्यकता है. आपका सामर्थ्य बहुत विशाल है परंतु आवश्यकता से अधिक मांगना उचित नहीं.
बलि को प्रभु की बुद्धि पर हंसी आई. उन्होंने कहा- ठीक है आपकी इच्छानुसार दान के लिए मैं तैयार हूं. भगवान ने उनसे दान के लिए संकल्प कराने को कमंडल से जल लेना चाहा.गुरु शुक्राचार्य ने छद्मवेषधारी भगवान को पहचान लिया था. वह बलि के पास गए और उन्हें सावधान भी किया कि देवों की सहायता के लिए वामनरूप में स्वयं श्रीहरि सर्वस्व मांगने आए हैं.
बलि बोले- मैं महाराज प्रहलाद का पौत्र हूं. अपने दिए वचन से पीछे नहीं हट सकता. शुक्राचार्य ने बहुत समझाया पर बलि सुनने को राजी न थे. शुक्राचार्य इसे रोकना चाहते थे.
शुक्राचार्य अत्यंत छोटा रूप धारण करके कमंडल के मुँह में समा गए, ताकि संकल्प के लिए जल न निकल पाए. वामन भगवान समझ गए कि यह शुक्रचार्य की चाल है.
उन्होंने अपने हाथ में रखी कुशा को कमण्डल के मुँह में डाल दिया जिससे शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई. शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से निकले.
क्रोधित शुक्राचार्य ने बलि को शाप दिया कि अपने गुरू की बात नहीं मानने के कारण तुम लक्ष्मीविहीन हो जाओगे.
बलि की पत्नी विद्यावती ने वामनदेव के पैर धोए. बलि ने विधिपूर्वक हाथ में जल लेकर संकल्प का जल छोड़ा और दान को तैयार हुए.तभी भगवान वामन का आकार बढ़ने लगा. उनके विराट स्वरूप में बलि को पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग, समुद्र, पाताल समस्त चराचर जगत दिखाई पड़ने लगा.
उन्होंने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया. दूसरे पग से अंतरिक्ष और स्वर्ग को नाप लिया. तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान ही नहीं शेष रह गया.
दैत्य इस छल से बड़े आहत थे. वे अस्त्र लेकर दौड़े. बलि ने उन्हें रोका और कहा कि अब हमारी यही गति है इसलिए हम सब अब सुतल वासी बनें. अब यहां से प्रस्थान करो.
भगवान के आदेश पर गरूड़ ने बलि को वरूणपाश में बांध लिया. प्रभु ने कहा- राजा बलि तुम प्रतिज्ञाबद्ध हो. यदि तीसरे पग को भूमि न मिली तो तुम नरक भोगोगे.
बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया और कहा आप तीसरा पग रखें. बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठे. तभी वहां प्रहलाद पधारे. उन्होंने प्रभु को प्रणाम कर स्तुति की.
प्रहलाद ने कहा- प्रभु आपका देना जितना उत्तम, लेना भी वैसा ही उत्तम. दैत्यराज ने अपना शरीर आत्मा सहित आपको समर्पित कर दिया. इन्हें दंड का भागी न बनाएं.
ब्रह्मा ने भी बलि को मुक्त करने की प्रार्थना की. भगवान बोले- बलि अपने धर्म से विचलित नहीं हुए. इसलिए वह दंड के भागी हो ही नहीं सकते.राजा बलि अब सावर्ण्य मन्वंतर में इंद्र होंगे. वहां सुतल लोक का निर्माण स्वयं विश्वकर्मा करेंगे. मेरे प्रिय भक्त बलि वहीं रहेंगे.
राजा बलि तुम अपने परिवार सहित सुतल लोक में निवास करो. मैं तुम्हारी रक्षा करुंगा और स्वयं दुर्गपाल बनकर वहां उपस्थित रहूंगा. बलि गदगद हो गए.
बलि बोले- प्रभु बड़े-बड़े भक्तों को भी जो दुर्लभ है, आपने वह मुझे दिया. बलि सुतल लोक चले गए. प्रभु ने प्रहलाद से कहा- तुम बलि के पास सुतल लोक जाओ. वहां रोज मेरे दर्शन होंगे.
यज्ञ अधूरा रह गया था. इसलिए वामन भगवान ने शुक्राचार्य को यज्ञ पूर्ण करने का आदेश दिया. स्वर्ग और तीनों लोकों का राज्य अपने भाई इंद्र को सौंपकर स्वयं उपेन्द का पद ग्रहण किया.
नियमित रूप से एप्प का लिंक अपने प्रियजनों के साथ शेयर करें, ताकि वे भी इसका आनंद ले सकें. इस धर्म कार्य में आपका सहयोग चाहिए.
प्रभु शरणम् की सारी कहानियां Android व iOS मोबाइल एप्प पे पब्लिश होती है। इनस्टॉल करने के लिए लिंक को क्लिक करें:
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. फेसबुक पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा. https://www.facebook.com/PrabhuSharanam कथा पसंद आने पर हमारे फेसबुक पोस्ट से यह कथा जरुर शेयर करें.
धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam
